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सिद्ध अयुर्वेदिक group join करे जाने रोज़ाना तरो ताजा अयुर्वेदिक नुस्खे।

अयुर्वेदिक group join करे जाने रोज़ाना तरो ताजा अयुर्वेदिक नुस्खे

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सिद्ध कब्जहर कल्पचूर्ण- एक बार में ही करे पेट साफ, गैस,जलन, कब्ज ,खट्टी डकारें हो लेते समय ही खत्म। पूरे नुस्खे साथ ले जानकारी।


सिद्ध कब्जहर कल्पचूर्ण- एक बार में ही करे पेट साफ, गैस,जलन, कब्ज ,खट्टी डकारें हो लेते समय ही खत्म। पूरे नुस्खे साथ ले जानकारी।

             सिद्ध कब्जहर कल्पचूर्ण

        जिदी कब्ज को करे जड़ से खत्म
       

इसका कोई साइड इफेक्ट्स नही है*
 पेट साफ, गैस,जलन, कब्ज ,खट्टी डकारें हो लेते समय ही खत्म। पूरे नुस्खे साथ ले जानकारी
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सिद्ध कब्जहर कल्पचूर्ण कब्ज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक काफी लोकप्रिय आयुर्वेदिक औषधि है. इस चूर्ण को तैयार करने के लिए मुलेठी, आजवाइन, कोडतुम्बा अजवाइन नीशोथ, काला नामक और हरीतकी समेत कई अन्य जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है.कोडतुम्बा से
बनी अजवाइन 250 ग्राम
त्रिफला          100 ग्राम
भृंगराज चूर्ण   100 ग्राम
गिलोय           100 ग्राम
अजवायन      100 ग्राम
करेला चुर्ण     100 ग्राम
तुलसी पंचाग  100 ग्राम
सोंठ               50 ग्राम
अडूसा            50 ग्राम
पिपली छोटी    50 ग्राम
त्रिकुट             50 ग्राम
मुलहठी           20 ग्राम
हल्दी              20 ग्राम
अतीस             20 ग्राम
चिरायता          20ग्राम
काला नमक     20 ग्राम
सेंधा नमक       20 ग्राम
पुदीना सत       20 ग्राम
निम्बू सत         20 ग्रामइसे 400 ग्राम एलोवेरा रस में भावना दे।
सेवन 1 चमच्च रात को कोसे दूध के साथ ले।
सुबह पेट बिल्कुल साफ हो जाएगा।
दिन में खाने के बाद सेवन कर सकते हैं।
लाभ ===जिदी कब्ज, गैस,जलन, पेट के रोग, पेट दर्द, लिवर दर्द और सूजन, पेट सूजन, पेट के कीड़े,
हाजमे की कमजोरी, अल्सर, मुह का अल्सर में 100%लाभदायक औऱ फायदेमंद।सिद्ध कब्जहर कल्पचुर्ण के लाभ और औषधीय इस्तेमाल-
* सिद्ध कब्जहर कल्पचुर्ण  में 100%  शुद्ध अयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का इस्तेमाल जाता है।  इसलिए यह एक उत्तेजक रेचक है और दस्तावर पाउडर है , जो क्रोनिक कब्ज से शीघ्र राहत प्रदान करता है.
* यह पेट में गैस से पीड़ित लोगों के लिए भी फायदेमंद है*
* गैस की समस्या से भी राहत देता है.
* पेट में दर्द की परेशानी भी खत्म करता है.
* सिरदर्द को भी कम करता है.
* मुंह में होने वाले छालों को भी दूर करता है.खुराक और दिशा-निर्देश-
आप 3 से 6 ग्राम (1 से 2 चम्मच) की खुराक में सिद्ध कल्पचुर्ण को रात में सोने से पहले गर्म पानी से ले सकते हैं.साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए दिन में 6 ग्राम से अधिक नहीं लेना चाहिए.*सिद्ध कब्जहर कल्पचुर्ण online मंगवाए*
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Online सिद्ध आयुर्वेदिक दवा कैसे मगवाएँ

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*सभी सिद्ध अयूर्वादिक दवा लिस्ट*

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🌴🌈🌴

गर्भधारण कल्पचुर्ण

300 ग्राम ~ 1050 रुपये

Whole sales- 1 kg~2050 रुपये

कायाकल्प चुर्ण 200 ग्राम ~325 रूपये

Whole sales- 1 kg~ 1200 रुपये

नोट:- 1360 रुपये की दवा 1 महीने होगी।

दोनों चूर्ण कब औऱ कैसे उपयोग करे

कायाकल्प चुर्ण

कायाकल्प चूर्ण कैसे और कब उपयोग करे-

मासिक धर्म से 15 दिन पहले कायाकल्प चूर्ण सुबह खाली पेट औऱ रात को सोते समय गर्म पानी से इस्तेमाल करे

कायाकल्प चूर्ण क्यों इस्तेमाल करे-

कायाकल्प चूर्ण मासिक धर्म की हर समस्या सही करेगा।

जैसे : बंद ट्यूब, गर्भाशय की सफाई, कमजोरी औऱ गर्भशय की गांठ आदि को ठीक करे

🌴🌈🌴

सफ़ेद दाग मूल्य

वजन 400 ग्राम

मूल्य 860

डाक खर्च ताहित (पार्सल रेट)

Speed post 960 रुपये

50 दिन दवा

★★

सिद्ध शीतल कल्पचुर्ण

400 ग्राम

750 रुपए with डाक खर्च।

30 दिन की दवा

★★★

सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण

वजन 500 ग्राम

मूल्य 600 रुपये

40 दिन की दवा

डाक खर्च समेत

◆◆◆

साइनस की दवा

सिद्ध कफ़ कल्पचुर्ण

200 ग्राम 600 रुपये

डाक पार्सल समेत

★★

पीलिया रोग की आयुर्वेदिक दवा

पीलिया नाशक कल्पचुर्ण

वजन 400 ग्राम र 1050 डाक पार्सल free

21 दिन की दवा

★★

ह्रदय रोग और बढ़े कालेस्ट्राल की दवा

40 दिन की दवा 400 ग्राम 1050 रुपये

with कोरियर

★★★

■.बढ़े लिवर, फेंटी लिवर में रामबाण दवा

★सिद्ध लिवर क्ल्पचुर्ण ★

300 ग्राम 750 रुपये with कोरियर

30 दिन की दवा है।

★★★

सिद्ध वातदर्द क्ल्प चुर्ण

300 ग्राम दवा 600 रुपये

500 ग्राम 1000 रुपये

1kg 1800 रुपये

30 दिन की दवा

डाक पार्सल फ्री

★★★

शरीरिक बलवर्धक चुर्ण

400 ग्राम 1050 रुपये

40 दिन की दवा

★★★

शुगर की कामयाब दवा

सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण

500 ग्राम दवा 850 रुपये

40 दिन की दवा

डाक पार्सल फ्री

★★★

खून शुद्धि की अयूर्वादिक दवा

300 ग्राम 750 रुपये

30 दिन की दवा

डाक पार्सल फ्री

★★★

.अधरंग, पक्षाघातकी अयूर्वादिक दवा

लकवे की दवा

400 ग्राम 1260 (आप के लिए 1050)

आयल 200 ग्राम 570 रुपये

★★

शुगर रोगी के लिए

कामक्ल्प चुर्ण

400 ग्राम 1260

★★★

■.

सिद्ध बुद्धिवर्धक चूर्ण

400 ग्राम 1050

“★★★

एक्जिमा और सोरसिस दवा

सिद्ध त्वचा कल्पचुर्ण

*वजन 400 ग्राम*

*मूल्य 1050 रुपये*

*सिद्ध त्वचा रोग नाशक क्रीम*

*वजन 100 ग्राम*

*मूल्य 250 रुपये*

*Speed पोस्ट 105 डाक खर्च*

*टोटल 1455 रुपये जमा होंगे।*

*30 दिन की दवा

★★

■.

पुराना सिर दर्द नुस्खा

100 ग्राम 300 रुपये

★★

■ई

पीरियड की कैसी भी समस्या हो

*नारी समस्या निदान कल्पचुर्ण*

200 ग्राम 550 रुपये

★★

मोटापा कम करने का योग

मोटापा नाशक कल्पचुर्ण

500 ग्राम 860 रुपये

1 kg 1500 रुपये

सभी दवा का डाक खर्च साथ ही है।

★★★

सिद्ध कफ़ चुर्ण

300 ग्राम 750 रुपये

★★★

कायाकल्प चुर्ण 500 ग्राम 700 रुपये।

★★

खून शुद्वि की दवा

सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण

300 ग्राम 750 रुपये

★★

बुखार की दवा

*सिद्ध ज्वर नाषक कल्पचुर्ण*

200 ग्राम दवा 400 रुपये with

कोरियर खर्च

◆◆

सिद्ध नाड़ी दुर्बलता कल्प चूर्ण

400 Gram 1050 रुपये

★★

■ त्वचा कल्पचुर्ण

दाद खाज खुजली के लिए।

300 ग्राम

750 रुपये

***

■■■

कैंसर की दवा

सिद्ध कैंसर नाशक कल्पचुर्ण

40 दिन की दवा

वजन 400 ग्राम

मूल्य 1050 रुपये सिद्ध आयुर्वेदिक

■■■

सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण

300ग्राम –1550

30 दिन की दवा

वजन 400 ग्राम

मूल्य 2050

40 दिन की दवा with डाक खर्च।

सेवन विधि

सुबह शाम शाम खाने के 1घंटे के बाद मीठे दूध से ले।

नोट- सूगर के मरीज न ले।

धातु ,शक्राणु, मर्दाना और शीघ्रपतन की यह रामबाण दवा है।

*20 मिनट सफल संभोग क्रिया*

*पेशाब में गर्मी की जलन, गर्मी कारण इंफेक्शन जड़ से खत्म होगी।*

*सपनदोष नही होगा*

*धातु रोग जड़ से खत्म होगा*

नोट

* सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण के साथ शिश्न की लगातार मालिश जरूर करे*

नारियल तेल 100 ml

काला तिल तेल 50 ml

बादाम तेल 25 ml

इतर गुलाब 5ml

दोनों को मिलाकर 10 मिनट सुबह 10 मिनट शाम को शिश्न की मालिश जरूर करे।

शिश्न नाड़ियों की कमजोरी दूर होगी

हमारी गरंटी होगी।

■■■

लकोरिया और धातु की दवा

सिद्ध धातु पुष्टि कल्पचुर्ण

वजन 300 ग्राम

मूल्य 1050

★★

नोट

दवा डाक से जाएगी।

डाक खर्च साधारण जोड़ा हुआ है।

पर

Speed post का 4 अलग से होगा।

अपना पता साफ साफ लिखे।

आप को पहले अकाउंट मे

दवा की राशि जमा रकरानी होगी ।

फिर आप को दवा कोरियर होगी ।

हमारा अकाउंट है है -:

*Paytm9417862263*

Swami veet das c/ ranjit Singh

*State bank of india*

*A/c -65072894910*

Ranjit Singh

Bank code –50966

*Ifsc code -sbin0050966*

Sarhind barach

Fatehgarh sahib (punjab )

★★★

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सिद्ध त्रिफला गुगुल कल्पचुर्ण

सिद्ध अयुर्वेदिक

त्रिफला गुगुल के होते हैं

अनन्त फ़ायदे

त्रिफला गुग्गुल क्या है?

त्रि का अर्थ है तीन और फला का अर्थ है फल| त्रिफला में तीन फलों के सत्त का मिश्रण पाउडर के रूप में होता है:

आँवला +बहेड़ा +हरड़= 1:2:3

गुग्गुल दो आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के मिश्रण से बना एक प्रकार का राल है। यह गुर्दे की पथरी और मूत्र पथ के संक्रमण पर सबसे अच्छा काम करता है।

त्रिफला चूर्ण और गुगुल को मिलाकर त्रिफला गुगुल बनाया जाता है जिसे त्रिफला गुगुल कहा जाता है।

त्रिफला गुग्गुल में पांच अलग-अलग तरह के स्वाद पाए जाते हैं: खट्टा, मीठा, कड़वा, नमकीन और तीखा

सिद्ध त्रिफला गुग्गुल के पौष्टिक गुण

प्राकृतिक रेचक

एंटी-ऑक्सीडेंट

एंटी इंफ्लेमेटरी

एंटी बैक्टीरियल

एंटी वायरल

हीमोग्लोबिन बढाने वाला

कैंसर से लड़ने के गुण

🐘🌴🐘🌴

त्रिफला गुगुल के फ़ायदे

➡️ कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखे

➡️ त्रिफला गुग्गुल(Triphala Guggul) कोशिकाओं में खून के प्रवाह को बढ़ा देता है। इससे आपकी धमनियों में एलडीएल (कम डेंसिटी लिपोप्रोटीन) का स्तर कम हो जाता है।

➡️ त्रिफला गुग्गुल का सेवन खून में शुगर के स्तर को कम कर देता है और किसी भी व्यक्ति की लिपिड प्रोफ़ाइल को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।

🌹🌲🌹

पाचन तंत्र को स्वस्थ रखे

त्रिफला गुग्गुल(Triphala Guggul) एक प्राकृतिक रेचक है और यह आँतों की गतिविधि को नियंत्रित करता है। रात में सोने से पहले एक चम्मच त्रिफला गुग्गुल का पानी के साथ सेवन करने से पेट फूलना, सूजन और दस्त जैसी पाचन समस्याओं को कम कर देता है।

🐘🌹🐘🌴

प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देना

त्रिफला गुग्गुल(Triphala Guggul) शरीर की अशुद्धियों को दूर करता है और खून के बहाव में सुधार करता है। इसमें प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए सभी आवश्यक विटामिन और खनिज मौजूद हैं|

🌹🐘🌴🐘

सूजन को कम करे

त्रिफला गुग्गुल(Triphala Guggul) शरीर की प्रतिरक्षा को बढ़ाकर शरीर को सभी आवश्यक पोषक तत्व देता है। सोने से पहले इसकी हलकी सी मात्रा लेने से भी यह शरीर में सूजन को कम कर देता है। 1 बड़ा चम्मच त्रिफला गुग्गुल पानी के साथ लेने से यह चमत्कारी प्रभाव दिखता है|

🌲🐘🌴🐘

जोड़ों के दर्द से राहत दिलाये

त्रिफला में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो गठिया, संधि-शोथ और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाता हैं। यह शरीर से यूरिक एसिड के कारण होने वाली सूजन को भी हटा देता है।

🐘🌴🐘🌲

वजन घटाने में सहायक

त्रिफला गुगुल(Triphala Guggul) कोलेसिस्टोकिनिंन’ नामक हार्मोन पैदा करता है जो आपको हमेशा पेट भरा हुआ महसूस कराता है| आप वजन को कम करने के लिए दिन में तीन बार पानी के साथ त्रिफला गुगुल को ले सकते हैं और अपने एडीपोज़ उत्तकों में अतिरिक्त फैट के जमाव को कम कर सकते हैं।

🐘🌹🐘🌴

एंटी डिप्रेसेंट के रूप में काम करे

त्रिफला गुगुल(Triphala Guggul) आपके दिमाग में चिंता का स्तर कम कर देता है और आपको शांत महसूस कराता है। रात में सोने से 30 से 40 मिनट पहले त्रिफला गुगुल कैप्सूल लिया जा सकता है|

🐘🌲🐘🌴

शरीर से एलर्जी और जीवाणुओं की वृद्धि हटाये

त्रिफला गुगुल(Triphala Guggul) में एंटी-वायरल और एंटी-एलर्जिक गुण होते हैं जो सामान्य सर्दी, बुखार, जी मिचलाना जैसी समस्याओं का इलाज करते हैं। इसे मौखिक रूप से गोलियों के रूप में या पाउडर रूप में पानी के साथ लिया जा सकता है। यह उन लोगों के लिए लाभदायक है जो एलर्जी जैसी प्रतिक्रियाओं के प्रति अति संवेदनशील हैं।

🌲🌹🐘🌲

त्रिफला गुग्गुल का उपयोग

सभी स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज़ के लिए त्रिफला गुग्गुल का चूर्ण लिया जा सकता है।

खाली पेट भी त्रिफला गुग्गुल(Triphala Guggul) का पाउडर लिया जा सकता है|

एक गिलास पानी में त्रिफला गुग्गुल पाउडर मिलाएं|

अच्छे परिणामों के लिए हर रात इस मिश्रण को पीएं|

🐘🌴🐘🌹

त्रिफला गुगुल का खुराक:

कितना लेना चाहिए?

2 चम्मच त्रिफला गुग्गुल पाउडर

2 त्रिफला गुगुल कैप्सूल (सुबह और शाम)

🔷🐘🔷🌴

त्रिफला गुगुल चूर्ण के

साइड इफेक्ट्स और बचाव

गर्भवती/स्तनपान करने वाली माताओं के लिए यह सुरक्षित नहीं है क्योंकि इससे गर्भपात और दूध के उत्पादन में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

यदि इसे ज्यादा मात्रा में लिया जाए तो यह गैस्ट्रिक मुद्दों, दस्त और डीहाईडरेशन का कारण बन सकता है।

यदि आप मधुमेह के रोगी हैं तो आपको त्रिफला गुग्गुल(Triphala Guggul) का उपयोग करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए|

त्रिफला गुगुल चूर्ण आप ऑनलाइन मगवाएँ

हेल्पलाइन- whats

78890 53063

94178 62263

हम अयुर्वेदिक की महत्वपूर्ण जानकारी

के लिए सदा आप की सेवा में है।

अपने रोग बारे हमे बताए हम आप सही सलाह ऒर उत्तम अयुर्वेदिक इलाज बताएंगे।

https://www.sidhayurved.com/2019/11/blog-post.html?m=1

शरीर दर्द, कमजोरी, हड्डी रोग, दांत रोग औऱ नींद के सभी रोग होंगे दूर।कैल्शियम सिद्ध योग अपनाएँ-

कैल्शियम की कमी है तो       कैल्शियम सिद्ध योग अपनाएँ
                 🌳🌹🌹🌲
शरीर दर्द, कमजोरी, हड्डी रोग, दांत रोग औऱ नींद के सभी रोग होंगे दूर।
                    🌷🌷🌷
तिल सफेद 100 ग्राम
तिल काला 100 ग्राम
जीरा         100 ग्राम
बादाम       100 ग्राम
शिलाजीत   20 ग्राम
बादाम गिरी  100 ग्राम
सभी को पीसकर चुर्ण बनाएँ ।
💬💬💬💬🌹🌹🌷
सेवन विधि – सुबह शाम 2 बार उपयोग करे।
मात्रा:-1चम्मच (2 ग्राम)  दूध के साथ सेवन करे।
                  🌹🌲🌹

कैल्शियम की कमी के नुकसान
हमारे दांत कमजोर होना |
नाखून और हड्डियां भी कमजोर होना या फिर उन में दर्द होना ।
बार बार जोड़ों में दर्द होने का कारण भी कैल्शियम की कमी है ।
कई बार शरीर में कैल्शियम की कमी होने के कारण बच्चों का विकास ठीक से नहीं होता है ।
दिल की धड़कन का बढ़ना या फिर शरीर में ।
थकावट महसूस होना, यह भी कैल्शियम की कमी के कारण होता है ।

सिद्ध कैल्शियम कल्पचुर्ण -online मगवाएँ
संपर्क सुत्र- whats 78890 53063/94178 62263

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सिद्ध कैल्शियम कल्पचुर्ण- हड्डियों को करे मजबूत और हड्डियों के गैप,टूटना ,घुटनों की ग्रीस,रीढ़ की हड्डी का गैप और दर्द, को करे छूमंतर

🌹🌷
सिद्ध मधुमेह नाशक कामकल्प -शुगर का घरेलू योग 100% कारगर -बिना किसी साइड इफेक्ट के।
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सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण- शरीर के समस्त दर्दो का दुश्मन।
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पेट रखे सदा दरुस्त नही होंगे कभी बीमार

             *पेट रखे दरुस्त*

        *नही होगी कोई बीमारी*

                  🌲🌹🌲

*100 ग्राम अजवाइन ,50 ग्राम बारीक कटा हुआ अदरक, 50 ml  नींबू का रस, और 30 ग्राम काला नमक मिलाएं और भोजन से पहले आधे घंटे पहले इसका 1चम्मच पानी से उपयोग करे उपभोग करें।*

*फ़ायदे-अपच ,गैस, जलन,कब्ज ,खट्टी डकारें खत्म होगी औऱ भोजन जल्दी पच जाएगा।*

*इसे नियमित रूप से पीने से 3-7 दिनों के भीतर पाचन में सुधार आता है।* 

🌹🌲🌹

*सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण का नित सेवन 103 रोगों को करता है ठीक लिंकः देखे-* 

💐💐💐

*यदि अन्य अवयव उपलब्ध नहीं हैं, तो पानी के साथ केवल काला नमक लें (1 ग्राम) यह भी काफ़ी फायदेमंद है।* 

                  🌹🥃🌹

             *पेट की हर बीमारी में*

            *गर्म अजवाइन पानी*

*एक ग्लास पानी में 1 चम्मच अजवाइन उबालकर थोड़ा ठंडा होने पर इसे भोजन के तुरंत बाद ग्रहण करें। इसे दिन में एक बार लें या तो, दोपहर के भोजन पश्चात अथवा रात के खाने के बाद लें।*

*अपच ,गैस, जलन,कब्ज ,खट्टी डकारें खत्म होगी औऱ भोजन जल्दी पच जाएगा।*

*पेट और लिवर की हर समस्या के लिए सिद्ध लिवर कल्पचुर्ण सेवन करे होंगे सभी रोग ठीक:-टच करें।। 

🥃🥃🥃🥃

*यदि आप सुबह उठते ही भारीपन और आलस्य महसूस करते हैं, नाश्ता छोड़ते हैं, तो जितना संभव हो उतना गर्म पानी पीते रहें।*

*रात के खाने में खिचड़ी खाएं (हरे मूंग की दाल और चावल का एक बड़ा मिश्रण, अच्छी मात्रा में पानी में पकाये।  यह आपको अपचन से राहत देगा।*

                    🍲🍲🍲

*नींबू को आधा काट लें और इसेमें काला नमक भरें। भोजन से पहले इसे चाटें। यह एक भूख जगाने वाले कारक के रूप में काम करता है। बहुत से लोग मानते हैं कि नींबू प्रकृति में अम्लीय है, लेकिन नींबू में मौजूद पोटेशियम शरीर में अम्ल को निष्क्रिय करता है।*

💐💐

*कभी-कभी अम्ल प्रतिवाह का कारण भी बन सकता है। अम्ल पाचन रस के अपर्याप्त स्राव का परिणाम है जो भोजन के साथ बहुत अधिक पानी पीने से हो सकता है। पानी पाचन रस को पतला करता है।* 

*इसके लिए सबसे अच्छा इलाज जामुन (जंबुल) है। खाने के ठीक बाद 5 से 10 जामुन खाने से अम्ल में बड़ी राहत मिलती है। पपीता खाने से भी इस स्थिति में मदद मिलती है।*

🌲🌹🌲

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अर्जन छाल है वरदान हिर्दय रोग में

अर्जन छाल है वरदान
                हिर्दय रोग में
               
अर्जुन के पेड़ की छाल से बनती है हृदय रोग की दवाई, घर में चूर्ण बना कर इन बीमारियों को करें दूर।
                     
💐💐

हृदय को रखें स्वस्थ

हृदय संबंधी रोगों के उपचार के लिए अर्जुन की छाल काफी कारगर साबित होती हैं क्योंकि इसमें हृदय को स्वस्थ और दिल को मजबूत करने वाले गुण होते है। यह हृदय की मांसपेशियों को मजबूत करने और हृदय द्वारा खून को पूरे शरीर में पहुंचाने की क्षमता में वृद्धि करता हैं। इसके अलावा इसके सेवन से हार्ट अटैक का खतरा भी दूर रहता हैं। रोज सुबह-शाम 3 ग्राम अर्जुन की छाल का पानी पीने से हृदय में सूजन और ब्लाकेज की समस्यां भी नहीं होती। 
                    
💐💐

 उच्च कोलेस्ट्रॉल में अर्जुन अर्क


                  
लिपिड डिसऑर्डर यानी शरीर में उच्च कोलेस्ट्रॉल और ट्रायग्लिसराइड्स वसा की मात्रा या तो ज्यादा होना या कम होना हैं। अगर इनका स्तर शरीर में अधिक है तो हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। यदि आप लिपिड डिसऑर्डर से जूझ रहे है तो अर्जुन का अर्क लेने से काफी फायदा मिलेगा। 
                   

 हाई ब्लड प्रैशर

💐💐


उच्च रक्तचाप जो दिल को नुकसान पहुंचा सकता हैं। हाई ब्लड प्रैशर के मरीज को अक्सर स्ट्रोक, हार्ट अटैक, किडनी डैमेज की प्रॉबल्म होने का खतरा बना रहता हैं। ऐसे में अर्जुन की औषधि में मौजूद प्रोटीन व अन्य गुण हाई बल्ड प्रैशर को कम करने में सहायक होते हैं। 
                 
💐💐

शरीरिक शक्ति को

करे दुगना बढ़ाए


जब आप व्यायाम करते हैं तो अर्जुन औषधि आपके एनर्जी लेवल को बढ़ा देता है। एक शोध के मुताबित, जिन लोगों ने 2 हफ्ते तक लगाकर अर्जुन का अर्क पीया तो उनके ऑक्सीजन को ग्रहण करने की क्षमता 4.9% बढ़ गई। एरोबिक और कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज करते समय शरीर को ऑक्सीजन की जरूरत अधिक होती है। ऐसे में अश्वगंधा के साथ अर्जुन की छाल लेने से शरीर की मांसपेशियां को एनर्जी मिलती हैं और व्यायाम करते समय शरीर को जितनी ऑक्सीजन की जरूर होती है, उतनी प्राप्त होती हैं। 

💐💐

मधुमेह को करें कंट्रोल

अगर आप अपने ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रखने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर चुके है तो इस बार अर्जुन की छाल इस्तेमाल करके देखें। शोध का कहना है कि अर्जुन किडनी में ग्लूकोज के लेवल को ठीक करके ब्लड शुगर को कम करता हैं। इसकी छाल में मौजूद टैनिन, फ्लैवोनोइड्स और सैपोनिन जैसे ग्लूकोज  मेटाबॉलिज्म में शामिल एंजाइमों को मिलाने में मदद करते हैं।रोज रात को सोने से पहले इसकी छाल और देसी जामुन के बीजों का चूर्ण बनाकर खाने से शुगर कंट्रोल में रहती है। 

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सिद्ध मधुमेह नाशक कामकल्प -शुगर का घरेलू योग 100% कारगर -बिना किसी साइड इफेक्ट के।

सिद्ध मधुमेह

नाशक कामकल्प

शुगर का घरेलू योग

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जिस का कोई साइड इफेक्ट्स नही है।
खाने के बाद पानी से ले एक चम्मच।
शरीरिक कमजोरी में दूध के साथ ले।
🌹🌲🌹
जब तक शुगर नॉर्मल हो 3 बार दिन में सेवन करे। जब नॉर्मल हो जाए तो सुबह शाम या एक time ले ।
🌲🌹🌲
एक भारती अयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का मधुमेह नाशक योग है। जो भारती दक्षिणी साधुओं ,योगियों और संतो की खोज पर आधारित है।

इस के सेवन करने से मधुमेह के रोगी को लाभ न हो ऐसा हो ही नहीं सकता है।

सिद्ध मधुमेह नाशक कामकल्प 100% प्रकृतिक है इसमे किसी भी तरह की कोई अन्य सामग्री की कोई मिलावट नहीं की गई है।

इसलिए इसका कोई साइड इफैक्ट भी नहीं है। इसका सेवन करना भी आसान है। इसकी कीमत भी काफी कम रखी गई है ताकि सभी को इसका लाभ मिल सके।

अंत मे इसमे किसी भी प्रकार का कोई ऐसा तत्व नहीं है जो हानिकारक हो इसलिए आप इसे बिना किसी संकोच के इसका सेवन कर सकते है।

सिद्ध मधुमेह नाशक कामकल्प allopathy दवाइयो से बेहतर कैसे है?

यह भारती अयुर्वेदिक मधुमेह नाशक योग 100% अयुर्वेदिक और प्राकृतिक है इसका लंबे समय तक सेवन करने से हमारे शरीर पर कोई भी दुष्टप्रभाव नहीं होता है। वही दूसरी ओर diabetes को कंट्रोल करने के लिए अँग्रेजी दवाइयो का लंबे समय तक सेवन करने से हमारे शरीर के कई मुख्य अंगो जैसे किडनी, लिवर पर गहरा दुष्टप्रभाव पड़ता है।

सिद्ध मधुमेह नाशक कामकल्प Diabetes के पेशंट के अग्न्याशय (Pancreas) मे इंसुलिन की मात्रा मे वृद्धि करता है। जबकि Allopathy दवाइया हमारे शरीर मे केवल शुगर लेवल के बड़ी हुई मात्र को कम करती है, वो बीमारी की जड़ अग्न्याशय (Pancreas) को ठीक रखने का कार्य नहीं करती है।

सिद्ध मधुमेह नाशक कामकल्प का सेवन आपको जीवन भर नहीं करना पड़ता है इसका सेवन आपको तभी तक करना होता है जब तक अग्न्याशय (Pancreas) पूरी तरह से स्वस्थ्य न हो जाए।

इसके विपरीत Allopathy दवाइयो का सेवन जीवन भर करना होता है जैसे-जैसे शरीर मे शुगर का लेवल बढ़ता है वैसे वैसे दवाइयो की Dose भी बढ़ती रहती है।

बढ़ते समय के साथ-साथ एक दिन ऐसा आ जाता है के जब Diabetes के पेशंट को जीने के लिए इंसुलिन के injection का सहारा लेना पड़ता है।

सिद्ध मधुमेह नाशक कामकल्प को सेवन करने के लाभ

सिद्ध मधुमेह नाशक कामकल्प प्रकृति का एक वरदान है। इसके सेवन से न केवल मधुमेह अपितु अन्य रोगो मे भी लाभ होता है।

इस का का नियमित सेवन करने से अग्न्याशय (Pancreas) उचित मात्र मे इंसुलिन बनाना शुरू कर देता है।

इसका का सेवन करने से शुगर का लेवल नियंत्रित होता है।

इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक (Immunity) क्षमता मे वृद्धि होती है ।

इसका सेवन Diabetes से किडनी और लिवर को होने वाले दुष्टप्रभाव से बचाता है।

Diabetes के कारण पुरुषो मे आई सेक्स और शरीरिक कमजोरी को दूर करता है।

इसका का सेवन करना जितना आसान है उतना ही Diabetes मे लाभकारी है।
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Email-sidhayurveda1@gmail.com
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Watch “सिद्ध कायाकल्प चूर्ण- सदा जवान रखने वाला सदा बहार चुर्ण।300 रोगों को करे जड़ से खत्म” on YouTube

https://youtu.be/wXDOnoEaHTo

सिद्ध कैल्शियम कल्पचुर्ण- हड्डियों को करे मजबूत और हड्डियों के गैप,टूटना ,घुटनों की ग्रीस,रीढ़ की हड्डी का गैप और दर्द, को करे छूमंतर

सिद्ध आयुर्वेदिक

*शरीर में कैल्शियम कमी कर देती हैं*
*हड्डियों को बेजान और दर्दनाक*
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सिद्ध कैल्शियम कल्पचुर्ण
हड्डियों, दांत औऱ हार्मोन
बदलाव की कमी को करे पूरा

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*कैल्शियम कमी से होने वाले रोग*
नींद की मकान कमी. थकान, मासपेशियों में दर्द, खुजली, ड्राई नाखून, दांतो टूटना, दांत खोरा, खाना चबाने में दिक्कत और हड्डियों का घिसना और हड्डी दर्द ,बालों का टूटना और मासिक धर्म की समस्या आना आदि।
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दवा क्या है ????
सिद्ध कैल्शियम कल्पचुर्ण
*यह योग करे इस्तेमाल*
अश्वगान्ध 200 ग्राम
कौंचबीज बीज 100 ग्राम
बेल चुर्ण 100 ग्राम
आवला चुर्ण 100 ग्राम
तुलसी बीज 100 ग्राम
कीकर फली 100 ग्राम
सतावरी 100 ग्राम
सफेद मूसली 100 ग्राम
तिल काला 100 ग्राम
तिल सफेद 100 ग्राम
गिलोय 50 ग्राम
बड़ दूध 50 ग्राम
मुलहठी 50 ग्राम
चरायता 50 ग्राम
हल्दी 50 ग्राम
सोंठ 50 ग्राम
काली मिर्च 50 ग्राम
लोह भस्म 50 ग्राम
चांदी भस्म 5 ग्राम
सालम मिश्री 20 ग्राम
सालम पंजा 20 ग्राम
सभी जड़ी बूटियों का मिश्रण बना 300 ग्राम गिलोय रस में भावना दे और सायं में सुखाएं।
सूखने के बाद 50 ग्राम शिलाजीत मिलाएं।
सेवन विधि- 3 ग्राम चूर्ण (1 चम्मच) गर्म दूध से दिन 2 बार सेवन करे।
10 साल तक के बच्चों को 2 -2 ग्राम दे।
परहेज -आचार, खट्टा, तला हुआ और फास्ट फूड बिल्कुल बंद करे।

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कैल्शियम कमी में यह
जड़ी बूटियों होती है कारगर
*दूध से करे इस्तेमाल*

गिलोय का करे इस्तेमाल
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गुड में भरपूर मात्रा में कैल्शियम होता है इसे खाना आपके शरीर के लिए फ़ायदेमंद माना जाता है और यह आपकी हड्डियों को स्वस्थ बनाये रखने में सहायक होता है।
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तिल :- प्रति दिन 2 चम्मच तिल का सेवन करें। आप इसे लड्डू या चिक्की के रूप में भी ले सकते हैं।
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गूगल:- आयुर्वेद में गुग्गल के कई फायदे बताए गए है इनके साथ ही यह शरीर में कैल्शियम की कमी को भी दूर करता है और आपको लाभ दिलाता है।
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जीरा :- एक चम्मच जीरे को रात भर पानी में भिगो दें। सुबह इसका सेवन करें। 15 दिन में लाभ दिखेगा।
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आवला:- आंवला खाना बहुत ही लाभकारी होता है इससे शरीर को इंफेक्शन के खतरे से लड़ने में मदद मिलती है और भरपूर मात्र में कैल्शियम मिलता है।
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रागी का करे इस्तेमाल
अश्वगंधा दूध के साथ करे इस्तेमाल
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बादाम:- रोज़ाना खाली पेट भीगे हुए बादाम खाने से आपकी बॉडी को अच्छी मात्रा में कैल्शियम मिलता है साथ ही कमज़ोरी दूर होती है।
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भुना मैथी दाना
सतावर
लोह भस्म
चांदी भस्म
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अंकुरित अनाज में कैल्शियम प्रचूर मात्रा में होता है। अगर आप अंकुरित आहार नहीं ले सकते हैं तो हफ्ते में एक बार सोयाबीन ले सकते हैं।
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1 अंजीर व दो बादाम रात में गलाएं और सुबह इसका सेवन करें। शर्तिया फायदा होगा।
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*कैल्शियम कमी औऱ आयुर्वेदिक इलाज
बता रहे हैं* – हमारी हड्डियों में कैल्शियम अच्छी तरह से स्टोर रहता है, लेकिन हड्डियां स्ट्रॉन्ग बनी रहें, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम की जरूरत होती है. जब कैल्शियम की कमी होती है, तब बॉडी इसकी पूर्ति हड्डियों से करती है, जिससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।
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*मांसपेशियों में होती है दिक्कत*
*कैल्शियम की कमी का सबसे सामान्य लक्षण शरीर और जोड़ों में दर्द है. इसके साथ-साथ कमजोरी, क्रैम्प्स, मसल कॉन्ट्रैक्शन जैसे लक्षण नजर आते हैं।*
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*बहुत ज्यादा थकान*
लोगों को बहुत ज्यादा थकान, सुस्ती, आलस और ऐसा लग सकता है कि एनर्जी की कमी है. कैल्शियम की कमी नींद न आने की वजह हो सकती है.
कैल्शियम की कमी से जुड़ी थकान भी चक्कर आना और ब्रेन फॉग का कारण बन सकती है, जिसमें फोकस करने में परेशानी, भूलना और कन्फ्यूजन शामिल है.
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*स्किन और नाखून से जुड़े लक्षण*
कैल्शियम की कमी आपकी त्वचा और नाखूनों को भी प्रभावित करती है.
स्किन रूखी और लाल हो सकती है और उसमें खुजली हो सकती है. वहीं इसकी कमी से नाखून ड्राइ और इतने कमजोर हो सकते हैं कि खुद ब खुद टूटने लगें।
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*दांतों में दिक्कत*
जब कैल्शियम की कमी होती है, तब शरीर इसकी पूर्ति दांतों और हड्डियों से कर सकता है. इस वजह से दांतों की दिक्कतें शुरू होती हैं, जैसे कमजोर दांत, मसूड़ों में समस्या, दांतों में सड़न.
शिशुओं में कैल्शियम की कमी से दांतों का निर्माण देर से हो सकता है।
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*ऑस्टियोपेनिया और ऑस्टियोपोरोसिस*

ऑस्टियोपोरोसिस एक बीमारी है, जिसमें हड्डियों का घनत्व (डेंसिटी) कम हो जाता है. हड्डियां इतनी कमजोर और भंगुर हो जाती हैं कि गिरने से, झुकने या छींकने-खांसने पर भी हड्डियों में फ्रैक्चर होने का खतरा रहता है.
हड्डियों की डेंसिटी कम होने में सालों लगते हैं और कैल्शियम की कमी से कोई गंभीर खतरा होने में समय लगता है।
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*मासिक धर्म में दर्द*
जिन महिलाओं में कैल्शियम की कमी होती है। उनको मासिक धर्म के दौरन दर्द होता है। इसके साथ ही मासिक धर्म देर से आना, इनरैगुलर होना भी कैल्शियम की कमी का संकेत है।
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* दिल की धड़कन बढ़ना *
दिल को ठीक तरीके से काम करने के लिए कैल्शियम की आवश्यकता होती है। इसकी कमी होने पर दिल की धड़कन बढ़ने लगती है जिससे बेचैनी से महसूस होने लगती है। कैल्शियम दिल को सही तरह से पम्प करने में मदद करता है।
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बालों का झड़ना
बालों के विकास में कैल्शियम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसकी कमी से बाल झड़ने लगते हैं और रुखे हो जाते हैं। अगर आपको ऐसी समस्या है तो ये शरीर में कैल्शियम की कमी का संकेत हो सकती है।
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*सिद्ध कैलिशयम कल्पचुर्ण*
*Online मंगवाए*
*78890 53063*

सिद्ध कैल्शियम कल्पचुर्ण
हड्डियों, दांत औऱ हार्मोन
बदलाव की कमी को करे पूरा
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*वजन 400 ग्राम ——मूल्य 1050 रुपये*
*40 दिन का चूर्ण*
*सेवन विधि- 1 -1 चम्मच सुबह शाम गर्म दूध के साथ ले।*
*लाभ:—-नींद की मकान कमी. थकान, मासपेशियों में दर्द, खुजली, ड्राई नाखून, दांतो टूटना, दांत खोरा, खाना चबाने में दिक्कत और हड्डियों का घिसना और हड्डी दर्द ,बालों का टूटना और मासिक धर्म की समस्या आना आदि में होगा पूर्ण लाभ।*
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नोट :- दवा डाक से जाएगी। डाक खर्च साधारण जोड़ा हुआ है। पर Speed post का खर्च अलग से होगा।
*अपना पता साफ साफ लिखे। आप को पहले अकाउंट मेदवा की राशि जमा रकरानी होगी।फिर आप को दवा कोरियर होगी।*
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*हमारा अकाउंट है*
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*State bank of india*
*A/c – 65072894910*
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Sarhind barach
Fatehgarh sahib (punjab )
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*निवेदन- पैसा जमा कृपया रसीद whats 78890 53063 पर भेजे और पूरा अड्रेस भेजे।*
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Pay-सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण- शरीर के समस्त दर्दो का दुश्मन।

*350 ग्राम 600 रुपये*

*कोरियर खर्च 110*

*700 रुपये जमा होंगे*

*500 ग्राम 1000 रुपये*

*1 kg 1800 रुपये*

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पैसा जमा कर तुरंत 78890 53063 पर

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दवा की राशि जमा रकरानी होगी ।

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सिद्ध वात दर्द कल्पचुर्ण

80 प्रकार के वातरोगों को करे जड़ से खत्म।

★सायटिका दर्द

★स्तन दर्द

★Vrushan bagअण्डकोश की थैली(अंडकोश और निचले पेट का दर्द दर्द)

★*नाक का मांस बढ़ा होने का दर्द*

★नाक जंतु (Polyps) दर्द और सूजन

◆*चेहरे की नसो मे दर्द*

◆ *Frozen shoulder_जमा हुआ( Frozen shoulder) या जकड़ा हुआ कन्धा में यह दवा रामबाणहै*

◆अफस्फीत शिराएं(Varicose veins) दर्द

◆सर्वकल दर्द

◆ पुरपडी (आंख से लेकर कान तक)दर्द

◆छाती का दर्द

◆घुटनों का दर्द,

◆जोड़ा का दर्द और सुजन,

◆कमर दर्द ,गठिया दर्द

◆समस्त शरीर का दर्द

◆युरिक एसिड दर्द

◆माइग्रेन का दर्द

◆डिस्क का दर्द

◆सिर (आधा) दर्द

◆नस ब्लॉक दर्द

★बुखार के बाद होने वाला दर्द

◆नजला के दर्द

यह दवा सभी प्रकार के दर्दो के लिए है क्योंकि यह दवा हमारे शरीर मे रोग प्रीतिरोधक जीवाणुओं को बढ़ाती है।

अगर किसी के घुटनों की ग्रीस खत्म हो चुकी हो और उनका चलना, उठना और सीढ़ी चढ़ना मुश्किल हो गया हो तो यह दवा कारगर होगी

दवा क्या है

इंद्रयाण अजवाइन 100 ग्राम

सौंठ भुनी 50 ग्राम

सोंठ, काली मिर्च और पीपर – 5-5 ग्राम।

पिपरामूल, चित्रकमूल, च्‍वय, धनिया, बेल की जड, अजवायन, सफ़ेद जीरा, काला जीरा, हल्‍दी, दारूहल्‍दी, अश्‍वगंधा, गोखुरू, खरैटी, हरड़, बहेड़ा, आंवला, शतावरी, मीठा सुरेजान, शुद्ध कुचला, बड़ी इलायची, दालचीनी, तेजपात, नागकेसर 4-4 ग्राम।

योगराज गुग्‍गल 100 को कूटने के बाद बारीक पीस लें और छान कर मिला लें।

दवा तैयार हो गई ।

सेवन विधि –

1-1 चम्मच छोटा सुबह-शाम दूध के साथ ले ।

Whats &call 78890 53063

Pay -सिद्ध नारीशक्ति कल्पचुर्ण

सिद्ध अयूर्वादिक

ओवेरियन सिस्ट के लिए*

*सिद्ध नारीशक्ति कल्पचुर्ण

30 दिन की दवा 350 ग्राम 1050 रुपये

with कोरियर। जब भी पैसे जमा हो जाए तो

तो whats या कॉल कर बताए -78890 53063।

★★

नोट:- कोरियर केवल शहर मे ही जाएगा ।

पता शहर का ही दे ।

डाक से गांव में जाएगी दवा ।

अपना पता साफ लिखे।

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दवा की राशि जमा करानी होगी

फिर आप को दवा कोरियर होगी ।

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*ओवेरियन सिस्ट के लिए*
*सिद्ध नारीशक्ति कल्पचुर्ण*
*Online मंगवाए*
*Whats 78890 53063

कॉल9 94178 62263

*कई महिलाओं को ये समस्‍या हारमोन्‍स के असंतुलन की वजह से होती है। ऐसे में हर्ब्‍स बहुत ही सहायक होती हैं। अलसी, तिल आदि का सेवन लाभकारी होता है और ये उस सिस्‍ट हो खत्‍म कर देते हैं। साथ ही नए सिस्‍ट को बनने से रोकते हैं।*

*अधिकांश महिलाऐं जो ओवेरियन सिस्ट की समस्या का सामना करती हैं उनमें कुछ खास लक्षण एक से देखे जा सकते हैं जिनमें कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं- ओवरी या अंडाशय में दर्द, सूजन, अनियमित मासिक धर्म, मूत्र से संबंधित समस्या, सेक्स के दौरान दर्द का अनुभव और वजन का बढ़ना.*

*अगर आपको बहुत ही गंभीर या तेज़ श्रोणि में दर्द, बुखार, चक्कर आना, जल्दी जल्दी सांस लेना या योनि में थोड़े थोड़े खून के धब्बों के साथ दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो यह दवा इस्तेमाल करे।*
*दवा online मंगवाए*
*WHAts 94178 62263*
*क्या है अयूर्वादिक दवा*

सिद्ध नारीशक्ति कल्पचुर्ण
अलसी 200 ग्राम
सौंठ भुनी 100 ग्राम
बादाम भूनकर 100 ग्राम
काले तिल 100ग्राम
गिलोय चूर्ण 50 ग्राम
आंवला चूर्ण। 50 ग्राम
छोटी हरड़। 5 0 ग्राम
तुलसी पाचांग- 50 ग्राम
चरायता चूर्ण 40 ग्राम
अजमायण -40 ग्राम
मलॅठी। -10 ग्राम
काली मिर्च -10 ग्राम
सभी चूर्ण को मिलाकर रख ले ।
*पुनर्वा,खोखरू, हल्दी और 7 और महत्वपूर्ण जड़ी बूटी से तैयार और एलोवेरा रस युक्त।*

*सेवन विधि- दिन मे 4 बार 2-2 ग्राम 3-3 घंटे बाद लेते रहे।*
दवा पानी से ले ऊपर से 250 ग्राम गर्म दूध ले सकते हैं।
★★
परहेज और आहार
लेने योग्य आहार
डर्मोइड सिस्ट से मुकाबला करने में सहायक आहारों में हैं:
फल
भाररहित स्टार्च युक्त सब्जियाँ गाजर, टमाटर, सब्जियों का सलाद।
मछली
ग्लूटेन रहित अनाज
साबुत चावल
कच्चे मेवे और गिरियाँ।
औषधीय गुणों वाली वनस्पतियाँ, पत्तियाँ और लहसुन।
पानी की अधिक मात्रा।
इनसे परहेज करें
पारंपरिक डेरी उत्पाद
सफ़ेद शक्कर
सफ़ेद चावल/ मैदा।
हाइड्रोजनेटेड तेल।
ग्लूटेनयुक्त अनाज।
रेड मीट और वसायुक्त मीट।
प्रोसेस्ड आहार
शराब

*जरूरी ध्यान दे*
अगर आप ओवरियन सिस्ट से पीड़ित हैं तो ज़रूरी है कि आप पेय पदार्थों का ज़्यादा से ज़्यादा सेवन करें। एल्कलाइन पानी पीने की कोशिश करें।

आप एक ग्लास पानी में एक नींबू निचोड़कर भी डाल सकते हैं। पानी आपके शरीर से विषाक्त पदार्थ निकालने में मदद करता है और अंदर से इलाज भी करता है। इससे आपका अंडाशय में सिस्ट की वजह से होने वाले दर्द और सूजन से भी आराम मिलता है।

पानी के साथ साथ आप नारियल का पानी और हरी सब्ज़ियों के जूस भी पी सकते हैं। शराब, कॉफी और कोक, पेप्सी आदि न पीएं।

★★★★

साथ मे यह जरूर करे।
*ओवेरियन सिस्ट के लिए सेंधा नमक का प्रयोग*

सेंधा नमक बाथ अंडाशय में सिस्ट से जुड़े लक्षणों और दर्द को दूर करने में बहुत ही मदद करता है।

सेंधा नमक में मौजूद सल्फेट मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है जिससे दर्द से आपको राहत मिलती है।

★सेंधा नमक का इस्तेमाल कैसे करें ★

★सबसे पहले एक कप सेंधा नमक को अपने टब या बाल्टी में डाल लें और फिर उसे गर्म पानी से भर लें।
अब उसमे लैवेंडर के तेल, गुलाब या जैस्मिन के तेल की दस बूँदें डालें।

★फिर उस पानी को अच्छे से चलाते रहे जिससे नमक पूरी तरह से घुल जाए।

★अब 20 से 30 मिनट के लिए अपने निचले धड़ को उसमे डुबो दें या फिर उस पानी का इस्तेमाल पेट के निचले क्षेत्र पर करें ।

★इस उपाय को रोज़ाना पूरे दिन में एक बार ज़रूर दोहराएं।

★★★
ओवेरियन सिस्ट के लिए गर्म कपड़े से सेक करें –

गर्माहट मांसपेशियों की ऐठन या अंडाशय में सिस्ट की वजह से पेट के निचले हिस्से में दर्द के लिए काफी प्रभावी है।

हीटिंग पैड का इस्तेमाल कैसे करें –

सबसे पहले हीटिंग पैड या गर्म बोतUल को अपने पेट के निचले हिस्से पर रख लें।

इसे 15 मिनट के लिए ऐसे ही रखे रहने दें।
इस उपाय को तब तब करें जब जब आपको पेट के निचले हिस्से में दर्द महसूस हो।
★★★★

इसमें बादाम का उपयोग करे

बादाम एक मैग्नीशियम से समृद्ध आहार है जो ओवरियन सिस्ट की वजह से होने वाली दर्दभरी ऐठन को दूर करने में मदद करता है

बादाम का इस्तेमाल चार तरीकों से करें –

पहला तरीका –

रोज़ाना भुने बादाम को खाएं इससे आपको दर्द और असहजता से आराम मिलेगा।

दूसरा तरीका –

इसके अलावा आप बादाम के तेल से पेट की निचले हिस्से में मसाज करें। इससे दर्द और फूलने की समस्या से आराम मिलेगा।

तीसरा तरीका –

अच्छा परिणाम पाने के लिए, आप बादाम के तेल में जैस्मिन की कुछ बूँदें मिलाएं और फिर इसे मसाज की तरह इस्तेमाल करें।

चौथा तरीका –

आप एक चम्मच बादाम के तेल को एक ग्लास गर्म दूध में डालकर पी सकते हैं .
इस मिश्रण रोज़ाना एक बार ज़रूर पियें।
■■■
*चकुंदर जरूर सेवन करे*

चुकंदर में बीटासियनिन (betacyanin) यौगिक होता है जो सिस्टम से विषाक्त पदार्थों को साफ़ कर लीवर की क्षमता को बढ़ाता है। इसके साथ ही इसके अल्कलाइन गुण शरीर में एसिडिटी को संतुलित करते हैं। इससे अंडाशय में सिस्ट से होने वाले लक्षणों को दूर करने में मदद मिलती है।

चुकंदर का इस्तेमाल कैसे करें –

सबसे पहले एक या आधा कप ताज़ा चुकंदर का जूस निकाल लें।

अब एक चम्मच एलो वेरा जेल और शीरा को इसमें मिला दें।

इस मिश्रण को अच्छे से चलाने के बाद पी जाएँ।
इस मिश्रण को अपने नाश्ते के बाद रोज़ाना एक बार ज़रूर पियें।

इस उपाय को तब तक दोहराएं जब तक इसके लक्षण दूर न हो जाएँ।

Online मंगवाए
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अश्वगंधा युक्त -बाजीकरण योग

*सिद्ध बाजीकरण योग*

*मूल्य 1860 :00*

*वजन 400 ग्राम*

शिश्न मालिश oil- 250 रुपये

टोटल 2110 रुपये

*40 दिन की सफलता पूर्ण दवा*

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🌴🙏🌴

*शक्ति की कमी है तो*

*सिद्ध बाजीकरण योग*

*यह योग आप को निपुणता देगा*

🌴🙏🌴

बाजीकरण योग सामग्री- ●सफेद मूसली -100 ग्राम

●कीकर फली -100 ग्राम (बीज रहित)

●अश्वगंधा -100 ग्राम

●सतावरी-100 ग्राम

●गोखरू-100 ग्राम

●जयफल -100 ग्रा

●जामुन – 100 ग्राम

की गुठली

●कौंच के – 100ग्राम

बीज के चूर्ण

●तालमखाना-50 ग्राम

●गिलोय चुर्ण-50 ग्राम

●सफेद जीरा-50ग्राम

●सेमल का चूर्ण -50ग्राम

●बबूल गोंद-50 ग्राम

●4 मगज-50ग्राम

●सालममिश्री-250ग्राम

●सालम पंजा-250ग्राम

सभी को मिलाकर चुर्ण बनाए।

सुबह शाम 5-5 ग्राम दूध के साथ ले।

🌴🙏🌴

*कैसे मंगवाए*

नोट-: दवा डाक से जाएगी।

डाक खर्च साधारण जोड़ा हुआ है।

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अपना पता साफ साफ लिखे।

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दवा की राशि जमा रकरानी होगी ।

फिर आप को दवा कोरियर होगी ।

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हमारा अकाउंट है है -:

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Pay दांत मंजन

*सिद्ध नीम दांत मंजन*

वज़न – -200 ग्राम

मूल्य – 260 रुपये

कोरियर खर्च – 70 रुपये

कूल राशि = -330 रुपये

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दवा की राशि जमा रकरानी होगी ।

फिर आप को दवा कोरियर होगी ।

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सिद्ध नीम दांत मंजन

🌱 सिद्ध नीम दांत मंजन 🌱

🌱 नीम दांतुन अब होगी आप के घर।🌱

मसूड़ों करे मजबूत, पायरिया को करे जड़ से ख़त्म,मुंह की बदवू, दांत कीड़ा, मुंह की इंफेक्शन,खून इंफेक्शन और भी अनंत फायदेमंद है। घर बना सकते हैं आप।

🌱 नीम दांत मंजन योग 🌱
नीम पंचांग पॉडर 100 ग्राम
सोंठ 20 ग्राम
काली मिर्च 20 ग्राम
पीपर 20 ग्राम
हरड़ 30 ग्राम
बहेड़ा 10 ग्राम
आंवला 20 ग्राम
दालचीनी 10 ग्राम
तेजपत्र 10 ग्राम
इलायची 5 ग्राम
सेंधा नमक 20 ग्राम

*सभी चूर्ण लेकर 100 ग्राम नीम रस में भावना दे। तथा तिल का तेल 50 ml मिलाकर पेस्ट बनायें।*
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अब इसे अपने दांतों पर उंगली की सहायता से या फिर ब्रश की सहायता से करें।
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🌱 नीम दांत मंजन का महत्व 🌱

दांतों को लेकर नीम के फायदे से कोई अनजान नहीं है। नीम की पत्तियां जहां संक्रमणरोधी होती हैं वहीं नीम के दातुन दांतो के लिए एक वरदान की तरह होते हैं।

दांतों में किसी भी प्रकार की तकलीफ हो नीम के दातुन के पास उन सबका इलाज मौजूद होता है। मुंह की दुर्गंध भी आजकल लोगों की एक अहम समस्या है।

दांतों पर तथा मुंह में मौजूद तमाम तरह के बैक्टीरिया ही मुंह की बदबू के सबसे बड़े कारक होते हैं।

ऐसे में नीम का दातुन इन सभी बैक्टीरिया को खत्म करने में काफी लाभकारी होता है। नीम के दातुन से दांत काफी मजबूत होते हैं। साथ ही साथ उनमें कोई भी रोग लगने की संभावना लगभग खत्म हो जाती है।
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सिद्ध वातदर्द क्ल्पचुर्ण

 

*सिद्ध वात दर्द कल्पचुर्ण*

 

*समस्त शरीरिक दर्दों के लिए

*यह दवा रामबाण है ।*

 

★समस्त वात रोग में रामबाण★

★आस्टि़यो आर्थराईटिस जोड़ों के दर्द कारगर★

खून में जमे कत्थे को करे सही

 

★*सुस्ती रहती हो, थकावट और कमजोरी महसूस हो,* *

नींद न आती हो ,*शरीर में भारापन और *

पेट की खराबी रहती हो तो यह रामबाण होगी.*

 

*केसी भी सूजन यह दवा कम करेगी*

 

यह दवा शुगर के मरीज भी ले ।

यह योग शुगर को भी नार्मल करता है।

 

★नाक जंतु (Polyps) दर्द और सूजन

◆*चेहरे की नसो मे दर्द*

◆ *Frozen shoulder_जमा हुआ

( Frozen shoulder)

या जकड़ा हुआ कन्धा में यह दवा रामबाणहै*

◆अफस्फीत शिराएं(Varicose veins) दर्द

◆सर्वकल दर्द

◆ पुरपडी (आंख से लेकर कान तक)दर्द

◆छाती का दर्द

◆घुटनों का दर्द,

◆जोड़ा का दर्द और सुजन,

◆कमर दर्द ,गठिया दर्द

◆समस्त शरीर का दर्द

◆युरिक एसिड दर्द

◆माइग्रेन का दर्द

◆डिस्क का दर्द

◆सिर (आधा) दर्द

◆नस ब्लॉक दर्द

★बुखार के बाद होने वाला दर्द

 

◆नजला के दर्द

यह दवा सभी प्रकार के दर्दो के लिए है

क्योंकि यह दवा हमारे शरीर मे रोग

प्रीतिरोधक जीवाणुओं को बढ़ाती है।

 

अगर किसी के घुटनों की ग्रीस खत्म हो चुकी हो

और उनका चलना, उठना और सीढ़ी चढ़ना

मुश्किल हो गया हो तो यह दवा कारगर होगी

 

दवा क्या है

 

इंद्रयाण अजवाइन 100 ग्राम

सौंठ भुनी 50 ग्राम ,सोंठ, काली मिर्च और

पीपर – 5-5 ग्राम। पिपरामूल, चित्रकमूल, च्‍वय,

निया, बेल की जड, अजवायन, सफ़ेद जीरा,

काला जीरा, हल्‍दी, दारूहल्‍दी, अश्‍वगंधा,

गोखुरू, खरैटी, हरड़, बहेड़ा, आंवला, शतावरी,

मीठा सुरेजान, शुद्ध कुचला, बड़ी इलायची,

दालचीनी, तेजपात, नागकेसर 4-4 ग्राम।

योगराज गुग्‍गल 100 को कूटने के बाद बारीक

पीस लें और छान कर मिला लें।

 

दवा तैयार हो गई ।

 

सेवन विधि –

1-1 चम्मच छोटा सुबह-शाम दूध के साथ ले ।

 

☆☆☆

घुटनों के दर्द में दवा के साथ

यह जरूर करे

 

दिन 2 बार

 

3 लीटर पानी में 200 ग्राम नमक 200 ग्राम

सरसों का तेल डालकर गरम कर लें। फिर उस

पानी में कपड़ा भिगोकर लगभग 10 मिनट

तक नित्य सेंकाई करें।

 

☆☆☆☆

परहेज -:

 

घुटने दर्द में क्या खाएं क्या नहीं

घुटने के दर्द में केवल ठंडी तथा वायु

बनाने वाली चीजों का उपयोग वर्जित है।

 

फलों तथा हरी तरकारियों का सेवन अधिक करें|

मट्ठा, चाट, पकौड़े, मछली, मांस, मुर्गा, अंडा,

धूम्रपान आदि का सेवन बिलकुल न करें।

 

घुटनों को मोड़कर नहीं बैठना चाहिए|।

पेट को साफ रखें तथा कब्ज न बनने दें|।

दूध के साथ ईसबगोल की भूसी का प्रयोग करें।

शरीर को अधिक थकने वाले कार्य न करें।

प्रतिदिन सुबह-शाम टहलने के लिए अवश्य जाएं।

 

***

 

☆साथ मे यह करे ज्यादा फायदा होगा ☆

 

आलू, शिमला मिर्च, हरी मिर्च, लाल मिर्च,

अत्‍यधिक नमक, बैगन आदि न खाये।

 

घुटनो की गर्म व बर्फ के पैड्स से सिकाई करे।

घुटनो के निचे तकिया रखे।

 

वजन कम रखे इसे बढ़ने न दे।

 

ज्‍यादा लम्बे समय तक खड़े न रहे।

आराम करे दर्द बढ़ाने वाली गति विधिया न करे

ससे आपका दर्द और बढता जायेगा और

आप इसे सहन नहीं कर पाएंगे।

सुबह खली पेट तीन से चार अखरोट खाये,

विटामिन इ युक्त खाना खाये धुप सेके।

 

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सिद्ध कायाकल्प चुर्ण और पंचकर्म चिकित्सा

                     

सिद्ध कायाकल्प चुर्ण और पंचकर्म आयुर्वेदिक चिकित्सा

                     दिनों के है एक जैसे काम

अगर  आप जी ले रहे है ,पंचकर्म आयुर्वेदिक चिकित्सा *तो साथ मे इस्तेमाल करे *सिद्ध कायाकल्प चुर्ण *आप को होगा दुगना फायदा *नही होने देगा कोई नुकसान *सिद्ध कायाकल्प चुर्ण की *पुरी जानकारी whats 94178 62263 प्राप्त करे*

पंचकर्म आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने की आयुर्वेदिक चिकित्सा है। पंचकर्म चिकित्सा में पांच प्रक्रियाएं होती हैं -*वमन, विरेचन, नस्य, रक्तमोक्षण और अनुवासनावस्ती।*

*इन पांचों का संयोजन पंचकर्म कहलाता है। इन पांचों का उद्देश्य आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना और स्वस्थ व संतुलित बनाना होता है।*

*आयुर्वेद विज्ञान आपको इस बात का संकेत देता है कि अधिक तनाव आपके आंत की नली या जठरांत्र मार्ग के लिए बहुत अधिक नुकसानदायक होता है।*

*जठरांत्र मार्ग में असंतुलन की वजह से सूजन होता है और पाचन क्रिया भी प्रभावित होती है। सूजन और पाचन क्रिया सही न होने की वजह से आपके शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा होने लगता है और शरीर बीमारियों का शिकार होने लगता है।*

*इसके साथ ही साथ कई प्रकार की बीमारियां भी जन्म लेती हैं।*

*पंचकर्म के माध्यम से आपके शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलता है और आपका शरीर अधिक सक्रिय हो जाता है। विषाक्त पदार्थ बाहर निकलने और शरीर अधिक सक्रिय होने की वजह से आप अधिक उर्जावान महसूस करते हैं और मानसिक स्तर पर भी सुधार होता है। आपके पाचन क्रिया को मजबूत बना कर पंचकर्म प्राकृतिक रूप से आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने का काम करता है।*

*पंचकर्म आयुर्वेदिक प्रक्रिया के माध्यम से शरीर के विभिन्न अंग जैसे फेफड़े, मू्त्राशय, पसीने की ग्रंथि, पेट और आंत से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है।*

*सिद्ध कायाकल्प चुर्ण भी पंचकर्म चिकित्सा की भांति विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण काम करता है। *सिद्ध कायाकल्प चुर्ण और पंचकर्म चिकित्सा एक जैसा ही काम करते हैं। *जब आप दोनों चिकित्सा एक साथ अपनाएँगे तो जल्दी और दुगना फायदा होगा।*

        क्या है कायाकल्प चूर्ण(What is Kayakalpa churan)

कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था।

कायाकल्प चुर्ण के वैसे तो कई फायदे हैं— *लेकिन इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं *नशों की कमजोरी को दूर करता है।• व्यक्ति की सुंदरता एंव स्वास्थ्य के साथ-साथ लंबे समय तक उन्हें जवानी को बरकरार बनाए रखना।• नेचुरल एजिंग प्रोसेस को धीमा करना •

●●
क्या है काया कल्प चूर्ण में आए जाने -:::
*त्रिफला -250 ग्रा *इंद्राण से बनी हुई अजमायन-200 ग्राम*गिलोय चूर्ण-100 ग्राम
बेल 200 ग्राम *अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम * ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम *शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम *कलौंजी -100 ग्राम *आवला चूर्ण-100 ग्राम *नसांदर -100 ग्राम *अपामर्ग -50 ग्राम *जटामांसी -50 ग्राम * सत्यनाशी -50 ग्राम * काला नमक -50 ग्राम *सेंधानमक -50 ग्राम *ऐलोवैरा रस -500 ग्राम

सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर सांय मे सुखाय । नोट-इंद्रयाण से बनी अजवाइन के बिना बना कायाकल्प बिलकुल काम नही करेगा।*

*जब सुख जाए तब आप का काया कल्प चूर्ण बनकर तैयार हो गया है।*सेवन विधि – अगर आप बिमार है तो दिन एक -एक चम्मच 3 बार ले। अगर आप सदा स्वास्थ्य रहना चाहते है तो एक चम्मच सुबह खाली पेट ले।*

                                          फायदे जाने

*यूरिन इन्फेक्शन में फायदेमंद है कायाकल्प चुर्ण* -पेशाब में संक्रमण का सीधा असर किडनी पर पड़ता है और समस्या गंभीर होने पर किडनी फेलियर तक हो सकता है। ऐसी स्थिति में शरीर में उपस्थित हानिकारक पदार्थ शरीर से बाहर निकलने की बजाए शरीर में ही घुलने लगते है।काफी देर तक पेशाब रोक कर रखे तो पेशाब का रंग गहरा आने लगता है जो यूरिन इन्फेक्शन सिम्पटम्स है

अगर प्रेशर बढ़ने के बाद भी पेशाब ना किया जाए तो ये गुर्दे की तरफ वापिस जाने लगता है जिससे गुर्दों को नुकसान होता है।
●●
*PCOD रोग में यह रामबाण काम करता हैं। *दिन में 3 बार पानी से सेवन करे* PCOD से शरीर पर क्या असर होता हैं।इस कारण से महिलाओ के मासिक धर्म (Menstrual Cycle) के साथ प्रजनन क्षमता (Fertility)PCOD पर भी असर पड़ता है, और महिला गर्भधारणा करने में असमर्थ हो जाती है।अगर PCOD का इलाज न किया जाए तो आगे जाकर यह गर्भाशय के कर्करोग (Cancer) का रूप भी ले सकती है।

■◆■
         काया कल्प चूर्ण के Multipurpose Benifits है

●पथरी 5 mm तक की 3 दिन में गुर्दे से बाहर निकल जाती है।
कैसे ले- 50 मिलीलीटर नीबू रस ले 300 ग्राम पानी मे मिलाकर 5 ग्राम दवा ले।
दिन में 4 बार दवा ले।जब दवा लेगे दर्द तत्काल मिट जाएगा।

****
● नसों की कमजोरी में रामबाण है काया कल्प योग। ●

हर प्रकार की एलर्जी में फायदा। जैसे :-नाक में पानी, छीके, पुराना जुकाम, खाँसी, गले की एलर्जी।● थकान कभी महसूस नही करेंगे। एक उत्साह होगा काया कल्प लेने से।
● आंखों की नज़र ठीक होगी।● त्वचा की सलवटे दूर होती हे, त्वचा के रंग में निखार आता हे ,चर्म रोग दूर होते हे ,त्वचा कांतिमय व् ओजमय बनती हे● यूरिया बढा हो काया कल्प रामबाण की भांतिकाम करता है ।

●ओवरी में सूजन ‘,पानी भरना’ अंडा न बनना।,मासिक धर्म कम आना ठीक करेगी यह काया कल्प।● शरीर मे गांठे हो तो काया कल्प रामबाण की भांति काम करता है ।● माइग्रेन में जबरदस्त लाभ होगा।● बालो की वृद्धि तेजी से होती है, ● अनावश्यक चर्बी घटेगी.● पुरानी कब्ज से मुक्ति मिलेगी ● खून साफ़ होगा ● रक्त नलिकाए साफ़ होगी. ● शरीर के समस्त दर्द 7 दिन ठीक होगे । ● युरिक एसिड जड़ से खत्म होगा।● शरीर के कोने कोने में जमी गंदगी इसके नियमित सेवन से पेशाब के द्वारा बाहर निकल जायेगी नया शुद्ध खून बनेगा. ◆ औरतों की पीरियड की समस्या हो तो काया कल्प रामबाण जैसा काम करता है ।◆ शरीर सुडोल ,मजबूत व आकर्षक बनता हे बल -बुद्धि – वीर्य की वृद्धि करता है । ● नपुसंकता दूर होती है। ● माहलाओं में सेक्स की कमी को पूरा करेगा काया क्ल्प चूर्ण
● कब्ज दूर होती हे , जठराग्नि व् पाचन शक्ति बढती है। और बादी /खूनी बवासीर खत्म होगी ● व्यक्ति का तेज बढ़ता हे , ● बुढ़ापा जल्दी नहीं आता दात मजबूत होते है। ● हड्डीया मजबूत होती है। ● रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है। ● ह्रदय की कार्यक्षमता बढती है। ◆ कोलेस्ट्रोल बढ़ता है तो समान्य हो जाएगा । ●आलोपथिक द्वइयो के साइड इफ़ेक्ट कम करता है।
● यह चूर्ण आयुष्य वर्धक है । ● आयु बढ़ेगी ● घठियावादी हमेशा के लिए दूर होती है।
◆ Diabetes काबू में रहती है। ● कफ से मुक्ति मिलती है।

परहेज क्या करें – अंडा, मांस, मछली, नशीले पदार्थो का सेवन एवं तली हुई वस्तु औगर फास्ट फूड वर्जित हैं

अगर आप *पंचकर्म आयुर्वेदिक चिकित्सा*ले रहे है या दे रहे हैं तो सिद्ध कायाकल्प चुर्ण एक बार जरूर इस्तेमाल करें। *100% फायदा होगा*

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                      Email-sidhayurveda1@gmail.com

अम्लपित्त हाईपर एसिडिटी कारण औऱ घरेलू उपाय

*सिद्ध अम्लपित्त नाशक कल्पचुर्ण या सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण ऑनलाइन मंगवाए- whats/telegram 94178 62263*

जब गलत खानपान और अपच के कारण पेट में पि‍त्त के विकृत होने पर अम्ल की अधिकता हो जाती है, तो उसे अम्लपित्त कहते हैं। यही अम्लपित्त हाईपर एसिडिटी कहलाता है। आइए जानते हैं, इसके कारण, लक्षण और इससे बचने के उपाय –
हाइपर एसिडिटी के कारण – अत्यधि‍क गर्म, तीखा, मसालेदार भोजन करने, अत्यधि‍क खट्टी चीजों का सेवन, देर से पचने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन, नशीले पदार्थों का सेवन करने से हाइपर एसडिटी की समस्या पैदा होती है। भोजन को पचने के लिए पर्याप्त समय न देना और अपच के बावजूद खाते रहना, आपकी इस समस्या को बढ़ा सकता है।
लक्षण – भोजन का पाचन नहीं होना, बगैर किसी मेहनत के ज्यादा थकावट होना, कड़वी या खट्टी डकार आना, शरीर में भारीपन, हृदय के पास या पेट में जलन होना, कभी-कभी उल्टी होना, उल्टी में अम्ल या खट्टे पदार्थ का निकलना, मिचली होना और मुंह से खट्टा पानी आना, सिरदर्द, आंखों में जलन, जीभ का लाल होना जैसे लक्षण हाइपर एसिडिटी में सामने आते हैं।
हाइपर एसिडिटी की समस्या से बचने के लिए आप घर पर ही कुछ उपाय और सावधानियां अपना सकते हैं जिससे आपको यह समस्या न हो –
1 गेहूं या जौ के आटे की बनी चपातियां ही खाएं, क्योंकि यह पाचन संबंधी समस्या पैदा नहीं करती, ना ही इससे गैस बनने जैसी समस्या होती है। बल्कि यह आपकी पाचनक्रिया को बेहतर करेगी।


2 मूंग की दाल, लौकी, तरोई, परवल, गिलकी, टिंडे, कद्दू जैसी सब्ज‍ियों को अनदेखा बिल्कुल न करें। यह आपके पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखती है, और हाइपर एसिडिटी से आपको बचाती है।

3 फलों में पपीता, मौसंबी, अनार आदि को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं। इसके अलावा नारियल और नारियल पानी का भी भरपूर सेवन करें।

4 मुनक्का, आंवले का मुरब्बा, कच्चा आंवला भी खाना बेहतर होगा।
5 अनार और आंवले के अलावा, खट्टी चीजों का अत्यधि‍क सेवन करने से बचें। इससे एसिडि‍टी बढ़ सकती है।

6 नींबू और टमाटर जैसी चीजों को भी नियंत्रित करें, इनके प्रयोग से आपकी यह समस्या बढ़ने में मदद मिलती है।

7 अत्यधि‍क गर्म, तीखा व मसालेदार भोजन करने से बचें। भारी खाद्य पदार्थों को भी खाने से बचें, ये आसानी से नहीं पचते जिससे आपकी समस्या कम होने के बजाए बढ़ जाती है।

8 दही और छाछ का ज्यादा सेवन न करें और उड़द की दाल की बनी चीजों व शराब या अन्य नशीले पदार्थों से दूरी बनाए रखें।
9 हल्का व आसानी से जल्दी पचने वाला भोजन ही करें, अन्यथा आपको बहुत अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
10 गुलकंद व गुलाब से बनी चीजों का सेवन आपके लिए फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि यह आपके पेट में जाकर ठंडक पैदा करता है, जिससे एसिडिटी में राहत मिलती है।

सिद्ध अम्लपित्त नाशक कल्पचुर्ण

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सिद्ध बाजीकरण योग– शरीरिक और सेक्स कमजोरी में कारगर योग

सिद्ध बाजीकरण योग

यह योग आप को निपुणता देगा Online भी मंगवा सकते हैं आ

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जो व्यक्ति यौन संबन्ध नहीं बना पाता या जल्द ही शिथिल हो जाता है वह नपुंसकता का रोगी होता है। इसका सम्बंध सीधे जननेन्द्रिय से होता है। इस रोग में रोगी अपनी यह परेशानी किसी दूसरे को नहीं बता पाता या सही उपचार नहीं करा पाता मगर जब वह पत्नी को संभोग के दौरान पूरी सन्तुष्टि नहीं दे पाता तो रोगी की पत्नी को पता चल ही जाता है कि वह नंपुसकता के शिकार हैं। इससे पति-पत्नी के बीच में लड़ाई-झगड़े होते हैं और कई तरह के पारिवारिक मन मुटाव हो जाते हैं बात यहां तक भी बढ़ जाती है कि आखिरी में उन्हें अलग होना पड़ता है।कुछ लोग शारीरिक रूप से नपुंसक नहीं होते, लेकिन कुछ प्रचलित अंधविश्वासों के चक्कर में फसकर, सेक्स के शिकार होकर मानसिक रूप से नपुंसक हो जाते हैं मानसिक नपुंसकता के रोगी अपनी पत्नी के पास जाने से डर जाते हैं। सहवास भी नहीं कर पाते और मानसिक स्थिति बिगड़ जाती है।कारण :नपुंसकता के दो कारण होते हैं- शारीरिक और मानसिक। चिन्ता और तनाव से ज्यादा घिरे रहने से मानसिक रोग होता है। नपुंसकता शरीर की कमजोरी के कारण होती है। ज्यादा मेहनत करने वाले व्यक्ति को जब पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता तो कमजोरी बढ़ती जाती है और नपुंसकता पैदा हो सकती है। हस्तमैथुन, ज्यादा काम-वासना में लगे रहने वाले नवयुवक नपुंसक के शिकार होते हैं। ऐसे नवयुवकों की सहवास की इच्छा कम हो जाती है।लक्षण :मैथुन के योग्य न रहना, नपुंसकता का मुख्य लक्षण है। थोड़े समय के लिए कामोत्तेजना होना, या थोड़े समय के लिए ही लिंगोत्थान होना-इसका दूसरा लक्षण है। मैथुन अथवा बहुमैथुन के कारण उत्पन्न ध्वजभंग नपुंसकता में शिशन पतला, टेढ़ा और छोटा भी हो जाता है। अधिक अमचूर खाने से धातु दुर्बल होकर नपुंसकता आ जाती है।

सिद्ध बाजीकरण योग

सफेद मूसली -100 ग्राम ●कीकर फली -100 ग्राम (बीज रहित) ●अश्वगंधा -100 ग्राम ●सतावरी-100 ग्राम ●गोखरू-100 ग्राम ●जयफल -100 ग्रा ●जामुन – 100 ग्राम की गुठली ●कौंच के – 100ग्राम बीज के चूर्ण ●तालमखाना-50 ग्राम ●गिलोय चुर्ण-50 ग्राम ●सफेद जीरा-50ग्राम ●सेमल का चूर्ण -50ग्राम ●बबूल गोंद-50 ग्राम ●4 मगज-50ग्राम ●सालममिश्री-250ग्राम ●सालम पंजा-250ग्राम

सभी को मिलाकर चुर्ण बनाए।

सुबह शाम 5-5 ग्राम दूध के साथ ले।

वाजीकरण का सेवन करने के लिए जरूरी बातें-

आयुर्वेद में बताया गया है कि कम उम्र के बच्चों और ज्यादा उम्र के पुरुषों को वाजीकरण औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए। इनका सेवन लगभग 16 से 60 साल तक की उम्र के लोगों को करना चाहिए। क्योंकि यही उम्र सेक्स करने के लिए सबसे ज्यादा अच्छा होता है। 16 साल से कम उम्र में या 60 साल से ज्यादा की उम्र में सेक्स करना बेकार होता है क्योंकि बाल्यकाल (युवावस्था से पहले की उम्र) में शरीर की धातुएं (वीर्य, शुक्राणु) पूरी तरह से विकसित नहीं होते हैं और अगर ऐसे में वह स्त्री के साथ संभोग क्रिया करता है तो वह उसके लिए व्यर्थ ही होता है और कभी-कभी हानिकारक भी हो जाता है।

इसी तरह से 60 साल की उम्र अर्थातवृद्धावस्था में शरीर की सारी धातुएं (वीर्य, शुक्राणु) कमजोर हो जाती हैं। कमजोर शरीर वाला, कमजोर हड्डियों वाला व्यक्ति अगर किसी स्त्री के साथ संभोग करने में लग जाता है तो वह इसमें कुछ पाने के बजाय अपने शरीर का नाश करवा लेता है। रसायन औषधि के सेवन से जहां नएयौवन की प्राप्ति होती है वही वाजीकरण औषधियों के सेवन से यौनसुख मिलता है। जिस व्यक्ति का मन उसके वश में रहता है वह हमेशा वाजीकरण औषधि का सेवन कर सकता है।

● इसका इस्तेमाल दो महीने तक विस्तारपूर्वक करने से इससे काफी अधिक फायदा मिलता है।●यह वीर्य को अधिक गाढ़ा बनाता है।यह रात को होने वाले स्वप्न रोग, वीर्य का जल्दी गिरना और यौनांग के ढीलेपन एवं कमजोरी जैसे रोगों को समाप्त कर देता है-इससे हर प्रकार की शरीरक कमजोरी दूर होती है औरसुबह-शाम लेने से बाजीकरण यानी संभोग शक्ति ठीक होती है और नपुंसकता भी दूर हो जाती है।

यह दवा कोरियर से मंगवा सकते हैं आप।

सिद्ध आयुर्वेदिक Whats 78890 53063

सिद्ध कायाकल्प तेल–योनि कसाव के लिए*

सिद्ध अयुर्वेदिक

सिद्ध कायाकल्प तेल

योनि कसाव के लिए -अयुर्वेदिक तेल

खुद बनाए


*आजकल कुछ महिलाओं को बच्चे पैदा होने के बाद योनि में बहुत ढीलापन आ जाता है।*
*100 में 10 महिला होती है इस रोग की शिकार*
*जिस कारण हीनभावना से मन भरता है*


अगर आप को ऐसा महसूस होता है तो यह अयुर्वेदिक सिद्ध नुस्खा अपनाएँ।*

100 ग्राम अनार छिलका

50 ग्राम माजूफल

50 ग्राम एलोवेरा जैल

50 ग्राम मोचरस रस

50 ग्राम लाल फिटकरी

50 धाय के फूल


सभी सामग्री को 1 लीटर पानी मे उबालना शुरू करे। जब पानी आधा जल जाए तो 500 ग्राम तिल का तेल डाल दे।

*जब पानी जल जाए तो तेल को छानकर शीशी में भर ले और 10 ml गुलाब इतर डाल लें।


इस तेल को 3 बार योनि पर अंदर तक लगाए।तुरंत आप को फ़ायदा होने लगेगा।


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गुर्दे की पथरी के घरेलू अयुर्वेदिक नुस्खे

गुर्दे की पथरी के लिए अयुर्वेदिक नुस्खे

गुर्दे की पथरी की दवा

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गुर्दे की पथरी

किडनी स्‍टोन गलत खानपान का नतीजा है, इसके मरीजों की संख्‍या लगातार बढ़ रही है। गुर्दे की पथरी होने पर असहनीय दर्द होता है। जब नमक एवं अन्य खनिज (जो मूत्र में मौजूद होते हैं) एक दूसरे के संपर्क में आते हैं तब पथरी बनती है। कुछ पथरी रेत के दानों की तरह बहुत छोटे आकार के होते हैं तो कुछ मटर के दाने की तरह। आमतौर पर पथरी मूत्र के जरिये शरीर के बाहर निकल जाती है, लेकिन जो पथरी बड़ी होती है वह बहुत ही परेशान करती है। आगे के स्‍लाइडशो में जानिए पथरी के उपचार के लिए 10 प्रमुख हर्ब्‍स के बारे में।

आंवला

किड्नी स्‍टोन होने पर आंवले का सेवन करना चाहिए। आंवला का चूर्ण मूली के साथ खाने से गुर्दे की पथरी निकल जाती है। इसमें अलबूमीन और सोडियम क्लोराइड बहुत ही कम मात्रा में पाया जाता है जिनकी वजह से इन्हें गुर्दे की पथरी के उपचार के लिए बहुत ही उत्तम माना जाता है। इसलिए गुर्दे की पथरी होने पर आंवले का सेवन कीजिए।

तुलसी की पत्‍ती

गुर्दे की पथरी होने पर तुलसी के पत्‍तों का सेवन कीजिए। तुलसी के पत्तों में विटामिन बी पाया जाता है जो पथरी से निजात दिलाने में मदद करता है। यदि विटामिन बी-6 को विटामिन बी ग्रुप के अन्य विटामिंस के साथ सेवन किया जाये तो गुर्दे की पथरी के इलाज में बहुत सहायता मिलती है। शोधकर्ताओं की मानें तो विटामिन बी की 100-150 मिग्रा की नियमित खुराक लेने से गुर्दे की पथरी से निजात मिलती है।

बथुआ

बथुआ भी किड़नी स्‍टोन से निजात दिलाता है। आधा किलो बथुआ लेकर इसे 800 मिलि पानी में उबालें। अब इसे कपड़े या चाय की छलनी में छान लीजिए। बथुआ की सब्जी भी इसमें अच्छी तरह मसलकर मिला लीजिए। आधा चम्‍मच काली मिर्च और थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर दिन में 3 से 4 बार पीयें। इससे गुर्दे की पथरी निकल जाती है।

इलायची

इलायची भी गुर्दे की पथरी से निजात दिलाती है। एक चम्‍मच इलायची, खरबूजे के बीज की गिरी, और दो चम्‍मच मिश्री एक कप पानी में डालकर उबाल लीजिए, इसे ठंडा होने के बाद छानकर सुबह-शाम पीने से पथरी पेशाब के रास्‍ते से बाहर निकल जाती है।

जीरा

किड्नी स्‍टोन को बाहर निकालने में जीरा बहुत कारगर है। जीरा और चीनी को समान मात्रा में लेकर पीस लीजिए, इस चूर्ण को एक-एक चम्‍मच ठंडे पानी के साथ रोज दिन में तीन बार लीजिए। इससे बहुत जल्‍दी ही गुर्दे की पथरी से निजात मिल जाती है।

सौंफ

सौंफ भी गुर्दे की पथरी के लिए रामबाण उपचार है। सौंफ, मिश्री, सूखा धनिया इनको 50-50 ग्राम मात्रा में लेकर रात को डेढ़ लीटर पानी में भिगोकर रख दीजिए, इसे 24 घंटे के बाद छानकर पेस्‍ट बना लीजिए। इसके एक चम्‍मच पेस्‍ट में आधा कप ठंडा पानी मिलाकर पीने से पथरी पेशाब के रास्‍ते बाहर निकल जाती है।

बेल पत्र

बेल पत्र को पर जरा सा पानी मिलाकर घिस लें, इसमें एक साबुत काली मिर्च डालकर सुबह खायें। दूसरे दिन काली मिर्च दो कर दें और तीसरे दिन तीन, ऐसे सात दिनों तक लगातार इसका सेवन कीजिए। बाद में इसकी संख्‍या कम कीजिए, दो सप्ताह तक प्रयोग करने के बाद पथरी बाहर निकल जायेगी।

काली मिर्च

काली मिर्च भी गुर्दे की पथरी से निजात दिलाती है, काली मिर्च का सेवन बेल पत्‍तर के साथ करने से दो सप्‍ताह में गुर्दे की पथरी पेशाब के रास्‍ते बाहर निलक जाती है।

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*रोज घटाएं 200 ग्राम वजन*
*सिद्ध मोटापा नाशक कल्पचुर्ण*
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*कैसे सेवन करे*
*3 करेला का जूस ले 200 ml पानी मिलाएं । 2 चमच्च मेथी दाना भुना हुआ जूस में मिलाएं। 300 ml के करीब बने जूस को 100 -100 ml कर दिन में 3 बार दवा के साथ ले।*

*विस्तार से जाने*
*आप अयुर्वेदिक की कौंन कौन सी जड़ी बूटी* *इस्तेमाल कर रहे हैं हम विस्तार से बताते हैं.*

*विश्वास का एक नाम है -सिद्ध आयुर्वेदिक*
*क्योंकि सिद्ध आयुर्वेदिक हर दवा कारगर है

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*525 ग्राम 850 रुपये*
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*कायाकल्प चुर्ण 500 ग्राम 700 रुपये*
*टोटल 1560 रुपये जमा कराए*
*◆रोजाना 20 ग्राम दवा ले◆*
*60 दिन की दवा 1 किलोग्राम 1560 रुपये*

*पहली सेबन विधि*-

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*ताजे पानी से ले कर ऊपर करेला जूस ले।*

*करेला जूस ऐसा बनाए*
*3 करेला का जूस ले 200 ml पानी मिलाएं । 2 चमच्च मेथी दाना भुना हुआ जूस में मिलाएं। 300 ml के करीब बने जूस को 100 -100 ml कर दिन में 3 बार दवा के साथ ले।*

★★★
दूसरी -सेवन विधि
कायाकल्प चुर्ण सुबह खाली पेट और रात को सोते समय एक एक चम्मच हल्के गर्म पानी से सेवन करे।
★★★★
मोटापा नाशक कल्पचुर्ण दिन में 3 बार खाने से 1घंटा पहले गर्म पानी से सेवन करे।
★★★★★
पहलेे हल्के गर्म पानी से सेवन करे।
*परहेज के लिए पोस्ट पढ़े।*
★★
नोट
कोरियर केवल शहर मे ही जाएगा ।
पता शहर का ही दे ।
डाक से गांव में जाएगी दवा ।
अपना पता साफ लिखे।
आप को पहले अकाउंट मे
दवा की राशि जमा करानी होगी
फिर आप को दवा कोरियर होगी ।
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सिद्ध नारीशक्ति कल्पचुर्ण

*आयुर्वेदिक दवा*
*ओवेरियन सिस्ट के लिए*
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*कई महिलाओं को ये समस्‍या हारमोन्‍स के असंतुलन की वजह से होती है। ऐसे में हर्ब्‍स बहुत ही सहायक होती हैं। अलसी, तिल आदि का सेवन लाभकारी होता है और ये उस सिस्‍ट हो खत्‍म कर देते हैं। साथ ही नए सिस्‍ट को बनने से रोकते हैं।*

*अधिकांश महिलाऐं जो ओवेरियन सिस्ट की समस्या का सामना करती हैं उनमें कुछ खास लक्षण एक से देखे जा सकते हैं जिनमें कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं- ओवरी या अंडाशय में दर्द, सूजन, अनियमित मासिक धर्म, मूत्र से संबंधित समस्या, सेक्स के दौरान दर्द का अनुभव और वजन का बढ़ना.*

*अगर आपको बहुत ही गंभीर या तेज़ श्रोणि में दर्द, बुखार, चक्कर आना, जल्दी जल्दी सांस लेना या योनि में थोड़े थोड़े खून के धब्बों के साथ दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो यह दवा इस्तेमाल करे।*
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*क्या है अयूर्वादिक दवा*

सिद्ध नारीशक्ति कल्पचुर्ण
अलसी 200 ग्राम
सौंठ भुनी 100 ग्राम
बादाम भूनकर 100 ग्राम
काले तिल 100ग्राम
गिलोय चूर्ण 50 ग्राम
आंवला चूर्ण। 50 ग्राम
छोटी हरड़। 5 0 ग्राम
तुलसी पाचांग- 50 ग्राम
चरायता चूर्ण 40 ग्राम
अजमायण -40 ग्राम
मलॅठी। -10 ग्राम
काली मिर्च -10 ग्राम
सभी चूर्ण को मिलाकर रख ले ।
*पुनर्वा,खोखरू, हल्दी और 7 और महत्वपूर्ण जड़ी बूटी से तैयार और एलोवेरा रस युक्त।*

*सेवन विधि- दिन मे 4 बार 2-2 ग्राम 3-3 घंटे बाद लेते रहे।*
दवा पानी से ले ऊपर से 250 ग्राम गर्म दूध ले सकते हैं।
★★
परहेज और आहार
लेने योग्य आहार
डर्मोइड सिस्ट से मुकाबला करने में सहायक आहारों में हैं:
फल
भाररहित स्टार्च युक्त सब्जियाँ गाजर, टमाटर, सब्जियों का सलाद।
मछली
ग्लूटेन रहित अनाज
साबुत चावल
कच्चे मेवे और गिरियाँ।
औषधीय गुणों वाली वनस्पतियाँ, पत्तियाँ और लहसुन।
पानी की अधिक मात्रा।
इनसे परहेज करें
पारंपरिक डेरी उत्पाद
सफ़ेद शक्कर
सफ़ेद चावल/ मैदा।
हाइड्रोजनेटेड तेल।
ग्लूटेनयुक्त अनाज।
रेड मीट और वसायुक्त मीट।
प्रोसेस्ड आहार
शराब

*जरूरी ध्यान दे*
अगर आप ओवरियन सिस्ट से पीड़ित हैं तो ज़रूरी है कि आप पेय पदार्थों का ज़्यादा से ज़्यादा सेवन करें। एल्कलाइन पानी पीने की कोशिश करें।

आप एक ग्लास पानी में एक नींबू निचोड़कर भी डाल सकते हैं। पानी आपके शरीर से विषाक्त पदार्थ निकालने में मदद करता है और अंदर से इलाज भी करता है। इससे आपका अंडाशय में सिस्ट की वजह से होने वाले दर्द और सूजन से भी आराम मिलता है।

पानी के साथ साथ आप नारियल का पानी और हरी सब्ज़ियों के जूस भी पी सकते हैं। शराब, कॉफी और कोक, पेप्सी आदि न पीएं।

★★★★

साथ मे यह जरूर करे।
*ओवेरियन सिस्ट के लिए सेंधा नमक का प्रयोग*

सेंधा नमक बाथ अंडाशय में सिस्ट से जुड़े लक्षणों और दर्द को दूर करने में बहुत ही मदद करता है।

सेंधा नमक में मौजूद सल्फेट मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है जिससे दर्द से आपको राहत मिलती है।

★सेंधा नमक का इस्तेमाल कैसे करें ★

★सबसे पहले एक कप सेंधा नमक को अपने टब या बाल्टी में डाल लें और फिर उसे गर्म पानी से भर लें।
अब उसमे लैवेंडर के तेल, गुलाब या जैस्मिन के तेल की दस बूँदें डालें।

★फिर उस पानी को अच्छे से चलाते रहे जिससे नमक पूरी तरह से घुल जाए।

★अब 20 से 30 मिनट के लिए अपने निचले धड़ को उसमे डुबो दें या फिर उस पानी का इस्तेमाल पेट के निचले क्षेत्र पर करें ।

★इस उपाय को रोज़ाना पूरे दिन में एक बार ज़रूर दोहराएं।

★★★
ओवेरियन सिस्ट के लिए गर्म कपड़े से सेक करें –

गर्माहट मांसपेशियों की ऐठन या अंडाशय में सिस्ट की वजह से पेट के निचले हिस्से में दर्द के लिए काफी प्रभावी है।

हीटिंग पैड का इस्तेमाल कैसे करें –

सबसे पहले हीटिंग पैड या गर्म बोतUल को अपने पेट के निचले हिस्से पर रख लें।

इसे 15 मिनट के लिए ऐसे ही रखे रहने दें।
इस उपाय को तब तब करें जब जब आपको पेट के निचले हिस्से में दर्द महसूस हो।
★★★★

इसमें बादाम का उपयोग करे

बादाम एक मैग्नीशियम से समृद्ध आहार है जो ओवरियन सिस्ट की वजह से होने वाली दर्दभरी ऐठन को दूर करने में मदद करता है

बादाम का इस्तेमाल चार तरीकों से करें –

पहला तरीका –

रोज़ाना भुने बादाम को खाएं इससे आपको दर्द और असहजता से आराम मिलेगा।

दूसरा तरीका –

इसके अलावा आप बादाम के तेल से पेट की निचले हिस्से में मसाज करें। इससे दर्द और फूलने की समस्या से आराम मिलेगा।

तीसरा तरीका –

अच्छा परिणाम पाने के लिए, आप बादाम के तेल में जैस्मिन की कुछ बूँदें मिलाएं और फिर इसे मसाज की तरह इस्तेमाल करें।

चौथा तरीका –

आप एक चम्मच बादाम के तेल को एक ग्लास गर्म दूध में डालकर पी सकते हैं .
इस मिश्रण रोज़ाना एक बार ज़रूर पियें।
■■■
*चकुंदर जरूर सेवन करे*

चुकंदर में बीटासियनिन (betacyanin) यौगिक होता है जो सिस्टम से विषाक्त पदार्थों को साफ़ कर लीवर की क्षमता को बढ़ाता है। इसके साथ ही इसके अल्कलाइन गुण शरीर में एसिडिटी को संतुलित करते हैं। इससे अंडाशय में सिस्ट से होने वाले लक्षणों को दूर करने में मदद मिलती है।

चुकंदर का इस्तेमाल कैसे करें –

सबसे पहले एक या आधा कप ताज़ा चुकंदर का जूस निकाल लें।

अब एक चम्मच एलो वेरा जेल और शीरा को इसमें मिला दें।

इस मिश्रण को अच्छे से चलाने के बाद पी जाएँ।
इस मिश्रण को अपने नाश्ते के बाद रोज़ाना एक बार ज़रूर पियें।

इस उपाय को तब तक दोहराएं जब तक इसके लक्षण दूर न हो जाएँ।

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सिद्ध बुद्धिवर्धक कल्पचुर्ण-कमजोर बुद्धि ,मानसिक तनाव, चिंता, डर, डिप्रेशन में कारगर है

सिद्ध बुद्धिवर्धक कल्पचुर्ण

(शंखपुष्पादि चूर्ण)

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पैनिक अटैक में, दिमागी कमजोरी में कारगर

★ पढ़ाई में कमजोर बच्चे यह चुर्ण उपयोग करे पढ़ाई की कमजोरी दूर होगी।

★ मानसिक तनाव, चिंता, डर, डिप्रेशन में कारगर है यह चुर्ण।

★ कोई भी उम्र हो यह चुर्ण उपयोगी हैं।

★ नींद की कमी पूरी कर दिमाग को स्वस्थ रखता है।

– एकाग्र ना हो पाना, कमजोर स्मरणशक्ति, अवसाद, चिंता, द्विध्रुवी विकार , भावनात्मक प्रतिक्रियाओं का बढ़ जाना-अधिक रोना या संवेदनशील या आक्रामक होना।

– यदि आप अत्यधिक तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहे हैं तो आप निष्क्रिय हो जाते हैं और कम काम करने लगते हैं। यह आपके काम की प्रगति को भी प्रभावित करता है।

तो यह चुर्ण आप को फायदेमंद साबित होगा

आप बहुत आसानी से विचलित हो जाते है और लगातार अज्ञात डर के नीचे आ जाते हैं।

प्रेरणा, समर्पण और आत्मविश्वास का अभाव होने लगते है तो यह चुर्ण आप को इन से बाहर ले कर आएगा।

आप अपने आप को दूसरे लोगों से अलग रखते हैं और आत्महत्या के विचार आते रहते हैं।

यह बुद्धिवर्धक चुर्ण आप को 100% लाभ देगा।

बुद्धिवर्धक चुुर्ण

आवश्यक सामग्री :-

शंखपुष्पी 150 ग्राम

गुडूची 100 ग्राम

ब्राह्मी 50 ग्राम

शतावर 50 ग्राम

बादाम 100 ग्राम

हल्दी 50 ग्राम

सोंफ 50 ग्राम

कालीमिर्च 10 ग्राम

छोटी इलायची बिज 10 ग्राम

तरबुज बिज गिरी 20 ग्राम

अश्वगंधा 50 ग्राम

आवला 50 ग्राम

जटामांशी 20ग्राम

तुलसी पंचाग 10 ग्राम

धागा मिश्री 250 ग्राम

सारे सामान को कुटपिस कर चूर्ण तैयार कर ले ।

और सुबह शाम एक एक चमच्च दूध के साथ ले।

बच्चों को आधा चमच्च दूध के साथ नित्य प्रयोग दे।

★★★

फायदे

◆मानसिक रोग में कारगर

◆दिमागी तनाव फायदेमंद

◆भूलने की आदत में फायदेमंद

◆ दिमागी रूप से सशक्त बनाता है दिमाग तेज़ करता है ।

◆अनिद्रा के रोगों में सहायक ।

◆मानसिक परेशानी और तनाव दूर करता है ।

◆थाइरोइड के रोग में लाभदायक थाइरोइड कम करता है ।

◆शरीर में सुस्ती नही आने देता हरदम एक्टिव रखता है ।

आज के समय में बच्चों के लिए ये चूर्ण अत्यंत आवश्यक है इसलिए आज ही इसे घर बनाए और प्रयोग करे।

जो लोग ध्यान करते हैं वो यह चुर्ण जरूर उपयोग करे।

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सिद्ध कायाकल्प चुर्ण

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सिद्ध कायाकल्प चुर्ण

सभी रोग के लिए सदैव युवा रखने वाला, शरीर का पूरा कायाकल्प करने वाला सदाबहार चूर्णसिद्ध कल्पचुर्ण चुर्ण सदा घर मे रखे जब कोई समस्या हो तो विधि अनुसार ले। किस रोग में कैसे कायाकल्प चुर्ण ले .हर रोग के लिए विधि विस्तार से पोस्ट में लिखी हुई है।

★★★
कायाकल्प चुर्ण वात पित्त कफ़ को संतुलित करता है। किसी भी नशे को छुड़ाने में कारगर है काया क्ल्प चूर्ण।थकान एक पल में दूर होगी। क्योंकि एलोवेरा हर नस को पूर्ण क्रिया में ले आता है । कंपन रोग में बजुर्ग लोग लगातार यह चुर्ण इस्तेमाल करे।

★★★

आज बढ़ते हुए तनाव, मानसिक थकान, चिंता, शारीरिक रोग ये सब असमय ही इंसान को बूढा बना देती हैं। भरी जवानी में इंसान बूढा नज़र आने लगता हैं। अगर आप अपना योवन कायम चाहते हैं तो आपको यथासंभव तनाव, चिंता को त्यागना होगा।

कहा भी जाता हैं के चिंता से बड़ा कोई शारीरिक शत्रु नहीं हैं। योग करे, ध्यान करे, दोस्तों से मिले, बच्चो और बुज़ुर्गो के साथ समय बिताये, किसी क्लब का सदस्य बनिए, हफ्ते में एक दिन गौशाला जाइए, किसी गरीब को खाना खिलाये। इस से आपकी तनाव और चिंता भाग जाएगी।

इसके साथ हम आज आपको बताने जा रहे हैं आयुर्वेद के एक ऐसे सदाबहार चूर्ण के बारे में जिसको खा कर आप सदा अपने आप को जवान और तंदुरुस्त महसूस करेंगे। बस इसको अपने दैनिक जीवन में शामिल करे।
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क्या है सिद्ध कायाकल्प चूर्ण (What is Kayakalpa churan)

कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था। कायाकल्प चुर्ण के तीन मुख्य लक्ष्य (Three main Objective of Kayakalpa churan)कायाकल्प चुर्ण के वैसे तो कई फायदे हैं

लेकिन इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं-

*नशों की कमजोरी को दूर करता है। • व्यक्ति की सुंदरता एंव स्वास्थ्य के साथ-साथ लंबे समय तक उन्हें जवानी को बरकरार बनाए रखना। • नेचुरल एजिंग प्रोसेस को धीमा करना • आयु बढ़ाना
• शरीर में कहीं भी गाँठ हो तो यह 15 से 50 दिन 90% लाभ होगा।

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क्या है काया कल्प चूर्ण में आए जाने -:::

*त्रिफला -250 ग्रा *इंद्राण से बनी हुई अजमायन-200 ग्राम *गिलोय चूर्ण-100 ग्राम बेल 200 ग्राम *अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम * ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम *शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम *कलौंजी -100 ग्राम *आवला चूर्ण-100 ग्राम *नसांदर -100 ग्राम *अपामर्ग -50 ग्राम * जटामांसी -50 ग्राम * सत्यनाशी -50 ग्राम * काला नमक -50 ग्राम *सेंधानमक -50 ग्राम *ऐलोवैरा रस -500 ग्राम
सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर सांय मे सुखाय । जब सुख जाए तब आप का काया कल्पचूर्ण बनकर तैयार हो गया है ।

सेवन विधि – अगर आप बिमार है तो दिन एक -एक चम्मच 3 बार ले ।अगर आप सदा स्वास्थ्य रहना चाहते है तो एक चम्मचसुबह खाली पेट ले ।



सेवन विधि – अगर आप बिमार है तो दिन एक -एक चम्मच 3 बार ले ।अगर आप सदा स्वास्थ्य रहना चाहते है तो एक चम्मचसुबह खाली पेट ले ।

फायदे जाने

यूरिन इन्फेक्शन में फायदेमंद है कायाकल्प चुर्ण*-पेशाब में संक्रमण का सीधा असर किडनी पर पड़ता है और समस्या गंभीर होने पर किडनी फेलियर तक हो सकता है। ऐसी स्थिति में शरीर में उपस्थित हानिकारक पदार्थ शरीर से बाहर निकलने की बजाए शरीर में ही घुलने लगते है।काफी देर तक पेशाब रोक कर रखे तो पेशाब का रंग गहरा आने लगता है जो यूरिन इन्फेक्शन सिम्पटम्स है।अगर प्रेशर बढ़ने के बाद भी पेशाब ना किया जाए तो ये गुर्दे की तरफ वापिस जाने लगता है जिससे गुर्दों को नुकसान होता है।

●●

PCOD रोग में यह रामबाण काम करता हैं। दिन में 3 बार पानी से सेवन करे।

PCOD से शरीर पर क्या असर होता हैं।इस कारण से महिलाओ के मासिक धर्म (Menstrual Cycle) के साथ प्रजनन क्षमता (Fertility)PCOD पर भी असर पड़ता है, और महिला गर्भधारणा करने में असमर्थ हो जाती है।अगर PCOD का इलाज न किया जाए तो आगे जाकर यह गर्भाशय के कर्करोग (Cancer) का रूप भी ले सकती है।

★★★

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काया कल्प चूर्ण के Multipurpose Benifits है

●पथरी 5 mm तक की 3 दिन में गुर्दे से बाहर निकल जाती है।कैसे ले- 50 मिलीलीटर नीबू रस ले 300 ग्राम पानी मे मिलाकर 5 ग्राम दवा ले। दिन में 4 बार दवा ले। जब दवा लेगे दर्द तत्काल मिट जाएगा।

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● नसों की कमजोरी में रामबाण है काया कल्प योग। ●हर प्रकार की एलर्जी में फायदा। जैसे :-नाक में पानी, छीके, पुराना जुकाम, खाँसी, गले की एलर्जी।● थकान कभी महसूस नही करेंगे। एक उत्साह होगा काया कल्प लेने से।● आंखों की नज़र ठीक होगी।● त्वचा की सलवटे दूर होती हे, त्वचा के रंग में निखार आता हे ,चर्म रोग दूर होते हे ,त्वचा कांतिमय व्ओजमय बनती हे ● यूरिया बढा हो काया कल्प रामबाण की भांति काम करता है । ●ओवरी में सूजन ‘,पानी भरना’ अंडा न बनना।,मासिक धर्म कम आना ठीक करेगी यह काया कल्प।
● शरीर मे गांठे हो तो काया कल्प रामबाण की भांति काम करता है । ● माइग्रेन में जबरदस्त लाभ होगा। ● बालो की वृद्धि तेजी से होती है, ● अनावश्यक चर्बी घटेगी. ● पुरानी कब्ज से मुक्ति मिलेगी ● खून साफ़ होगा रक्त नलिकाए साफ़ होगी. ● शरीर के समस्त दर्द 7 दिन ठीक होगे । ● युरिक एसिड जड़ से खत्म होगा।● शरीर के कोने कोने में जमी गंदगी इसके नियमित सेवन से पेशाब के द्वारा बाहर निकल जायेगी नया शुद्ध खून बनेगा.◆ औरतों की पीरियड की समस्या हो तो काया कल्प रामबाण जैसा काम करता है । ◆ शरीर सुडोल ,मजबूत व आकर्षक बनता हे बल -बुद्धि – वीर्य की वृद्धि करता है ।● नपुसंकता दूर होती है।
● माहलाओं में सेक्स की कमी को पूरा करेगा काया क्ल्प चूर्ण ● कब्ज दूर होती हे , जठराग्नि व् पाचन शक्ति बढती है। और बादी /खूनी बवासीर खत्म होगी । ● व्यक्ति का तेज बढ़ता हे ,
● बुढ़ापा जल्दी नहीं आता दात मजबूत होते है। ● हड्डीया मजबूत होती है। ● रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है। ● ह्रदय की कार्यक्षमता बढती है। ◆ कोलेस्ट्रोल बढ़ता है तो समान्य हो जाएगा । ●आलोपथिक द्वइयो के साइड इफ़ेक्ट कम करता है। ● यह चूर्ण आयुष्य वर्धक है ● आयु बढ़ेगी ● घठियावादी हमेशा के लिए दूर होती है। ◆ Diabetes काबू में रहती है। ● कफ से मुक्ति मिलती है।

परहेज क्या करें – अंडा, मांस, मछली, नशीले पदार्थो का सेवन एवं तली हुई वस्तु औगर फास्ट फूड वर्जित हैं

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सिद्ध आयुर्वेदिक
किसी भी शरीरक स्मयसा के लिए contact करे। Whats 78890 53063

Email-sidhayurveda1@gmail.com

https://ayurvedasidh.blogspot.com/2018/01/blog-post_52.html

सिद्ध खूनी बवासीर नाशक कल्पचुर्ण

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खूनी बवासीर में 2 घंटों में आराम
सिद्ध खूनी बवासीर नाशक कल्पचुर्ण

कचनार छाल 100 ग्राम,नारियल जटा भस्म 100 ग्राम,आँवला चुर्ण 100 ग्राम, तुलसी बीज 50 ग्राम, कौंचबीज 50 ग्राम, बड़ दूध 50 ग्राम।
नोट:-सभी चुर्ण को मिलाकर कचनार काढ़ा 200 ml में भावना दे।

सेवन विधि- मख्खन में मिलाकर या एक गिलास छाछ के साथ, सुबह-शाम सेवन कराना चाहिए। इससे उदर शुद्धि होती है और बवासीर में खून गिरना बंद होता है।

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गीली लाल मिर्च का अचार

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गीली लाल मिर्च का अचार
सामग्री

1/2 किलो लाल मिर्च
200 ग्राम राई की दाल
100 ग्राम सौफ
100 ग्राम मैथी दाना
50 ग्राम कलौजी
200 ग्राम पिसा अमचूर
नमक स्वादानुसार
1/2 लिटर सरसों का तेल तेल

सब मसालो को सेंक कर दरदरा पीस कर उसमे अमचूर हल्दी नमक मिला लें।

सरसो के तेल हींग पावडर डालकर मसाला सेंक ले और मिर्च को बीच में चाकू से कट लगा लें और मसाला भर ले और भरकर धूप मे 4_5 के लिए रख दें।
नोट
लाल मिर्च चाहे तो टुकड़े कर के भी बना सकते हैं
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सिद्ध ब्राह्मी रसायन

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सिद्ध ब्राह्मी रसायन
सवर्ण शक्ति बढ़ाने के लिए

ब्राह्मी चूर्ण 100 ग्राम
मुलहठी का चूर्ण 100 ग्राम
शंखाहुली का चूर्ण 100 ग्राम
गिलोप का चूर्ण 100 ग्राम
स्वर्ण भस्म 1ग्राम

सभी को मिलाकर चुर्ण बनाए।
सेवन विधि-: 1 से 3 ग्राम चुर्ण को 1चमच्च घी या शहद में मिलाकर सेवन करे। साथ मे दूध ले सकते हैं। ( घी और शहद एक साथ न ले)

इस अयुर्वेदिक चुर्ण खाने से मनुष्य की स्मरणशक्ति बढ़ती है और कुष्ठ एवं शरीर के अन्य रोगों का नाश हो जाता है तथा मनुष्यनिरोगी होकर सकल सिध्दि प्राप्त कर सकता है।

इसको आप घर पर बना कर खुद प्रयोग भी कर सकते हैं ।पर ध्यान रहे दोस्तों ब्राह्मी धुप में सुखाई हुई न हो वो छाँव में ही सुखाई गई हो व्ही उत्तम और श्वेष्ठ है ।

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मोटापा कैसे घटाएँ-।।।।बिना किसी साइड इफेक्ट के।।

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■मोटापा कम करने के लिए संपूर्ण जानकारी■

★【आप जी पहले कायकल्प चुर्ण बारे जाने

जो मोटापा की दवा साथ दिया जाता है]

★【फिर मोटापा की दवा बारे जानकारी देंगे]

★:【फिर दवा कैसे लेनी है यह बताएगे】

★ 【अंत मे मूल्य बताया गया है।】

★★★

कायाकल्प चुर्ण

सभी रोग के लिए

सदैव युवा रखने वाला,

शरीर का पूरा कायाकल्प

करने वाला सदाबहार चूर्ण

★★★

कायाकल्प चुर्ण वात पित्त कफ़

को संतुलित करता है

★★★

किसी भी नशे को छुड़ाने में कारगर है काया क्ल्प चूर्ण।

थकान एक पल में दूर होगी। क्योंकि एलोवेरा हर नस को पूर्ण क्रिया में ले आता है।

★★★

आज बढ़ते हुए तनाव, मानसिक थकान, चिंता, शारीरिक रोग ये सब असमय ही इंसान को बूढा बना देती हैं। भरी जवानी में इंसान बूढा नज़र आने लगता हैं। अगर आप अपना योवन कायम चाहते हैं तो आपको यथासंभव तनाव, चिंता को त्यागना होगा

कहा भी जाता हैं के चिंता से बड़ा कोई शारीरिक शत्रु नहीं हैं। योग करे, ध्यान करे, दोस्तों से मिले, बच्चो और बुज़ुर्गो के साथ समय बिताये, किसी क्लब का सदस्य बनिए,हफ्ते में एक दिन गौशाला जाइए, किसी गरीब को खाना खिलाएं। इस से आपकी तनाव और चिंता भाग जाएगी।

इसके साथ हम आज आपको बताने जा रहे हैं आयुर्वेद के एक ऐसे सदाबहार चूर्ण के बारे में जिसको खा कर आप सदा अपने आप को जवान और तंदुरुस्त महसूस करेंगे। बस इसको अपने दैनिक जीवन में शामिलकरे।

●●●

क्या है कायाकल्प चूर्ण

(What is Kayakalpa churan)

कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था।

कायाकल्प चुर्ण के तीन मुख्य लक्ष्य

(Three main Objective of Kayakalpa churan)

कायाकल्प चुर्ण के वैसे तो कई फायदे हैं।

लेकिन इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं-

*नशों की कमजोरी को दूर करता है।

• व्यक्ति की सुंदरता एंव स्वास्थ्य के साथ-साथ लंबे समय तक उन्हें जवानी को बरकरार बनाए रखना।।

• नेचुरल एजिंग प्रोसेस को धीमा करना

• आयु बढ़ाना।

●●

क्या है काया कल्प चूर्ण में

आए जाने -:::

*त्रिफला -250 ग्रा

*इंद्राण से बनी

हुई अजमायन-200 ग्राम

*गिलोय चूर्ण-100 ग्राम

बेल 200 ग्राम

*अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम

* ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम

*शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम

*कलौंजी -100 ग्राम

*आवला चूर्ण-100 ग्राम

*नसांदर -100 ग्राम

*अपामर्ग -50 ग्राम

* जटामांसी -50 ग्राम

* सत्यनाशी -50 ग्राम

* काला नमक -50 ग्राम

*सेंधानमक -50 ग्राम

*ऐलोवैरा रस -500 ग्राम

सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर

सांय मे सुखाय ।

जब सुख जाए तब आप का काया कल्प

चूर्ण बनकर तैयार हो गया है ।

सेवन विधि – अगर आप बिमार है तो दिन एक -एक चम्मच 3 बार ले ।।

अगर आप सदा स्वास्थ्य रहना चाहते है तो एक चम्मच

सुबह खाली पेट ले ।

●●

काया कल्प चूर्ण के Multipurpose Benifits है

●पथरी 5 mm तक की 3 दिन में गुर्दे से बाहर निकल जाती है।

कैसे ले- 50 मिलीलीटर नीबू रस ले 300 ग्राम पानी मे मिलाकर 5 ग्राम दवा ले।

दिन में 4 बार दवा ले।

जब दवा लेगे दर्द तत्काल मिट जाएगा।

****

● नसों की कमजोरी में रामबाण है काया कल्प योग।

●हर प्रकार की एलर्जी में फायदा। जैसे :-

नाक में पानी, छीके, पुराना जुकाम, खाँसी, गले की एलर्जी।

● थकान कभी महसूस नही करेंगे। एक उत्साह होगा काया कल्प लेने से।

● त्वचा की सलवटे दूर होती हे, त्वचा के रंग में निखार आता हे ,चर्म रोग दूर होते हे ,त्वचा कांतिमय व् ओजमय बनती हे

● यूरिया बढा हो काया कल्प रामबाण की भांति

काम करता है ।

●ओवरी में सूजन ‘,पानी भरना’ अंडा न बनना।,मासिक धर्म कम आना ठीक करेगी यह काया कल्प।

● शरीर मे गांठे हो तो काया कल्प रामबाण की

भांति काम करता है ।

● माइग्रेन में जबरदस्त लाभ होगा।

● बालो की वृद्धि तेजी से होती है,

● अनावश्यक चर्बी घटेगी.

● पुरानी कब्ज से मुक्ति मिलेगी

● खून साफ़ होगा

● रक्त नलिकाए साफ़ होगी.

● शरीर के समस्त दर्द 7 दिन ठीक होगे ।

● युरिक एसिड जड़ से खत्म होगा।

● शरीर के कोने कोने में जमी गंदगी इसके नियमित सेवन से पेशाब के द्वारा बाहर निकल जायेगी

नया शुद्ध खून बनेगा.

◆ औरतों की पीरियड की समस्या हो तो काया कल्प

रामबाण जैसा काम करता है ।

◆ शरीर सुडोल ,मजबूत व आकर्षक बनता हे

बल -बुद्धि – वीर्य की वृद्धि करता है ।

● नपुसंकता दूर होती है।

● माहलाओं में सेक्स की कमी को पूरा करेगा काया क्ल्प चूर्ण

● कब्ज दूर होती हे , जठराग्नि व् पाचन शक्ति बढती है। और बादी /खूनी बवासीर खत्म होगी ।

● व्यक्ति का तेज बढ़ता हे ,

● बुढ़ापा जल्दी नहीं आता

दात मजबूत होते है।

● हड्डीया मजबूत होती है।

● रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है।

● ह्रदय की कार्यक्षमता बढती है।

◆ कोलेस्ट्रोल बढ़ता है तो समान्य हो जाएगा ।

●आलोपथिक द्वइयो के साइड इफ़ेक्ट कम करता है।

● यह चूर्ण आयुष्य वर्धक है ।

● आयु बढ़ेगी

● घठियावादी हमेशा के लिए दूर होती है।

◆ Diabetes काबू में रहती है।

● कफ से मुक्ति मिलती है।

परहेज क्या करें – अंडा, मांस, मछली, नशीले पदार्थो का सेवन एवं तली हुई वस्तु औगर फास्ट फूड वर्जित हैं।

●●●

मोटापा नाशक कल्पचुर्ण

■मोटापा कम करने का योग ■

¶यह एक फ़ूड है इस योग का

कोई साइड इफेक्ट्स और नुकसान नही है।¶

【बाजार में मिलने वाली दवाएं

हड्ड़ी रोग का कारण बन सकती हैं।】

★★★

नोट -: online दवा मंगवाए जिस में हम आप को साथ मे कायकल्प चुर्ण भी देगे। जो आप की नाड़ी तंत्र को शुद्ध और साफ करेगा।

कायकल्प चुर्ण बारे जानने के लिए whats 94178 62263 पर sms करे।

★★★

आप खुद भी बना सकते है।

यह पेट की चर्बी में बहुत अच्छा काम करती हैं।

आवश्यक सामग्री :

●गुग्गुल(Guggul)- 140 ग्राम

●विलायिती इमली (Camachile)-105 ग्राम (इसे जंगल जलेबी, अग्रेजी इमली, गंगा इमली भी कहते है।)

●त्रिफला (Triphala)- 105 ग्राम

●बेल चूर्ण -105 ग्राम

◆अर्जुन छाल-,105 ग्राम

●यष्टिमधु (Liquorice)-70 ग्राम (इसे मुलेठी भी कहते है।)

◆गिलोय (Tinospora)- 70 ग्राम

●नागरमोथा (Nut grass)- 70 ग्राम (Cyperus Scariosus)

जीरा (cumin)- 70 ग्राम

शुंठी(Shunti)- 70 ग्राम (सोंठ)

★ बनाने की विधि :

उपरोक्त सभी औषिधियों को बारीक-बारीक कूट-पीस ले और महीन छन्नी से छान कर किसी डिब्बे में बंद कर के रख ले-आपकी ये सामग्री कूट-पिस लगभग 700 ग्राम तैयार हो जायेगी।

सेवन करने का तरीका :

प्रतिदिन आपको इसमें से दस ग्राम सुबह खाने से पहले गुनगुने पानी से और शाम को खाने के बाद गुनगुने पानी से लेना है ।

बीस ग्राम के हिसाब से एक माह में 600 ग्राम दवा होगी तथा ये एक माह से उपर के लिए हो जायेगी।

तब तक आपका वजन लगभग आठ से दस किलो से जादा कम हो जाएगा।

पेट बढ़ा है 2 से 3 इंच कम हो जाएगा।

पहले माह तेजी से घटता है लगभग छ: से सात किलो फिर थोडा कम घटेगा।

आप इसे आगे भी जारी रख सकते है जब आपको लगे कि आपका वजन और चर्बी अब आपके लिए पर्याप्त है दवा को बंद कर सकते है।

★ आवश्यक परहेज :

भोजन और परहेज :

मोटापे से परेशान व्यक्ति को मुद्ग, जौ, मूंग का रस, मक्खन, गर्म पानी, बाजरा, गेहूं, ताजा दूध, मुनक्का, संतरा, टमाटर, मसूर, छाछ आदि का सेवन करना चाहिए। मोटे व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह टहलना चाहिए और थोड़ी-बहुत मेहनत भी करनी चाहिए। रोगी को पतला करके दूध, फलों का रस, कॉफी, गर्म करके पीना चाहिए।

मोटापे के रोगी को गाय का दूध, देशी घी, गाढ़ी दाल, चावल, आलू, गर्म दूध, चीनी से बने पदार्थ, पनीर, आइसक्रीम, मिठाइयां, मांसाहारी भोजन, अधिक चिकनाई व चटपटा पदार्थ, सांभर, सूप, बिस्कुट, केक, नमकीन पदार्थ, जेली, मिठाइयां, बाहर का खाना, देर रात पार्टियों में खाना, नए शालि चावल आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। शीतल पानी से नहाना मोटापे के लिए हानिकारक होता है।

तली भुनी चीजे, फास्ट-फ़ूड तथा रिफाइंड आयल का प्रयोग न करे।

Online आप दवा मंगवा सकते हैं।

हम साथ मे काया क्ल्प चूर्ण भी देगे।

जो मोटापे की दवा औऱ मोटापे में हैरानीजनक फायदा करता है।

★★★★

70 दिन की दवा होगी

खर्च जाने अब

मोटापा कम करने की दवा 500 ग्राम

1050 रुपये

कायाकल्प चुर्ण 500 ग्राम

500 रुपये।

टोटल 1550 जमा कराए।

★★★★

सेवन विधि

कायाकल्प चुर्ण 1 चम्मच सुबह खाली पेट।

रात को सोते टाइम पानी से सेवन करे।

★★★

मोटापा दवा दिन 3 बार कभी भी पानी से ले।

परहेज के लिए पोस्ट पढ़े।

★★

नोट

कोरियर केवल शहर मे ही जाएगा ।

पता शहर का ही दे ।

डाक से गांव में जाएगी दवा ।

अपना पता साफ लिखे।

आप को पहले अकाउंट मे

दवा की राशि जमा करानी होगी

फिर आप को दवा कोरियर होगी ।

हमारा अकाउंट है है -:

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Fatehgarh sahib (punjab )

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बसंत ऋतु के रोग और इलाज

          *बसंत ऋतु में आयुर्वेदिक दवाएं*

                *और खान-पान*

बसंत ऋतु में कफ़ रोग, लीवर रोग , ह्र्दय रोग और खून अशुद्धि जैसे रोग उतपन्न होते हैं।

इसे कच्ची मौसम के रोग भी बोला जाता है।

सिद्ध आयुर्वेदिक औषधियों इस मौसम के हिसाब से निर्मत की जाती है।

।।वसंत ऋतु इस्तेमाल करने योग्य सिद्ध चुर्ण।।

1.सिद्ध कफ़ नाशक कल्पचुर्ण

2.सिद्ध लिवर कल्पचुर्ण

3.सिद्ध ह्रदय कल्पचुर्ण

4.सिद्ध खून शुद्धि कल्पचुर्ण

लिंकः देख सकते टच करे

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हिन्‍दू कैलेंडर के हिसाब से15 मार्च से 15 मई का वक्‍त वसंत ऋतु का होता है। 

वसंत ऋतु का शरीर  पर क्‍या असर पड़ता है?

 यह वक्‍त गर्मी और सर्दी के बीच का होता है इसलिए ठंड और गर्मी दोनों का इफेक्‍ट होता है। दिन में गर्मी और रात को ठंडक होती है।

इस मौसम में कफ दोष बॉडी पर और हावी होने लगता है।

वजह ये है कि इससे पहले वाले मौसम यानी शिशिर ऋतु में बॉडी में जमा कफ अब गर्मी होने पर पिघल जाता है।

इससे खासतौर पर पचाने की ताकत पर असर पड़ता है। साफ तौर पर कहें तो खाने को पचाने वाली आग जिसे जठराग्‍नि कहते हैं, कमजोर पड़ जाती है।

एक तो वैसे ही इस मौसम में कफ का असर ज्‍यादा होता है उसमें अगर आपने कफ बढ़ाने वाली चीजें थोड़ी बहुत भी खा लीं तो समझें टांसिल्‍स, खांसी, गले में खराश, जुकाम, सर्दी और कफ व बुखार का हमला हो सकता है।

            ।।बसंत ऋतु में खान -पान।।

   वसंत ऋतु में कफ की समस्या अधिक रहती है। अतः इस मौसम में जौ, चना, ज्वार, गेहूं, चावल, मूंग, अरहर, मसूर की दाल, बैंगन, मूली, बथुआ, परवल, करेला, तोरई, अदरक, सब्जियां, केला खीरा, संतरा, शहतूत, हींग, मेथी, जीरा, हल्दी, आंवला आदि कफनाशक पदार्थों का सेवन करें|

   इसके अलावा मूंग बनाकर खाना भी उत्तम है।

◆◆

                   बसंत ऋतु में 

                ।। घरेलू नुस्खे।।

  नागरमोथा अथवा सोंठ डालकर उबाला हुआ पानी पीने से कफ का नाश होता है।

मन प्रसन्न रखें एवं जो हृदय के लिए हितकारी हों ऐसे आसव अरिष्ट जैसे कि मध्वारिष्ट, द्राक्षारिष्ट, गन्ने का रस, सिरका आदि पीना लाभदायक है। 

●◆◆

          ।।सिद्ध हिर्दय कल्पचुर्ण ।।

आप अगर बसंत ऋतु में इस्तेमाल करते हैं तो आप को कभी हार्ट अटैक नही होगा *

सिद्ध ह्रदय कल्पचुर्ण की पूरी जानकारी के लिए link देखे:- 

https://wp.me/paDg1r-J

●●

   इस ऋतु में कड़वे नीम में नई कोंपलें फूटती हैं। नीम की 15-20 कोंपलें, 2-3 काली मिर्च के साथ चबा-चबाकर खानी चाहिए।

15-20 दिन यह प्रयोग करने से वर्ष भर चर्म रोग, रक्त विकार और ज्वर आदि रोगों से रक्षा करने की प्रतिरोधक शक्ति पैदा होती है एवं आरोग्यता की रक्षा होती है। 

इसके अलावा कड़वे नीम के फूलों का रस 7 से 15 दिन तक पीने से त्वचा के रोग एवं मलेरिया जैसे ज्वर से भी बचाव होता है।

●●

          ।।सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण।।

*बसंत ऋतु में इस्तेमाल करे खून शुद्वि कल्पचुर्ण*

सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण आप बसंत ऋतु में अगर इस्तेमाल करते हैं तो खून सबंधी जितने भी रोग होते हैं सभी साल भर के लिए आप ठीक हो जाएंगे।

सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण की पूरी जानकारी के लिंक देख सकते हैं।

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◆◆

   धार्मिक ग्रंथों के वर्णनानुसार चैत्र मास के दौरान अलौने व्रत याने बिना नमक के व्रत करने से रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है एवं त्वचा के रोग, हृदय के रोग, उच्च रक्तचाप( हाई बीपी), गुर्दा, किडनी आदि के रोग नहीं होते। 

   वसंत ऋतु में दही का सेवन न करें क्योंकि वसंत ऋतु में कफ का स्वाभाविक प्रकोप होता है एवं दही कफ को बढ़ाता है। अतः कफ रोग से व्यक्ति ग्रसित हो जाते हैं।

      वसंत के मौसम में क्‍या नहीं खाना चाहिए

●●

 ।।फेंटी, खःटी औऱ मीठी वस्तुओं से करे परहेज।।

   वसंत में फैटी, खट्टे, मीठे और पेट के लिए भारी चीजें नहीं खानी चाहिए। तली और मसालेदार चीजें कम से कम खाएं। 

दिन में सोना बंद कर दें ऐसा करने से कफ दोष भड़क जाएगा। रात को ज्‍यादा देर तक नहीं जागना चाहिए इससे वायु दोष बढ़ जाता है।

सुबह देर तक सोने से मल सूख जाता है, भूख्‍ देर से लगती है और चेहरे व आंखों की चमक कम हो जाती है। इसलिए इस मौसम में जल्‍दी सोएं और जल्‍दी उठें।

   शीत एवं वसंत ऋतु में श्वास, जुकाम, खांसी आदि जैसे कफजन्य रोग उत्पन्न होते हैं। 

उन रोगों में हल्दी का प्रयोग उत्तम होता है। हल्दी शरीर की व्याधि रोधक क्षमता को बढ़ाती है जिससे शरीर रोगों से लड़ने में सक्षम होता है। 

  चौथाई चम्मच हरड़ का चूर्ण शहद में मिलाकर चाटें तो वसंत ऋतु में होने वाले बलगम, ज्वर, खांसी आदि नष्ट हो जाते हैं। मौसम के अनुसार भोजन हमारे शरीर और मन दोनों के लिए हितकारी होता है।

मौसम के अनुसार भोजन में परिवर्तन करके आहार लेने वाले लोग हर समय स्वस्थ और प्रसन्नचित रहते हैं।

   इस मौसम में स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए रोज एक्‍सरसाइज करें। टहलें, मालिश करें और अगर मौसम में ठंडक है तो गुनगुने पानी से नहा सकते हैं। गर्म पानी से मूत्राशय और मलाशय की अच्‍छे से सफाई करनी चाहिए।

नहाने के बाद बदन पर कपूर, चंदन, अगरू, कुमकुम जैसी खुश्‍बू वाली चीजों का लेप लगा सकते हैं। चाहें तो शाम के वक्‍त दोबारा नहा सकते हैं। ढीले और सूती कपड़े पहनें। 

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सालम पंजा – शरीर की हर शक्ति देता है जगा

                *सालम पंजा*
     *एक जीवित ऊर्जा प्रदान करता है*
*अयुर्वेदिक अनंत जड़ी बूटी मानव जीवन के लिए कुदरत का वरदान है।।

*सालम पंजा युक्त सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण online मंगवाए*
*’सालमपंजा’ एक बहुत ही गुणकारी, बलवीर्यवर्द्धक, पौष्टिक और यौन शक्ति को बढ़ाकर नपुंसकता नष्ट करने वाली वनौषधि है।*
*यह बल बढ़ाने वाला, शीतवीर्य, भारी, स्निग्ध, तृप्तिदायक और मांस की वृद्धि करने वाला होता है। यह वात-पित्त का शमन करने वाला, रस में मधुर होता है।*

विभिन्न भाषाओं में नाम : संस्कृत- मुंजातक। हिन्दी- सालमपंजा। मराठी- सालम। गुजराती- सालम। तेलुगू- गोरू चेट्टु। इंग्लिश- सालेप। लैटिन- आर्किस लेटिफोलिया।

परिचय : सालम हिमालय और तिब्बत में 8 से 12 हजार फीट की ऊंचाई पर पैदा होता है। भारत में इसकी आवक ज्यादातर ईरान और अफगानिस्तान से होती है। सालमपंजा का उपयोग शारीरिक, बलवीर्य की वृद्धि के लिए, वाजीकारक नुस्खों में दीर्घकाल से होता आ रहा है। 

समुद्र यात्रा : समुद्र में प्रायः यात्रा करते रहने वाले पश्चिमी देशों के लोग प्रतिदिन 2 चम्मच चूर्ण एक गिलास पानी में उबालकर शक्कर मिलाकर पीते हैं। इससे शरीर में स्फूर्ति और शक्ति बनी रहती है तथा क्षुधा की पूर्ति होती है।
●●
यौन दौर्बल्य : 
सालमपंजा 100 ग्राम, बादाम की मिंगी 200 ग्राम, दोनों को खूब बारीक पीसकर मिला लें।

इसका 10 ग्राम चूर्ण प्रतिदिन कुनकुने मीठे दूध के साथ प्रातः खाली पेट और रात को सोने से पहले सेवन करने से शरीर की कमजोरी और दुबलापन दूर होता है, यौनशक्ति में खूब वृद्धि होती है और धातु पुष्ट एवं गाढ़ी होती है। यह प्रयोग महिलाओं के लिए भी पुरुषों के समान ही लाभदायक, पौष्टिक और शक्तिप्रद है, अतः महिलाओं के लिए भी सेवन योग्य है।
●●
शुक्रमेह :
 सालम पंजा, सफेद मूसली एवं काली मूसली तीनों 100-100 ग्राम लेकर कूट-पीसकर खूब बारीक चूर्ण करके मिला लें और शीशी में भर लें।
प्रतिदिन आधा-आधा चम्मच सुबह और रात को सोने से पहले कुनकुने मीठे दूध के साथ सेवन करने से शुक्रमेह, स्वप्नदोष, शीघ्रपतन, कामोत्तजना की कमी आदि दूर होकर यौनशक्ति की वृद्धि होती है।
●●

जीर्ण अतिसार : 
सालमपंजा का खूब महीन चूर्ण 1-1 चम्मच सुबह, दोपहर और शाम को छाछ के साथ सेवन करने से पुराना अतिसार रोग ठीक होता है।

एक माह तक भोजन में सिर्फ दही-चावल का ही सेवन करना चाहिए। इस प्रयोग को लाभ होने तक जारी रखने से आमवात, पुरानी पेचिश और संग्रहणी रोग में भी लाभ होता है।
●●
प्रदर रोग :

 सलमपंजा, शतावरी, सफेद मूसली और असगन्ध सबका 50-50 ग्राम चूर्ण लेकर मिला लें।
इस चूर्ण को एक-एक चम्मच सुबह व रात को कुनकुने मीठे दूध के साथ सेवन करने से पुराना श्वेतप्रदर और इसके कारण होने वाला कमर दर्द दूर होकर शरीर पुष्ट और निरोगी होता है।
●●
वात प्रकोप : 
सालमपंजा और पीपल (पिप्पली) दोनों का महीन चूर्ण मिलाकर आधा-आधा चम्मच चूर्ण सुबह-शाम बकरी के कुनकुने मीठे दूध के साथ सेवन करने से कफ व श्वास का प्रकोप शांत होता है। सांस फूलना, शरीर की कमजोरी, हाथ-पैर का दर्द, गैस और वात प्रकोप आदि ठीक होते हैं। 
●●
विदार्यादि चूर्ण :
 विन्दारीकन्द, सालमपंजा, असगन्ध, सफेद मूसली, बड़ा गोखरू, अकरकरा सब 50-50 ग्राम खूब महीन चूर्ण करके मिला लें और शीशी में भर लें।

इस चूर्ण को 1-1 चम्मच सुबह व रात को कुनकुने मीठे दूध के साथ सेवन करने से यौन शक्ति और स्तंभनशक्ति बढ़ती है।

*यह योग online मगवां सकते हैं*
●●

रतिवल्लभ चूर्ण :
 सालमपंजा, बहमन सफेद, बहमन लाल, सफेद मूसली, काली मूसली, बड़ा गोखरू सब 50-50 ग्राम। छोटी इलायची के दाने, गिलोय सत्व, दालचीनी और गावजवां के फूल-सब 25-25 ग्राम। मिश्री 125 ग्राम। सबको अलग-अलग खूब कूट-पीसकर महीन चूर्ण करके मिला लें और शीशी में भर लें।

इस चूर्ण को 1-1 चम्मच सुबह व रात को कुनकुने मीठे दूध के साथ दो माह तक सेवन करने से यौन दौर्बल्य और यौनांग की शिथिलता एवं नपुंसकता दूर होती है। शरीर पुष्ट और बलवान बनता है।

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सिद्ध गर्भधारण कल्पचुर्ण

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        *सिद्ध गर्भधारण कल्पचुर्ण*

*फायदे-*

*अंडे का न बनना, गर्भावस्था कमजोरी, गर्भ नली का बंद होना, लकोरिया, गर्भाशय कमजोरी , अंतुसलन हार्मोन, गर्भाशय का छोटापन आदि*

सिद्ध गर्भधारण कल्पचुर्ण का नुस्खा

पुत्रजीवक          100 ग्राम

शिवलिंगी बीज    100 ग्राम

गजकेसर की जड़  50 ग्राम

पीपल की दाढ़ी      50 ग्राम

ब्रह्मिबुटी               50 ग्राम

तुलसी के बीज       50 ग्राम

गोरखमुण्डी।          50 ग्राम

काकोली का बीज   20 ग्राम

नागकेसर              20 ग्राम

मिश्री                   100 ग्राम

इसकी 5 ग्राम मात्रा को सुबह के समय बछडे़ वाली गाय के 250 मिलीलीटर  दूध से मासिक-धर्म खत्म होने के बाद लगभग 20 दिन तक करना चाहिए।

इसके सेवन से स्त्रियां गर्भधारण के पक्के तौर योग्य बन जाती हैं।

       *गऊ के दूध और दही का खूब सेवन करे।*

परहेज -गर्म ओर खट्टी वस्तु न ले। 

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नोट

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अगर आप online मंगवाते है तो हम आप को 2 दवाएं का पैक देगे।

      *जिस से बहुत फायदा होता है।*

     दोनों चूर्ण कब औऱ कैसे उपयोग करे

             *कायाकल्प चूर्ण*

कायाकल्प चूर्ण कैसे और कब उपयोग करे-

मासिक धर्म से 15 दिन पहले कायाकल्प चूर्ण सुबह खाली पेट औऱ रात को सोते समय गर्म पानी से इस्तेमाल करे।

कायाकल्प चूर्ण क्यों इस्तेमाल करे-

कायाकल्प चूर्ण मासिक धर्म की हर समस्या सही करेगा।

जैसे :-

बंद ट्यूब, गर्भाशय की सफाई, कमजोरी औऱ गर्भशय की गांठ आदि को ठीक करेगे।

★★

     *गर्भधारण कल्पचुर्ण कैसे उपयोग करे*

*मासिक धर्म बंद होने के 1 दिन बाद कोसे गर्म दूध से सुबह खाने के 30 मिनट बाद और रात को भी ऐसे ही उपयोग करे।*

*ध्यान रहे :-खाने में  दही का उपयोग जरूर करे।*

कोई भी गर्म वस्तु इन दिनों उपयोग न करे।*

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शरीर में दर्द क्यों होते हैं ??

 शरीर में दर्द क्यों होते है??
*वातदर्द रोगों की संपूर्ण जानकारी ,मात्र जानने से दर्दो से आप दर्दो से पाएंगे मुक्ति

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*सभी वातदर्द रोगों को जड़ से खत्म करता है*
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वात क्या है ??

          वात, पित्त और कफ तीनों में से वात सबसे प्रमुख होता है क्योंकि पित्त और कफ भी वात के साथ सक्रिय होते हैं।

शरीर में वायु का प्रमुख स्थान पक्वाशय में होता है और वायु का शरीर में फैल जाना ही वात रोग कहलाता है।

हमारे शरीर में वात रोग 5 भागों में हो सकता है जो 5 नामों से जाना जाता है।

वात के पांच भाग निम्नलिखित हैं-

1.उदान वायु    – यह कण्ठ में होती है।
2.अपान वायु   – यह बड़ी आंत से मलाशय तक होती है।
3.प्राण वायु     –  यह हृदय या इससे ऊपरी भाग में होती है।
4.व्यान वायु        – यह पूरे शरीर में होती है।5.समान वायु       – यह आमाशय और बड़ी आंत में होती है।

वात रोग बहुत प्रकार की होती है।

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जैसे
1.आमवात :
आमवात के रोग में रोगी को बुखार होना शुरू हो जाता है तथा इसके साथ-साथ उसके जोड़ों में दर्द तथा सूजन भी हो जाती है।

इस रोग से पीड़ित रोगियों की हडि्डयों के जोड़ों में पानी भर जाता है। जब रोगी व्यक्ति सुबह के समय में उठता है तो उसके हाथ-पैरों में अकड़न महसूस होती है और जोड़ों में तेज दर्द होने लगता है। जोड़ों के टेढ़े-मेढ़े होने से रोगी के शरीर के अंगों की आकृति बिगड़ जाती है।

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2.सन्धिवात रोग
         जब आंतों में दूषित द्रव्य जमा हो जाता है तो शरीर की हडि्डयों के जोड़ों में दर्द तथा अकड़न होने लगती है।

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3.यूरिक एसिड वात रोग
गाउट रोग बहुत अधिक कष्टदायक होता है। यह रोग रक्त के यूरिक एसिड में वृद्धि होकर जोड़ों में जमा होने के कारण होता है। शरीर में यूरिया प्रोटीन से उत्पन्न होता है, लेकिन किसी कारण से जब यूरिया शरीर के अंदर जल नहीं पाता है तो वह जोड़ों में जमा होने लगता है और बाद में यह पथरी रोग का कारण बन जाता है।

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मांसपेशियों में वातदर्द :-

         इस रोग के कारण रोगी की गर्दन, कमर, आंख के पास की मांस-पेशियां, हृदय, बगल तथा शरीर के अन्य भागों की मांसपेशियां प्रभावित होती हैं जिसके कारण रोगी के शरीर के इन भागों में दर्द होने लगता है। जब इन भागों को दबाया जाता है तो इन भागों में तेज दर्द होने लगता है।

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4.गठिया

        इस रोग के कारण हडि्डयों को जोड़ने वाली तथा जोड़ों को ढकने वाली लचीली हडि्डयां घिस जाती हैं तथा हडि्डयों के पास से ही एक नई हड्डी निकलनी शुरू हो जाती है। जांघों और घुटनों के जोड़ों पर इस रोग का बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है और जिसके कारण इन भागों में बहुत तेज दर्द होता है।

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अब जाने
           *वात रोग के लक्षण*

वात रोग से पीड़ित रोगी के शरीर में खुश्की तथा रूखापन होने लगता है।

वात रोग से पीड़ित रोगी के शरीर की त्वचा का रंग मैला सा होने लगता है।

रोगी व्यक्ति को अपने शरीर में जकड़न तथा दर्द महसूस होता है।वात रोग से पीड़ित रोगी के सिर में भारीपन होने लगता है तथा उसके सिर में दर्द होने लगता है।

रोगी व्यक्ति का पेट फूलने लगता है तथा उसका पेट भारी-भारी सा लगने लगता है।रोगी व्यक्ति के शरीर में दर्द रहता है।

वात रोग से पीड़ित रोगी के जोड़ों में दर्द होने लगता है।रोगी व्यक्ति का मुंह सूखने लगता है।

वात रोग से पीड़ित रोगी को डकारें या हिचकी आने लगती है।

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अब जाने
वात रोग होने का कारण :-


वात रोग होने का सबसे प्रमुख कारण पक्वाशय, आमाशय तथा मलाशय में वायु का भर जाना है।

भोजन करने के बाद भोजन के ठीक तरह से न पचने के कारण भी वात रोग हो सकता है।

जब अपच के कारण अजीर्ण रोग हो जाता है और अजीर्ण के कारण कब्ज होता है तथा इन सबके कारण गैस बनती है तो वात रोग पैदा हो जाता है।

पेट में गैस बनना वात रोग होने का कारण होता है।जिन व्यक्तियों को अधिक कब्ज की शिकायत होती है उन व्यक्तियों को वात रोग अधिक होता है।

जिन व्यक्तियों के खान-पान का तरीका गलत तथा सही समय पर नहीं होता है उन व्यक्तियों को वात रोग हो जाता है।

ठीक समय पर शौच तथा मूत्र त्याग न करने के कारण भी वात रोग हो सकता है।

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अब जाने

वात रोग होने पर प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार :-

वात रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को अपने हडि्डयों के जोड़ में रक्त के संचालन को बढ़ाना चाहिए। 
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*क्या करे इस के लिए*

वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को लगभग 4 दिनों तक फलों का रस (मौसमी, अंगूर, संतरा, नीबू) पीना चाहिए।

इसके साथ-साथ रोगी को दिन में कम से कम 4 बार 1 चम्मच शहद चाटना चाहिए।

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इसके बाद रोगी को कुछ दिनों तक फलों को खाना चाहिए।

कैल्शियम तथा फास्फोरस की कमी के कारण रोगी की हडि्डयां कमजोर हो जाती हैं इसलिए रोगी को भोजन में पालक, दूध, टमाटर तथा गाजर का अधिक उपयोग करना चाहिए।

पर यूरिक एसिड रोग  में इनका सेवन न करे।
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कच्चा लहसुन वात रोग को ठीक करने में रामबाण औषधि का काम करती है इसलिए वात रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन कच्चे लहसुन की 4-5 कलियां खानी चाहिए।

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वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को भोजन में प्रतिदिन चोकर युक्त रोटी, अंकुरित हरे मूंग तथा सलाद का अधिक उपयोग करना चाहिए।

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रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम आधा चम्मच मेथीदाना तथा थोड़ी सी अजवायन का सेवन करना चाहिए।

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इनका सेवन करने से यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी को प्रतिदिन सुबह तथा शाम के समय में खुली हवा में गहरी सांस लेनी चाहिए। इससे रोगी को अधिक आक्सीजन मिलती है और उसका रोग ठीक होने लगता है।

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शरीर पर प्रतिदिन तिल के तेलों से मालिश करने से वात रोग ठीक होने लगता है।रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह के समय में धूप में बैठकर शरीर की मालिश करनी चाहिए। धूप वात रोग से पीड़ित रोगियों के लिए बहुत ही लाभदायक होती है।

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वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए तिल के तेल में कम से कम 4-5 लहसुन तथा थोड़ी सी अजवाइन डालकर गर्म करना चाहिए तथा इसके बाद इसे ठंडा करके छान कर इस तेल से प्रतिदिन हडि्डयों के जोड़ पर मालिश करें। इससे वात रोग जल्दी ही ठीक हो जायेगा।

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*अगर आप वातरोग के आधीन आ गए हैं तो 2 से  5 महीने तक सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण जरूर इस्तेमाल करे।*

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डाक खर्च साधारण जोड़ा हुआ है।
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सिद्ध एलोवेरा आयुर्वेदिक शेंपू

*एलोवेरा आयुर्वेदिक शेंपू*

बालों का झड़ना, खुश्क बाल, दो मुँहे बाल,

बालों के विकास का रुकना, रूसी, त्वचा की इंफेक्शन, बालों की चमक मर जाना औऱ बालों की कमजोरी को करे जड़ से खत्म।

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   *हम देगे जानकारी आप करे अविष्कार*

एलोवेरा व शहद दोनो ही बालों को नमी देते हैं। बालों से नमी निकालने के अलावा वे जड़ों से भी तेल हटाते हैं।

           *कैसे बनायें एलोवेरा शेंपू*
               *सामग्री देखे*

एलोवेरा रस  (जेल ) 100 ml
एक कोई भी शेंपू     20 ml
सेब का सिरका        50 ml
शहद                     50 ml
अरंडी तेल              50 ml
कोई भी खुसबू तेल   30 ml

विधि: 
एलोवीरा जेल और सामग्री को अच्छे से मिलाकर 2 से 4 बार लगा कर बालो को अच्छे से मलते रहे।
       *हफ्ते में 2 बार बालों को इस धोएं*

लाभः 
1.एलोवीरा एक तरह का कंडीशनर है. इसके इस्तेमाल से बाल रेशम से मुलायम बनते हैं और चमकीले नज़र आते हैं.


2. बाल झड़ेंगे नही न ही दो मुहे रहेंगे।


3.सिर की त्वचा की खुश्की, इंफेक्शन,रूसी और बालों की जड़ का दर्द में  हैरानीजनक लाभ होगा।


4. बाल लंबे और घने होने शुरू हो जाएंगे।

5.सिर में हल्कापन महसूस करेगे।


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सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण

*सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण*
*शुगर रोग की देशी दवा*
*सुलभ और सस्ती औषधि*
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*शुगर की आयुर्वेदिक दवा बनाने के लिए*
*चूर्ण बनाने की विधि*
*त्रिफला चूर्ण-400 ग्राम*
*इन्द्रजो कडवा या*
*इन्द्रजो तल्ख़ 250 ग्राम*
*इंद्राण अजमायन-250 ग्राम*
*मेथी का दना – 200 ग्राम*
*कलौंजी 200 ग्राम*
*तेज पत्ता ——- 200 ग्राम*
*जामुन की गुठली -200 ग्राम*
*बेलपत्र के पत्ते – 200 ग्राम*
*गुडमार -130 ग्राम*
*नीम की गुठली 130 ग्राम*
*तुलसी की पत्तियाँ- 130 ग्राम*
*सदाबहार की पत्तियाँ -130 ग्राम*
*वंशलोचन -130 ग्राम*
*जायफल -50 ग्राम*
*जावित्री -50 ग्राम*
*चार गोंद -50 ग्राम*
*छोटी इलायची -20 ग्राम*
*कालीमिर्च- 50*
*एलोवेरा रस 500 ग्राम*

*सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर सांय में
सुखाए।*
*सेवन विधि – सुबह -शाम 3 से 5 ग्राम पानी से लेते रहे।*
***
*खानपान में करें परहेज*

-*अधिक चावल खानें से बचें। चीनी, आलू का सेवन कम करें। मीठे फलों से दूर रहें। मिठाई से बचें।*

*गुड़, आम, इमली की खटाई, आलू, अरबी, बैंगन, शक्कर, सैक्रिन, सभी मीठे फ़ल, गाजर, कद्दू (पेठा), गेहूं, चावल, तले हुए भोजन, उड़द, मसूर दाल, मांस- मछली, अण्डा-मुर्गा, सभी मादक द्र्व्य, चाय, काफ़ी, तेज मिर्च,अश्लिल-उत्तेजक साहित्य, टीवी, फ़िल्में देखना,अधिक रात्रि तक जागना,औरत प्र्संग आदि से मधुमेही को अवश्य बचना चाहिए । अन्यथा लाभ नहीं होगा।*
-***
*मधुमेह के रोगी इसका भी जरुर करें सेवन*

*जौ का आटा 6 किलो में चने का बेसन 2 किलो मिला कर इसकी रोटी खायें।*

*यह चूर्ण शुगर की रामबाण दवाई का काम करेगा| सुबह खाली पेट एक चम्मच चूर्ण गर्म पानी के साथ लें और ध्यान रखें कि नाश्ता करने के कम से कम एक घंटा पहले आपको यह चूर्ण लेना है| उसी प्रकार शाम को खाना खाने के एक घंटा पहले फिर से इस चूर्ण का एक चम्मच गर्म पानी के साथ लें।*

*यह दवा शुगर के रोग में दैवीय औषधि का काम करती है|*
***

*यह डायबिटीज की दवा आप ऐसे इस्तेमाल करेगे तो हैरानीजनक लाभ होगा।*

करेले के जूस – से

करेला शुगर के मरीजों को विशेष लाभ पहुंचाता है| सुबह खाली पेट एक गिलास करेले का जूस के साथ 1चमच्च मधुमेह चुर्ण सेवन करे।
और करेले की सब्जी का भी सेवन करें| करेले का जूस कड़वा लग रहा हो तो उसमें थोड़ी मात्रा में पानी मिला लीजिये|
***
तुलसी के 5 पत्ते – मधुमेह कल्पचुर्ण के साथ मे सेवन
1चमच्च चुर्ण पानी ले फिर 5 पत्ते धीरे चबाएं।

तुलसी अनेक रोगों में काम आने वाला पौधा है| तुलसी के 5 पत्ते रोजाना सुबह खाली पेट चबाइए| इससे शुगर का बढ़ता लेवल खुद कम हो जायेगा| तुलसी में एंटी-ऑक्सीडेंट तत्व होते हैं जो आपके पेट की क्रियाओं को सुगम बनाते हैं|
**
मैथी के दाने साथ – सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण सेवन करे।रात को एक चम्मच मैथी के दाने एक गिलास पानी में डालकर रख दें|

सुबह उठकर इस पानी को छान लें और खाली पेट इस पानी से सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण सेवन करे।
मैथी के दाने आप पानी पीने के बाद चबा जाइये| मैथी बढ़ती शुगर को तुंरत कंट्रोल करती है|
**&

ग्रीन टी – के साथ सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण सेवन करे।
कैसे बनाए ग्रीन टी:-

6 ग्लास पानी लेकर आग पर रख दे।
उसमे नीचे लिखी सामग्री डाले

★ गिलोय हरी 100 ग्राम
★मेथी दाना 1चमच्च
★चरायता 1 चमच्च
★अजवाइन 1चमच्च
★नीम पत्ती 10 पीस
★तुलसी पत्ते 50 पीस
★पपीता पत्ता 1पीस

सभी सामग्री को तब तक उबाले जब तक आधा न रह जाए। 3 ग्लास बाकी बची टी को:-
1चमच्च मधुमेह कल्पचुर्ण को
1 ग्लास सुबह
1 दुपहरी
1 शाम को ले।

आम की पत्तियां – के पानी से सेवन।

आम सबका पसंदीदा फल होता है लेकिन दुर्भग्यवश शुगर के रोगियों को आम का सेवन करने से बहुत नुकसान होता है लेकिन आम की पत्तियां शुगर के मर्ज में बहुत लाभ पहुंचाती हैं| आम की पत्तियों को रात को पानी में भिगोकर डाल दें| सुबह खाली पेट इस पानी के साथ सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण सेवन करें इससे शुगर कण्ट्रोल होती है|
★★★

एलोवेरा का जूस –के साथ सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण का सेवन:-

एलोवेरा के चमत्कारी गुणों के बारे में तो आप सब जानते ही होंगे| रोजाना सुबह एक गिलास एलोवेरा का जूस के साथ सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण सेवन करने से शुगर का लेवल कण्ट्रोल होता है और यह लम्बे समय तक अच्छे परिणाम भी देता है|
नोट:-एलोवेरा जूस में थोड़ा करेले का जूस मिलाकर भी ले सकते हैं|

ज्वारे खायें – यह मधुमेह में बहुत लाभदायक साबित हुआ है।

“ज्वारे” हो सकता है आपने यह नाम पहले ना सुना हो लेकिन ज्वारे को डायबिटीज की सबसे बेहतरीन औषधि माना जाता है| गेहूं के बीजों से जब छोटी पत्तियां निकलना शुरू होती हैं तो इसे “ज्वारे” कहा जाता है| घर पर ही मिटटी के बर्तन में कुछ गेहूं के बीज बो दें| इसमें समय से पानी वगैहरा डालते रहें| कुछ समय बाद जब गेहूं की पत्तिया निकलना शुरू हों तो इन पत्तियों को किसी कैंची से काट लें और इनका सेवन करें| शुगर में यह रामबाण दवा का काम करती है|

ध्यान रखें कि पत्तियों को उखाड़े नहीं क्यूंकि कुछ समय बाद फिर से पत्तियां आनी शुरू हो जाएँगी तब आप फिर से काटकर खाएं|
★★★
नित्य व्यायाम – अगर कर सको तो बहुत फायदेमंद साबित होगा।

मधुमेह की बीमारी ज्यादातर उन लोगों को होती है जो शारीरिक रूप से बिल्कुल निष्क्रिय रहते हैं| इसलिए शुगर के रोग में रोजाना सुबह व्यायाम बहुत जरुरी है| सुबह टहलने जरूर जाएँ और हो सके तो 10 से 15 मिनट की दौड़ भी लगाएं|

आपको साफ़-साफ बता दूँ कि कोई भी दवा आपको उतना लाभ नहीं पहुँचाएगी जितना सुबह का घूमना आपको लाभ पहुँचायेगा| इसलिए गर्मी, जाड़ा, बारिश कुछ भी हो लेकिन सुबह 30 मिनट टहलना ना भूलें|

योगा करें –

डायबिटीज के रोगियों के लिए कपालभाति सबसे लाभकारी योगा है।

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मंदाग्नि के 103 रोग

*मंदाग्नि के 103 रोग*


मंदाग्नि से होते हैं 103 हानिकारक रोग
*पेट के हाजमे की अग्नि जब मध्म
पड़ जाती है तो अनेकों रोगों का शरीर पर हमला होने लग जाता है।*
*सिद्ध आयुर्वेदिक आप को कर रहा है जागृत*
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*जानकारी नीचे लिंकः में दी गई है*
*मंदाग्नि रोगों की संपूर्ण जानकारी*
आयुर्वेद में बताया गया है कि मंदाग्नि (मन्द अगनी) से 103 प्रकार के रोग होते है, जिसमे पहले स्थान पर एसिडिटी और एक सौ तीन स्थान पर कैंसर को रखा गया है।

ये सूची देखे मंदाग्नि के 103
1. हाइपर एसिडिटी
2. जल्दी-जल्दी भूख लगना
3. भोजन के 4 घंटे बाद या खाली पेट जलन
4. अत्यधिक प्यास
5. हर समय मुँह सुखना
6. मसूढ़ो में संवेदनशीलता
7. लार का खट्टा होना
8. दाँतो में ढीलापन
9. होठो के किनारे फटना
10. दाँतो में ठंडा गर्म लगना
11. दाँतो का फटना या टुकड़ो में निकलना
12. दाँतो की नसों में दर्द
13. गले या टॉन्सिल का बार बार संक्रमण
14. अम्ल का मुँह में आना
15. अल्सर
16. खट्टी डकार
17. उदर के ऊपरी भाग में दर्द
18. बहुत ज्यादा गर्मी लगना या जलन होना
19. थकान, हाथ पैरो में भारीपन, मानसिक शक्ति का ह्रास
20. शरीर छूने से बुखार की अनुभूति
21. प्रसन्नता व उत्साह की कमी
22. अवसादित होने की प्रवृति
23. बिना कारण घबराहट, व्याकुलता, तेज शोरगुल में चिड़चिड़ाहट
24. अत्यधिक रक्तहीन चेहरा
25. सिरदर्द
26. आसानी से बातो बातो में आँसू आजाना
27. आँखों में सूजन, लाली, दर्द, जलन, गड़न
28. पलको एवं कोर्निया में प्रदाह
29. बालो का घुँघराले होना
30. नाख़ून पतले होना, जल्दी टूट जाना
31. रूखी त्वचा
32. बाल घुँघराले, बेजान, झड़ते
33. शरीर पर पसीने से खुजली
34. पित्ती उछलना
35. पिण्डलियों में बायटे आना, ऐंठन
36. झाईयां
37. कान में दर्द
38. आवाज़ में बदलाव
39. बैचैनी
40. कब्ज
41. ऑस्टियो ऑर्थोरिटिस
42. यूरिक एसिड बढ़ना
43. CRP बढ़ना
44. मासपेशियो में ऐंठन
45. पैर के बाहरी भाग में दर्द
46. अमाशय या अन्न नली में दर्द या घाव
47. बवासीर
48. भगन्दर
49. फिशर
50. गैस्ट्रिक
(वायु बनकर शरीर में घूमने से)
51. पेट में जलन
52. गले में जलन
53. छाती में जलन जैसे heart attack हो
54. सिर दर्द या भारीपन
55. चक्कर
56. कान में घंटियाँ बजना
57. हाई बी पी
58. सिर में भ्रम की स्थिति, समझ न आना
59. बालो का झड़ना
60. बालो का सफ़ेद होना या पकना
61. पीठ दर्द
62. धड़कन बढ़ना
63. पायरिया
64. मुँह में दुर्गन्ध
65. भूख न लगना
66. प्यास न लगना
67. खट्टी / कच्ची डकार
68. मितली होना
69. मल में गंध
70. पेट में भारीपन
71. अफारा
72. शुगर
73. ढीले मसूड़े
74. मसूढ़ो के किनारे सफ़ेद या हरी परत
75. मल थोड़ा पतला, लेकिन मुश्किल से निकले
76. उल्टी होने, करने के बाद हल्का महसूस होना
77. अनिद्रा
78. कोलेस्ट्रॉल बढ़ना
79. बॉडी का फूल जाना मोटा हो जाना
80. पैरो में चलने पर दर्द
81. मसूढ़ो से खून आना
(कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से होने वाले रोग)
82. रक्त वाहिनियों में अवरोध
83. हृदयाघात
84. रक्त वाहिनियों का का संकरा होना
85. धमनियों में थक्के जमना
86. अत्यधिक बलगम
87. साँस लेने में कठिनाई
88. सीने में भारीपन
89. धमनियों में कड़कपन
90. किडनी से जुडी हुई बीमारियाँ
91. मस्तिष्क में ब्लड सप्लाई अवरोध होने से भूलने की समस्या
92. शरीर में जगह जगह गाँठे
93. हर्निया
94. गर्भाशय का स्थान से नीचे लटक जाना
95. हाथ पैर पतले होना
96. आंतरिक या बाहरी रक्त स्त्राव
97. आँखों का कमजोर होना
98. आँखों के सामने कुछ उड़ता प्रतीत होना
99. मुँह में कफ़ ज्यादा आना
100. पसीने में बदबू
101. मल मूत्र ज्यादा होना, मल लेसदार होना
102. हाथ पैरो में फड़कन
103. शरीर में होने वाला कैंसर
*103 रोगों को सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण जड़ से करता है खत्म*
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सिद्ध त्वचा रोग नाशक तेल

      *सिद्ध त्वचा रोग नाशक तेल*

*त्वचा के सभी रोगों को करे जड़ से खत्म*

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*शुगर के होने वाले जख्म को आराम करता है*
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नुस्खा
गन्धक शुद       200 ग्राम
कलौंजी तेल      100 ml
पीली सरसों तेल 100 ml
नीम तेल            100ml
अरंडी तेल          100 ml
करंज तेल            50 ml
केलेतेल               50 ml
मदार का दूध       100 ml

सभी सामग्री को 200 ग्राम एलोवेरा जेल में भावना दे।

लगाने की विधि
दाद, खाज, खुजली ,सिरासिस, एक्जिमा, बवासीर पर उंगली से हल्के से मालिश करे।

Not – साबन का उपयोग बिल्कुल बंद कर दे।
★★
फ़ायदे-
★चमड़ी के किसी भी प्रकार के रोगो को जड़ से खत्म कर चमड़ी को नॉर्मल कर देता है।
★ बवासीर के मस्से पर लगाने से मस्सा
        बेजान  हो कर गिर जाता है।
★ सुगर के रोग होने वाले जख्म को
       साफ करता है।
★ जिदी चमड़ी के इंफेक्शन को जड़ से खत्म
    कर देता है।
★दाद,खाज, खुजली  को तुरंत आराम
   कर देता है।

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आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का संपूर्ण ज्ञान

आयुर्वेदिक नुस्खे, जड़ी बूटी, बच्चों के रोग, नारी रोग, गुप्त रोग, वात्त, पित्त, कफ़ रोग की संपूर्ण जानकारी देता है 

      *जो विश्वास और भरोसे का एक नाम है*

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या कोई रोग है तो सिद्ध आयुर्वेदिक लिंकः
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सिद्ध अम्लपित्त नाशक कल्पचुर्ण

     *सिद्ध अम्लपित्त नाशक कल्पचुर्ण*
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दस्त, पेट में जलन, पतले दस्त का आना, मल त्यागने में गुदा प्रदेश में जलन महसूस हो तो कारगर है *सिद्ध अम्लपित्त नाशक कल्पचुर्ण*

आयुर्वेद में एसिडिटी को अम्ल पित्त कहते हैं। इसमें खट्टे डकार आ सकते हैं, छाती में जलन महसूस हो सकती है, उल्टी की प्रवृति दिखती है

क्योंकि आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, बदलती जीवनशैली और खान-पान की आदतें हमें कई रोगों की तरफ धकेल रही हैं। हमारी दिनचर्या आरामदेह हो गई है और खाने में स्वस्थ खाने की जगह पिज़्ज़ा, बर्गर और सोडा कोल्ड ड्रिंक्स ने ले ली है।

एसिड रिफ्लक्स भी ऐसा ही एक रोग है, जो हमारे खान-पान और रहन-सहन की गलत आदतों के कारण होता है। पेट के अंदर गई हुई चीज़ों का वापस खाने की नली  में आना एसिड रिफ्लक्स (acid reflux) कहलाता है।

कभी- कभार, बहुत थोड़ी मात्रा में पेट की चीज़ों का खाने की नली में वापस आना आम बात है, लेकिन ऐसा बार-बार और अधिक मात्रा में होना आपके लिए हानिकारक हो सकता है।

●इसे हार्टबर्न (heartburn),
●एसिड इनडाइजेशन (acid indigestion),
●गेस्ट्रो इसोफेजियल रिफ्लक्स डिसीज (gastrooesophageal reflux disease/GERD/GORD)
या
●पाईरोसिस (pyrosis) के नाम से भी जाना जाता है।

       क्या हैं एसिड रिफ्लक्स के मुख्य कारण ?

*अनियमित और असंतुलित आहार
*निष्क्रिय जीवनशैली (Sedentary Lifestyle)
*मोटापा (Obesity)
*हर्निया (hiatal hernia)
*स्मोकिंग (Smoking)
*नमक और नमक युक्त खाने का अत्यधिक प्रयोग
*गर्भावस्था (Pregnancy)
*बुढ़ापा
*अत्यधिक चाय और कॉफ़ी का सेवन
*अत्यधिक मात्रा में और भूख न लगने पर भी खाना
*कुछ दवाओं जैसे एंटी-डिप्रेसेंट, पेन किलर्स, एंटी-अलर्जिक या एंटी-बायोटिक के साइड इफेक्ट्स फलस्वरुप एसिड रिफ्लक्स

●●●

  क्या हैं एसिड रिफ्लक्स के लक्षण ?
(What Are The Symptoms Of Acid Reflux Or GERD?)

*छाती के बीच के हिस्से में जलन
*खाने की चीज़ों का पेट से वापस अन्न नली में आना
*सूखी खांसी और आवाज का बैठ जाना
*जी मचलाना या उल्टी आना
*बिना किसी कारण के वजन कम होना
*बेचैनी या घबराहट होना
*खट्टी डकार आना
*पेट भरा हुआ लगना

        *क्या सिद्ध अम्लपित्त कल्पचुर्ण*

त्रिफला                ~ 20 ग्राम
बेल चुर्ण               ~  20 ग्राम
ब्रह्मी बूटी              ~ 20 ग्राम
संखपुष्पी               ~10 ग्राम
हिंग                      ~  10 ग्राम
कालीमिर्च             ~  10 ग्राम
अजवायन             ~  10 ग्राम
दालचीनी             ~ 10 ग्राम
छोटी हरेड             ~  10 ग्राम
सतपुष्पा                ~10 ग्राम
सैंधा नमक            ~   10 ग्राम
सौंफ भुनी             ~   10 ग्राम
मीठा सोडा             ~100 ग्राम  मिलाए

सभी चुर्ण को 100 ग्राम एलोवेरा रस भावना दे।
●●●
सेवन विधि

जब सुख जाए तो पानी से खाने के बाद एक एक चम्मच लेते रहे।

              *साथ यह जरूर करे*

*सबसे पहले तो खाने के बाद गुड़ जरुर खाएं। ऐंसा करने से एसिड की समस्या नही होती।

*खाने में भुने हुए जीरे को शामिल कर लें।

*खाने के बाद रोज 4 से 5 बादाम खायें।

*इलाइची भी पाचन में काफी मदद करती है, और आपको एसिड रिफ्लक्स से भी आराम दिलाने में मदद करती है।

* पुदीना, अदरक, आंवला और तुलसी के सेवन से भी आराम मिलता है।

*ठंडा दूध एसिड को पेट तक ही रखने में मदद करेगा।

*यदि आप स्मोकिंग करते हैं, तो स्मोकिंग करना बंद कर दें।

*मुलेठी चूर्ण (Licorice Powder) का काढ़ा आपकी काफी मदद कर सकता है।

*गरिष्ठ भोजन से दूर रहें।

*बहुत ज्यादा टाइट कपड़े ना पहनें।

*एक्सरसाइज करें।

*अल्कोहल से दूर रहें।

*तली हुई चीज़ों से दूरी बनाकर रखें।

■■
      अम्लपित्त के बारे कुछ जरूरी जानकारी

अधोग स्थिति: यह स्थिति छोटी अमाशय और बड़ी अमाशय के बीच होती है। इसमें दस्त, पेट में जलन, पतले दस्त का आना, मल त्यागने में गुदा प्रदेश में जलन महसूस होता है। इसमें पित्त और वायु बढ़ जाते हैं। ऐसा बरसात में पेय पदार्थ का ज्यादा सेवन करने से भी हो सकता है या खट्टे पदार्थ का ज्यादा सेवन भी कारण बन सकता है।

■■

क्या करें: ऐसे लोगों को उड़द की दाल, बैंगन, तिल के तेल से बनी चीजें, गरिष्ठ भोजन, मदिरा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

 अगर इस समस्या से परेशान हैं तो बेल का शरबत, नारियल पानी, चिरायता आदि का इस्तेमाल करें, पूरा लाभ होगा।

■■

उध्र्वग-अधोग स्थिति: इसमें दोनों के मिले-जुले लक्षण होते हैं। इसमें मल का रंग काला होता है। जो लोग खाना खाने के काफी देर बाद सोते हैं, उनका पित्त विकृत हो जाता है।

■■

क्या करें: इसमें परवल के व्यंजन, कुटकी, चिरायता का काढ़ा, गिलोय के रस का सेवन करना चाहिए। 

उन्हें गुलकंद, सेब और बेल का मुरब्बा खाना चाहिए। ऐसे लोगों के लिए अदरक और सौंठ, कागजी नींबू, नारियल का पानी लाभकारी है।

■■

 दफ्तर में लगातार बैठकर काम करते हैं तो

जो लोग लगातार बैठकर काम करते हैं उनके पेट और छाती में जलन पैदा होती है। 

इससे शरीर में भारीपन, नींद, चकत्ते आना आदि की समस्या होती है। इससे शुरुआत में खांसी होती है। इसके बाद रोग शुरू होता है। 

इसके रोगियों को थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहना चाहिए। नारियल पानी बेहतर पेय है। उनके लिए पेठे की मिठाई अमृततुल्य है। 

कभी-कभी गुलकंद, मुनक्का का भी सेवन कर लेना चाहिए। इन्हें टमाटर, चावल, चाय, सिगरेट आदि से बचना चाहिए। खाने में उड़द की दाल, राजमा आदि चावल के साथ न लें। राजमा का सेवन रोटी के साथ कर सकते हैं

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                     ■■■

                    निवेदन

         पहले whats पर जानकारी ले।

  जरूरत होने पर call के लिए time देगे।

सिद्ध स्वाइन फ्लू नाशक कल्पचुर्ण

सिद्ध आयुर्वेदिक
    
     *सिद्ध स्वाइन फ्लू नाशक काढ़ा*
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         *स्वाइन फ्लू के लक्षण*

स्वाइन फ्लू की ऊष्मायन अवधि एक से चार दिनों (लक्षण प्रकट होने वाला समय) की होती हैं। इसके लक्षण इन्फ्लूएंजा (फ्लू) के समान हैं। इसके लक्षणों में शामिल है :

बुख़ार●सिरदर्द●नाक बहना●गले में खराश●खांसी की तकलीफ या सांस फूलना●भूख में कमी●दस्त या उल्टी

●गिलोय- लगभग 50 इंच लम्बा तना कुटा हुआ
●मुनक्का    -10 नग
●छुहारे        -5 नग
●तुलसी।      – 11 पत्ते
●चिरायता      –3 ग्राम
●दालचीनी।     -3 ग्राम
●सोंठ             –2 ग्राम
●हल्दी            -2 ग्राम
●छोटी पीपल   – 3 नग कुटी
●लौंग               – 3 नग कुटी
●बड़ी इलायची – एक कुटी हुई
●गुड देसी स्वादानुसार

सब सामग्री कूटकर 6 ग्लास पानी मे उबाले।
3 ग्लास बाकी रहने पर दिन 4 बार गर्म चाय की भांति सेवन करे।
●3 पूर्ण दिन आराम करें।
●घर से बाहर न निकले।
            ◆◆◆
नोट करें।
इसको पीने के बाद ओढ़ कर लेट रहें शरीर में ठंडी हवा न लगने दें घंटे भर और कुछ खाना पीना नहीं. ।

कितना भी कठिन जकड़ा जुकाम फ्लू हो सब ठीक हो जाता है. स्वाइन फ्लू में भी फायदा होगा.
◆◆◆

              *गिलोय से बनी*
            *स्वाइन फ्लू की दवा*
      *स्वाइन फ्लू नाशक कल्पचुर्ण *
यह दवा स्वाइन फ्लू,टाइफाइड, डेंगू, चिकन गुनिया,दिमागी बुखार, वायरल फीवर और मलेरिया।किसी भी प्रकार का  बुखार और हैपेटाटस ए बी सी  हो या डेंगू बुखार हो….
              
            ★यह दवा रामबाण है★
★ यह समान पन्सारी से सुलभ मिल जाता हैं★
         ★कोरियर से मँगवा सकते हैं★
*और भी फ़ायदे है।*
     ★3 ग्राम दवा 5000 डेंगू cell{ wbc} निर्मित करती है★
★*बढ़े हुए wbc को समानता देती हैं*

       *स्वाइन फ्लू नाशक कल्पचुर्ण*

गिलोय चूर्ण 100 ग्राम
आंवला चूर्ण 100 ग्राम
छोटी हरड़ 100 ग्राम
सतावर      100 ग्राम
तुलसी पाचांग-100 ग्राम 
चरायता चूर्ण 100 ग्राम
अजमायण-100 ग्राम
मलॅठी-50 ग्राम
सौंठ-50 ग्राम
काली मिर्च -10 ग्राम

सभी  चूर्ण को मिलाकर 250 ग्राम गिलोय रस में भावना दे

दिन मे 4 बार  2-2 ग्राम  3-3 घंटे बाद लेते रहे । साथ मे दुध भी जरूर ले । साथ काढ़ा का सेवन करे।
स्वाईन  मे  लगातार 3 दिन दवा ले ।

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  सिद्ध बिल्वादी कल्पचुर्ण

सिद्ध आयुर्वेदिक

               *सिद्ध बिल्वादी कल्पचुर्ण*
                 *मल का बार बार आना*
               *एक बार पेट साफ न होता हो*

                      *यह चुर्ण रामबाण है*
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भाँग चूर्ण          100 gm
सौंठ                 100 gm
बेल गिरी          100 gm
मोचरस            100 gm
धायफूल           100 gm
धनियां बीज      200 gm
सौंफ                 400 gm
सभी को पीस कप्पड़छान कर 1   1 चम्मच लस्सी के साथ 2 या 3 बार प्रयोग करें

लाभ:- मल का बार बार आना और मरोड़ के साथ आना आँव का आना खून मिक्स हो कर आना इन सब रोगों में अच्छा लाभ देता है लेकिन परहेज़ के साथ परहेज़ में रोटी और दूध बन्द करें ।

कॉल 89680 42263
व्हस्ट्स 94178 62263

चेहरे की काली छाया हटाएँ

सिद्ध अयूर्वादिक

                 चेहरे की छाया( कालापन)
                   अयूर्वादिक इलाज

 कभी-कभी चेहरे में कालापन आ जाता है जिसे चेहरे की छाया कहते हैं। इसमें चेहरे की त्वचा में काले या भूरे रंग के दाग-धब्बे भी हो जाते हैं।

★★★
     चेहरे का कालापन दूर करने के लिए
                 अयूर्वादिक उपाय

गेंदे के फूल से हटाए झाई

झाई के उपाय में गेंदे के फूल और गेंदे के पत्ती ले और पीस ले| झाई हटाने के घरेलू उपाय  मे यह एक सफल उपाय है जिस के नियमित उपयोग से झाई ख़तम हो जाती है| रात को लेप करे और सवेरे धो दे|

★★

काले तिल और हल्दी से झाई हटाए

झाइयां की क्रीम  का इस्तेमाल करे उस के बदले फेस की झाइयों का इलाज जानिए कैसे करे ।

काले तिल और हल्दी के उपयोग से काले तिल को गुलाब जल के साथ मिला के पीस ले और फिर इस मे हल्दी और नींबू का रस मिला के झाई पर लगा के रखे ।

एक घंटे तक तक धोएं नही

इस मे एलो वेरा जूस मिलाया जाए तो और भी अच्छा काम करेगा|
★★

संतरे के छिलके से हटाए झाइया

संतरे के छिलके मे गुण है जो काले दाग धब्बे मिटा दे और त्वचा के मेलानोसाईट मे अधिक मेलेनिन के निर्माण पर रोक लगाए ।


इसलिए झाइयों का उपचार करने के लिए संतरे के छिलके को पीस ले और इस मे तुलसी का रस मिला के जहाँ पर झाई है वहाँ पर लगा के रात भर रहने दे।

बेकिंग सोडा, हाइड्रोजन पेरोक्साइड, अरीठा से झाई निकाले अरीठा को भिगो के पीस दे|

 इस मे बेकिंग सोडा मिलाए और फिर थोड़े बूँद हाइड्रोजन पेरोक्साइड डाल के झाइयों पर 10 मिनिट तक घिसे और फिर धो दे।

★★★
झाइया हटाने की क्रीम
आप चाहे तो बाजार मे मिल रही झाइयों की क्रीम  का इस्तेमाल करे।

झाइयों के लिए बेस्ट क्रीम आप को
ऑनलाइन ज़रूर मिल जाएँगे|

झाइयां मिटाने की झाइयों की बेस्ट क्रीम एक है Mediderma

 दूसरा है Vincere एंटी -मेलासमा क्रीम,

 तीसरा है मेला K वाइट मेलासमा ब्राइटनिंग क्रीम

 और Reviva Labs ka skin lightening और brown spot removing cream।

 यह झाइयां मिटाने की क्रीम (jhaiya mitane ki cream) का प्रयोग करे या तो घर पर ही बनाए|

★★


झाइयों के लिए बेस्ट क्रीम घर पर बनाने के लिए

 झाइयां के लिए क्रीम बनाने के लिए
 इस मे आप ले

मलाई     5 ग्राम (2 चमच्च)
हल्दी      1 ग्राम (आधा चम्मच)
शहद      1 ग्राम
 बादाम   4  (बादाम रात को भिगोकर रखना है।)

सभी को मिलाकर कर पेस्ट बनाएं।
तो फ्रेश एंटी स्पॉट क्रीम तैयार।

20 मिनट के लिए चेहरे में लगाए।
यह प्रयोग दिन में 2 बार करे।

21 दिन लगातार उपयोग करे।


झाई गायब होंगे और साथ मे त्वचा मे भी अनोखा निखार आएगा|

झाई मिट जाने के बाद भी यह प्रयोग करते रहे हफ्ते मे दो बार तो त्वचा की कोमलता और रंगत बरकरार रहेगी|

◆◆
नोट

बाजार की क्रीम में होते है हानिकारक एसिड

 ध्यान मे रखे की इन झाइयों की क्रीम मे होते है hydroquinone, kojic acid, retinoid जो की लंबे समय के उपयोग पर त्वचा के लिए हानिकारक है तो बेहतर है की घरेलू नुस्खे से झाइयां हटाए।

किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
Whats 94178 62263
Email-sidhayurveda@gmail.com

सिद्ध वातदर्द रोग कल्पचुर्ण

               ★साइटिका की दवा★

           *सिद्ध वातरोग कल्पचुर्ण*

कमर से संबंधित नसों में से अगर किसी एक में भी सूजन आ जाए तो पूरे पैर में असहनीय दर्द होने लगता है।

जिसे गृध्रसी या सायटिका (Sciatica) कहा जाता है।

साइटिका की बीमारी में होने वाला दर्द बहुत तकलीफ देह होता है।

यह दर्द कभी कभी हमारी रीढ़ की हड्डी के नीचे से पैर की एड़ी तक जाता है।

इस दर्द में सूजन की समस्या भी होने लगती है।

 जिसके कारण हमारे पैरो में बहुत ज़्यादा दर्द होने लगता है जिससे उठने बैठने में भी तकलीफे होने लगती है।

हम इस के लिए आप को रामबाण दवा बता रहे हैं।

आप करे आप को फायदा होगा।

           ★साइटिका दवा★

गिलोय चुर्ण       ~200 ग्राम
सहजन की जड़ ~100ग्राम
सतावर             ~100 ग्राम
आँवला चुर्ण     – 100 ग्राम
चरायता             ~ 50 ग्राम
अजवाइन         ~ 50 ग्राम
सौंठ भुनी         ~ 50 ग्राम
हींग  भुनी         ~ 10 ग्राम

सभी को मिलाकर चुर्ण बनाए।

दिन में 2 बार दूध के साथ सेवन करे।

दवा खाने के एक घंटे बाद ही ले।

कैंसर और पेट आदि के दौरान शरीर के बनी गांठ , फोड़ा आदि में यह दवा रामबाण है।

यह दवा साइटिका (पैरों में दर्द) , जोड़ों में दर्द , लकवा ,दमा,सूजन , पथरी आदि में लाभकारी है |

Online दवा मंगवा सकते हैं।
Whats 9417862263

गुर्दे की खराबी में रामबाण -सिद्ध कायाकल्प चुर्ण

सिद्ध अयूर्वादिक

             ★गुर्दे की खराबी में रामबाण★
                   ■कायाकल्प चुर्ण■

   गुर्दे खराब हो और डायलिसिस ट्रीटमेंट ले रहे तो 21 दिन कायाकल्प चुर्ण ले ।आप को डायलिसिस ट्रीटमेंट
की जरूतर नही पड़ेगी।

गुर्दे हमारे शरीर में खून साफ़ करने और शरीर से विषेले पदार्थ पेशाब के रास्ते बाहर निकालने का काम करते है, इससे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम करने में मदद मिलती है।

 इसके इलावा ब्लड प्रेशर, नया खून बनाना, पानी और कैल्शियम का नियंत्रण बनाए रखना भी किडनी के कुछ अन्य काम है। अगर किडनी में कोई इन्फेक्शन या फिर कोई बीमारी हो जाती है तो ये सही से काम नहीं कर पाती जिस कारण शरीर को कई दूसरे रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।

गुर्दे सही तरीके से काम नही कर रहे तो कायाकल्प चुर्ण आप के गुर्दे रोग में सहायता करेगा।

क्योंकि  कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था।

कायाकल्प चुर्ण के तीन मुख्य लक्ष्य
(Three main Objective of Kayakalpa churan)

कायाकल्प चुर्ण के वैसे तो कई फायदे हैं

लेकिन इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं-

*नशों की कमजोरी को दूर करता है।
• व्यक्ति की सुंदरता एंव स्वास्थ्य के साथ-साथ लंबे समय तक उन्हें जवानी को बरकरार बनाए रखना।
• नेचुरल एजिंग प्रोसेस को धीमा करना
• आयु बढ़ाना

●●
क्या है काया कल्प चूर्ण में 
आए जाने -:::

*त्रिफला -250 ग्रा
*इंद्राण से बनी 
हुई अजमायन-200 ग्राम
*गिलोय चूर्ण-100 ग्राम
बेल 200 ग्राम
*अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम
* ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम
*शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम
*कलौंजी -100 ग्राम
*आवला चूर्ण-100 ग्राम
*नसांदर -100 ग्राम
*अपामर्ग -50 ग्राम
* जटामांसी -50 ग्राम
* सत्यनाशी -50 ग्राम
* काला नमक -50 ग्राम
*सेंधानमक -50 ग्राम
*ऐलोवैरा रस -500 ग्राम

सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर 
सांय मे सुखाय ।

जब सुख जाए तब आप का काया कल्प 
चूर्ण बनकर तैयार हो गया है ।

सेवन विधि – गुर्दे के रोगी दिन में 3 बार पानी से ले।

★★

         किडनी को स्वस्थ रखने के लिए 
               ★आहार और परहेज★

नमक का सेवन जादा ना करे।

बाजार में मिलने वाला डब्बा बंद खाने से दूर रहे।

साफ पानी पिए और अगर पानी साफ ना मिले तो उबाल कर पिए।

किडनी के लिए डाइट हेल्थी होनी चाहिए और फास्ट फुड खाने से परहेज करे। अपने आहार में फलों और सब्जियों का सेवन अधिक करे।

अगर दस्त, उल्टी या बुखार हुआ हो तो शरीर में पानी की कमी ना हो, इसलिए प्रयाप्त मात्रा में पानी पिए।

धूम्रपान शराब और किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहे।
गुर्दे के रोग से बचने के लिए ज़रूरी है की आप किसी भी तरह के इन्फेक्शन से बचे रहे।

ज्यादा तनाव लेने से बचे और स्वस्थ जीवनशैली अपनाये।

शरीर का वजन जादा ना बढ़ने दे।

दर्द निवारक दवा का सेवन कम से कम करे, क्योंकि ये मेडिसिन किडनी को नुकसान करती है।

कायाकल्प चुर्ण online मंगवा सकते हैं।

किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  
contact करे
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Email-sidhayurveda1@gmail.com
http://www.ayurvedasidh.blogspot.com/

   सिद्ध नाड़ी दुर्बलता नाशक कल्पचुर्ण

सिद्ध अयूर्वादिक

      *नाड़ी दुर्बलता(Nervous Weakness)*

        सिद्ध नाड़ी दुर्बलता नाशक कल्पचुर्ण

Online  मगवाएँ- whats 94178 62263

                        (Online मंगवाए)
               *नाड़ी दुर्बलता कल्पचुर्ण*

अश्वगन्धा 100 ग्राम
गिलोय 100 ग्राम
सर्पगन्धा 100 ग्राम
ब्रह्मबुटी 100 ग्राम
संखपुष्पी 100 ग्राम
सतावर 100 ग्राम
बाहीपत्र 100 ग्राम
इसबगोल की भूसी 100 ग्राम
तालमिश्री 100 ग्राम

इन सबको कपड़छन चूर्ण बनाकर एक काँच की शीशी में भरकर रख लें।

सुबह-शाम दूध या पानी के साथ 10 ग्राम मात्रा लें।

5 ग्राम सुबह 
5 ग्राम शाम

21 दिन तक लेने के बाद ही मस्तिष्क एवं शरीर रक्त में संचार का अनुभव होगा।

★★★
                *नाड़ी दुर्बलतामें क्या होता*

जब किसी व्यक्ति नाड़ी दुर्बलता का रोग हो जाता है तो उसे नींद बहुत आती है तथा उसकी पाचनक्रिया खराब हो जाती है जिसके कारण उसको भूख नहीं लगती है तथा खाया हुआ खाना ठीक से पचता नहीं है।

रोगी का शरीर गिरा-गिरा सा रहता है तथा उसे यौन सम्बंधी अनियमिताएं भी हो जाती हैं। रोगी को भय, क्रोध, चिंता, ईर्ष्या, चिड़चिड़ापन, दुविधा में रहना आदि परेशानियां भी हो जाती हैं।

रोगी को कोई काम करने का मन नहीं करता है और उसका मन इधर-उधर भटकता रहता है। इस रोग से पीड़ित रोगी को कभी-कभी आत्महत्या करने का मन करता है तथा रोगी को अकेले रहने का मन करता है और उसे कहीं भी शांति नहीं मिलती है।

          इस रोग से पीड़ित रोगी को सहानुभूति की आवश्यकता होती है इसलिए इस रोग के रोगी के साथ मधुरवाणी (प्यार भरे शब्द) से बोलना चाहिए और रोगी व्यक्ति को अधिक देर तक सोने देना चाहिए।

रोगी को सोच-विचार का अधिक कार्य नहीं करना चाहिए। इस रोग से पीड़ित रोगी को पहले की सारी बातें याद दिलानी चाहिए जिसमें उसने कोई सफलता प्राप्त की हो या फिर उसने अच्छे स्थान की यात्रा की हो।

रोगी की इच्छाओं को महत्व देना चाहिए। रोगी व्यक्ति के साथ कभी भी बहस नहीं करनी चाहिए।

           “*निःशुक्ल अयूर्वादिक सलाह ले*

                  दवा online मगवाएँ
              What’s   *
94178 62263*

सिद्ध कंठ कल्पचुर्ण

सिद्ध आयुर्वेदिक

                   *सिद्ध कंठ कल्पचुर्ण*

Online मगवाएँ- whats 94178 62263

            *गलेगी की आवाज बैठ जाएं तो*
                     *गले सूजन हो तो*

मलाठी चुर्ण       100 ग्राम
ब्राह्मी                100 ग्राम
सोंठ भुनी           50 ग्राम
कालीमिर्च          50 ग्राम
छोटी इलाची      50 ग्राम
आवला चुर्ण       50 ग्राम
चरायता             50 ग्राम
गिलोय चुर्ण        50 ग्राम
लौंग                  10 ग्राम
हींग                   10 ग्राम
सुहागे की खील  10 ग्राम
काला नमक       10 ग्राम

चुर्ण बना कर 2 ग्राम चुर्ण एक चम्मच शुद्ध शहद से दिन में 3 से 4 बार ले।

            *क्यों बैठता है गला संपूर्ण जानकारी ले*

        अस्पष्ट आवाज (खराब आवाज), कर्कश स्वर (भारी आवाज) को स्वरभंग या गला बैठना कहते हैं। ठंड लगने या ठंड शरीर में बैठ जाने से आवाज अटकने से होता है। ज्यादा जोर से बोलने या ज्यादा देर तक लगातार बोलने या गाने से भी यह रोग हो जाता है।

गला बैठना या आवाज (स्वर) खराब होने का कारण है गुस्से में अधिक जोर से चिल्लाकर बोलना। ऊंची आवाज से पढ़ने या गाने से गला बैठ जाता है। गले में लकड़ी आदि की चोट के कारण एवं विष या विषयुक्त पदार्थों का सेवन कर लेने से भी गला बैठ जाता है।

आवाज का बैठ जाना कोई रोग नहीं होता है परन्तु यह रोग द्वारा उत्पन्न हो सकता है जैसे : गले में कैंसर, हिस्टीरिया और पक्षाघात (लकवा) आदि।

             *गले बैठने के 6 प्रकार होते है*

           यह रोग 6 प्रकार से उत्पन्न होता है :

 1. वातज 2. पित्तज 3. कफज 4. त्रिदोषज 5. क्षयज 6. मेदज।
कारण :

खट्टा, चटपटा या ज्यादा मसालेदार चीजें खाने से गला बैठ सकता है। यह चीजें हमारी आवाज को खराब कर देती हैं।

 स्वर-यंत्र में सूजन आने से, जोर-जोर से बोलने से, अधिक खांसी और गले में जख्म आदि कारणों से भी आवाज बैठ जाती है जिसमें रोगी को बोलते समय गले में जलन सी महसूस होती है। गले में कफ (बलगम) रुक जाता है।

शरीर में कमजोरी, खून की कमी, वीर्य आदि के कम हो जाने के कारण भी गले की आवाज खराब हो जाती है।

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◆सिद्ध बलवर्धक कल्पचुर्ण◆

सिद्ध अयूर्वादिक

        ★शरीरिक की हर कमजोरी के लिए★
            ★खाया पीया न लगे तो यह चुर्ण ले★

                      ◆सिद्ध बलवर्धक कल्पचुर्ण◆

सिद्ध आयुर्वेदिक का एक ही नंबर 94178 62263 है।  बहुत frod लोग सिद्ध आयुर्वेदिक को अपना बता रहे है। धोखे से बचे। 94178 62263 पर ही call या whats करे।

घर में काम करने वाली महिला, दफ्तर जाने वाले पुरुष, स्पोर्ट्स खेलने वाले खिलाडी हो या running करने वाले लड़के हो सबको बेहतर प्रदर्शन के लिए शरीर में ताकत और स्टैमिना चाहिए। इस लिए हर कोई ये जानना चाहता है की शारीरिक कमजोरी दूर करके शरीर में ताकत और एनर्जी कैसे बढ़ाये ताकि जल्दी थकान ना हो। बलवर्धक चुर्ण ऐसा है जिनकी मदद से आप बॉडी में एनर्जी और स्टैमिना बढ़ा सकते है।

*★ बीमारी के बाद आई कमजोरी को दूर करे★*
*★महिलाओं औऱ पुरुषों के रामबाण चुर्ण★*

*★जिन को खून की कमी है वो यह जरूर

दवा ले★*

*★दुगले पतले लोग और बच्चे जरूर उपयोग करे★*

*★जिन को खाया पिया नही लगता उनके लिए              कारगर है।★*

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        ★बलवर्धक कल्पचुर्ण नुस्खा★
अश्वगंधा        -250 ग्राम 
सतावर।         -250 ग्राम 
आवला-          200  ग्राम 
अनार छिलका  200 ग्राम
अजवाइन-       100ग्राम
सौंफ                100 ग्राम
मिश्री                -100 ग्राम 
शंखपुष्पी         -100 ग्राम 
ब्राह्मी बुटी         -100  ग्राम 
जायफल           100 ग्राम
जावित्री           100 ग्राम
लोहभस्म           50 ग्राम
तुलसी बीज       -50 ग्राम 
सालम मिश्री     -50 ग्राम
सालम पंजा       -5 0 ग्राम

काली मिर्च -20 ग्राम

सभी को मिलाकर किसी बंद डब्बे मे रखे ।

सेवन विधि –

इसे रात सोते समय रोज दो चम्मच गाय के दूध के साथ लें।

हर शरीरिक कमजोरी दूर होगी।

◆◆◆

*शारीरिक कमजोरी के लक्षण*

★पसीना ज्यादा आना
★जल्दी थकान होना
★नींद नहीं आना
★चक्कर आना
★दुबला पतला शरीर दिखना
★भूख ना लगना या कम लगना
★किसी भी काम में मन नहीं लगना
★मर्दाना कमज़ोरी महसूस होना

    *दवा के साथ साथ यह भी जरूर करे।*

कमजोरी चाहे शारीरिक हो या मानसिक, सबसे पहले समस्या के कारण पता होना चाहिए तभी इलाज सही तरीके से और सही दिशा में संभव है। शरीर की कमजोरी दूर करने और ताकत बढ़ाने के लिए आप दवा दवा के साथ साथ  निम्न उपयोग भी करे आप को  दुगना फायदा होगा।

*देसी खजूर शरीर में ताक़त बढ़ाने का एक आसान तरीका है। खजूर के बीज निकाल ले, अब खजूर में मक्खन भर कर खाये। इस उपाय को कुछ दिन निरंतर करने पर आप शरीर में भरपूर ताकत और एनर्जी महसूस करेंगे।*

*नसों की कमजोरी दूर करने और खून बढ़ाने के लिए प्रतिदिन 8 – 10 खजूर खाये और एक गिलास दूध पिए।*

*शारीरिक ताकत बढ़ाने के उपाय में गाजर का हलवा भी फायदेमंद है। अगर आपका शरीर दुबला पतला और कमजोर दिखाई देता है तो गाजर का सेवन करना चाहिए। प्रतिदिन गाजर के जूस का सेवन भी उत्तम उपाय है।*

*मर्दाना कमज़ोरी दूर करने के लिए सुबह मीठा आम खाये और सोंठ वाला दूध पिए।*

*अंकुरित दाल, चने और सोयाबीन दाल खाने से body को प्रोटीन और आवश्यक पोषक मिलते है। इससे शरीर में ताकत आने के साथ साथ पाचन तंत्र भी दरुस्त रहता है।*

शरीर की कमजोरी कैसे दूर करे में दूध भी काफी उपयोगी है। दूध में कैल्शियम और अन्य कई प्रकार के पोषक तत्व होते है जिससे शरीर में ताक़त बढ़ती है। रोजाना कम से कम एक गिलास दूध जरूर पीना चाहिए। दूध से हड्डियां भी मजबूत होती है।

*शरीर में energy बढ़ने के लिए अपने आहार में केला शामिल करे। केला प्राकृतिक शुगर का अच्छा स्रोत है जो शरीर में एनर्जी जल्दी छोड़ता है। प्रतिदिन 2 केले ज़रूर खाए।*

*सुबह दूध के साथ एक केला हर रोज खाने से बॉडी में power और चर्बी बढ़ती है। वजन बढ़ाने और दुबलापन दूर करने का ये सबसे आसान उपाय है।*

प्रतिदिन टमाटर का सूप पीने से शरीर में खून की कमी पूरी होती है। इस होम रेमेडीज से भूख बढ़ती है व चेहरे पर निखार भी आने लगता है।*

*दूध के ही जैसे दही भी कमज़ोरी दूर करने व stamina बढ़ाने के लिए कारगर है। अगर जुखाम हो या गला खराब हो तो दही के सेवन से बचे।*

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सिद्ध कैश तेल

सिद्ध आयुर्वेदिक

              *बालों की सभी समस्याओं से मुक्ति*
                     *घर मे तेल बनाए*

                    *सिद्ध कैश तेल*

       *केशों की मजबूती ओर सुन्दर्य के लिए*

                  *तैल बनाने की विधि*

*अलसी तैल 20ml

*करंज तैल 10ml

*निम्ब तैल 10ml

*एरण्डेका तैल 10m l

*कलोंजी तैल 20ml

*जमालगोटेका तैल 20ml

*रक्तगुंजा तैल 10ml

*बादाम का तेल 25 ml

★सभी तैल को अच्छे से मिलाकर लाल रंग की कांच की बौतल में भर ले ।सूर्य की रोशनी में 7 दिन तक शोधित करें।

 ◆उपयोग विधि◆
‍★उंगलियों से बालो के जड़ मैं मालिस करे 15-20 मिनिट तक

★सप्ताह मे तीन बार यह तैल जहा तक हो इसे बालो मे लगा रहने दे ।।

★तैल के लाभ

★बालो की सारी समस्या समाप्त।

★3 उपयोग मे बाल जड़ना भूल जाओगे।

★9 उपयोग मे बाल सफ़ेद होना बंद।

★6 माह के उपयोग से  फिर से नए  बाल आना शुरू शुरू किन्तु यह समस्या आनुवंशिक न हो|  बाल को काला घना मजबूत करेगा .

      *निःशुक्ल आयुर्वेद चिकित्सा  सलाह ले*
       कॉल 89680 42263
      व्हाट्स 94178 62263

हार्ट ब्लॉकइज है तो कायाकल्प चुर्ण है कारगर

हार्ट ब्लॉकइज है तो कायाकल्प चुर्ण है कारगर

 हार्ट ब्लॉकइज है तो

कायाकल्प चुर्ण है कारगर

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  रोजाना 50  ग्राम अर्जुन छाल का काढ़ा बनाएं ।
              
                ★कैसे बनाएं काढ़ा★

1 लीटर पानी मे 50 ग्राम अर्जुन छाल डाल कर
तब तक पकाएं, जब तक 500 ग्राम न रह जाए।
रोजाना ऐसा काढ़ा बनाना है।

500 ग्राम काढ़े की 3 खुराक बनाकर एक एक चम्मच कायाकल्प चुर्ण दिन में 3 बार ले।

     सुबह -दुहपर-शाम को 3 बार ले।

50 दिन बाद टेस्ट कराए आप को 70 %फायदा होगा।  पूरे 100 दिन प्रयोग करे।

जाने क्या है

                  सदैव युवा रखने वाला,
                 शरीर का पूरा कायाकल्प
                 करने वाला सदाबहार चूर्ण
                          ★★★
            कायाकल्प चुर्ण वात पित्त कफ़
                 को संतुलित करता है।

क्या है कायाकल्प चूर्ण
(What is Kayakalpa churan)

कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था।

कायाकल्प चुर्ण के तीन मुख्य लक्ष्य
(Three main Objective of Kayakalpa churan)
कायाकल्प चुर्ण के वैसे तो कई फायदे हैं

लेकिन इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं-

*नशों की कमजोरी को दूर करता है।
• व्यक्ति की सुंदरता एंव स्वास्थ्य के साथ-साथ लंबे समय तक उन्हें जवानी को बरकरार बनाए रखना।
• नेचुरल एजिंग प्रोसेस को धीमा करना
• आयु बढ़ाना
• शरीर में कहीं भी गाँठ हो तो यह 15 से 50 दिन 90% लाभ होगा।

●●
क्या है काया कल्प चूर्ण में
आए जाने -:::

*त्रिफला -250 ग्रा
*इंद्राण से बनी
हुई अजमायन-200 ग्राम
*गिलोय चूर्ण-100 ग्राम
बेल 200 ग्राम
*अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम
* ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम
*शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम
*कलौंजी -100 ग्राम
*आवला चूर्ण-100 ग्राम
*नसांदर -100 ग्राम
*अपामर्ग -50 ग्राम
* जटामांसी -50 ग्राम
* सत्यनाशी -50 ग्राम
* काला नमक -50 ग्राम
*सेंधानमक -50 ग्राम
*ऐलोवैरा रस -500 ग्राम

सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर
सांय मे सुखाय ।

जब सुख जाए तब आप का काया कल्प
चूर्ण बनकर तैयार हो गया है ।

सेवन विधि – अगर आप बिमार
★★

हार्ट ब्लॉकइज के बारे जाने

हार्ट ब्लॉकेज होने पर व्यक्ति की धड़कने अर्थात Pulses सुचारु तरीके से काम करना बंद कर देती है

 इस प्रकार हार्ट ब्लॉकेज पर व्यक्ति की धड़कने रुक रुक कर चलती है| धड़कनो के रुक रूककर चलने को ही हार्ट ब्लॉकेज कहते है।

 हार्ट ब्लॉकेज की समस्या कुछ लोगो में जन्मजात होती है, लेकिन कुछ लोगो में हार्ट ब्लॉकेज की समस्या जन्म के बाद बड़े होने पर विकसित हो जाती है।

जन्मजात हार्ट ब्लॉकेज की समस्या को कोनगेनिटल हार्ट ब्लॉकेज कहते है।

और बड़े होने के होने वाली हार्ट ब्लॉकेज की समस्या को एक्वायर्ड हार्ट ब्लॉकेज कहते है।

बड़े होने के बाद हार्ट ब्लॉकेज की समस्या खाने पीने की गलत आदतों और खराब जीवन शैली के चलते बढ़ती जा रही है।

★★

              हार्ट ब्लॉकेज के लक्षण
(Heart Blockage Symptoms in Hindi)

हार्ट ब्लॉकेज की तीन डिग्री होती है और इन डिग्री के आधार पैर ही हार्ट अटैक के लक्षणों की पहचान की जाती है।

हार्ट ब्लॉकेज की पहली डिग्री में किसी प्रकार का कोई लक्षण नजर नहीं आता।

हार्ट ब्लॉकेज की दूसरी डिग्री में दिल की धड़कने सामान्य से थोड़ी कम हो जाती है।

हार्ट ब्लॉकेज की तीसरी डिग्री में दिल की धड़कने रुक रूककर धड़कना शुरू कर देती है।

हार्ट ब्लॉकेज के अन्य लक्षण निम्न है –

बार बार चक्कर आना
बार बार सिरदर्द होना
छाती में दर्द होना
सांस फूलना
थकान अधिक होना
बेहोश होना
★★

हार्ट ब्लॉकइज में परहेज

तेल में बने खाद्य पदार्थ
कोल्ड ड्रिंक
डेयरी उत्पाद
धूम्रपान
मक्खन
शराब
घी
★★★

          ★साथ साथ घरेलू नुस्खे जरूर★

★खाने में या सलाद में अलसी के बीजों का इस्तेमाल करें।

★खाने में सामान्य चावल की जगह लाल यीस्ट चावल का इस्तेमाल करें।

◆प्रतिदिन सुबह में 3 से 4 किलोमीटर की सैर करें।

 ★सुबह को लहसुन की एक कली लेने से कोलेस्‍ट्राल कम होता है।

★खाने में बैंगन का प्रयोग करने से कोलेस्‍ट्राल की मात्रा में कमी आती है।

★प्याज अथवा प्याज के रस का सेवन करने से हृदय गति नियंत्रित होती है।

★हृदय रोगी को हरी साग-सब्‍जी जैसे लौकी, पालक, बथुआ और मेथी जैसी कम कैलोरी वाली सब्जियों का प्रयोग करना चाहिए।

 ★घी, मक्खन, मलाईदार दूध और तली हुई चीजों के सेवन से परहेज करें।

★अदरक अथवा अदरक का रस भी खून का थक्का बनने से रोकने में सहायक होता है।

★शराब के सेवन और धूम्रपान से बचना चाहिए।

★एक कप दूध में लहसुन की तीन से चार कली डालकर उबालें। इस दूध को रोज पीएं।

★एक गिलास दूध में हल्दी डालकर उबालें और गुनगुना रहने पर शहद डालकर पीएं।

★एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू का रस, काली मिर्च और शहद डालकर पीएं।

★दो से तीन कप अदरक की चाय रोजाना पीएं। इसके लिए पानी में अदरक डालकर उबालें और शहद मिलाकर पीएं।

★मेथी दाने को रात भर पानी में भिगाकर, सुबह मेथी चबाकर खायें और बचा हुआ पानी पी जाएं।

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सिद्ध घाव नाशक मरहम*

सिद्ध घाव नाशक मरहम*

सिद्ध आयुर्वेदिक

               *सिद्ध घाव नाशक मरहम*

         लगभग 25 ग्राम नीम के पत्तों को
         पानी में पीसकर टिक्की बना लें।
 
     और इस टिक्की को 50 मिलीलीटर
              तिल के तेल में पकायें।

              जब यह टिक्की जल जाये
       तो तेल को छानकर फिर इसमें 6 ग्राम
मोम मिलाकर घोंट लें और मरहम की तरह बना लें।

              इसके बाद इसे फूटे हुए
  फोड़े के घाव पर लगाने से घाव ठीक हो जाता है। इसको हर प्रकार के घाव पर लगाया जा सकता है।

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सिद्ध कायाकल्प भस्म

सिद्ध  आयुर्वेदिक
                  सिद्ध  कायाकल्प भस्म

पेचिश पाचन तंत्र का रोग है जिसमें गंभीर अतिसार (डायरिया) की शिकायत होती है और मल में रक्त एवं म्यूकस आता है में कायाकल्प भस्म कारगर है।

            मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव और

                  खूनी बवासीर में रामबाण
   *प्रकार के रक्तस्राव को रोकने में कारगर यह योग*
*नारियल की जटा से करे खूनी बवासीर मासिक धर्म में अधिक रक्तस्रावका एक दिन में भी इलाज हो सकता है।*
          कैसे बनाए कायाकल्प भस्म
       3 किलोग्राम नारियल की जटा

       300 ग्राम आवला चुर्ण

       100 ग्राम कोंचबीज काला

          50  छोटी इलाची

● नारियल की जटा लीजिए।

● उसे माचिस से जला दीजिए।

● इस मे सभी और सामग्री डाल कर जला दे।

● जलकर भस्म बन जाएगी।

● इस भस्म को शीशी में भर कर ऱख लीजिए।

● कप डेढ़ कप छाछ या दही के साथ सिद्ध कायाकल्प भस्म तीन ग्राम खाली पेट दिन में तीन बार सिर्फ एक ही दिन लेनी है।
● ध्यान रहे दही या छाछ ताजी हो खट्टी न हो।
● कैसी और कितनी ही पुरानी पाइल्स की बीमारी क्यों न हो, एक दिन में ही ठीक हो जाती है।
■ यह नुस्खा किसी भी प्रकार के रक्तस्राव को रोकने में कारगर है।
■ महिलाओं के मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव या श्वेत प्रदर की बीमारी में भी कारगर है।
■ हैजा, वमन या हिचकी रोग में यह भस्म एक घूँट पानी के साथ लेनी चाहिए।

*परहेज़*
■ दवा लेने के एक घंटा पहले और एक घंटा बाद तक कुछ न खाएं तो बहुत अच्छा रहेगा।
■ अगर रोग ज्यादा जीर्ण हो और एक दिन दवा लेने से लाभ न हो तो दो या तीन दिन लेकर देखिए।
*हम आपके लिए कोने कोने से कुदरत के अनसुने चमत्कारिक नुस्खे ले कर आते हैं, आप इनको आजमायें और फायदा होने पर ज़्यादा से ज़्यादा लोगो तक पहुंचाए।*
*●विशेष सावधानियां●*
                  खूनी बवासीर के लिए
1. बवासीर से बचने के लिए गुदा को गर्म पानी से न धोएं। खासकर जब तेज गर्मियों के मौसम में छत की टंकियों व नलों से बहुत गर्म पानी आता है तब गुदा को उस गर्म पानी से धोने से बचना चाहिए।
2. एक बार बवासीर ठीक हो जाने के बाद बदपरहेजी (जैसे अत्यधिक मिर्च-मसाले, गरिष्ठ और उत्तेजक पदार्थो का सेवन) के कारण उसके दुबारा होने की संभावना रहती है। अत: बवासीर के रोगी के लिए बदपरहेजी से बचना परम आवश्यक है।
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 *गोखरू युक्त सिद्ध आयुर्वेदिक नुस्खे*

सिद्ध आयुर्वेदिक

                *गोखरू युक्त सिद्ध आयुर्वेदिक नुस्खे*

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गोखरू (Gokhru)– गोखरू का फल कांटेदार होता है और औषधि के रूप में काम आता है। 

बारिश के मौसम में यह हर जगह पर पाया जाता है।

                      *गोखरू नुस्खा 1*

 नपुंसकता रोग में गोखरू के लगभग 10 ग्राम बीजों के चूर्ण में इतने ही काले तिल मिलाकर 250 ग्राम दूध में डालकर आग पर पका लें। 

पकने पर इसके खीर की तरह गाढ़ा हो जाने पर इसमें 25 ग्राम मिश्री का चूर्ण मिलाकर सेवन करना चाहिए।

*सुबह शाम 2 बार उपयोग करे*

*21 दिन लगातार उपयोग करे*

1. इसका सेवन नियमित रूप से करने से नपुसंकता रोग में बहुत ही लाभ होता है।

2. शरीरक ,मानसिक और आत्मिक शक्ति का उदय होगा।

★★★

                      *गोखरू नुस्ख़ा 2*

गोखरू                         100 ग्राम

कौंचबीज काला               50 ग्राम

कीकर फल(बीज रहित)    50 ग्राम

सतावर                           50 ग्राम

तालमखाना                     50 ग्राम

अशगन्ध                         50 ग्राम

मिश्री।                          100 ग्राम

     *सभी को चूर्ण बना कर बंद डिब्बे में रखे*

*सेवन विधि :-*

                  *1 चमच्च सुबह 1चमच्च रात को मीठे दूध से 30 दिन तक सेवन करे।*

परहेज :-खट्टे पदार्थों से परहेज करें।

लाभ:- सेक्स कमजोरी, शीघ्रपतन, वीर्य का पतलापन, सेक्स की इच्छा की कमी, टाइम की कमी, तनाव की कमी और शरीरक कमजोरी में लाभदायक है।

          *online मंगवाए या खुद बनाए*

                 *सदा स्वस्थ रहे*

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सिद्ध आयुर्वेदिक तेल

सिद्ध आयुर्वेदिक

             *सिद्ध आयुर्वेदिक तेल*
           *यह आयुर्वेदिक तेल आप जी*
         *घर मे आसानी से बना सकते हैं*

            *हम आप जी की सेवा में है*
       *दर्दो की दवा सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण*
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*साइटिका, गठिया का दर्द, कमर का दर्द ,जोड़ों का दर्द और कंधे की जकड़न स्नायू शूल मांशपेशियों का दर्द को सिर्फ़ 1 मिनट में ख़त्म करने का अद्भुत उपाय*

*शरीर में दर्द होना एक आम समस्या है। लेकिन इसके लिए यह तो जरूरी नहीं है कि आप दर्द निवारक दवाईयों का सेवन करें। भारत में अक्सर देखा गया है कि यदि शरीर के किसी भी अंग में दर्द हो रहा होता है तो वे तुरंत दर्द नाशक गोलियां खा लेते हैं।

जिसके दुष्प्रभाव उन्हें आगे चलकर झेलने पड़ते हैं। पेन किलर के साइड इफेक्टस होते हैं। इनकी जगह आप अपने घर में दर्द निवारक तेल बनाकर उसकी मालिश कर सकते हो जिससे दर्द पल भर में दूर हो जाएगा और आपको इसका फायदा भी मिलेगा।

*आइये जानते हैं दर्द निवारक तेल बनाने का तरीका।*

       *दर्द नाशक तेल बनाने का तरीका :*

*1. पहला तरीका : कांच कि शीशी में एक छोटा कपूरए पुदीने का रस एक छोटा चम्मचए एक चम्मच अजवायन को डालकर अच्छे से मिलाएं और इसमें एक चम्मच नीलगिरी का तेल डालकर इसे अच्छे से हिलाएं। अब इस तेल को दर्द वाली जगह पर लगाएं।*

*2. दूसरा तरीका : तारपीन का तेल 60 ग्राम, कपूर 25 ग्राम। इन दोनों को मिलाकर किसी कांच की शीशी में भरकर इसे धूप में रख दें। और समय.समय पर इसे हिलाएं भी। जिससे कि इसमें मौजूद कपूर अच्छे से घुल जाए। अब आपका दर्द निवारक तेल तैयार है।*

*3. तीसरा तरीका : पचास ग्राम सरसों के तेल को किसी बर्तन में डाल दें। और उसमें दो गांठ छिला और पिसा हुआ लहसुन का पेस्ट और एक चम्मच सेंधा नमक को  डाल कर इसे गैस या चूले पर तब तक पकाते रहें जब तक इसमें मौजूद लहसुन काला न पड़ जाए। फिर बाद में इसे ठंडा करके किसी छोटी बोतल या कांच की शीशी में भर कर रख लें।*

*इन तीनों तेलों को आप अलग-अलग बनाकर बोतलों या कांच की शीशीयों में भरकर रख लें। ये तेल दर्द निवारक तेल गठिया के दर्द कमर के दर्द जोड़ों के दर्द और शरीर के अन्य किसी हिस्से में होने वाले दर्द में राहत देते हैं।*

*साइटिका, रिंगन बाय, जोड़ों के दर्द, घुटनो के दर्द, कंधे की जकड़न, कमर दर्द के लिए एक अद्भुत तेल*

*साइटिका, रिंगन बाय, गृध्रसी, जोड़ों के दर्द, घुटनो के दर्द, कंधे की जकड़न एक टांग मे दर्द (साइटिका, रिंगन बाय, गृध्रसी), गर्दन का दर्द (सर्वाइकल स्पोंडोलाइटिस), कमर दर्द आदि के लिए ये तेल अद्भुत रिजल्ट देता हैं। दर्द भगाएँ चुटकी में एक बार जरूर अपनाएँ। ये चिकित्सा आयुर्वेद विशेषज्ञ “श्री श्याम सुंदर” जी ने अपनी पुस्तक रसायनसार मे लिखी हैं। मैं इस तेल को पिछले 2 सालों से बना रहा हूँ और प्रयोग कर रहा हूँ। कोई भी तेल जैसे महानारायण तेल, आयोडेक्स, मूव, वोलीनी आदि इसके समान प्रभावशाली नहीं है। एक बार आप इसे जरूर बनाए।*

*आवश्यक सामग्री :*

*कायफल = 250 ग्राम,*

*तेल (सरसों या तिल का) = 500 ग्राम,*

*दालचीनी = 25 ग्राम*

*कपूर = 5 टिकिया*

*कायफल- “यह एक पेड़ की छाल है” जो देखने मे गहरे लाल रंग की खुरदरी लगभग 2 इंच के टुकड़ों मे मिलती है। ये सभी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी बेचने वाली दुकानों पर कायफल के नाम से मिलती है। इसे लाकर कूट कर बारीक पीस लेना चाहिए। जितना महीन/ बारीक पीसोगे उतना ही अधिक गुणकारी होगा।*

*तेल बनाने की विधि :*

*एक लोहे/ पीतल की कड़ाही मे तेल गरम करें। जब तेल गरम हो जाए तब थोड़ा थोड़ा करके कायफल का चूर्ण डालते जाएँ। आग धीमी रखें। फिर इसमें दालचीनी का पाउडर डालें। जब सारा चूर्ण खत्म हो जाए तब कड़ाही के नीचे से आग बंद कर दे। एक कपड़े मे से तेल छान ले। तेल ठंडा हो जाए तब कपड़े को निचोड़ लें। यह तेल हल्का गरम कर फिर उसमें 5 कपूर की टिकिया मिला दे या तेल में अच्छे से कपूर मिक्स हो जाये इसलिए इसका पाउडर बना कर डाले तो ठीक होगा।  इस तेल को एक बोतल मे रख ले। कुछ दिन मे तेल मे से लाल रंग नीचे बैठ जाएगा। उसके बाद उसे दूसरी शीशी मे डाल ले।*

*प्रयोग विधि :*

*अधिक गुणकारी बनाने के लिए इस साफ तेल मे 25 ग्राम दालचीनी का मोटा चूर्ण डाल दे। जो कायफल का चूर्ण तेल छानने के बाद बच जाए उसी को हल्का गरम करके उसी से सेके। उसे फेकने की जरूरत नहीं। हर रोज उसी से सेके।*

*जहां पर भी दर्द हो इसे हल्का गरम करके धीरे धीरे मालिश करें। मालिश करते समय हाथ का दबाव कम रखें। उसके बाद सेक जरूर करे।*

*बिना सेक के लाभ कम होता है। मालिस करने से पहले पानी पी ले। मालिश और सेक के 2 घंटे बाद तक ठंडा पानी न पिए।*

*दर्दनिवारक तेल बनाने की एक और विधि जो मेरी 70 वर्षीय मासी जी हर चिकित्सा पद्धति से इलाज कराने के बाद थक हार कर नानी माँ के ज्ञानानुसार इस घरेलू तेल का उपयोग कर रही हैं 30 वर्षो से इस तेल का उपयोग कर रही हैं और दर्दनिवारक दवायों से कोषों दूर हैं*साथ ही अपना और हृदयरोग से ग्रसित मौसा जी का देखभाल कर लेती हैं जबकि एलोपैथी चिकित्सा ने 20 साल पहले घुटना बदलने की सलाह दे चुके हैं*

*समय के साथ दर्द बर्दाश्त करने की शक्ति रखे अन्यथा स्वास्थ्य व समृद्धि दोनो का नाश हो जाएगा जब दिल सामाज पारिवारिक भौतिक दर्द बर्दाश्त कर सकते हैं तो इसका दर्द क्यों नहीं दर्द निवारक आयुर्वेद होमेओपेथी पंचगव्य या घरेलू ही उपयोग में लायें*

**दर्दनिवारक तेल :-*

*दर्दनिवारक  तेल बनाने की विधि*

*500ml तिल का तेल या सरसो तेल*
*100gram लहसुन की कली*
*50 ग्राम सौठ*
*25 ग्राम कच्चा कपूर*
*15 ग्राम पीपरमेंट*
*अजवायन 2 चम्मच*
*मेथी 2 चम्मच*
*लौंग 15 20*
*दालचीनी 25 ग्राम*
*सफेद प्याज 1*
*गौमुत्र 100 ml या गौ अर्क 20ml*
*बड़ी इलायची 2 pcs*
*जवन्तरि  10 ग्राम*
*सबसे पहले धीमी आंच पर तेल में सभी का पाउडर बनाकर या पेस्ट बनाकर डालकर गर्म करें गर्म होते होते झाग व बुलबुले बनने बन्द हो जाएंगे तो आग को तेज करे जब सभी सुनहरे या काले रंग को हो तो आग बन्द कर दे इस बीच मे* *चलाते रहे । अब कपूर व पीपरमेंट डालकर खूब घोल दे अब छान कर कांच की शीशी में रखे व दर्द होने पर इस्तेमाल करें।*
*बाजार से शुद्ध व उत्तम कोटि का तेल ।*
*इस्तेमाल व शेयर करे  साथ ही उपयोग के बाद अनुभव शेयर करें स्वस्थ व समृद्ध भारत निमार्ण हेतु*


*कुछ अन्य उपाये करें*

*दो गेंहूं के दाने के बराबर चुना दूध छोड़कर किसी भी तरल पेय में पथरी की समस्या हो तो न ले*

या

*2 चम्मच मेथी रात को एक गिलास पानी मे भिगो दें सुबह इस पानी को पिये व मेथी को चबाकर खाये*

या

*हरड़ को गौमुत्र में भिगोकर रातभर के लिए सुबह इसे साँवली छाँव में सुखाकर अरण्ड के तेल में भूनकर पाउडर बनाले इस पाउडर का एक चम्मच या भुने हरड़ का एक पीस भोजन के बाद ले गुनगुने जल के साथ*

या

*सुबह प्रतिदिन एक चम्मच अरण्ड का तेल गौमुत्र के साथ सेवन करें*

या

*प्रतिदिन एक कप गौमुत्र पिये सर्वरोगनाशक हेतु*

या

*बराबर मात्रा में मेथी हल्दी सौठ का चूर्ण बनाकर रखे सुबह शाम भोजन के बाद एक चम्मच गर्म जल या गर्म पानी के साथ सेवन करे*

*जब दर्द बिस्तर पर लेटा कर छोड़ दे आर्थत घुटने बदलने की नौबत आये तब इस दिव्य औषधि का उपयोग करें*

*हरसिंगार (पारिजात) के पत्तो की चटनी 2 चम्मच बनाये और एक गिलास पानी मे उबाले जब पानी आधा रह जाये तो इसे रातभर छोड़ दे सुबह इस पानी को पी ले 3 माह लगातार*

     *सिद्घ वातदर्द कल्पचुर्ण online मंगवाए*

     *निशुल्क आयुर्वेद सलाह के लिए संपर्क करे*
                Call      89680 42263
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   *सिद्ध क्रेक हील तेल*

          *सिद्ध आयुर्वेदिक एक सेवा संस्था है*

         फ़टी एड़ियो का गरंटी सुधा आयुर्वेदिक तेल
           सर्दियों में फ़टी एड़ियो के परेशानी से बचे

                   *सिद्ध क्रेक हील तेल*

अमचूर तेल, देशी गाय का घी,जैतून का तेल, तिल का तेल, नारियल का तेल , नीम तेल 50 -50 ml ले । सभी तेलों में 100 ml वैसलीन मिलाए।

सोने से पहले वनस्पति तेल को अपनी फटी हुई एड़ियों पर लगाए ओर जुराब पहन कर सोए।

                      *नही बना सकते तो*
         100 ML 250 रुपये में online मगवाएँ*
               *कोरीयर खर्च अलग से होगा*
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सिद्ध फाइलेरिया नाशक कल्पचुर्ण

सिद्ध आयुर्वेदिक


     *सिद्ध फाइलेरिया नाशक कल्पचुर्ण*

  *Online मगवाएँ-94178 62263*
त्रिफला       250 ग्राम
गिलोय चुर्ण 200 ग्राम
त्रिकुटा       200 ग्राम
ब्राहिमी बूटी 100ग्राम
संखपुष्पी    100 ग्राम
अगर         100 ग्राम
सौंठ भुनी   100 ग्राम
बेल चुर्ण       50 ग्राम
शिलाजीत    30 ग्राम
सेंधा नमक 125 ग्राम


सभी चुर्ण को 400 ग्राम एलोवेरा रस औऱ 200 ग्राम गिलोय रस में भावना दे।
सेवन विधि
फ़िर सूखा कर दिन में 3 बार ताजे पानी से एक एक चम्मच लेते रहे।
★90 दिन में 60 से 80 % लाभ  होगा।
★90 दिन उपयोग के बाद दवा को छोड़ दे।
★यह दवा छोड़ने पर भी असर करती रहेगी।
*जरूरत अनुसार फिर चालू कर सकते हैं*

        *साथ मे यह भी अपनाएं*

फाइलेरिया बिमारी के कई अन्य नाम भी हैं जैसे कि हाथीपाँव, फीलपाँव, श्लीपद आदि.

ये बिमारी उष्णकटिबंध देशों में सामान्य है. इसकी उत्पति परजीवी (पेरेसिटिक) निमेटोड कीड़ों के कारण होता है जो छोटे धागों जैसे दिखते हैं. यह बीमारी फिलेरी वुचरेरिअ बैंक्रोफ्टी, ब्रूगिआ मलाई और ब्रूगिआ टिमोरि नामक निमेटोड कीड़ो के कारण होती है. फाइलेरिया के सबसे ज़्यादा मामले वुचरेरिअ बैंक्रोफ्टी नामक परजीवी के कारण होते हैं. फाइलेरिया दुनिया भर में विकलांगता और विरूपता का सबसे बढ़ा कारण है. यह ज़्यादातर गरीब लोगों को होता है क्योंकि जहाँ गरीब लोग रहते हैं वहाँ मच्छरों की प्रजननता अधिक होती है. एलीफेंटिटिस यानि श्लीपद ज्वर एक परजीवी के कारण फैलती है जो कि मच्छर के काटने से शरीर के अंदर प्रवेश करता है. इस बीमारी से मरीज के पैर हाथी के पैरों की तरह फूल जाते हैं. इस रोग के होने से न केवल शारीरिक विकलांगता हो सकती है बल्कि मरीजों की मानसिक और आर्थिक स्थिति भी बिगड़ सकती है.
एलीफेंटिटिस को लसीका फाइलेरिया भी कहा जाता है क्योंकि फाइलेरिया शरीर की लसिका प्रणाली को प्रभावित करता है. यह रोग मनुष्यों के हाथ-पैरों के साथ ही जननांगों को भी प्रभावित करता है. आइए फाइलेरिया को दूर करने के लिए उसके उपचार हेतु कुछ घरेलू उपायों पर प्रकाश डालें.
1. लौंग
लौंग फाइलेरिया के उपचार के लिए बहुत प्रभावी घरेलू नुस्खा है. लौंग में मौजूद एंजाइम परजीवी के पनपते ही उसे खत्म कर देते हैं और बहुत ही प्रभावी तरीके से परजीवी को रक्त से नष्ट कर देते हैं. रोगी लौंग से तैयार चाय का सेवन कर सकते हैं.
2. काले अखरोट का तेल
काले अखरोट के तेल को एक कप गर्म पानी में तीन से चार बूंदे डालकर पिएं. इस मित्रण को दिन में दो बार पिया जा सकता है. अखरोट के अंदर मौजूद गुणों से खून में मौजूद कीड़ों की संख्या कम होने लगती है और धीरे धीरे एकदम खत्म हो जाती है. जल्द परिणाम के लिए कम से कम छह हफ्ते प्रतिदिन इस उपाय को करें.
3. भोजन
फाइलेरिया के इलाज के लिए अपने रोज के खाने में कुछ आहार जैसे लहसुन, अनानास, मीठे आलू, शकरकंदी, गाजर और खुबानी आदि शामिल करें. इनमें विटामिन ए होता है और बैक्टरीरिया को मारने के लिए विशेष गुण भी होते हैं.
4. आंवला
आंवला में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है. इसमें एन्थेलमिंथिंक भी होता है जो कि घाव को जल्दी भरने में बेहद लाभप्रद है. आंवला को रोज खाने से इंफेक्शन दूर रहता है.
5. अश्वगंधा
अश्वगंधा शिलाजीत का मुख्य हिस्सा है, जिसके आयुर्वेद में बहुत से उपयोग हैं. अश्वगंधा को फाइलेरिया के इलाज के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है.
6. ब्राह्मी
ब्राह्मी पुराने समय से ही बहुत सी बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाती है. फाइलेरिया के इलाज के लिए ब्राह्मी को पीसकर उसका लेप लगाया जाता है. रोजाना ऐसा करने से रोगी सूजन कम हो जाती है.
7. अदरक
फाइलेरिया से निजात के लिए सूखे अदरक का पाउडर या सोंठ का रोज गरम पानी से सेवन करें. इसके सेवन से शरीर में मौजूद परजीवी नष्ट होते हैं और मरीज को जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है.
8. शंखपुष्पी
फाइलेरिया के उपचार के लिए शंखपुष्पी की जड़ को गरम पानी के साथ पीसकर पेस्ट तैयार करें. इस पेस्ट को प्रभावित स्थान पर लगाएं. इससे सूजन कम होने में मदद मिलेगी.
9. कुल्ठी
कुल्ठी या हॉर्स ग्राम में चींटियों द्वारा निकाली गई मिट्टी और अंडे की सफेदी मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाएं. इस लेप को प्रतिदिन प्रभावित स्थान पर लगाएं, सूजन से आराम मिलेगा.
10. अगर
अगर को पानी के साथ मिलाकर लेप तैयार करें. इस लेप को प्रतिदिन 20 मिनट के लिए दिन में दो बार प्रभावित स्थान पर लगाएं. इससे घाव जल्दी भरते हैं और सूजन कम होती है. घाव में मौजूद बैक्टीरिया भी मर जाते हैं.
11. रॉक साल्ट – शंखपुष्पी और सौंठ के पाउडर में रॉक साल्ट मिलाकर, एक एक चुटकी रोज दो बार गरम पानी के साथ लें.

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 सिद्ध घरेलू आँख अंजन ड्रॉप्स

 

               

काला या सफ़ेद मोतिया बिंद आयुर्वेदिक दवा

      सिद्ध घरेलू आँख अंजन ड्रॉप्स

        कोई साइड इफेक्ट नही है

10 मिलीलीटर सफेद प्याज का रस, 10 मिलीलीटर अदरक का रस, 10 मिलीलीटर नींबू का रस और 50 मिलीलीटर शहद को मिला लें।

इस रस की 2-2 बूंदें रोजाना आंखों में डालने से मोतियाबिंद कट जाता है।

दिन में 5 से 7 बार आँखों में 41 दिन उपयोग करे।
पक्का फ़ायदा होगा।
किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  
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सिद्ध पीलिया नाशक कल्पचुर्ण*

        *पीलिया रोग की अयूर्वादिक दवा*

        *सिद्ध पीलिया नाशक कल्पचुर्ण*


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*खून की कमी औऱ अशुद्धि को करे 10 दिन में पूरा*


*पीलिया के प्रकार*

*पीलिया मुख्यत तीन प्रकार का होता है* 


*जोकि इस प्रकार हैं – वायरल हैपेटाइटिस ए, वायरल हैपेटाइटिस बी तथा वायरल हैपेटाइटिस नान A व नान B।* 


*यह दवा सभी प्रकार के पीलिया रोग में कारगर है*


       *(Online दवा मंगवा सकते हैं)*


*पीलिया नाशक कल्पचुर्ण नुस्ख़ा*

गिलोय 100 ग्राम

कलमी शोरा 50 ग्राम

आँवला 50 ग्राम

 सोंठ 50 ग्राम

काली मिर्च 50 ग्रान

पीपर (पाखर) 30 ग्राम

हल्दी  30 ग्राम

मीठा सोडा 30 ग्रान

उत्तम लोहभस्म 50 ग्राम

मिश्री तांगा  100 ग्राम


*सभी को मिलाकर  200 ग्राम गिलोय रस में भावना दे।*


*दो आनी भार *(करीब 1.5 ग्राम आधा चम्मच)*जितना चूर्ण दिन में तीन बार शहद के साथ लेने से पीलिया का उग्र हमला भी 3 से 7 दिन में शांत हो जाता है।*


★★★


*परहेज और आहार*


*लेने योग्य आहार*

*सब्जियों का ताजा निकला रस (चुकंदर, मूली, गाजर, और पालक), फलों का रस (संतरा, नाशपाती, अंगूर और नीबू) और सब्जियों का शोरबा।*


ताजे फल, जैसे सेब, अन्नानास, अंगूर, नाशपाती, संतरे, केले, पपीता, आदि। खासकर अन्नानास विशेष रूप से उपयोगी होता है।


पीलिया के उपचार हेतु जौ का पानी, नारियल का पानी अत्यंत प्रभावी होते हैं।


*नीबू के रस के साथ अधिक मात्रा में पानी पीने से लिवर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की रक्षा होती है।

पीलिया की चिकित्सा हेतु लिए जाने वाले प्रभावी आहारों में फलों के रस का विशेष स्थान है। गन्ने, नीबू, मूली, टमाटर आदि का रस लिवर के लिए अत्यंत सहायक होता है।*


*आँवला भी विटामिन सी का उत्तम स्रोत है। आप अपने लिवर की कोशिकाओं को स्वच्छ करने हेतु कच्चा, धूप में सुखाया हुआ या रस के रूप में आँवला ले सकते हैं।*


अनाज जैसे ब्रेड, चपाती, सूजी, जई का आटा, गेहूँ का दलिया, चावल आदि कार्बोहायड्रेट के बढ़िया स्रोत हैं और पीलिया से पीड़ित व्यक्ति को दिये जा सकते हैं।


●●●

*इनसे परहेज करें*

तले और वसायुक्त आहार, अत्यधिक मक्खन और सफाईयुक्त मक्खन, माँस, चाय, कॉफ़ी, अचार, मसाले और दालें आदि


सभी वसा जैसे घी, क्रीम और तेल।


★★★


कुछ अचूक नुस्खे जिससे आपको पीलिया के इलाज में मदद मिलेगी ।


*गन्ने का रस*

गन्ने का रस दिन में कई बार पीना चाहिये। पीलिया के रोग में यह अमृत है। गन्ने के रस का सेवन करने से पीलिया बहुत ही जल्दी ठीक हो जाता है।

 *छाछ*

पीलिया के रोग में 1 ग्लास छाछ रोज़ाना पीनी चाहिये। इसमें काली मिर्च का पाउडर मिलाकर पीने से इसका गुण और भी बढ़ जाता है और यह कुछ ही दिनों में पीलिया के रोग को समाप्त कर देता है।


 *प्याज़ से इलाज*

प्याज़ पीलिया में बहुत ही लाभदायक होती है। प्याज़ को काट लीजिये और नीबू के रस में कुछ घंटों के लिये भिगो दीजिये। कुछ घंटों बाद इस प्याज़ को निकाल लीजिये। इसे नमक और काली मिर्च लगाकर मरीज को खिला दीजिए। दिन में 2 बार इस प्याज़ को खाने से पीलिया बहुत ही जल्दी दूर हो जाता है।


*फ्रूट्स*

फलों में तरबूज और खरबूजा दोनों ही पीलिया में बहुत लाभदायक हैं। इन्हें अच्छी मात्रा में खाना चाहिये। इससे पीलिया का रोग बहुत जल्दी ठीक हो जाता है।

*निम्बू का रस*

लिवर के सेल्स की सुरक्षा की दॄष्टि से दिन में ३-४ बार निंबू का रस पानी में मिलाकर पिएं। कुछ ही दिनों में आप खुदको पीलिया से छुटकारा मिलता है महसूस करेंगे।


*मूली के पत्ते*

मूली के हरे पत्ते पीलिया के इलाज में बेहद लाभदायक होता है। पत्ते पीसकर रस निकालकर छानकर पीना उत्तम है। इससे भूख बढेगी और आंतें साफ होंगी। और आप पाएंगे पीलिया से छुटकारा।


*टमाटर का रस*

टमाटर का रस पीलिया में लाभकारी है। रस में थोड़ा नमक और काली मिर्च मिलाकर पीयें। 

 *खास एहतियात बरतें*

स्वास्थ्य सुधरने पर एक दो किलोमीटर घूमने जाएं और कुछ समय धूप में रहें। भोजन में उन चीजों को शामिल करें  जिसमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, विटामिन सी, विटामिन ई और विटामिन बी काम्पलेक्स मौजूद हों। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद भी भोजन के मामले में लापरवाही न बरतें। वर्कआउट खूब करें और स्वच्छता से रहें हेल्दी चीजें खाएं।


*पीलिया में इनका सेवन न करें*

सभी वसायुक्त पदार्थ जैसे घी ,तेल , मक्खन ,मलाई कम से कम १५ दिन के लिये उपयोग न करें। इसके बाद थोड़ी मात्रा में मक्खन या जेतून का तैल उपयोग कर सकते हैं। 


*दाल खाने से बचें,  क्योंकि दालों से आंतों में फुलाव और सडांध पैदा हो सकती है।*


     ■हम आप की सेवा में है■

         ◆ किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए◆ 

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*सिद्ध सर्दी नाशक गिलोय काढ़ा

सिद्ध आयुर्वेदिक


      *सिद्ध सर्दी नाशक गिलोय काढ़ा*       
     

             ★काढ़ा कैसे बनाए★

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*सर्दी, जुकाम, बुखार, काली खाँसी,रेशा, निमोनिया, फेफड़ों के इंफेक्शन, लिवर खराबी, बच्चों में बड़ी/छोटी माता (चेचक)

और भी अनेकों फायदे से भरपूर है सिद्ध सर्दी नाशक गिलोय काढ़ा*


   *6 ग्लास पानी लेकर आग पर रख दे।*

       *उसमे नीचे लिखी सामग्री डाले*


★ गिलोय हरी 100 ग्राम

★किसमिश 10 पीस

★छुहारे 5 पीस

★तुलसी पत्ते 50 पीस

★पपीता पत्ता 1पीस

★सोंठ 2 ग्राम (आधा चमच्च)

★मुलेठी आधा चम्मच

★काली मिर्च आधा चम्मच

★दालचीनी आधा चम्मच


सभी सामग्री को तब तक उबाले जब तक आधा न रह जाए।

सेवन विधि

*200 ग्राम काढ़ा गर्म चाय की भांति उपयोग करे*

*बच्चों को आधी मात्रा में दे।*

* 1 से 3 साल के बच्चों को 5 चमच्च एक बार मे दे*

दिन में 4 बार सिद्ध सर्दी नाशक काढ़े का इस्तेमाल करे।


यह क्रिया 3 से 5 दिन लगातार करे। 

फायदे 

वातरोग, वातदर्द, गठिया वात, wbc, जुकाम, खासी,चेचक, टाइफाइड औऱ किसी भी प्रकार की इंफेक्शन में कारगर है।

        सिद्ध आयुर्वेदिक

  Whats 94178 62263

सिद्ध पित्ताशय पथरी नाशक कल्पचुर्ण

सिद्ध आयुर्वेदिक

पित्त की पथरी के लिए

 सिद्ध पित्ताशय पथरी नाशक कल्पचुर्ण

ऑनलाइन मगवाएँ – what’s 94178 62263.



  • गुलहर फूल चुर्ण           250 ग्राम

इन्द्रयाण अजवाइन       200 ग्राम

त्रिफला                       100 ग्राम

ब्रह्मी                            100 ग्राम

इन्द्रयाण(कड़वी तुंबी)   100 ग्राम

सोंठ                            100 ग्राम

अजमोदा फल का चूर्ण  100 ग्राम

मजीठा                        100 ग्राम

गोखरू                         100 ग्राम

बड़ी इलाची                  100 ग्राम

हूर                                100 ग्राम

सहजना की छाल           50  ग्राम

अपामार्ग                        50 ग्राम

काली मिर्च                     20 ग्राम

हींग                              20 ग्राम

सेंधानमक                     100 ग्राम

 

सभी मिलाकर चुर्ण बनाए।

फिर

200 ग्राम गिलोय रस में भावना दे।

सांय में सुखाए।

सेवन विधि

दिन में 3 बार एक एक चम्मच गर्म पानी से ले।

 

*साथ मे रात को रात 10 बजे आधा कप जैतून  या तिल का तेल – आधा कप ताजा नीम्बू रस में अच्छे से मिला कर पीयें*

 

*21 दिन में पथरी निकल जाती हैं।*

 

*ध्यान दे*

 * सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण* दर्द को ततकाल बंद कर देता है। 

*अगर पथरी बड़ी हो तो सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण

टुकड़े करेगा उस वक्त दर्द बड़ सकता है। 10 से 20 मिनट तक*

           *थोड़ा अपने पर विश्वास रखे दर्द बर्दाश्त करे*

पालक, टमाटर, चुकंदर, भिंडी का सेवन न करें तो आछा है। 

★★★

         *पित्त की थैली में  पथरी क्यों बनती हैं*

जब ज्यादा वसा से भरा पदार्थ यानी घी, मक्खन, तेल वगैरह से बने पदार्थ का सेवन करते हैं तो शरीर में कोलेस्ट्रोल, कैल्शियम कार्बोनेट और कैल्शियम फांस्फेट के अधिक बनने से पित्ताशय में पथरी का निर्माण होता है।

रक्त विकृति के कारण छोटे बच्चों के शरीर में भी पथरी बन सकती है। पित्ताशय में पथरी की बीमारी से स्त्रियों को ज्यादा कष्ट होता है।

 30 वर्ष से ज्यादा की स्त्रियां गर्भधारण के बाद पित्ताशय की पथरी से अधिक ग्रस्त होती हैं। 

कुछ स्त्रियों में पित्ताशय की पथरी का रोग वंशानुगत भी होता है। खून में कोलेस्ट्रोल की मात्रा ज्यादा होने पर कैल्शियम के मिलने से पथरी बनने लगती है।

           *कैसे पता चले कि  पित्ते में पथरी है*

            * पित्त की थैली में पथरी के लक्षण*

पेट के ऊपरी भाग में दायीं ओर बहुत ही तेज दर्द होता है और बाद में पूरे पेट में फैल जाता है। लीवर स्थान बड़ा और कड़ा और दर्द से भरा होता है। नाड़ी की गति धीमी हो जाती है। शरीर ठंड़ा हो जाता है, मिचली और उल्टी के रोग, कमजोरी (दुर्बलता), भूख की कमी और पीलिया रोग के भी लक्षण होते हैं। इसका दर्द भोजन के 2 घण्टे बाद होता है इसमें रोगी बहुत छटपटाता है।

भोजन तथा परहेज :

गाय का दूध, जौ, गेहूं, मूली, करेला, अंजीर्ण, तोरई, मुनक्का, परवल, पके पपीता का रस, कम खाना, फल ज्यादा खाना और कुछ दिनों तक रस आदि का प्रयोग करें।

चीनी और मिठाइयां, वसा और कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें- इस रोग में कदापि सेवन न करें। तेल, मांस, अण्डा, लाल मिर्च, हींग, उड़द, मछली और चटपटे मसालेदार चीजें, गुड़, चाय, श्वेतसार और चर्बीयुक्त चीजें, खटाई, धूम्रपान, ज्यादा मेहनत और क्रोध आदि से परहेज करें।

                  *यह लोग सेवन न करे*

           *इस दवा का कोई नुकसान नही है*

*फिर भी तासीर गर्म  होने के कारण यह लोग ध्यान से उपयोग करे।*

  * सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण*  उन महिलाओं के लिए असुरक्षित है जो गर्भवती हैं या जो प्रजनन उपचार के दौर से गुजर रही हैं।

 * सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण*  शरीर में एस्ट्रोजेन का स्तर कम करती है और मासिक धर्म का कारण हो सकती है, जिससे गर्भपात हो सकता है या खून बह सकता है। 

विशेष रूप से, पहली तिमाही में गर्भवती महिलाओं को बिल्कुल नहीं लेनी चाहिए। 

हार्मोन उपचार करवा रही महिलाओं या गर्भनिरोधक गोलियां ले रही महिलाओं को * सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण* नहीं लेनी चाहिए।

  * सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण* के उपयोग से नींद आने लगती है। अतः वाहन ड्राइव करते समय या मशीन चलाते समय गुड़हल * सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण* का उपयोग नहीं करें।

 * सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण* के उपयोग से उच्च रक्तचाप को कम किया जाता है। निम्न रक्तचाप वाले इस का उपयोग नहीं करें। 

इसके उपयोग से आप का स्वास्थ्य ख़राब हो सकता है।

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गुर्दे की पथरी में सिद्ध कायाकल्प चुर्ण- 3 mm की पथरी 3 दिन निकल जाती है।

गुर्दे की पथरी में

स्पेशल सिद्ध कायाकल्प चुर्ण

पथरी 5 mm तक की 3 दिन में गुर्दे से बाहर निकल जाती है।

अगर पथरी बड़ी या ज्यादा हो तो 21 दिन कायाकल्प चुर्ण का सेवन करे।

कैसे ले- 50 मिलीलीटर नीबू रस ले 300 ग्राम पानी मे मिलाकर 5 ग्राम दवा ले।
दिन में 4 बार दवा ले।

जब दवा लेगे दर्द तत्काल मिट जाएगा।
★★★
यह 21 दिन का उपयोग होगा।
21 दिन पथरी गुर्दे से बिल्कुल साफ हो जाएगी।
निम्बू पानी से केवल 5 दिन दवा लेनी।
5 दिन के बाद 2 बार सुबह शाम खाने के बाद ताजे पानी से कायाकल्प चुर्ण लेते रहे।
★★

क्या है कायाकल्प चूर्ण
(What is Kayakalpa churan)

कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था।

कायाकल्प चुर्ण के तीन मुख्य लक्ष्य

(Three main Objective of Kayakalpa churan)
कायाकल्प चुर्ण के वैसे तो कई फायदे हैं

लेकिन इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं-

*नशों की कमजोरी को दूर करता है।

• व्यक्ति की सुंदरता एंव स्वास्थ्य के साथ-साथ लंबे समय तक उन्हें जवानी को बरकरार बनाए रखना।

• नेचुरल एजिंग प्रोसेस को धीमा करना
• आयु बढ़ाना

●●
क्या है काया कल्प चूर्ण में
आए जाने -:::

*त्रिफला -250 ग्रा
*इंद्राण से बनी
हुई अजमायन-200 ग्राम
*गिलोय चूर्ण-100 गरा
*अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम
* ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम
*शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम
*कलौंजी -100 ग्राम
*आवला चूर्ण-100 ग्राम
*नसांदर -100 ग्राम
*अपामर्ग -50 ग्राम
* जटामांसी -50 ग्राम
* सत्यनाशी -50 ग्राम
* काला नमक -50 ग्राम
*सेंधानमक -50 ग्राम
*ऐलोवैरा रस -500 ग्राम

सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर
सांय मे सुखाय ।

जब सुख जाए तब आप का काया कल्प
चूर्ण बनकर तैयार हो गया है ।

विधि अनुसार सेवन करे।

किसी भी शरीरक स्मयसा के लिए contact करे –Whats 78890 53063

Email-sidhayurveda@gmail.com

मूल्य क्या है- जानने के लिए tach करे।

https://docs.google.com/document/d/10kDcmwR6efgNVv1dzgf5EQ3dRfwXTkp1CvVUQqEh8n0/edit?usp=drivesdk

सिद्ध महाशक्ति योग

    ★शुक्राणु विर्द्धि के लिए आयुर्वेदिक योग★

          सिद्ध महाशक्ति योग

Online मगवाएँ- whats 94178 62263

           ★शुक्राणु की पुरुषों में कमी★
     【बच्चे न होने की एक पीड़ा यह भी है】

 ज्यादातर बच्चे के ना होने का कारण महिलाओं को ही ठहराया जाता है ।

लेकिन इसमें पुरूष भी कम नही है जब पुरूषों में शुक्राणु के बनने के लक्षण कम होते है तो उनमें नपुंसकता बढ़ने लगता है ।

 जिससे बच्चे के पैदा होने में
 दुविधा खड़ी हो जाती है

 सामान्य तौर पर एक स्वस्थ या हेल्दी पुरूष में 15 मिलियन शुक्राणु की कोशिकाओं का होना काफी आवश्यक होता है।

जिसमें स्वस्थ शुक्राणु के इन लक्षणों के अलावा रूप, संरचना और गतिशीलता का होना जरूरी माना जाता है।

और इसकी कमी ही अनहेल्दी शुक्राणु के लक्षणों का होना पाया जाता है। जिसमें मर्द में नपुंसकता और सेक्स करने के इच्छा में कमी होने लगती है और पूरी लाइफ पर इसका असर देखने को मिलता है।

यदि आप थोड़ी सी सतर्कता बरते तो आप अपनी जीवनशैली में कुछ सुधार लाकर शुक्राणु की गुणवत्ता और संख्या को बढ़ा सकते है।

★★★
                       शुक्राणुओं के बारे          
                   कुछ हैरान करने वाले सच

भारत के मर्दो के वीर्य में साल दर साल शुक्राणुओं की कमी देखी जा रही है।  भारत के मर्दो में अब पहले जैसी बात नही रही। शक्राणु के आकर और संरचना में गड़बड़ियां आ रही है। 1978 में एक सेहतमंद व्यक्ति के वीर्य में शुक्राणुओं की गिनती 6 करोड़ प्रति लीटर पाई जाती थी, 2012 में यह गिनती 6 करोड़ से 2 करोड़ हो गयी थी।

इन सालों में भारती मर्द बहुत कमजोर हुआ है।

कारण क्या है।

आयुर्वेद मान्यता है कि

■अवैध नशीली दवाओं का प्रयोग – कोकीन या गांजा जैसे नशीले पदार्थों के सेवन से आपके शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता में कमी आ सकती है।

■शराब का सेवन – शराब पीने से टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है और शुक्राणु उत्पादन में कमी आ सकती है। (और पढ़ें – टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के घरेलू उपाय)

■धूम्रपान – अन्य व्यक्तियों की तुलना में धूम्रपान करने वाले पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या कम हो सकती है।

■तनाव – लंबे समय तक तनाव में रहने के कारण शुक्राणु पैदा करने वाले कुछ आवश्यक हार्मोन असंतुलित हो सकते हैं।

■वजन – मोटापे के कारण हार्मोन में बदलाव हो सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप पुरुषों की प्रजनन क्षमता कमज़ोर हो सकती है।

★★★

फिर भी चिंता की बात है आयुर्वेद में हर रोग का इलाज  शर्तिया है।

★★★

       ★शुक्राणुओं के लिए आयुर्वेदिक योग★

गिलोय चुर्ण 100 ग्राम
तुसली बीज 100 ग्राम
कौंच के बीज 100 ग्राम (छिलकारहित)
सफ़ेद मूसली 100ग्राम
सतावर 100 ग्राम
बाबुल फली 50 ग्राम
गोखरू 50 ग्राम
विदारीकंद 50 ग्राम
बरगद दूध 50 ग्राम
सालम पंजा 50 ग्राम
सालम मिश्री 50 ग्राम
शिलाजीत 50 ग्राम
आवला चुर्ण 50 ग्राम
कबाब (शीतल)चीनी 50 ग्राम
तालमखाना 20 ग्राम
शिलाजीत 50 ग्राम
हत्था जोरी 20 ग्राम
कतीरा गोंद 20 ग्राम
बबूल का गोंद 20 ग्राम
काले तिल।   20 ग्राम

सभी को चुर्ण को 200 ग्राम एलोवेरा रस में मिलाकर धुप में सुखाए।

 सुबह-शाम एक-एक चम्मच चूर्ण मीठे दूध के साथ 60 दिन तक सेवन करें और इसके बाद वीर्य की जाँच करवाकर देख लें कि शुक्राणुओं में क्या वृद्धि हुई है।

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भोजन में निम्न पदार्थों का सेवन शरीर में वीर्य Semen improving को बढ़ाता है:

★मिश्री मिला गाय का दूध
★ गाय का धारोष्ण दूध
★मक्खन, घी
★चावल व दूध की खीर
★ उड़द की दाल
★तुलसी के बीज
★बादाम का हलवा
★मीठा अनार
★प्याज, प्याज का रस घी-शहद के साथ
★ खजूर
★बादाम

★★★

परहेज
1. तेल और तली चीजें, अधिक लाल मिर्च, मसालेदार पदार्थ, इमली, अमचूर, तेज खटाईयां व आचार।

2. प्रयोग काल में घी का उचित सेवन करना चाहिए।

3. पेट की शुध्दि पर भी ध्यान देना चाहिए। कब्ज नही होने देनी चाहिए। कब्ज अधिक रहता हो तो प्रयोग से पहले पेट को हल्के दस्तावर जैसे त्रिफला का चूर्ण एक चमच अथवा दो-तीन छोटी हरड़ का चूर्ण गर्म दूध या गर्म पानी के साथ, सोने से पहले अंतिम वास्तु के रूप में लें।

4. सेवन-काल में ब्रह