मोटापा कैसे घटाएँ-।।।।बिना किसी साइड इफेक्ट के।।

।। मोटापा कैसे घटाएँ-।।

।।बिना किसी साइड इफेक्ट के।।

sidhayurvedic.com


■मोटापा कम करने के लिए संपूर्ण जानकारी■

★【आप जी पहले कायकल्प चुर्ण बारे जाने

     जो मोटापा की दवा साथ दिया जाता है]

★【फिर मोटापा की दवा बारे जानकारी देंगे]

★:【फिर दवा कैसे लेनी है यह बताएगे】

★ 【अंत मे मूल्य बताया गया है।】

★★★

                     कायाकल्प चुर्ण

                    सभी रोग के लिए

                  सदैव युवा रखने वाला,

                 शरीर का पूरा कायाकल्प

                 करने वाला सदाबहार चूर्ण


★★★

कायाकल्प चुर्ण वात पित्त कफ़

को संतुलित करता है

★★★

किसी भी नशे को छुड़ाने में कारगर है काया क्ल्प चूर्ण।

थकान एक पल में दूर होगी। क्योंकि एलोवेरा हर नस को पूर्ण क्रिया में ले आता है।

★★★

आज बढ़ते हुए तनाव, मानसिक थकान, चिंता, शारीरिक रोग ये सब असमय ही इंसान को बूढा बना देती हैं। भरी जवानी में इंसान बूढा नज़र आने लगता हैं। अगर आप अपना योवन कायम चाहते हैं तो आपको यथासंभव तनाव, चिंता को त्यागना होगा

कहा भी जाता हैं के चिंता से बड़ा कोई शारीरिक शत्रु नहीं हैं। योग करे, ध्यान करे, दोस्तों से मिले, बच्चो और बुज़ुर्गो के साथ समय बिताये, किसी क्लब का सदस्य बनिए,हफ्ते में एक दिन गौशाला जाइए, किसी गरीब को खाना खिलाएं। इस से आपकी तनाव और चिंता भाग जाएगी।

इसके साथ हम आज आपको बताने जा रहे हैं आयुर्वेद के एक ऐसे सदाबहार चूर्ण के बारे में जिसको खा कर आप सदा अपने आप को जवान और तंदुरुस्त महसूस करेंगे। बस इसको अपने दैनिक जीवन में शामिलकरे।

●●●


क्या है कायाकल्प चूर्ण

(What is Kayakalpa churan)

कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था।

कायाकल्प चुर्ण के तीन मुख्य लक्ष्य

(Three main Objective of Kayakalpa churan)

कायाकल्प चुर्ण के वैसे तो कई फायदे हैं।

लेकिन इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं-

*नशों की कमजोरी को दूर करता है।

• व्यक्ति की सुंदरता एंव स्वास्थ्य के साथ-साथ लंबे समय तक उन्हें जवानी को बरकरार बनाए रखना।।

• नेचुरल एजिंग प्रोसेस को धीमा करना

• आयु बढ़ाना।

●●

क्या है काया कल्प चूर्ण में

आए जाने -:::

*त्रिफला -250 ग्रा

*इंद्राण से बनी

हुई अजमायन-200 ग्राम

*गिलोय चूर्ण-100 ग्राम

बेल 200 ग्राम

*अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम

* ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम

*शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम

*कलौंजी -100 ग्राम

*आवला चूर्ण-100 ग्राम

*नसांदर -100 ग्राम

*अपामर्ग -50 ग्राम

* जटामांसी -50 ग्राम

* सत्यनाशी -50 ग्राम

* काला नमक -50 ग्राम

*सेंधानमक -50 ग्राम

*ऐलोवैरा रस -500 ग्राम

सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर

सांय मे सुखाय ।

जब सुख जाए तब आप का काया कल्प

चूर्ण बनकर तैयार हो गया है ।

सेवन विधि – अगर आप बिमार है तो दिन एक -एक चम्मच 3 बार ले ।।

अगर आप सदा स्वास्थ्य रहना चाहते है तो एक चम्मच

सुबह खाली पेट ले ।

●●



काया कल्प चूर्ण के Multipurpose Benifits है

●पथरी 5 mm तक की 3 दिन में गुर्दे से बाहर निकल जाती है।

कैसे ले- 50 मिलीलीटर नीबू रस ले 300 ग्राम पानी मे मिलाकर 5 ग्राम दवा ले।

दिन में 4 बार दवा ले।

जब दवा लेगे दर्द तत्काल मिट जाएगा।

****

● नसों की कमजोरी में रामबाण है काया कल्प योग।

●हर प्रकार की एलर्जी में फायदा। जैसे :-

नाक में पानी, छीके, पुराना जुकाम, खाँसी, गले की एलर्जी।

● थकान कभी महसूस नही करेंगे। एक उत्साह होगा काया कल्प लेने से।

● त्वचा की सलवटे दूर होती हे, त्वचा के रंग में निखार आता हे ,चर्म रोग दूर होते हे ,त्वचा कांतिमय व् ओजमय बनती हे

● यूरिया बढा हो काया कल्प रामबाण की भांति

काम करता है ।

●ओवरी में सूजन ‘,पानी भरना’ अंडा न बनना।,मासिक धर्म कम आना ठीक करेगी यह काया कल्प।

● शरीर मे गांठे हो तो काया कल्प रामबाण की

भांति काम करता है ।

● माइग्रेन में जबरदस्त लाभ होगा।

● बालो की वृद्धि तेजी से होती है,

● अनावश्यक चर्बी घटेगी.

● पुरानी कब्ज से मुक्ति मिलेगी

● खून साफ़ होगा

● रक्त नलिकाए साफ़ होगी.

● शरीर के समस्त दर्द 7 दिन ठीक होगे ।

● युरिक एसिड जड़ से खत्म होगा।

● शरीर के कोने कोने में जमी गंदगी इसके नियमित सेवन से पेशाब के द्वारा बाहर निकल जायेगी

नया शुद्ध खून बनेगा.

◆ औरतों की पीरियड की समस्या हो तो काया कल्प

रामबाण जैसा काम करता है ।

◆ शरीर सुडोल ,मजबूत व आकर्षक बनता हे

बल -बुद्धि – वीर्य की वृद्धि करता है ।

● नपुसंकता दूर होती है।

● माहलाओं में सेक्स की कमी को पूरा करेगा काया क्ल्प चूर्ण

● कब्ज दूर होती हे , जठराग्नि व् पाचन शक्ति बढती है। और बादी /खूनी बवासीर खत्म होगी ।

● व्यक्ति का तेज बढ़ता हे ,

● बुढ़ापा जल्दी नहीं आता

दात मजबूत होते है।

● हड्डीया मजबूत होती है।

● रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है।

● ह्रदय की कार्यक्षमता बढती है।

◆ कोलेस्ट्रोल बढ़ता है तो समान्य हो जाएगा ।

●आलोपथिक द्वइयो के साइड इफ़ेक्ट कम करता है।


● यह चूर्ण आयुष्य वर्धक है ।

● आयु बढ़ेगी

● घठियावादी हमेशा के लिए दूर होती है।

◆ Diabetes काबू में रहती है।

● कफ से मुक्ति मिलती है।

परहेज क्या करें – अंडा, मांस, मछली, नशीले पदार्थो का सेवन एवं तली हुई वस्तु औगर फास्ट फूड वर्जित हैं।

●●●



               मोटापा नाशक कल्पचुर्ण

             ■मोटापा कम करने का योग ■  

            ¶यह एक फ़ूड है इस योग का

    कोई साइड इफेक्ट्स और नुकसान नही है।¶

            【बाजार में  मिलने वाली दवाएं

        हड्ड़ी रोग का कारण बन सकती हैं।】

★★★

नोट -: online दवा मंगवाए जिस में हम आप को साथ मे कायकल्प चुर्ण भी देगे। जो आप की नाड़ी तंत्र को शुद्ध और साफ करेगा।

कायकल्प  चुर्ण बारे जानने के लिए whats 94178 62263  पर sms करे।

★★★

आप खुद भी बना सकते है।

यह पेट की चर्बी में बहुत अच्छा काम करती हैं।

           आवश्यक सामग्री :

●गुग्गुल(Guggul)- 140 ग्राम

●विलायिती इमली (Camachile)-105 ग्राम (इसे जंगल जलेबी, अग्रेजी इमली, गंगा इमली भी कहते है।)

●त्रिफला (Triphala)- 105 ग्राम

●बेल चूर्ण -105 ग्राम

◆अर्जुन छाल-,105 ग्राम

●यष्टिमधु (Liquorice)-70 ग्राम (इसे मुलेठी भी कहते है।)

◆गिलोय (Tinospora)- 70 ग्राम

●नागरमोथा (Nut grass)- 70 ग्राम (Cyperus Scariosus)

जीरा (cumin)- 70 ग्राम

शुंठी(Shunti)- 70 ग्राम (सोंठ)

★ बनाने की विधि :

उपरोक्त सभी औषिधियों को बारीक-बारीक कूट-पीस ले और महीन छन्नी से छान कर किसी डिब्बे में बंद कर के रख ले-आपकी ये सामग्री कूट-पिस लगभग 700 ग्राम तैयार हो जायेगी।

★ 


सेवन करने का तरीका :

प्रतिदिन आपको इसमें से दस ग्राम सुबह खाने से पहले गुनगुने पानी से और शाम को खाने के बाद गुनगुने पानी से लेना है ।

बीस ग्राम के हिसाब से एक माह में 600 ग्राम दवा होगी तथा ये एक माह से उपर के लिए हो जायेगी।

तब तक आपका वजन लगभग आठ से दस किलो से जादा कम हो जाएगा।

पेट बढ़ा है 2 से 3 इंच कम हो जाएगा।

पहले माह तेजी से घटता है लगभग छ: से सात किलो फिर थोडा कम घटेगा।

आप इसे आगे भी जारी रख सकते है जब आपको लगे कि आपका वजन और चर्बी अब आपके लिए पर्याप्त है दवा को बंद कर सकते है।

★ आवश्यक परहेज :

भोजन और परहेज :

          मोटापे से परेशान व्यक्ति को मुद्ग, जौ, मूंग का रस, मक्खन, गर्म पानी, बाजरा, गेहूं, ताजा दूध, मुनक्का, संतरा, टमाटर, मसूर, छाछ आदि का सेवन करना चाहिए। मोटे व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह टहलना चाहिए और थोड़ी-बहुत मेहनत भी करनी चाहिए। रोगी को पतला करके दूध, फलों का रस, कॉफी, गर्म करके पीना चाहिए।

          मोटापे के रोगी को गाय का दूध, देशी घी, गाढ़ी दाल, चावल, आलू, गर्म दूध, चीनी से बने पदार्थ, पनीर, आइसक्रीम, मिठाइयां, मांसाहारी भोजन, अधिक चिकनाई व चटपटा पदार्थ, सांभर, सूप, बिस्कुट, केक, नमकीन पदार्थ, जेली, मिठाइयां, बाहर का खाना, देर रात पार्टियों में खाना, नए शालि चावल आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। शीतल पानी से नहाना मोटापे के लिए हानिकारक होता है।

तली भुनी चीजे, फास्ट-फ़ूड तथा रिफाइंड आयल का प्रयोग न करे।



Online आप दवा मंगवा सकते हैं।

हम साथ मे काया क्ल्प चूर्ण भी देगे।

जो मोटापे की दवा औऱ मोटापे में हैरानीजनक फायदा करता है।

★★★★

70  दिन की दवा होगी

खर्च जाने अब

मोटापा कम करने की दवा 500 ग्राम

1050 रुपये

कायाकल्प चुर्ण 500 ग्राम 

500  रुपये।

टोटल 1550 जमा कराए।

★★★★

सेवन विधि

कायाकल्प चुर्ण 1 चम्मच सुबह खाली पेट।

रात को सोते टाइम पानी से सेवन करे।

★★★

मोटापा दवा दिन 3 बार कभी भी पानी से ले।

परहेज के लिए पोस्ट पढ़े।

★★

नोट

कोरियर  केवल शहर मे ही जाएगा ।

पता शहर का ही दे ।

डाक से गांव में जाएगी दवा ।

अपना पता साफ लिखे।

आप को पहले अकाउंट मे

दवा की राशि जमा करानी होगी

फिर आप को दवा कोरियर होगी ।

हमारा अकाउंट है है -:

Paytm 9417862263

Swami Veet Dass c℅ Ranjit Singh

State bank of india

A/c -65072894910

Ranjit Singh

Bank code –50966

Ifsc code -sbin0050966

Sarhind barach

Fatehgarh sahib (punjab )

पढ़ कर कॉल करे

94178 622636

https://ayurvedasidh.blogspot.in/2018/01/blog-post_26.html

Online सिद्ध आयुर्वेदिक दवा कैसे मगवाएँ

 Online सिद्ध आयुर्वेदिक दवा कैसे  मगवाएँ

  *सभी सिद्ध अयूर्वादिक दवा लिस्ट*

अभी whats 94178 62263 पर मैसिज करे।

दवा का नाम लिखे और कैसे मंगवाएं पूछे।

तुरंत आप को जवाब मिलेगा।

sidhayurveduc.com

■■■

गर्भधारण कल्पचुर्ण

300 ग्राम  1050 रुपये।

कायाकल्प चुर्ण 200 ग्राम 325

टोटल 1375

 दोनों चूर्ण कब औऱ कैसे उपयोग करे

             *कायाकल्प चूर्ण*

कायाकल्प चूर्ण कैसे और कब उपयोग करे-

मासिक धर्म से 15 दिन पहलह्े कायाकल्प चूर्ण सुबह खाली पेट औऱ रात को सोते समय गर्म पानी से इस्तेमाल करे।

कायाकल्प चूर्ण क्यों इस्तेमाल करे-

 कायाकल्प चूर्ण मासिक धर्म की हर समस्या सही करेगा।

जैसे :-

बंद ट्यूब, गर्भाशय की सफाई, कमजोरी औऱ गर्भशय की गांठ आदि को ठीक करेगे।

★★★

       सफ़ेद दाग  मूल्य

वजन 400 ग्राम

मूल्य 860

डाक खर्च ताहित (पार्सल रेट)

Speed post 960 रुपये

50 दिन दवा

★★

सिद्ध शीतल कल्पचुर्ण

400 ग्राम

750 रुपए with डाक खर्च।

30 दिन की दवा

★★★

सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण

वजन 500 ग्राम

मूल्य 600  रुपये

40 दिन की दवा

डाक खर्च समेत

◆◆◆

साइनस की दवा

सिद्ध कफ़ कल्पचुर्ण

200 ग्राम 600 रुपये

डाक पार्सल समेत

★★

पीलिया रोग की  आयुर्वेदिक दवा

पीलिया नाशक कल्पचुर्ण

वजन 400 ग्राम र 1050 डाक पार्सल free

21 दिन की दवा

★★

■ह्रदय रोग और बढ़े कालेस्ट्राल की दवा

40 दिन की दवा 400 ग्राम 1050 रुपये

with कोरियर

★★★

■.बढ़े लिवर, फेंटी लिवर में रामबाण दवा

     ★सिद्ध  लिवर क्ल्पचुर्ण ★

300 ग्राम 750 रुपये with कोरियर

30 दिन की दवा है।

★★★

सिद्ध वातदर्द क्ल्प चुर्ण

300 ग्राम दवा 600 रुपये

500 ग्राम 1000 रुपये

1kg 1800 रुपये

30 दिन की दवा

डाक पार्सल फ्री

★★★

शरीरिक बलवर्धक चुर्ण

400 ग्राम 1050 रुपये

40 दिन की दवा

★★★

शुगर की कामयाब दवा

सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण

500 ग्राम दवा 850 रुपये

40 दिन की दवा

डाक पार्सल फ्री

★★★

खून शुद्धि की अयूर्वादिक दवा

300 ग्राम 750 रुपये

30 दिन की दवा

डाक पार्सल फ्री

★★★

.अधरंग, पक्षाघातकी अयूर्वादिक दवा

लकवे की दवा

400 ग्राम 1260  (आप के लिए 1050)

आयल 200 ग्राम 570 रुपये

★★

शुगर रोगी के लिए

कामक्ल्प चुर्ण

400 ग्राम 1260

★★★

■.

सिद्ध बुद्धिवर्धक चूर्ण

400 ग्राम 1050


“★★★

एक्जिमा और  सोरसिस दवा

सिद्ध त्वचा कल्पचुर्ण

*वजन 400 ग्राम*

*मूल्य 1050 रुपये*

*सिद्ध त्वचा रोग नाशक क्रीम*

          *वजन 100 ग्राम*

           *मूल्य 250 रुपये*

     *Speed पोस्ट 105 डाक खर्च*

      *टोटल 1455 रुपये जमा होंगे।*

                 *30 दिन की दवा

★★

■.

पुराना सिर दर्द नुस्खा

100 ग्राम 300 रुपये

★★

■ई

पीरियड की कैसी भी समस्या हो

*नारी समस्या निदान कल्पचुर्ण*

200 ग्राम 550 रुपये

★★

मोटापा कम करने का योग

मोटापा नाशक कल्पचुर्ण

500 ग्राम 860 रुपये

1 kg  1500 रुपये

सभी दवा का डाक खर्च साथ ही है।

★★★

■  

सिद्ध कफ़ चुर्ण

300 ग्राम 750 रुपये

★★★

कायाकल्प चुर्ण 500 ग्राम 700 रुपये।

★★

खून शुद्वि की दवा

सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण

300 ग्राम 750 रुपये

★★

  बुखार की दवा

    *सिद्ध ज्वर नाषक कल्पचुर्ण*

200 ग्राम दवा 400 रुपये with

कोरियर खर्च

◆◆

सिद्ध नाड़ी दुर्बलता कल्प चूर्ण

400 Gram 1050 रुपये

★★

■ त्वचा कल्पचुर्ण

दाद खाज खुजली के लिए।

300 ग्राम

750 रुपये

***

■■■

कैंसर की दवा

सिद्ध कैंसर नाशक कल्पचुर्ण

40 दिन की दवा

वजन 400 ग्राम

मूल्य 1050 रुपये सिद्ध आयुर्वेदिक

■■■

सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण

300ग्राम –1550 र

30 दिन की दवा

वजन 400 ग्राम

मूल्य 2050

40 दिन की दवा with डाक खर्च।

सेवन विधि

सुबह शाम शाम खाने के 1घंटे के बाद मीठे दूध से ले।

नोट- सूगर के मरीज न ले।

धातु ,शक्राणु, मर्दाना और शीघ्रपतन की यह रामबाण दवा है।

*20 मिनट सफल  संभोग क्रिया*

*पेशाब में गर्मी की जलन, गर्मी कारण इंफेक्शन जड़ से खत्म होगी।*

*सपनदोष नही होगा*

*धातु रोग जड़ से खत्म होगा*

नोट

* सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण के साथ शिश्न की लगातार मालिश जरूर करे*

नारियल तेल 100 ml

काला तिल तेल 50 ml

बादाम तेल      25 ml

इतर गुलाब  5ml

दोनों को मिलाकर 10 मिनट सुबह 10 मिनट शाम को शिश्न की मालिश जरूर करे।

शिश्न नाड़ियों की कमजोरी दूर होगी

हमारी गरंटी होगी।

■■■

लकोरिया और धातु की दवा

सिद्ध धातु पुष्टि कल्पचुर्ण

वजन 300 ग्राम

मूल्य 1050

★★

नोट

दवा डाक से जाएगी।

डाक खर्च साधारण जोड़ा हुआ है।

पर

Speed post का 4 अलग से होगा।

अपना पता साफ साफ लिखे।

आप को पहले अकाउंट मे

दवा की राशि जमा रकरानी होगी ।

फिर आप को दवा कोरियर होगी ।

हमारा अकाउंट है है -:

*Paytm9417862263*

Swami veet das c/ ranjit Singh

*State bank of india*

*A/c -65072894910*

Ranjit Singh

Bank code –50966

*Ifsc code -sbin0050966*

Sarhind barach

Fatehgarh sahib (punjab )   

★★★

नोट

दवा डाक से जाएगी।

डाक खर्च साधारण जोड़ा हुआ है।

पर

Speed post का 4 अलग से होगा।

अपना पता साफ साफ लिखे।

आप को पहले अकाउंट मे

दवा की राशि जमा रकरानी होगी ।

फिर आप को दवा कोरियर होगी ।

हमारा अकाउंट है है -:

*Paytm9417862263*

Swami veet das c/ ranjit Singh

*State bank of india*

*A/c -65072894910*

Ranjit Singh

Bank code –50966

*Ifsc code -sbin0050966*

Sarhind barach

Fatehgarh sahib (punjab )   

बसंत ऋतु के रोग और इलाज

          *बसंत ऋतु में आयुर्वेदिक दवाएं*

                *और खान-पान*

बसंत ऋतु में कफ़ रोग, लीवर रोग , ह्र्दय रोग और खून अशुद्धि जैसे रोग उतपन्न होते हैं।

इसे कच्ची मौसम के रोग भी बोला जाता है।

सिद्ध आयुर्वेदिक औषधियों इस मौसम के हिसाब से निर्मत की जाती है।

।।वसंत ऋतु इस्तेमाल करने योग्य सिद्ध चुर्ण।।

1.सिद्ध कफ़ नाशक कल्पचुर्ण

2.सिद्ध लिवर कल्पचुर्ण

3.सिद्ध ह्रदय कल्पचुर्ण

4.सिद्ध खून शुद्धि कल्पचुर्ण

लिंकः देख सकते टच करे

Sidhayurvedic.com

हिन्‍दू कैलेंडर के हिसाब से15 मार्च से 15 मई का वक्‍त वसंत ऋतु का होता है। 

वसंत ऋतु का शरीर  पर क्‍या असर पड़ता है?

 यह वक्‍त गर्मी और सर्दी के बीच का होता है इसलिए ठंड और गर्मी दोनों का इफेक्‍ट होता है। दिन में गर्मी और रात को ठंडक होती है।

इस मौसम में कफ दोष बॉडी पर और हावी होने लगता है।

वजह ये है कि इससे पहले वाले मौसम यानी शिशिर ऋतु में बॉडी में जमा कफ अब गर्मी होने पर पिघल जाता है।

इससे खासतौर पर पचाने की ताकत पर असर पड़ता है। साफ तौर पर कहें तो खाने को पचाने वाली आग जिसे जठराग्‍नि कहते हैं, कमजोर पड़ जाती है।

एक तो वैसे ही इस मौसम में कफ का असर ज्‍यादा होता है उसमें अगर आपने कफ बढ़ाने वाली चीजें थोड़ी बहुत भी खा लीं तो समझें टांसिल्‍स, खांसी, गले में खराश, जुकाम, सर्दी और कफ व बुखार का हमला हो सकता है।

            ।।बसंत ऋतु में खान -पान।।

   वसंत ऋतु में कफ की समस्या अधिक रहती है। अतः इस मौसम में जौ, चना, ज्वार, गेहूं, चावल, मूंग, अरहर, मसूर की दाल, बैंगन, मूली, बथुआ, परवल, करेला, तोरई, अदरक, सब्जियां, केला खीरा, संतरा, शहतूत, हींग, मेथी, जीरा, हल्दी, आंवला आदि कफनाशक पदार्थों का सेवन करें|

   इसके अलावा मूंग बनाकर खाना भी उत्तम है।

◆◆

                   बसंत ऋतु में 

                ।। घरेलू नुस्खे।।

  नागरमोथा अथवा सोंठ डालकर उबाला हुआ पानी पीने से कफ का नाश होता है।

मन प्रसन्न रखें एवं जो हृदय के लिए हितकारी हों ऐसे आसव अरिष्ट जैसे कि मध्वारिष्ट, द्राक्षारिष्ट, गन्ने का रस, सिरका आदि पीना लाभदायक है। 

●◆◆

          ।।सिद्ध हिर्दय कल्पचुर्ण ।।

आप अगर बसंत ऋतु में इस्तेमाल करते हैं तो आप को कभी हार्ट अटैक नही होगा *

सिद्ध ह्रदय कल्पचुर्ण की पूरी जानकारी के लिए link देखे:- 

https://wp.me/paDg1r-J

●●

   इस ऋतु में कड़वे नीम में नई कोंपलें फूटती हैं। नीम की 15-20 कोंपलें, 2-3 काली मिर्च के साथ चबा-चबाकर खानी चाहिए।

15-20 दिन यह प्रयोग करने से वर्ष भर चर्म रोग, रक्त विकार और ज्वर आदि रोगों से रक्षा करने की प्रतिरोधक शक्ति पैदा होती है एवं आरोग्यता की रक्षा होती है। 

इसके अलावा कड़वे नीम के फूलों का रस 7 से 15 दिन तक पीने से त्वचा के रोग एवं मलेरिया जैसे ज्वर से भी बचाव होता है।

●●

          ।।सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण।।

*बसंत ऋतु में इस्तेमाल करे खून शुद्वि कल्पचुर्ण*

सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण आप बसंत ऋतु में अगर इस्तेमाल करते हैं तो खून सबंधी जितने भी रोग होते हैं सभी साल भर के लिए आप ठीक हो जाएंगे।

सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण की पूरी जानकारी के लिंक देख सकते हैं।

https://wp.me/paDg1r-2H

◆◆

   धार्मिक ग्रंथों के वर्णनानुसार चैत्र मास के दौरान अलौने व्रत याने बिना नमक के व्रत करने से रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है एवं त्वचा के रोग, हृदय के रोग, उच्च रक्तचाप( हाई बीपी), गुर्दा, किडनी आदि के रोग नहीं होते। 

   वसंत ऋतु में दही का सेवन न करें क्योंकि वसंत ऋतु में कफ का स्वाभाविक प्रकोप होता है एवं दही कफ को बढ़ाता है। अतः कफ रोग से व्यक्ति ग्रसित हो जाते हैं।

      वसंत के मौसम में क्‍या नहीं खाना चाहिए

●●

 ।।फेंटी, खःटी औऱ मीठी वस्तुओं से करे परहेज।।

   वसंत में फैटी, खट्टे, मीठे और पेट के लिए भारी चीजें नहीं खानी चाहिए। तली और मसालेदार चीजें कम से कम खाएं। 

दिन में सोना बंद कर दें ऐसा करने से कफ दोष भड़क जाएगा। रात को ज्‍यादा देर तक नहीं जागना चाहिए इससे वायु दोष बढ़ जाता है।

सुबह देर तक सोने से मल सूख जाता है, भूख्‍ देर से लगती है और चेहरे व आंखों की चमक कम हो जाती है। इसलिए इस मौसम में जल्‍दी सोएं और जल्‍दी उठें।

   शीत एवं वसंत ऋतु में श्वास, जुकाम, खांसी आदि जैसे कफजन्य रोग उत्पन्न होते हैं। 

उन रोगों में हल्दी का प्रयोग उत्तम होता है। हल्दी शरीर की व्याधि रोधक क्षमता को बढ़ाती है जिससे शरीर रोगों से लड़ने में सक्षम होता है। 

  चौथाई चम्मच हरड़ का चूर्ण शहद में मिलाकर चाटें तो वसंत ऋतु में होने वाले बलगम, ज्वर, खांसी आदि नष्ट हो जाते हैं। मौसम के अनुसार भोजन हमारे शरीर और मन दोनों के लिए हितकारी होता है।

मौसम के अनुसार भोजन में परिवर्तन करके आहार लेने वाले लोग हर समय स्वस्थ और प्रसन्नचित रहते हैं।

   इस मौसम में स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए रोज एक्‍सरसाइज करें। टहलें, मालिश करें और अगर मौसम में ठंडक है तो गुनगुने पानी से नहा सकते हैं। गर्म पानी से मूत्राशय और मलाशय की अच्‍छे से सफाई करनी चाहिए।

नहाने के बाद बदन पर कपूर, चंदन, अगरू, कुमकुम जैसी खुश्‍बू वाली चीजों का लेप लगा सकते हैं। चाहें तो शाम के वक्‍त दोबारा नहा सकते हैं। ढीले और सूती कपड़े पहनें। 

और जानकारी के whats करे

94178 62263

Online दवाएं के लिए website देखे:-

Online सिद्ध आयुर्वेदिक दवा मगवाएँ

Online सिद्ध आयुर्वेदिक दवा मगवाएँ *सभी सिद्ध अयूर्वादिक दवा लिस्ट*

ayurvedasidh.blogspot.com

सालम पंजा – शरीर की हर शक्ति देता है जगा

                *सालम पंजा*
     *एक जीवित ऊर्जा प्रदान करता है*
*अयुर्वेदिक अनंत जड़ी बूटी मानव जीवन के लिए कुदरत का वरदान है।।

*सालम पंजा युक्त सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण online मंगवाए*
*’सालमपंजा’ एक बहुत ही गुणकारी, बलवीर्यवर्द्धक, पौष्टिक और यौन शक्ति को बढ़ाकर नपुंसकता नष्ट करने वाली वनौषधि है।*
*यह बल बढ़ाने वाला, शीतवीर्य, भारी, स्निग्ध, तृप्तिदायक और मांस की वृद्धि करने वाला होता है। यह वात-पित्त का शमन करने वाला, रस में मधुर होता है।*

विभिन्न भाषाओं में नाम : संस्कृत- मुंजातक। हिन्दी- सालमपंजा। मराठी- सालम। गुजराती- सालम। तेलुगू- गोरू चेट्टु। इंग्लिश- सालेप। लैटिन- आर्किस लेटिफोलिया।

परिचय : सालम हिमालय और तिब्बत में 8 से 12 हजार फीट की ऊंचाई पर पैदा होता है। भारत में इसकी आवक ज्यादातर ईरान और अफगानिस्तान से होती है। सालमपंजा का उपयोग शारीरिक, बलवीर्य की वृद्धि के लिए, वाजीकारक नुस्खों में दीर्घकाल से होता आ रहा है। 

समुद्र यात्रा : समुद्र में प्रायः यात्रा करते रहने वाले पश्चिमी देशों के लोग प्रतिदिन 2 चम्मच चूर्ण एक गिलास पानी में उबालकर शक्कर मिलाकर पीते हैं। इससे शरीर में स्फूर्ति और शक्ति बनी रहती है तथा क्षुधा की पूर्ति होती है।
●●
यौन दौर्बल्य : 
सालमपंजा 100 ग्राम, बादाम की मिंगी 200 ग्राम, दोनों को खूब बारीक पीसकर मिला लें।

इसका 10 ग्राम चूर्ण प्रतिदिन कुनकुने मीठे दूध के साथ प्रातः खाली पेट और रात को सोने से पहले सेवन करने से शरीर की कमजोरी और दुबलापन दूर होता है, यौनशक्ति में खूब वृद्धि होती है और धातु पुष्ट एवं गाढ़ी होती है। यह प्रयोग महिलाओं के लिए भी पुरुषों के समान ही लाभदायक, पौष्टिक और शक्तिप्रद है, अतः महिलाओं के लिए भी सेवन योग्य है।
●●
शुक्रमेह :
 सालम पंजा, सफेद मूसली एवं काली मूसली तीनों 100-100 ग्राम लेकर कूट-पीसकर खूब बारीक चूर्ण करके मिला लें और शीशी में भर लें।
प्रतिदिन आधा-आधा चम्मच सुबह और रात को सोने से पहले कुनकुने मीठे दूध के साथ सेवन करने से शुक्रमेह, स्वप्नदोष, शीघ्रपतन, कामोत्तजना की कमी आदि दूर होकर यौनशक्ति की वृद्धि होती है।
●●

जीर्ण अतिसार : 
सालमपंजा का खूब महीन चूर्ण 1-1 चम्मच सुबह, दोपहर और शाम को छाछ के साथ सेवन करने से पुराना अतिसार रोग ठीक होता है।

एक माह तक भोजन में सिर्फ दही-चावल का ही सेवन करना चाहिए। इस प्रयोग को लाभ होने तक जारी रखने से आमवात, पुरानी पेचिश और संग्रहणी रोग में भी लाभ होता है।
●●
प्रदर रोग :

 सलमपंजा, शतावरी, सफेद मूसली और असगन्ध सबका 50-50 ग्राम चूर्ण लेकर मिला लें।
इस चूर्ण को एक-एक चम्मच सुबह व रात को कुनकुने मीठे दूध के साथ सेवन करने से पुराना श्वेतप्रदर और इसके कारण होने वाला कमर दर्द दूर होकर शरीर पुष्ट और निरोगी होता है।
●●
वात प्रकोप : 
सालमपंजा और पीपल (पिप्पली) दोनों का महीन चूर्ण मिलाकर आधा-आधा चम्मच चूर्ण सुबह-शाम बकरी के कुनकुने मीठे दूध के साथ सेवन करने से कफ व श्वास का प्रकोप शांत होता है। सांस फूलना, शरीर की कमजोरी, हाथ-पैर का दर्द, गैस और वात प्रकोप आदि ठीक होते हैं। 
●●
विदार्यादि चूर्ण :
 विन्दारीकन्द, सालमपंजा, असगन्ध, सफेद मूसली, बड़ा गोखरू, अकरकरा सब 50-50 ग्राम खूब महीन चूर्ण करके मिला लें और शीशी में भर लें।

इस चूर्ण को 1-1 चम्मच सुबह व रात को कुनकुने मीठे दूध के साथ सेवन करने से यौन शक्ति और स्तंभनशक्ति बढ़ती है।

*यह योग online मगवां सकते हैं*
●●

रतिवल्लभ चूर्ण :
 सालमपंजा, बहमन सफेद, बहमन लाल, सफेद मूसली, काली मूसली, बड़ा गोखरू सब 50-50 ग्राम। छोटी इलायची के दाने, गिलोय सत्व, दालचीनी और गावजवां के फूल-सब 25-25 ग्राम। मिश्री 125 ग्राम। सबको अलग-अलग खूब कूट-पीसकर महीन चूर्ण करके मिला लें और शीशी में भर लें।

इस चूर्ण को 1-1 चम्मच सुबह व रात को कुनकुने मीठे दूध के साथ दो माह तक सेवन करने से यौन दौर्बल्य और यौनांग की शिथिलता एवं नपुंसकता दूर होती है। शरीर पुष्ट और बलवान बनता है।

*यह सभी चूर्ण online मगवां सकते हैं*
    *Whats करे-94178 62263*

https://ayurvedasidh.blogspot.com/2019/02/blog-post_24.html

सिद्ध गर्भधारण कल्पचुर्ण

sidhayurvedic.com

        *सिद्ध गर्भधारण कल्पचुर्ण*

*फायदे-*

*अंडे का न बनना, गर्भावस्था कमजोरी, गर्भ नली का बंद होना, लकोरिया, गर्भाशय कमजोरी , अंतुसलन हार्मोन, गर्भाशय का छोटापन आदि*

सिद्ध गर्भधारण कल्पचुर्ण का नुस्खा

पुत्रजीवक          100 ग्राम

शिवलिंगी बीज    100 ग्राम

गजकेसर की जड़  50 ग्राम

पीपल की दाढ़ी      50 ग्राम

ब्रह्मिबुटी               50 ग्राम

तुलसी के बीज       50 ग्राम

गोरखमुण्डी।          50 ग्राम

काकोली का बीज   20 ग्राम

नागकेसर              20 ग्राम

मिश्री                   100 ग्राम

इसकी 5 ग्राम मात्रा को सुबह के समय बछडे़ वाली गाय के 250 मिलीलीटर  दूध से मासिक-धर्म खत्म होने के बाद लगभग 20 दिन तक करना चाहिए।

इसके सेवन से स्त्रियां गर्भधारण के पक्के तौर योग्य बन जाती हैं।

       *गऊ के दूध और दही का खूब सेवन करे।*

परहेज -गर्म ओर खट्टी वस्तु न ले। 

****

नोट

***

अगर आप online मंगवाते है तो हम आप को 2 दवाएं का पैक देगे।

      *जिस से बहुत फायदा होता है।*

     दोनों चूर्ण कब औऱ कैसे उपयोग करे

             *कायाकल्प चूर्ण*

कायाकल्प चूर्ण कैसे और कब उपयोग करे-

मासिक धर्म से 15 दिन पहले कायाकल्प चूर्ण सुबह खाली पेट औऱ रात को सोते समय गर्म पानी से इस्तेमाल करे।

कायाकल्प चूर्ण क्यों इस्तेमाल करे-

कायाकल्प चूर्ण मासिक धर्म की हर समस्या सही करेगा।

जैसे :-

बंद ट्यूब, गर्भाशय की सफाई, कमजोरी औऱ गर्भशय की गांठ आदि को ठीक करेगे।

★★

     *गर्भधारण कल्पचुर्ण कैसे उपयोग करे*

*मासिक धर्म बंद होने के 1 दिन बाद कोसे गर्म दूध से सुबह खाने के 30 मिनट बाद और रात को भी ऐसे ही उपयोग करे।*

*ध्यान रहे :-खाने में  दही का उपयोग जरूर करे।*

कोई भी गर्म वस्तु इन दिनों उपयोग न करे।*

           *खुद बनाएं या online मंगवाए*

              Whats 94178 62263

                 Call 89680 62263


शरीर में दर्द क्यों होते हैं ??

 शरीर में दर्द क्यों होते है??
*वातदर्द रोगों की संपूर्ण जानकारी ,मात्र जानने से दर्दो से आप दर्दो से पाएंगे मुक्ति

      *सिद्ध वातदर्द नाशक कल्पचुर्ण*
*सभी वातदर्द रोगों को जड़ से खत्म करता है*
*Online मंगवाए whats 94178 62263*

●●

वात क्या है ??

          वात, पित्त और कफ तीनों में से वात सबसे प्रमुख होता है क्योंकि पित्त और कफ भी वात के साथ सक्रिय होते हैं।

शरीर में वायु का प्रमुख स्थान पक्वाशय में होता है और वायु का शरीर में फैल जाना ही वात रोग कहलाता है।

हमारे शरीर में वात रोग 5 भागों में हो सकता है जो 5 नामों से जाना जाता है।

वात के पांच भाग निम्नलिखित हैं-

1.उदान वायु    – यह कण्ठ में होती है।
2.अपान वायु   – यह बड़ी आंत से मलाशय तक होती है।
3.प्राण वायु     –  यह हृदय या इससे ऊपरी भाग में होती है।
4.व्यान वायु        – यह पूरे शरीर में होती है।5.समान वायु       – यह आमाशय और बड़ी आंत में होती है।

वात रोग बहुत प्रकार की होती है।

●●●
जैसे
1.आमवात :
आमवात के रोग में रोगी को बुखार होना शुरू हो जाता है तथा इसके साथ-साथ उसके जोड़ों में दर्द तथा सूजन भी हो जाती है।

इस रोग से पीड़ित रोगियों की हडि्डयों के जोड़ों में पानी भर जाता है। जब रोगी व्यक्ति सुबह के समय में उठता है तो उसके हाथ-पैरों में अकड़न महसूस होती है और जोड़ों में तेज दर्द होने लगता है। जोड़ों के टेढ़े-मेढ़े होने से रोगी के शरीर के अंगों की आकृति बिगड़ जाती है।

●●●
2.सन्धिवात रोग
         जब आंतों में दूषित द्रव्य जमा हो जाता है तो शरीर की हडि्डयों के जोड़ों में दर्द तथा अकड़न होने लगती है।

●●●
3.यूरिक एसिड वात रोग
गाउट रोग बहुत अधिक कष्टदायक होता है। यह रोग रक्त के यूरिक एसिड में वृद्धि होकर जोड़ों में जमा होने के कारण होता है। शरीर में यूरिया प्रोटीन से उत्पन्न होता है, लेकिन किसी कारण से जब यूरिया शरीर के अंदर जल नहीं पाता है तो वह जोड़ों में जमा होने लगता है और बाद में यह पथरी रोग का कारण बन जाता है।

●●●

मांसपेशियों में वातदर्द :-

         इस रोग के कारण रोगी की गर्दन, कमर, आंख के पास की मांस-पेशियां, हृदय, बगल तथा शरीर के अन्य भागों की मांसपेशियां प्रभावित होती हैं जिसके कारण रोगी के शरीर के इन भागों में दर्द होने लगता है। जब इन भागों को दबाया जाता है तो इन भागों में तेज दर्द होने लगता है।

●●●
4.गठिया

        इस रोग के कारण हडि्डयों को जोड़ने वाली तथा जोड़ों को ढकने वाली लचीली हडि्डयां घिस जाती हैं तथा हडि्डयों के पास से ही एक नई हड्डी निकलनी शुरू हो जाती है। जांघों और घुटनों के जोड़ों पर इस रोग का बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है और जिसके कारण इन भागों में बहुत तेज दर्द होता है।

●●●
अब जाने
           *वात रोग के लक्षण*

वात रोग से पीड़ित रोगी के शरीर में खुश्की तथा रूखापन होने लगता है।

वात रोग से पीड़ित रोगी के शरीर की त्वचा का रंग मैला सा होने लगता है।

रोगी व्यक्ति को अपने शरीर में जकड़न तथा दर्द महसूस होता है।वात रोग से पीड़ित रोगी के सिर में भारीपन होने लगता है तथा उसके सिर में दर्द होने लगता है।

रोगी व्यक्ति का पेट फूलने लगता है तथा उसका पेट भारी-भारी सा लगने लगता है।रोगी व्यक्ति के शरीर में दर्द रहता है।

वात रोग से पीड़ित रोगी के जोड़ों में दर्द होने लगता है।रोगी व्यक्ति का मुंह सूखने लगता है।

वात रोग से पीड़ित रोगी को डकारें या हिचकी आने लगती है।

●●◆
अब जाने
वात रोग होने का कारण :-


वात रोग होने का सबसे प्रमुख कारण पक्वाशय, आमाशय तथा मलाशय में वायु का भर जाना है।

भोजन करने के बाद भोजन के ठीक तरह से न पचने के कारण भी वात रोग हो सकता है।

जब अपच के कारण अजीर्ण रोग हो जाता है और अजीर्ण के कारण कब्ज होता है तथा इन सबके कारण गैस बनती है तो वात रोग पैदा हो जाता है।

पेट में गैस बनना वात रोग होने का कारण होता है।जिन व्यक्तियों को अधिक कब्ज की शिकायत होती है उन व्यक्तियों को वात रोग अधिक होता है।

जिन व्यक्तियों के खान-पान का तरीका गलत तथा सही समय पर नहीं होता है उन व्यक्तियों को वात रोग हो जाता है।

ठीक समय पर शौच तथा मूत्र त्याग न करने के कारण भी वात रोग हो सकता है।

●●
अब जाने

वात रोग होने पर प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार :-

वात रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को अपने हडि्डयों के जोड़ में रक्त के संचालन को बढ़ाना चाहिए। 
●●

*क्या करे इस के लिए*

वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को लगभग 4 दिनों तक फलों का रस (मौसमी, अंगूर, संतरा, नीबू) पीना चाहिए।

इसके साथ-साथ रोगी को दिन में कम से कम 4 बार 1 चम्मच शहद चाटना चाहिए।

●●

इसके बाद रोगी को कुछ दिनों तक फलों को खाना चाहिए।

कैल्शियम तथा फास्फोरस की कमी के कारण रोगी की हडि्डयां कमजोर हो जाती हैं इसलिए रोगी को भोजन में पालक, दूध, टमाटर तथा गाजर का अधिक उपयोग करना चाहिए।

पर यूरिक एसिड रोग  में इनका सेवन न करे।
●●●

कच्चा लहसुन वात रोग को ठीक करने में रामबाण औषधि का काम करती है इसलिए वात रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन कच्चे लहसुन की 4-5 कलियां खानी चाहिए।

●●

वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को भोजन में प्रतिदिन चोकर युक्त रोटी, अंकुरित हरे मूंग तथा सलाद का अधिक उपयोग करना चाहिए।

●●
रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम आधा चम्मच मेथीदाना तथा थोड़ी सी अजवायन का सेवन करना चाहिए।

●●
इनका सेवन करने से यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी को प्रतिदिन सुबह तथा शाम के समय में खुली हवा में गहरी सांस लेनी चाहिए। इससे रोगी को अधिक आक्सीजन मिलती है और उसका रोग ठीक होने लगता है।

●●
शरीर पर प्रतिदिन तिल के तेलों से मालिश करने से वात रोग ठीक होने लगता है।रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह के समय में धूप में बैठकर शरीर की मालिश करनी चाहिए। धूप वात रोग से पीड़ित रोगियों के लिए बहुत ही लाभदायक होती है।

●●●
वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए तिल के तेल में कम से कम 4-5 लहसुन तथा थोड़ी सी अजवाइन डालकर गर्म करना चाहिए तथा इसके बाद इसे ठंडा करके छान कर इस तेल से प्रतिदिन हडि्डयों के जोड़ पर मालिश करें। इससे वात रोग जल्दी ही ठीक हो जायेगा।

●●

*अगर आप वातरोग के आधीन आ गए हैं तो 2 से  5 महीने तक सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण जरूर इस्तेमाल करे।*

●●

*सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण online भी* 
         *आप मगवा सकते हैं।*

*कैसे बनता है सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण*

नीचे लिंकः को टच करे।

https://ayurvedasidh.blogspot.com/2017/12/blog-post_95.html

Sidh ayurvedic. com

हम आप जी की सेवा में आयुर्वेदिक नुस्खे, जड़ी बूटी ज्ञान और घरेलू नुस्खे निशुल्क प्रदान करते हैं।