Online सिद्ध आयुर्वेदिक दवा कैसे मगवाएँ

                                 Online सिद्ध आयुर्वेदिक दवा कैसे  मगवाएँ

  *सभी सिद्ध अयूर्वादिक दवा लिस्ट*

अभी whats 94178 62263 पर मैसिज करे।

दवा का नाम लिखे और कैसे मंगवाएं पूछे।

तुरंत आप को जवाब मिलेगा।

sidhayurveduc.com

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   गर्भधारण कल्पचुर्ण     

 300 ग्राम  1050 रुपये

कायाकल्प चुर्ण 200 ग्राम 325

  टोटल 1375 जमा होंगे

दोनों चूर्ण कब औऱ कैसे उपयोग करे

                                   

कायाकल्प चुर्ण

   कायाकल्प चूर्ण कैसे और कब उपयोग करे-

मासिक धर्म से 15 दिन पहले कायाकल्प चूर्ण सुबह खाली पेट औऱ रात को सोते समय गर्म पानी से इस्तेमाल करे

कायाकल्प चूर्ण क्यों इस्तेमाल करे-

कायाकल्प चूर्ण मासिक धर्म की हर समस्या सही करेगा।

जैसे :  बंद ट्यूब, गर्भाशय की सफाई, कमजोरी औऱ गर्भशय की गांठ आदि को ठीक करेगे।

★★★

       सफ़ेद दाग  मूल्य

वजन 400 ग्राम

मूल्य 860

डाक खर्च ताहित (पार्सल रेट)

Speed post 960 रुपये

50 दिन दवा

★★

सिद्ध शीतल कल्पचुर्ण

400 ग्राम

750 रुपए with डाक खर्च।

30 दिन की दवा

★★★

सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण

जन 500 ग्राम

मूल्य 600  रुपये

40 दिन की दवा

डाक खर्च समेत

◆◆◆

साइनस की दवा

सिद्ध कफ़ कल्पचुर्ण

200 ग्राम 600 रुपये

डाक पार्सल समेत

★★

पीलिया रोग की  आयुर्वेदिक दवा

पीलिया नाशक कल्पचुर्ण

वजन 400 ग्राम र 1050 डाक पार्सल free

21 दिन की दवा

★★

ह्रदय रोग और बढ़े कालेस्ट्राल की दवा

40 दिन की दवा 400 ग्राम 1050 रुपये

with कोरियर

★★★

■.बढ़े लिवर, फेंटी लिवर में रामबाण दवा

     ★सिद्ध  लिवर क्ल्पचुर्ण ★

300 ग्राम 750 रुपये with कोरियर

30 दिन की दवा है।

★★★

सिद्ध वातदर्द क्ल्प चुर्ण

300 ग्राम दवा 600 रुपये

500 ग्राम 1000 रुपये

1kg 1800 रुपये

30 दिन की दवा

डाक पार्सल फ्री

★★★

शरीरिक बलवर्धक चुर्ण

400 ग्राम 1050 रुपये

40 दिन की दवा

★★★

शुगर की कामयाब दवा

सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण

500 ग्राम दवा 850 रुपये

40 दिन की दवा

डाक पार्सल फ्री

★★★

खून शुद्धि की अयूर्वादिक दवा

300 ग्राम 750 रुपये

30 दिन की दवा

डाक पार्सल फ्री

★★★

.अधरंग, पक्षाघातकी अयूर्वादिक दवा

लकवे की दवा

400 ग्राम 1260  (आप के लिए 1050)

आयल 200 ग्राम 570 रुपये

★★

शुगर रोगी के लिए

कामक्ल्प चुर्ण

400 ग्राम 1260

★★★

■.

सिद्ध बुद्धिवर्धक चूर्ण

400 ग्राम 1050


“★★★

एक्जिमा और  सोरसिस दवा

सिद्ध त्वचा कल्पचुर्ण

*वजन 400 ग्राम*

*मूल्य 1050 रुपये*

*सिद्ध त्वचा रोग नाशक क्रीम*

          *वजन 100 ग्राम*

           *मूल्य 250 रुपये*

     *Speed पोस्ट 105 डाक खर्च*

      *टोटल 1455 रुपये जमा होंगे।*

                 *30 दिन की दवा

★★

■.

पुराना सिर दर्द नुस्खा

100 ग्राम 300 रुपये

★★

■ई

पीरियड की कैसी भी समस्या हो

*नारी समस्या निदान कल्पचुर्ण*

200 ग्राम 550 रुपये

★★

मोटापा कम करने का योग

मोटापा नाशक कल्पचुर्ण

500 ग्राम 860 रुपये

1 kg  1500 रुपये

सभी दवा का डाक खर्च साथ ही है।

★★★

■  

सिद्ध कफ़ चुर्ण

300 ग्राम 750 रुपये

★★★

कायाकल्प चुर्ण 500 ग्राम 700 रुपये।

★★

खून शुद्वि की दवा

सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण

300 ग्राम 750 रुपये

★★

  बुखार की दवा

    *सिद्ध ज्वर नाषक कल्पचुर्ण*

200 ग्राम दवा 400 रुपये with

कोरियर खर्च

◆◆

सिद्ध नाड़ी दुर्बलता कल्प चूर्ण

400 Gram 1050 रुपये

★★

■ त्वचा कल्पचुर्ण

दाद खाज खुजली के लिए।

300 ग्राम

750 रुपये

***

■■■

कैंसर की दवा

सिद्ध कैंसर नाशक कल्पचुर्ण

40 दिन की दवा

वजन 400 ग्राम

मूल्य 1050 रुपये सिद्ध आयुर्वेदिक

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सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण

300ग्राम –1550 र

30 दिन की दवा

वजन 400 ग्राम

मूल्य 2050

40 दिन की दवा with डाक खर्च।

सेवन विधि

सुबह शाम शाम खाने के 1घंटे के बाद मीठे दूध से ले।

नोट- सूगर के मरीज न ले।

धातु ,शक्राणु, मर्दाना और शीघ्रपतन की यह रामबाण दवा है।

*20 मिनट सफल  संभोग क्रिया*

*पेशाब में गर्मी की जलन, गर्मी कारण इंफेक्शन जड़ से खत्म होगी।*

*सपनदोष नही होगा*

*धातु रोग जड़ से खत्म होगा*

नोट

* सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण के साथ शिश्न की लगातार मालिश जरूर करे*

नारियल तेल 100 ml

काला तिल तेल 50 ml

बादाम तेल      25 ml

इतर गुलाब  5ml

दोनों को मिलाकर 10 मिनट सुबह 10 मिनट शाम को शिश्न की मालिश जरूर करे।

शिश्न नाड़ियों की कमजोरी दूर होगी

हमारी गरंटी होगी।

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लकोरिया और धातु की दवा

सिद्ध धातु पुष्टि कल्पचुर्ण

वजन 300 ग्राम

मूल्य 1050

★★

नोट

दवा डाक से जाएगी।

डाक खर्च साधारण जोड़ा हुआ है।

पर

Speed post का 4 अलग से होगा।

अपना पता साफ साफ लिखे।

आप को पहले अकाउंट मे

दवा की राशि जमा रकरानी होगी ।

फिर आप को दवा कोरियर होगी ।

हमारा अकाउंट है है -:

*Paytm9417862263*

Swami veet das c/ ranjit Singh

*State bank of india*

*A/c -65072894910*

Ranjit Singh

Bank code –50966

*Ifsc code -sbin0050966*

Sarhind barach

Fatehgarh sahib (punjab )   

★★★

नोट

दवा डाक से जाएगी।

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Pay दांत मंजन

*सिद्ध नीम दांत मंजन*

वज़न – -200 ग्राम

मूल्य – 260 रुपये

कोरियर खर्च – 70 रुपये

कूल राशि = -330 रुपये

नोट

अपना पता साफ साफ लिखे।

आप को पहले अकाउंट मे

दवा की राशि जमा रकरानी होगी ।

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सिद्ध नीम दांत मंजन

🌱 सिद्ध नीम दांत मंजन 🌱

🌱 नीम दांतुन अब होगी आप के घर।🌱

मसूड़ों करे मजबूत, पायरिया को करे जड़ से ख़त्म,मुंह की बदवू, दांत कीड़ा, मुंह की इंफेक्शन,खून इंफेक्शन और भी अनंत फायदेमंद है। घर बना सकते हैं आप।

🌱 नीम दांत मंजन योग 🌱
नीम पंचांग पॉडर 100 ग्राम
सोंठ 20 ग्राम
काली मिर्च 20 ग्राम
पीपर 20 ग्राम
हरड़ 30 ग्राम
बहेड़ा 10 ग्राम
आंवला 20 ग्राम
दालचीनी 10 ग्राम
तेजपत्र 10 ग्राम
इलायची 5 ग्राम
सेंधा नमक 20 ग्राम

*सभी चूर्ण लेकर 100 ग्राम नीम रस में भावना दे। तथा तिल का तेल 50 ml मिलाकर पेस्ट बनायें।*
🌴🌴🌴
अब इसे अपने दांतों पर उंगली की सहायता से या फिर ब्रश की सहायता से करें।
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🌱 नीम दांत मंजन का महत्व 🌱

दांतों को लेकर नीम के फायदे से कोई अनजान नहीं है। नीम की पत्तियां जहां संक्रमणरोधी होती हैं वहीं नीम के दातुन दांतो के लिए एक वरदान की तरह होते हैं।

दांतों में किसी भी प्रकार की तकलीफ हो नीम के दातुन के पास उन सबका इलाज मौजूद होता है। मुंह की दुर्गंध भी आजकल लोगों की एक अहम समस्या है।

दांतों पर तथा मुंह में मौजूद तमाम तरह के बैक्टीरिया ही मुंह की बदबू के सबसे बड़े कारक होते हैं।

ऐसे में नीम का दातुन इन सभी बैक्टीरिया को खत्म करने में काफी लाभकारी होता है। नीम के दातुन से दांत काफी मजबूत होते हैं। साथ ही साथ उनमें कोई भी रोग लगने की संभावना लगभग खत्म हो जाती है।
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🌱 Online अयुर्वेदिक दवाओं के लिए 🌱
🌱 Whats 78890 53063🌱
🌱Telegram 94178 62263 🌱

सिद्ध वातदर्द क्ल्पचुर्ण

https://youtu.be/QEgbLPACkEE*80 प्रकार के वातरोग दर्दो की दवा*
★ *सिद्ध वातदर्द क्ल्पचुर्ण*★
*Whats 78890 53063* *समस्त वा रोग में रामबाण*
*शरीर मे खिंचाव रहता तो दवा ले।कोई भी नस दबी हो तो यह दवा 90 दिन इस्तेमाल करे*
*इंग्लिश दर्द युक्त दवाईयों से मुक्ति पाएं* *यह दवा शुगर के मरीज भी ले ।यह योग शुगर को भी नार्मल करता है।* *यह दवा online से भी मंगवा सकते है।*
* Whats 78890 53063*
◆अफस्फीत शिराएंV(aricose veins) दर्द
◆सर्वकल दर्द
◆छाती का दर्द
◆घुटनों का दर्द,
◆जोड़ा का दर्द और सुजन,
◆कमर दर्द ,गठिया दर्द
◆समस्त शरीर का दर्द
◆युरिक एसिड दर्द
◆माइग्रेन का दर्द
◆डिस्क का दर्द
◆सिर (आधा) दर्द
◆नस ब्लॉक दर्द
◆नजला के दर्द*यह दवा 80 प्रकार के वातरोग दर्दो के लिए है। क्योंकि यह दवा हमारे शरीर मे रोग प्रीतिरोधक जीवाणुओं को बढ़ाती है।**अगर किसी के घुटनों की ग्रीस खत्म हो चुकी हो और उनका चलना, उठना और सीढ़ी चढ़ना मुश्किल हो गया हो तो यह दवा कारगर होगी।* *दवा क्या है*
इंद्रयाण अजवाइन 100 ग्राम
सौंठ भुनी 50 ग्राम
सोंठ, काली मिर्च और पीपर – 5-5 ग्राम।
पिपरामूल, चित्रकमूल, च्‍वय, धनिया, बेल की जड, अजवायन, सफ़ेद जीरा, काला जीरा, हल्‍दी, दारूहल्‍दी, अश्‍वगंधा, गोखुरू, खरैटी, हरड़, बहेड़ा, आंवला, शतावरी, मीठा सुरेजान, शुद्ध कुचला, बड़ी इलायची, दालचीनी, तेजपात, नागकेसर 4-4 ग्राम।
*5 और महत्वपूर्ण अयुर्वेदिक जड़ी बूटी * ….योगराज गुग्‍गल 100 को कूटने के बाद बारीक पीस लें और छान कर मिला लें।200 ग्राम एलोवेरा रस में भावना दे और साय में सुखाए।
दवा तैयार हो गई ।सेवन विधि –
1-1 चम्मच छोटा सुबह-शाम दूध के साथ ले ।☆☆☆*घुटनों के दर्द में दवा के साथ यह जरूर करे दिन 2 बार*
*3 लीटर पानी में 200 ग्राम नमक 200 ग्राम सरसों का तेल डालकर गरम कर लें। फिर उस पानी में कपड़ा भिगोकर लगभग 10 मिनट तक नित्य सेंकाई करें।*☆☆☆☆ *परहेज*
*घुटने दर्द में क्या खाएं क्या नहीं**अपथ्य भोजन:- (तीन से छह महीनों तक क्या न खाएं):- केला,सब खट्टे फल व पदार्थ ( नींबू, अचार इत्यादि) सब ठंडे पदार्थ, सब सूखे मेवे खासकर काजू ,बादाम इत्यादि उड़द दाल का उपयोग न करे। जोड़ो के दर्द ठीक होने में कब्ज सबसे बड़ी समस्या है इसलिये पेट का रोज साफ होना जरूरी है।**पथ्य:- दिन में भोजन के पहले गेंहू के दाने के बराबर चुना थोड़े से देशी गुड़ व देशी गाय के घी के साथ खाएं । कम से कम 20 मिनट धूप में (कम से कम कपड़े पहन कर ) बैठे।*◆◆
घुटने के दर्द में केवल ठंडी तथा वायु बनाने वाली चीजों का उपयोग वर्जित है।फलों तथा हरी तरकारियों का सेवन अधिक करें| मट्ठा, चाट, पकौड़े, मछली, मांस, मुर्गा, अंडा, धूम्रपान आदि का सेवन बिलकुल न करें।*घुटनों को मोड़कर नहीं बैठना चाहिए।*
*पेट को साफ रखें तथा कब्ज न बनने दें।*
*दूध के साथ ईसबगोल की भूसी का प्रयोग करें।*
*शरीर को अधिक थकने वाले कार्य न करें।* प्रतिदिन सुबह-शाम टहलने के लिए अवश्य जाएं।****
*साथ मे यह करे ज्यादा फायदा होगा**आलू, शिमला मिर्च, हरी मिर्च, लाल मिर्च, अत्‍यधिक नमक, बैगन आदि न खाये।**घुटनो की गर्म व बर्फ के पैड्स से सिकाई करे।
घुटनो के निचे तकिया रखे।**वजन कम रखे इसे बढ़ने न दे।ज्‍यादा लम्बे समय तक खड़े न रहे।आराम करे दर्द बढ़ाने वाली गति विधिया न करे इससे आपका दर्द और बढता जायेगा और आप इसे सहन नहीं कर पाएंगे।**सुबह खली पेट तीन से चार अखरोट खाये, विटामिन इ युक्त खाना खाये धुप सेके।* *अभी ऑनलाइन मंगवाए*
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*सिद्ध अयुर्वेदिक में*
*आप जी का स्वागत है।*
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*आने शुरू हो जाएंगे।*
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*साथ मे आप जी के लिए*
*शुभ कामनाएँ*
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*प्रभु से हम आप,आप के परिवार मित्र, संबंधी रिश्तेदार और प्रेमियों स्नेहीजनों के अच्छे स्वस्थ की कामना करते हैं।*
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*चमड़ी के रोग*
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*80 प्रकार के वातदर्द रोग*
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*गुर्दे के रोग औऱ गुर्दे की पथरी रोग*
*पित्त पथरी रोग*
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सिद्ध कायाकल्प चुर्ण और पंचकर्म चिकित्सा

                     

सिद्ध कायाकल्प चुर्ण और पंचकर्म आयुर्वेदिक चिकित्सा

                     दिनों के है एक जैसे काम

अगर  आप जी ले रहे है ,पंचकर्म आयुर्वेदिक चिकित्सा *तो साथ मे इस्तेमाल करे *सिद्ध कायाकल्प चुर्ण *आप को होगा दुगना फायदा *नही होने देगा कोई नुकसान *सिद्ध कायाकल्प चुर्ण की *पुरी जानकारी whats 94178 62263 प्राप्त करे*

पंचकर्म आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने की आयुर्वेदिक चिकित्सा है। पंचकर्म चिकित्सा में पांच प्रक्रियाएं होती हैं -*वमन, विरेचन, नस्य, रक्तमोक्षण और अनुवासनावस्ती।*

*इन पांचों का संयोजन पंचकर्म कहलाता है। इन पांचों का उद्देश्य आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना और स्वस्थ व संतुलित बनाना होता है।*

*आयुर्वेद विज्ञान आपको इस बात का संकेत देता है कि अधिक तनाव आपके आंत की नली या जठरांत्र मार्ग के लिए बहुत अधिक नुकसानदायक होता है।*

*जठरांत्र मार्ग में असंतुलन की वजह से सूजन होता है और पाचन क्रिया भी प्रभावित होती है। सूजन और पाचन क्रिया सही न होने की वजह से आपके शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा होने लगता है और शरीर बीमारियों का शिकार होने लगता है।*

*इसके साथ ही साथ कई प्रकार की बीमारियां भी जन्म लेती हैं।*

*पंचकर्म के माध्यम से आपके शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलता है और आपका शरीर अधिक सक्रिय हो जाता है। विषाक्त पदार्थ बाहर निकलने और शरीर अधिक सक्रिय होने की वजह से आप अधिक उर्जावान महसूस करते हैं और मानसिक स्तर पर भी सुधार होता है। आपके पाचन क्रिया को मजबूत बना कर पंचकर्म प्राकृतिक रूप से आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने का काम करता है।*

*पंचकर्म आयुर्वेदिक प्रक्रिया के माध्यम से शरीर के विभिन्न अंग जैसे फेफड़े, मू्त्राशय, पसीने की ग्रंथि, पेट और आंत से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है।*

*सिद्ध कायाकल्प चुर्ण भी पंचकर्म चिकित्सा की भांति विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण काम करता है। *सिद्ध कायाकल्प चुर्ण और पंचकर्म चिकित्सा एक जैसा ही काम करते हैं। *जब आप दोनों चिकित्सा एक साथ अपनाएँगे तो जल्दी और दुगना फायदा होगा।*

        क्या है कायाकल्प चूर्ण(What is Kayakalpa churan)

कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था।

कायाकल्प चुर्ण के वैसे तो कई फायदे हैं— *लेकिन इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं *नशों की कमजोरी को दूर करता है।• व्यक्ति की सुंदरता एंव स्वास्थ्य के साथ-साथ लंबे समय तक उन्हें जवानी को बरकरार बनाए रखना।• नेचुरल एजिंग प्रोसेस को धीमा करना •

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क्या है काया कल्प चूर्ण में आए जाने -:::
*त्रिफला -250 ग्रा *इंद्राण से बनी हुई अजमायन-200 ग्राम*गिलोय चूर्ण-100 ग्राम
बेल 200 ग्राम *अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम * ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम *शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम *कलौंजी -100 ग्राम *आवला चूर्ण-100 ग्राम *नसांदर -100 ग्राम *अपामर्ग -50 ग्राम *जटामांसी -50 ग्राम * सत्यनाशी -50 ग्राम * काला नमक -50 ग्राम *सेंधानमक -50 ग्राम *ऐलोवैरा रस -500 ग्राम

सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर सांय मे सुखाय । नोट-इंद्रयाण से बनी अजवाइन के बिना बना कायाकल्प बिलकुल काम नही करेगा।*

*जब सुख जाए तब आप का काया कल्प चूर्ण बनकर तैयार हो गया है।*सेवन विधि – अगर आप बिमार है तो दिन एक -एक चम्मच 3 बार ले। अगर आप सदा स्वास्थ्य रहना चाहते है तो एक चम्मच सुबह खाली पेट ले।*

                                          फायदे जाने

*यूरिन इन्फेक्शन में फायदेमंद है कायाकल्प चुर्ण* -पेशाब में संक्रमण का सीधा असर किडनी पर पड़ता है और समस्या गंभीर होने पर किडनी फेलियर तक हो सकता है। ऐसी स्थिति में शरीर में उपस्थित हानिकारक पदार्थ शरीर से बाहर निकलने की बजाए शरीर में ही घुलने लगते है।काफी देर तक पेशाब रोक कर रखे तो पेशाब का रंग गहरा आने लगता है जो यूरिन इन्फेक्शन सिम्पटम्स है

अगर प्रेशर बढ़ने के बाद भी पेशाब ना किया जाए तो ये गुर्दे की तरफ वापिस जाने लगता है जिससे गुर्दों को नुकसान होता है।
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*PCOD रोग में यह रामबाण काम करता हैं। *दिन में 3 बार पानी से सेवन करे* PCOD से शरीर पर क्या असर होता हैं।इस कारण से महिलाओ के मासिक धर्म (Menstrual Cycle) के साथ प्रजनन क्षमता (Fertility)PCOD पर भी असर पड़ता है, और महिला गर्भधारणा करने में असमर्थ हो जाती है।अगर PCOD का इलाज न किया जाए तो आगे जाकर यह गर्भाशय के कर्करोग (Cancer) का रूप भी ले सकती है।

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         काया कल्प चूर्ण के Multipurpose Benifits है

●पथरी 5 mm तक की 3 दिन में गुर्दे से बाहर निकल जाती है।
कैसे ले- 50 मिलीलीटर नीबू रस ले 300 ग्राम पानी मे मिलाकर 5 ग्राम दवा ले।
दिन में 4 बार दवा ले।जब दवा लेगे दर्द तत्काल मिट जाएगा।

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● नसों की कमजोरी में रामबाण है काया कल्प योग। ●

हर प्रकार की एलर्जी में फायदा। जैसे :-नाक में पानी, छीके, पुराना जुकाम, खाँसी, गले की एलर्जी।● थकान कभी महसूस नही करेंगे। एक उत्साह होगा काया कल्प लेने से।
● आंखों की नज़र ठीक होगी।● त्वचा की सलवटे दूर होती हे, त्वचा के रंग में निखार आता हे ,चर्म रोग दूर होते हे ,त्वचा कांतिमय व् ओजमय बनती हे● यूरिया बढा हो काया कल्प रामबाण की भांतिकाम करता है ।

●ओवरी में सूजन ‘,पानी भरना’ अंडा न बनना।,मासिक धर्म कम आना ठीक करेगी यह काया कल्प।● शरीर मे गांठे हो तो काया कल्प रामबाण की भांति काम करता है ।● माइग्रेन में जबरदस्त लाभ होगा।● बालो की वृद्धि तेजी से होती है, ● अनावश्यक चर्बी घटेगी.● पुरानी कब्ज से मुक्ति मिलेगी ● खून साफ़ होगा ● रक्त नलिकाए साफ़ होगी. ● शरीर के समस्त दर्द 7 दिन ठीक होगे । ● युरिक एसिड जड़ से खत्म होगा।● शरीर के कोने कोने में जमी गंदगी इसके नियमित सेवन से पेशाब के द्वारा बाहर निकल जायेगी नया शुद्ध खून बनेगा. ◆ औरतों की पीरियड की समस्या हो तो काया कल्प रामबाण जैसा काम करता है ।◆ शरीर सुडोल ,मजबूत व आकर्षक बनता हे बल -बुद्धि – वीर्य की वृद्धि करता है । ● नपुसंकता दूर होती है। ● माहलाओं में सेक्स की कमी को पूरा करेगा काया क्ल्प चूर्ण
● कब्ज दूर होती हे , जठराग्नि व् पाचन शक्ति बढती है। और बादी /खूनी बवासीर खत्म होगी ● व्यक्ति का तेज बढ़ता हे , ● बुढ़ापा जल्दी नहीं आता दात मजबूत होते है। ● हड्डीया मजबूत होती है। ● रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है। ● ह्रदय की कार्यक्षमता बढती है। ◆ कोलेस्ट्रोल बढ़ता है तो समान्य हो जाएगा । ●आलोपथिक द्वइयो के साइड इफ़ेक्ट कम करता है।
● यह चूर्ण आयुष्य वर्धक है । ● आयु बढ़ेगी ● घठियावादी हमेशा के लिए दूर होती है।
◆ Diabetes काबू में रहती है। ● कफ से मुक्ति मिलती है।

परहेज क्या करें – अंडा, मांस, मछली, नशीले पदार्थो का सेवन एवं तली हुई वस्तु औगर फास्ट फूड वर्जित हैं

अगर आप *पंचकर्म आयुर्वेदिक चिकित्सा*ले रहे है या दे रहे हैं तो सिद्ध कायाकल्प चुर्ण एक बार जरूर इस्तेमाल करें। *100% फायदा होगा*

*Online मंगवाने के मैसिज करे* Whats 94178 62263
                      Email-sidhayurveda1@gmail.com

अम्लपित्त हाईपर एसिडिटी कारण औऱ घरेलू उपाय

*सिद्ध अम्लपित्त नाशक कल्पचुर्ण या सिद्ध पाचन कल्पचुर्ण ऑनलाइन मंगवाए- whats/telegram 94178 62263*

जब गलत खानपान और अपच के कारण पेट में पि‍त्त के विकृत होने पर अम्ल की अधिकता हो जाती है, तो उसे अम्लपित्त कहते हैं। यही अम्लपित्त हाईपर एसिडिटी कहलाता है। आइए जानते हैं, इसके कारण, लक्षण और इससे बचने के उपाय –
हाइपर एसिडिटी के कारण – अत्यधि‍क गर्म, तीखा, मसालेदार भोजन करने, अत्यधि‍क खट्टी चीजों का सेवन, देर से पचने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन, नशीले पदार्थों का सेवन करने से हाइपर एसडिटी की समस्या पैदा होती है। भोजन को पचने के लिए पर्याप्त समय न देना और अपच के बावजूद खाते रहना, आपकी इस समस्या को बढ़ा सकता है।
लक्षण – भोजन का पाचन नहीं होना, बगैर किसी मेहनत के ज्यादा थकावट होना, कड़वी या खट्टी डकार आना, शरीर में भारीपन, हृदय के पास या पेट में जलन होना, कभी-कभी उल्टी होना, उल्टी में अम्ल या खट्टे पदार्थ का निकलना, मिचली होना और मुंह से खट्टा पानी आना, सिरदर्द, आंखों में जलन, जीभ का लाल होना जैसे लक्षण हाइपर एसिडिटी में सामने आते हैं।
हाइपर एसिडिटी की समस्या से बचने के लिए आप घर पर ही कुछ उपाय और सावधानियां अपना सकते हैं जिससे आपको यह समस्या न हो –
1 गेहूं या जौ के आटे की बनी चपातियां ही खाएं, क्योंकि यह पाचन संबंधी समस्या पैदा नहीं करती, ना ही इससे गैस बनने जैसी समस्या होती है। बल्कि यह आपकी पाचनक्रिया को बेहतर करेगी।


2 मूंग की दाल, लौकी, तरोई, परवल, गिलकी, टिंडे, कद्दू जैसी सब्ज‍ियों को अनदेखा बिल्कुल न करें। यह आपके पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखती है, और हाइपर एसिडिटी से आपको बचाती है।

3 फलों में पपीता, मौसंबी, अनार आदि को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं। इसके अलावा नारियल और नारियल पानी का भी भरपूर सेवन करें।

4 मुनक्का, आंवले का मुरब्बा, कच्चा आंवला भी खाना बेहतर होगा।
5 अनार और आंवले के अलावा, खट्टी चीजों का अत्यधि‍क सेवन करने से बचें। इससे एसिडि‍टी बढ़ सकती है।

6 नींबू और टमाटर जैसी चीजों को भी नियंत्रित करें, इनके प्रयोग से आपकी यह समस्या बढ़ने में मदद मिलती है।

7 अत्यधि‍क गर्म, तीखा व मसालेदार भोजन करने से बचें। भारी खाद्य पदार्थों को भी खाने से बचें, ये आसानी से नहीं पचते जिससे आपकी समस्या कम होने के बजाए बढ़ जाती है।

8 दही और छाछ का ज्यादा सेवन न करें और उड़द की दाल की बनी चीजों व शराब या अन्य नशीले पदार्थों से दूरी बनाए रखें।
9 हल्का व आसानी से जल्दी पचने वाला भोजन ही करें, अन्यथा आपको बहुत अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
10 गुलकंद व गुलाब से बनी चीजों का सेवन आपके लिए फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि यह आपके पेट में जाकर ठंडक पैदा करता है, जिससे एसिडिटी में राहत मिलती है।

सिद्ध अम्लपित्त नाशक कल्पचुर्ण

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सिद्ध बाजीकरण योग

शक्ति की कमी है तो   

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जो व्यक्ति यौन संबन्ध नहीं बना पाता या जल्द ही शिथिल हो जाता है वह नपुंसकता का रोगी होता है। इसका सम्बंध सीधे जननेन्द्रिय से होता है। इस रोग में रोगी अपनी यह परेशानी किसी दूसरे को नहीं बता पाता या सही उपचार नहीं करा पाता मगर जब वह पत्नी को संभोग के दौरान पूरी सन्तुष्टि नहीं दे पाता तो रोगी की पत्नी को पता चल ही जाता है कि वह नंपुसकता के शिकार हैं। इससे पति-पत्नी के बीच में लड़ाई-झगड़े होते हैं और कई तरह के पारिवारिक मन मुटाव हो जाते हैं बात यहां तक भी बढ़ जाती है कि आखिरी में उन्हें अलग होना पड़ता है।कुछ लोग शारीरिक रूप से नपुंसक नहीं होते, लेकिन कुछ प्रचलित अंधविश्वासों के चक्कर में फसकर, सेक्स के शिकार होकर मानसिक रूप से नपुंसक हो जाते हैं मानसिक नपुंसकता के रोगी अपनी पत्नी के पास जाने से डर जाते हैं। सहवास भी नहीं कर पाते और मानसिक स्थिति बिगड़ जाती है।कारण :नपुंसकता के दो कारण होते हैं- शारीरिक और मानसिक। चिन्ता और तनाव से ज्यादा घिरे रहने से मानसिक रोग होता है। नपुंसकता शरीर की कमजोरी के कारण होती है। ज्यादा मेहनत करने वाले व्यक्ति को जब पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता तो कमजोरी बढ़ती जाती है और नपुंसकता पैदा हो सकती है। हस्तमैथुन, ज्यादा काम-वासना में लगे रहने वाले नवयुवक नपुंसक के शिकार होते हैं। ऐसे नवयुवकों की सहवास की इच्छा कम हो जाती है।लक्षण :मैथुन के योग्य न रहना, नपुंसकता का मुख्य लक्षण है। थोड़े समय के लिए कामोत्तेजना होना, या थोड़े समय के लिए ही लिंगोत्थान होना-इसका दूसरा लक्षण है। मैथुन अथवा बहुमैथुन के कारण उत्पन्न ध्वजभंग नपुंसकता में शिशन पतला, टेढ़ा और छोटा भी हो जाता है। अधिक अमचूर खाने से धातु दुर्बल होकर नपुंसकता आ जाती है।

                          सिद्ध बाजीकरण योग

सफेद मूसली -100 ग्राम ●कीकर फली -100 ग्राम (बीज रहित) ●अश्वगंधा -100 ग्राम ●सतावरी-100 ग्राम ●गोखरू-100 ग्राम ●जयफल -100 ग्रा ●जामुन – 100 ग्राम की गुठली ●कौंच के – 100ग्राम बीज के चूर्ण ●तालमखाना-50 ग्राम ●गिलोय चुर्ण-50 ग्राम ●सफेद जीरा-50ग्राम ●सेमल का चूर्ण -50ग्राम ●बबूल गोंद-50 ग्राम ●4 मगज-50ग्राम ●सालममिश्री-250ग्राम ●सालम पंजा-250ग्राम

सभी को मिलाकर चुर्ण बनाए।

सुबह शाम 5-5 ग्राम दूध के साथ ले।

वाजीकरण का सेवन करने के लिए जरूरी बातें-

आयुर्वेद में बताया गया है कि कम उम्र के बच्चों और ज्यादा उम्र के पुरुषों को वाजीकरण औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए। इनका सेवन लगभग 16 से 60 साल तक की उम्र के लोगों को करना चाहिए। क्योंकि यही उम्र सेक्स करने के लिए सबसे ज्यादा अच्छा होता है। 16 साल से कम उम्र में या 60 साल से ज्यादा की उम्र में सेक्स करना बेकार होता है क्योंकि बाल्यकाल (युवावस्था से पहले की उम्र) में शरीर की धातुएं (वीर्य, शुक्राणु) पूरी तरह से विकसित नहीं होते हैं और अगर ऐसे में वह स्त्री के साथ संभोग क्रिया करता है तो वह उसके लिए व्यर्थ ही होता है और कभी-कभी हानिकारक भी हो जाता है।

इसी तरह से 60 साल की उम्र अर्थातवृद्धावस्था में शरीर की सारी धातुएं (वीर्य, शुक्राणु) कमजोर हो जाती हैं। कमजोर शरीर वाला, कमजोर हड्डियों वाला व्यक्ति अगर किसी स्त्री के साथ संभोग करने में लग जाता है तो वह इसमें कुछ पाने के बजाय अपने शरीर का नाश करवा लेता है। रसायन औषधि के सेवन से जहां नएयौवन की प्राप्ति होती है वही वाजीकरण औषधियों के सेवन से यौनसुख मिलता है। जिस व्यक्ति का मन उसके वश में रहता है वह हमेशा वाजीकरण औषधि का सेवन कर सकता है।

● इसका इस्तेमाल दो महीने तक विस्तारपूर्वक करने से इससे काफी अधिक फायदा मिलता है।●यह वीर्य को अधिक गाढ़ा बनाता है।यह रात को होने वाले स्वप्न रोग, वीर्य का जल्दी गिरना और यौनांग के ढीलेपन एवं कमजोरी जैसे रोगों को समाप्त कर देता है-इससे हर प्रकार की शरीरक कमजोरी दूर होती है औरसुबह-शाम लेने से बाजीकरण यानी संभोग शक्ति ठीक होती है और नपुंसकता भी दूर हो जाती है।

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सिद्ध कायाकल्प तेल–योनि कसाव के लिए*

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सिद्ध कायाकल्प तेल

योनि कसाव के लिए -अयुर्वेदिक तेल

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*आजकल कुछ महिलाओं को बच्चे पैदा होने के बाद योनि में बहुत ढीलापन आ जाता है।*
*100 में 10 महिला होती है इस रोग की शिकार*
*जिस कारण हीनभावना से मन भरता है*


अगर आप को ऐसा महसूस होता है तो यह अयुर्वेदिक सिद्ध नुस्खा अपनाएँ।*

100 ग्राम अनार छिलका

50 ग्राम माजूफल

50 ग्राम एलोवेरा जैल

50 ग्राम मोचरस रस

50 ग्राम लाल फिटकरी

50 धाय के फूल


सभी सामग्री को 1 लीटर पानी मे उबालना शुरू करे। जब पानी आधा जल जाए तो 500 ग्राम तिल का तेल डाल दे।

*जब पानी जल जाए तो तेल को छानकर शीशी में भर ले और 10 ml गुलाब इतर डाल लें।


इस तेल को 3 बार योनि पर अंदर तक लगाए।तुरंत आप को फ़ायदा होने लगेगा।


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गुर्दे की पथरी के घरेलू अयुर्वेदिक नुस्खे

गुर्दे की पथरी के लिए अयुर्वेदिक नुस्खे

गुर्दे की पथरी की दवा

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गुर्दे की पथरी

किडनी स्‍टोन गलत खानपान का नतीजा है, इसके मरीजों की संख्‍या लगातार बढ़ रही है। गुर्दे की पथरी होने पर असहनीय दर्द होता है। जब नमक एवं अन्य खनिज (जो मूत्र में मौजूद होते हैं) एक दूसरे के संपर्क में आते हैं तब पथरी बनती है। कुछ पथरी रेत के दानों की तरह बहुत छोटे आकार के होते हैं तो कुछ मटर के दाने की तरह। आमतौर पर पथरी मूत्र के जरिये शरीर के बाहर निकल जाती है, लेकिन जो पथरी बड़ी होती है वह बहुत ही परेशान करती है। आगे के स्‍लाइडशो में जानिए पथरी के उपचार के लिए 10 प्रमुख हर्ब्‍स के बारे में।

आंवला

किड्नी स्‍टोन होने पर आंवले का सेवन करना चाहिए। आंवला का चूर्ण मूली के साथ खाने से गुर्दे की पथरी निकल जाती है। इसमें अलबूमीन और सोडियम क्लोराइड बहुत ही कम मात्रा में पाया जाता है जिनकी वजह से इन्हें गुर्दे की पथरी के उपचार के लिए बहुत ही उत्तम माना जाता है। इसलिए गुर्दे की पथरी होने पर आंवले का सेवन कीजिए।

तुलसी की पत्‍ती

गुर्दे की पथरी होने पर तुलसी के पत्‍तों का सेवन कीजिए। तुलसी के पत्तों में विटामिन बी पाया जाता है जो पथरी से निजात दिलाने में मदद करता है। यदि विटामिन बी-6 को विटामिन बी ग्रुप के अन्य विटामिंस के साथ सेवन किया जाये तो गुर्दे की पथरी के इलाज में बहुत सहायता मिलती है। शोधकर्ताओं की मानें तो विटामिन बी की 100-150 मिग्रा की नियमित खुराक लेने से गुर्दे की पथरी से निजात मिलती है।

बथुआ

बथुआ भी किड़नी स्‍टोन से निजात दिलाता है। आधा किलो बथुआ लेकर इसे 800 मिलि पानी में उबालें। अब इसे कपड़े या चाय की छलनी में छान लीजिए। बथुआ की सब्जी भी इसमें अच्छी तरह मसलकर मिला लीजिए। आधा चम्‍मच काली मिर्च और थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर दिन में 3 से 4 बार पीयें। इससे गुर्दे की पथरी निकल जाती है।

इलायची

इलायची भी गुर्दे की पथरी से निजात दिलाती है। एक चम्‍मच इलायची, खरबूजे के बीज की गिरी, और दो चम्‍मच मिश्री एक कप पानी में डालकर उबाल लीजिए, इसे ठंडा होने के बाद छानकर सुबह-शाम पीने से पथरी पेशाब के रास्‍ते से बाहर निकल जाती है।

जीरा

किड्नी स्‍टोन को बाहर निकालने में जीरा बहुत कारगर है। जीरा और चीनी को समान मात्रा में लेकर पीस लीजिए, इस चूर्ण को एक-एक चम्‍मच ठंडे पानी के साथ रोज दिन में तीन बार लीजिए। इससे बहुत जल्‍दी ही गुर्दे की पथरी से निजात मिल जाती है।

सौंफ

सौंफ भी गुर्दे की पथरी के लिए रामबाण उपचार है। सौंफ, मिश्री, सूखा धनिया इनको 50-50 ग्राम मात्रा में लेकर रात को डेढ़ लीटर पानी में भिगोकर रख दीजिए, इसे 24 घंटे के बाद छानकर पेस्‍ट बना लीजिए। इसके एक चम्‍मच पेस्‍ट में आधा कप ठंडा पानी मिलाकर पीने से पथरी पेशाब के रास्‍ते बाहर निकल जाती है।

बेल पत्र

बेल पत्र को पर जरा सा पानी मिलाकर घिस लें, इसमें एक साबुत काली मिर्च डालकर सुबह खायें। दूसरे दिन काली मिर्च दो कर दें और तीसरे दिन तीन, ऐसे सात दिनों तक लगातार इसका सेवन कीजिए। बाद में इसकी संख्‍या कम कीजिए, दो सप्ताह तक प्रयोग करने के बाद पथरी बाहर निकल जायेगी।

काली मिर्च

काली मिर्च भी गुर्दे की पथरी से निजात दिलाती है, काली मिर्च का सेवन बेल पत्‍तर के साथ करने से दो सप्‍ताह में गुर्दे की पथरी पेशाब के रास्‍ते बाहर निलक जाती है।

मेरे प्यारे मित्रो ऐसी ही घरेलु जानकारी और आयुर्वेदिक टिप्स पाने के लिए हमारे नीचे लिखे

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रोज़ाना 200 ग्राम मोटापा घटाएं

*रोज घटाएं 200 ग्राम वजन*
*सिद्ध मोटापा नाशक कल्पचुर्ण*
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*कैसे सेवन करे*
*3 करेला का जूस ले 200 ml पानी मिलाएं । 2 चमच्च मेथी दाना भुना हुआ जूस में मिलाएं। 300 ml के करीब बने जूस को 100 -100 ml कर दिन में 3 बार दवा के साथ ले।*

*विस्तार से जाने*
*आप अयुर्वेदिक की कौंन कौन सी जड़ी बूटी* *इस्तेमाल कर रहे हैं हम विस्तार से बताते हैं.*

*विश्वास का एक नाम है -सिद्ध आयुर्वेदिक*
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*कायाकल्प चुर्ण 500 ग्राम*
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*कायाकल्प चुर्ण 500 ग्राम 700 रुपये*
*टोटल 1560 रुपये जमा कराए*
*◆रोजाना 20 ग्राम दवा ले◆*
*60 दिन की दवा 1 किलोग्राम 1560 रुपये*

*पहली सेबन विधि*-

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*ताजे पानी से ले कर ऊपर करेला जूस ले।*

*करेला जूस ऐसा बनाए*
*3 करेला का जूस ले 200 ml पानी मिलाएं । 2 चमच्च मेथी दाना भुना हुआ जूस में मिलाएं। 300 ml के करीब बने जूस को 100 -100 ml कर दिन में 3 बार दवा के साथ ले।*

★★★
दूसरी -सेवन विधि
कायाकल्प चुर्ण सुबह खाली पेट और रात को सोते समय एक एक चम्मच हल्के गर्म पानी से सेवन करे।
★★★★
मोटापा नाशक कल्पचुर्ण दिन में 3 बार खाने से 1घंटा पहले गर्म पानी से सेवन करे।
★★★★★
पहलेे हल्के गर्म पानी से सेवन करे।
*परहेज के लिए पोस्ट पढ़े।*
★★
नोट
कोरियर केवल शहर मे ही जाएगा ।
पता शहर का ही दे ।
डाक से गांव में जाएगी दवा ।
अपना पता साफ लिखे।
आप को पहले अकाउंट मे
दवा की राशि जमा करानी होगी
फिर आप को दवा कोरियर होगी ।
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सिद्ध नारीशक्ति कल्पचुर्ण

*आयुर्वेदिक दवा*
*ओवेरियन सिस्ट के लिए*
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*कई महिलाओं को ये समस्‍या हारमोन्‍स के असंतुलन की वजह से होती है। ऐसे में हर्ब्‍स बहुत ही सहायक होती हैं। अलसी, तिल आदि का सेवन लाभकारी होता है और ये उस सिस्‍ट हो खत्‍म कर देते हैं। साथ ही नए सिस्‍ट को बनने से रोकते हैं।*

*अधिकांश महिलाऐं जो ओवेरियन सिस्ट की समस्या का सामना करती हैं उनमें कुछ खास लक्षण एक से देखे जा सकते हैं जिनमें कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं- ओवरी या अंडाशय में दर्द, सूजन, अनियमित मासिक धर्म, मूत्र से संबंधित समस्या, सेक्स के दौरान दर्द का अनुभव और वजन का बढ़ना.*

*अगर आपको बहुत ही गंभीर या तेज़ श्रोणि में दर्द, बुखार, चक्कर आना, जल्दी जल्दी सांस लेना या योनि में थोड़े थोड़े खून के धब्बों के साथ दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो यह दवा इस्तेमाल करे।*
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*क्या है अयूर्वादिक दवा*

सिद्ध नारीशक्ति कल्पचुर्ण
अलसी 200 ग्राम
सौंठ भुनी 100 ग्राम
बादाम भूनकर 100 ग्राम
काले तिल 100ग्राम
गिलोय चूर्ण 50 ग्राम
आंवला चूर्ण। 50 ग्राम
छोटी हरड़। 5 0 ग्राम
तुलसी पाचांग- 50 ग्राम
चरायता चूर्ण 40 ग्राम
अजमायण -40 ग्राम
मलॅठी। -10 ग्राम
काली मिर्च -10 ग्राम
सभी चूर्ण को मिलाकर रख ले ।
*पुनर्वा,खोखरू, हल्दी और 7 और महत्वपूर्ण जड़ी बूटी से तैयार और एलोवेरा रस युक्त।*

*सेवन विधि- दिन मे 4 बार 2-2 ग्राम 3-3 घंटे बाद लेते रहे।*
दवा पानी से ले ऊपर से 250 ग्राम गर्म दूध ले सकते हैं।
★★
परहेज और आहार
लेने योग्य आहार
डर्मोइड सिस्ट से मुकाबला करने में सहायक आहारों में हैं:
फल
भाररहित स्टार्च युक्त सब्जियाँ गाजर, टमाटर, सब्जियों का सलाद।
मछली
ग्लूटेन रहित अनाज
साबुत चावल
कच्चे मेवे और गिरियाँ।
औषधीय गुणों वाली वनस्पतियाँ, पत्तियाँ और लहसुन।
पानी की अधिक मात्रा।
इनसे परहेज करें
पारंपरिक डेरी उत्पाद
सफ़ेद शक्कर
सफ़ेद चावल/ मैदा।
हाइड्रोजनेटेड तेल।
ग्लूटेनयुक्त अनाज।
रेड मीट और वसायुक्त मीट।
प्रोसेस्ड आहार
शराब

*जरूरी ध्यान दे*
अगर आप ओवरियन सिस्ट से पीड़ित हैं तो ज़रूरी है कि आप पेय पदार्थों का ज़्यादा से ज़्यादा सेवन करें। एल्कलाइन पानी पीने की कोशिश करें।

आप एक ग्लास पानी में एक नींबू निचोड़कर भी डाल सकते हैं। पानी आपके शरीर से विषाक्त पदार्थ निकालने में मदद करता है और अंदर से इलाज भी करता है। इससे आपका अंडाशय में सिस्ट की वजह से होने वाले दर्द और सूजन से भी आराम मिलता है।

पानी के साथ साथ आप नारियल का पानी और हरी सब्ज़ियों के जूस भी पी सकते हैं। शराब, कॉफी और कोक, पेप्सी आदि न पीएं।

★★★★

साथ मे यह जरूर करे।
*ओवेरियन सिस्ट के लिए सेंधा नमक का प्रयोग*

सेंधा नमक बाथ अंडाशय में सिस्ट से जुड़े लक्षणों और दर्द को दूर करने में बहुत ही मदद करता है।

सेंधा नमक में मौजूद सल्फेट मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है जिससे दर्द से आपको राहत मिलती है।

★सेंधा नमक का इस्तेमाल कैसे करें ★

★सबसे पहले एक कप सेंधा नमक को अपने टब या बाल्टी में डाल लें और फिर उसे गर्म पानी से भर लें।
अब उसमे लैवेंडर के तेल, गुलाब या जैस्मिन के तेल की दस बूँदें डालें।

★फिर उस पानी को अच्छे से चलाते रहे जिससे नमक पूरी तरह से घुल जाए।

★अब 20 से 30 मिनट के लिए अपने निचले धड़ को उसमे डुबो दें या फिर उस पानी का इस्तेमाल पेट के निचले क्षेत्र पर करें ।

★इस उपाय को रोज़ाना पूरे दिन में एक बार ज़रूर दोहराएं।

★★★
ओवेरियन सिस्ट के लिए गर्म कपड़े से सेक करें –

गर्माहट मांसपेशियों की ऐठन या अंडाशय में सिस्ट की वजह से पेट के निचले हिस्से में दर्द के लिए काफी प्रभावी है।

हीटिंग पैड का इस्तेमाल कैसे करें –

सबसे पहले हीटिंग पैड या गर्म बोतUल को अपने पेट के निचले हिस्से पर रख लें।

इसे 15 मिनट के लिए ऐसे ही रखे रहने दें।
इस उपाय को तब तब करें जब जब आपको पेट के निचले हिस्से में दर्द महसूस हो।
★★★★

इसमें बादाम का उपयोग करे

बादाम एक मैग्नीशियम से समृद्ध आहार है जो ओवरियन सिस्ट की वजह से होने वाली दर्दभरी ऐठन को दूर करने में मदद करता है

बादाम का इस्तेमाल चार तरीकों से करें –

पहला तरीका –

रोज़ाना भुने बादाम को खाएं इससे आपको दर्द और असहजता से आराम मिलेगा।

दूसरा तरीका –

इसके अलावा आप बादाम के तेल से पेट की निचले हिस्से में मसाज करें। इससे दर्द और फूलने की समस्या से आराम मिलेगा।

तीसरा तरीका –

अच्छा परिणाम पाने के लिए, आप बादाम के तेल में जैस्मिन की कुछ बूँदें मिलाएं और फिर इसे मसाज की तरह इस्तेमाल करें।

चौथा तरीका –

आप एक चम्मच बादाम के तेल को एक ग्लास गर्म दूध में डालकर पी सकते हैं .
इस मिश्रण रोज़ाना एक बार ज़रूर पियें।
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*चकुंदर जरूर सेवन करे*

चुकंदर में बीटासियनिन (betacyanin) यौगिक होता है जो सिस्टम से विषाक्त पदार्थों को साफ़ कर लीवर की क्षमता को बढ़ाता है। इसके साथ ही इसके अल्कलाइन गुण शरीर में एसिडिटी को संतुलित करते हैं। इससे अंडाशय में सिस्ट से होने वाले लक्षणों को दूर करने में मदद मिलती है।

चुकंदर का इस्तेमाल कैसे करें –

सबसे पहले एक या आधा कप ताज़ा चुकंदर का जूस निकाल लें।

अब एक चम्मच एलो वेरा जेल और शीरा को इसमें मिला दें।

इस मिश्रण को अच्छे से चलाने के बाद पी जाएँ।
इस मिश्रण को अपने नाश्ते के बाद रोज़ाना एक बार ज़रूर पियें।

इस उपाय को तब तक दोहराएं जब तक इसके लक्षण दूर न हो जाएँ।

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सिद्ध बुद्धिवर्धक कल्पचुर्ण

*सिद्ध बुद्धिवर्धक कल्पचूर्ण*

                  * (शंखपुष्पादि चूर्ण)*

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*पैनिक अटैक में, दिमागी कमजोरी में कारगर*

★ पढ़ाई में कमजोर बच्चे यह चुर्ण उपयोग करे पढ़ाई की कमजोरी दूर होगी।

★ मानसिक तनाव, चिंता, डर, डिप्रेशन में कारगर है यह चुर्ण।

★ कोई भी उम्र हो यह चुर्ण उपयोगी हैं।

★ नींद की कमी पूरी कर दिमाग को स्वस्थ रखता है।

– एकाग्र ना हो पाना, कमजोर स्मरणशक्ति, अवसाद, चिंता, द्विध्रुवी विकार , भावनात्मक प्रतिक्रियाओं का बढ़ जाना-अधिक रोना या संवेदनशील या आक्रामक होना।

– यदि आप अत्यधिक तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहे हैं तो आप निष्क्रिय हो जाते हैं और कम काम करने लगते हैं। यह आपके काम की प्रगति को भी प्रभावित करता है।

  *तो यह चुर्ण आप को फायदेमंद साबित होगा*

आप बहुत आसानी से विचलित हो जाते  है और लगातार अज्ञात डर के नीचे आ जाते हैं।

प्रेरणा, समर्पण और आत्मविश्वास का अभाव होने लगते है तो यह चुर्ण आप को इन से बाहर ले कर आएगा।

आप अपने आप को दूसरे लोगों से अलग रखते हैं और आत्महत्या के विचार आते रहते हैं।

यह बुद्धिवर्धक चुर्ण आप को 100% लाभ देगा।

बुद्धिवर्धक चुुर्ण

आवश्यक सामग्री :-

शंखपुष्पी 150 ग्राम

गुडूची 100 ग्राम

ब्राह्मी 50 ग्राम

शतावर 50 ग्राम

बादाम 100 ग्राम

हल्दी 50 ग्राम

सोंफ 50 ग्राम

कालीमिर्च 10 ग्राम

छोटी इलायची बिज 10 ग्राम

तरबुज बिज गिरी 20 ग्राम

अश्वगंधा 50 ग्राम

आवला 50 ग्राम

जटामांशी 20ग्राम

तुलसी पंचाग 10 ग्राम

धागा मिश्री 250 ग्राम

सारे सामान को कुटपिस कर चूर्ण तैयार कर ले ।

और सुबह शाम एक एक चमच्च दूध के साथ ले।

बच्चों को आधा चमच्च दूध के साथ नित्य प्रयोग दे।

★★★

फायदे

◆मानसिक रोग में कारगर

◆दिमागी तनाव फायदेमंद

◆भूलने की आदत में फायदेमंद

◆ दिमागी रूप से सशक्त बनाता है दिमाग तेज़ करता है ।

◆अनिद्रा के रोगों में सहायक ।

◆मानसिक परेशानी और तनाव दूर करता है ।

◆थाइरोइड के रोग में लाभदायक थाइरोइड कम करता है ।

◆शरीर में सुस्ती नही आने देता हरदम एक्टिव रखता है ।

आज के समय में बच्चों के लिए ये चूर्ण अत्यंत आवश्यक है इसलिए आज ही इसे घर बनाए और प्रयोग करे।

जो लोग ध्यान करते हैं वो यह चुर्ण जरूर उपयोग करे।

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                *निःशुक्ल अयूर्वादिक सलाह ले*

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सिद्ध कायाकल्प चुर्ण

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सिद्ध कायाकल्प चुर्ण

सभी रोग के लिए सदैव युवा रखने वाला, शरीर का पूरा कायाकल्प करने वाला सदाबहार चूर्णसिद्ध कल्पचुर्ण चुर्ण सदा घर मे रखे जब कोई समस्या हो तो विधि अनुसार ले। किस रोग में कैसे कायाकल्प चुर्ण ले .हर रोग के लिए विधि विस्तार से पोस्ट में लिखी हुई है।

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कायाकल्प चुर्ण वात पित्त कफ़ को संतुलित करता है। किसी भी नशे को छुड़ाने में कारगर है काया क्ल्प चूर्ण।थकान एक पल में दूर होगी। क्योंकि एलोवेरा हर नस को पूर्ण क्रिया में ले आता है । कंपन रोग में बजुर्ग लोग लगातार यह चुर्ण इस्तेमाल करे।

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आज बढ़ते हुए तनाव, मानसिक थकान, चिंता, शारीरिक रोग ये सब असमय ही इंसान को बूढा बना देती हैं। भरी जवानी में इंसान बूढा नज़र आने लगता हैं। अगर आप अपना योवन कायम चाहते हैं तो आपको यथासंभव तनाव, चिंता को त्यागना होगा।

कहा भी जाता हैं के चिंता से बड़ा कोई शारीरिक शत्रु नहीं हैं। योग करे, ध्यान करे, दोस्तों से मिले, बच्चो और बुज़ुर्गो के साथ समय बिताये, किसी क्लब का सदस्य बनिए, हफ्ते में एक दिन गौशाला जाइए, किसी गरीब को खाना खिलाये। इस से आपकी तनाव और चिंता भाग जाएगी।

इसके साथ हम आज आपको बताने जा रहे हैं आयुर्वेद के एक ऐसे सदाबहार चूर्ण के बारे में जिसको खा कर आप सदा अपने आप को जवान और तंदुरुस्त महसूस करेंगे। बस इसको अपने दैनिक जीवन में शामिल करे।
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क्या है सिद्ध कायाकल्प चूर्ण (What is Kayakalpa churan)

कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था। कायाकल्प चुर्ण के तीन मुख्य लक्ष्य (Three main Objective of Kayakalpa churan)कायाकल्प चुर्ण के वैसे तो कई फायदे हैं

लेकिन इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं-

*नशों की कमजोरी को दूर करता है। • व्यक्ति की सुंदरता एंव स्वास्थ्य के साथ-साथ लंबे समय तक उन्हें जवानी को बरकरार बनाए रखना। • नेचुरल एजिंग प्रोसेस को धीमा करना • आयु बढ़ाना
• शरीर में कहीं भी गाँठ हो तो यह 15 से 50 दिन 90% लाभ होगा।

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क्या है काया कल्प चूर्ण में आए जाने -:::

*त्रिफला -250 ग्रा *इंद्राण से बनी हुई अजमायन-200 ग्राम *गिलोय चूर्ण-100 ग्राम बेल 200 ग्राम *अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम * ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम *शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम *कलौंजी -100 ग्राम *आवला चूर्ण-100 ग्राम *नसांदर -100 ग्राम *अपामर्ग -50 ग्राम * जटामांसी -50 ग्राम * सत्यनाशी -50 ग्राम * काला नमक -50 ग्राम *सेंधानमक -50 ग्राम *ऐलोवैरा रस -500 ग्राम
सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर सांय मे सुखाय । जब सुख जाए तब आप का काया कल्पचूर्ण बनकर तैयार हो गया है ।

सेवन विधि – अगर आप बिमार है तो दिन एक -एक चम्मच 3 बार ले ।अगर आप सदा स्वास्थ्य रहना चाहते है तो एक चम्मचसुबह खाली पेट ले ।



सेवन विधि – अगर आप बिमार है तो दिन एक -एक चम्मच 3 बार ले ।अगर आप सदा स्वास्थ्य रहना चाहते है तो एक चम्मचसुबह खाली पेट ले ।

फायदे जाने

यूरिन इन्फेक्शन में फायदेमंद है कायाकल्प चुर्ण*-पेशाब में संक्रमण का सीधा असर किडनी पर पड़ता है और समस्या गंभीर होने पर किडनी फेलियर तक हो सकता है। ऐसी स्थिति में शरीर में उपस्थित हानिकारक पदार्थ शरीर से बाहर निकलने की बजाए शरीर में ही घुलने लगते है।काफी देर तक पेशाब रोक कर रखे तो पेशाब का रंग गहरा आने लगता है जो यूरिन इन्फेक्शन सिम्पटम्स है।अगर प्रेशर बढ़ने के बाद भी पेशाब ना किया जाए तो ये गुर्दे की तरफ वापिस जाने लगता है जिससे गुर्दों को नुकसान होता है।

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PCOD रोग में यह रामबाण काम करता हैं। दिन में 3 बार पानी से सेवन करे।

PCOD से शरीर पर क्या असर होता हैं।इस कारण से महिलाओ के मासिक धर्म (Menstrual Cycle) के साथ प्रजनन क्षमता (Fertility)PCOD पर भी असर पड़ता है, और महिला गर्भधारणा करने में असमर्थ हो जाती है।अगर PCOD का इलाज न किया जाए तो आगे जाकर यह गर्भाशय के कर्करोग (Cancer) का रूप भी ले सकती है।

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काया कल्प चूर्ण के Multipurpose Benifits है

●पथरी 5 mm तक की 3 दिन में गुर्दे से बाहर निकल जाती है।कैसे ले- 50 मिलीलीटर नीबू रस ले 300 ग्राम पानी मे मिलाकर 5 ग्राम दवा ले। दिन में 4 बार दवा ले। जब दवा लेगे दर्द तत्काल मिट जाएगा।

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● नसों की कमजोरी में रामबाण है काया कल्प योग। ●हर प्रकार की एलर्जी में फायदा। जैसे :-नाक में पानी, छीके, पुराना जुकाम, खाँसी, गले की एलर्जी।● थकान कभी महसूस नही करेंगे। एक उत्साह होगा काया कल्प लेने से।● आंखों की नज़र ठीक होगी।● त्वचा की सलवटे दूर होती हे, त्वचा के रंग में निखार आता हे ,चर्म रोग दूर होते हे ,त्वचा कांतिमय व्ओजमय बनती हे ● यूरिया बढा हो काया कल्प रामबाण की भांति काम करता है । ●ओवरी में सूजन ‘,पानी भरना’ अंडा न बनना।,मासिक धर्म कम आना ठीक करेगी यह काया कल्प।
● शरीर मे गांठे हो तो काया कल्प रामबाण की भांति काम करता है । ● माइग्रेन में जबरदस्त लाभ होगा। ● बालो की वृद्धि तेजी से होती है, ● अनावश्यक चर्बी घटेगी. ● पुरानी कब्ज से मुक्ति मिलेगी ● खून साफ़ होगा रक्त नलिकाए साफ़ होगी. ● शरीर के समस्त दर्द 7 दिन ठीक होगे । ● युरिक एसिड जड़ से खत्म होगा।● शरीर के कोने कोने में जमी गंदगी इसके नियमित सेवन से पेशाब के द्वारा बाहर निकल जायेगी नया शुद्ध खून बनेगा.◆ औरतों की पीरियड की समस्या हो तो काया कल्प रामबाण जैसा काम करता है । ◆ शरीर सुडोल ,मजबूत व आकर्षक बनता हे बल -बुद्धि – वीर्य की वृद्धि करता है ।● नपुसंकता दूर होती है।
● माहलाओं में सेक्स की कमी को पूरा करेगा काया क्ल्प चूर्ण ● कब्ज दूर होती हे , जठराग्नि व् पाचन शक्ति बढती है। और बादी /खूनी बवासीर खत्म होगी । ● व्यक्ति का तेज बढ़ता हे ,
● बुढ़ापा जल्दी नहीं आता दात मजबूत होते है। ● हड्डीया मजबूत होती है। ● रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है। ● ह्रदय की कार्यक्षमता बढती है। ◆ कोलेस्ट्रोल बढ़ता है तो समान्य हो जाएगा । ●आलोपथिक द्वइयो के साइड इफ़ेक्ट कम करता है। ● यह चूर्ण आयुष्य वर्धक है ● आयु बढ़ेगी ● घठियावादी हमेशा के लिए दूर होती है। ◆ Diabetes काबू में रहती है। ● कफ से मुक्ति मिलती है।

परहेज क्या करें – अंडा, मांस, मछली, नशीले पदार्थो का सेवन एवं तली हुई वस्तु औगर फास्ट फूड वर्जित हैं

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सिद्ध आयुर्वेदिक
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https://ayurvedasidh.blogspot.com/2018/01/blog-post_52.html

सिद्ध खूनी बवासीर नाशक कल्पचुर्ण

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खूनी बवासीर में 2 घंटों में आराम
सिद्ध खूनी बवासीर नाशक कल्पचुर्ण

कचनार छाल 100 ग्राम,नारियल जटा भस्म 100 ग्राम,आँवला चुर्ण 100 ग्राम, तुलसी बीज 50 ग्राम, कौंचबीज 50 ग्राम, बड़ दूध 50 ग्राम।
नोट:-सभी चुर्ण को मिलाकर कचनार काढ़ा 200 ml में भावना दे।

सेवन विधि- मख्खन में मिलाकर या एक गिलास छाछ के साथ, सुबह-शाम सेवन कराना चाहिए। इससे उदर शुद्धि होती है और बवासीर में खून गिरना बंद होता है।

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गीली लाल मिर्च का अचार

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गीली लाल मिर्च का अचार
सामग्री

1/2 किलो लाल मिर्च
200 ग्राम राई की दाल
100 ग्राम सौफ
100 ग्राम मैथी दाना
50 ग्राम कलौजी
200 ग्राम पिसा अमचूर
नमक स्वादानुसार
1/2 लिटर सरसों का तेल तेल

सब मसालो को सेंक कर दरदरा पीस कर उसमे अमचूर हल्दी नमक मिला लें।

सरसो के तेल हींग पावडर डालकर मसाला सेंक ले और मिर्च को बीच में चाकू से कट लगा लें और मसाला भर ले और भरकर धूप मे 4_5 के लिए रख दें।
नोट
लाल मिर्च चाहे तो टुकड़े कर के भी बना सकते हैं
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सिद्ध ब्राह्मी रसायन

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सिद्ध ब्राह्मी रसायन
सवर्ण शक्ति बढ़ाने के लिए

ब्राह्मी चूर्ण 100 ग्राम
मुलहठी का चूर्ण 100 ग्राम
शंखाहुली का चूर्ण 100 ग्राम
गिलोप का चूर्ण 100 ग्राम
स्वर्ण भस्म 1ग्राम

सभी को मिलाकर चुर्ण बनाए।
सेवन विधि-: 1 से 3 ग्राम चुर्ण को 1चमच्च घी या शहद में मिलाकर सेवन करे। साथ मे दूध ले सकते हैं। ( घी और शहद एक साथ न ले)

इस अयुर्वेदिक चुर्ण खाने से मनुष्य की स्मरणशक्ति बढ़ती है और कुष्ठ एवं शरीर के अन्य रोगों का नाश हो जाता है तथा मनुष्यनिरोगी होकर सकल सिध्दि प्राप्त कर सकता है।

इसको आप घर पर बना कर खुद प्रयोग भी कर सकते हैं ।पर ध्यान रहे दोस्तों ब्राह्मी धुप में सुखाई हुई न हो वो छाँव में ही सुखाई गई हो व्ही उत्तम और श्वेष्ठ है ।

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मोटापा कैसे घटाएँ-।।।।बिना किसी साइड इफेक्ट के।।

।। मोटापा कैसे घटाएँ।।बिना किसी साइड इफेक्ट के।।

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■मोटापा कम करने के लिए संपूर्ण जानकारी■

★【आप जी पहले कायकल्प चुर्ण बारे जाने

जो मोटापा की दवा साथ दिया जाता है]

★【फिर मोटापा की दवा बारे जानकारी देंगे]

★:【फिर दवा कैसे लेनी है यह बताएगे】

★ 【अंत मे मूल्य बताया गया है।】

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कायाकल्प चुर्ण

सभी रोग के लिए

सदैव युवा रखने वाला,

शरीर का पूरा कायाकल्प

करने वाला सदाबहार चूर्ण

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कायाकल्प चुर्ण वात पित्त कफ़

को संतुलित करता है

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किसी भी नशे को छुड़ाने में कारगर है काया क्ल्प चूर्ण।

थकान एक पल में दूर होगी। क्योंकि एलोवेरा हर नस को पूर्ण क्रिया में ले आता है।

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आज बढ़ते हुए तनाव, मानसिक थकान, चिंता, शारीरिक रोग ये सब असमय ही इंसान को बूढा बना देती हैं। भरी जवानी में इंसान बूढा नज़र आने लगता हैं। अगर आप अपना योवन कायम चाहते हैं तो आपको यथासंभव तनाव, चिंता को त्यागना होगा

कहा भी जाता हैं के चिंता से बड़ा कोई शारीरिक शत्रु नहीं हैं। योग करे, ध्यान करे, दोस्तों से मिले, बच्चो और बुज़ुर्गो के साथ समय बिताये, किसी क्लब का सदस्य बनिए,हफ्ते में एक दिन गौशाला जाइए, किसी गरीब को खाना खिलाएं। इस से आपकी तनाव और चिंता भाग जाएगी।

इसके साथ हम आज आपको बताने जा रहे हैं आयुर्वेद के एक ऐसे सदाबहार चूर्ण के बारे में जिसको खा कर आप सदा अपने आप को जवान और तंदुरुस्त महसूस करेंगे। बस इसको अपने दैनिक जीवन में शामिलकरे।

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क्या है कायाकल्प चूर्ण

(What is Kayakalpa churan)

कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था।

कायाकल्प चुर्ण के तीन मुख्य लक्ष्य

(Three main Objective of Kayakalpa churan)

कायाकल्प चुर्ण के वैसे तो कई फायदे हैं।

लेकिन इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं-

*नशों की कमजोरी को दूर करता है।

• व्यक्ति की सुंदरता एंव स्वास्थ्य के साथ-साथ लंबे समय तक उन्हें जवानी को बरकरार बनाए रखना।।

• नेचुरल एजिंग प्रोसेस को धीमा करना

• आयु बढ़ाना।

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क्या है काया कल्प चूर्ण में

आए जाने -:::

*त्रिफला -250 ग्रा

*इंद्राण से बनी

हुई अजमायन-200 ग्राम

*गिलोय चूर्ण-100 ग्राम

बेल 200 ग्राम

*अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम

* ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम

*शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम

*कलौंजी -100 ग्राम

*आवला चूर्ण-100 ग्राम

*नसांदर -100 ग्राम

*अपामर्ग -50 ग्राम

* जटामांसी -50 ग्राम

* सत्यनाशी -50 ग्राम

* काला नमक -50 ग्राम

*सेंधानमक -50 ग्राम

*ऐलोवैरा रस -500 ग्राम

सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर

सांय मे सुखाय ।

जब सुख जाए तब आप का काया कल्प

चूर्ण बनकर तैयार हो गया है ।

सेवन विधि – अगर आप बिमार है तो दिन एक -एक चम्मच 3 बार ले ।।

अगर आप सदा स्वास्थ्य रहना चाहते है तो एक चम्मच

सुबह खाली पेट ले ।

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काया कल्प चूर्ण के Multipurpose Benifits है

●पथरी 5 mm तक की 3 दिन में गुर्दे से बाहर निकल जाती है।

कैसे ले- 50 मिलीलीटर नीबू रस ले 300 ग्राम पानी मे मिलाकर 5 ग्राम दवा ले।

दिन में 4 बार दवा ले।

जब दवा लेगे दर्द तत्काल मिट जाएगा।

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● नसों की कमजोरी में रामबाण है काया कल्प योग।

●हर प्रकार की एलर्जी में फायदा। जैसे :-

नाक में पानी, छीके, पुराना जुकाम, खाँसी, गले की एलर्जी।

● थकान कभी महसूस नही करेंगे। एक उत्साह होगा काया कल्प लेने से।

● त्वचा की सलवटे दूर होती हे, त्वचा के रंग में निखार आता हे ,चर्म रोग दूर होते हे ,त्वचा कांतिमय व् ओजमय बनती हे

● यूरिया बढा हो काया कल्प रामबाण की भांति

काम करता है ।

●ओवरी में सूजन ‘,पानी भरना’ अंडा न बनना।,मासिक धर्म कम आना ठीक करेगी यह काया कल्प।

● शरीर मे गांठे हो तो काया कल्प रामबाण की

भांति काम करता है ।

● माइग्रेन में जबरदस्त लाभ होगा।

● बालो की वृद्धि तेजी से होती है,

● अनावश्यक चर्बी घटेगी.

● पुरानी कब्ज से मुक्ति मिलेगी

● खून साफ़ होगा

● रक्त नलिकाए साफ़ होगी.

● शरीर के समस्त दर्द 7 दिन ठीक होगे ।

● युरिक एसिड जड़ से खत्म होगा।

● शरीर के कोने कोने में जमी गंदगी इसके नियमित सेवन से पेशाब के द्वारा बाहर निकल जायेगी

नया शुद्ध खून बनेगा.

◆ औरतों की पीरियड की समस्या हो तो काया कल्प

रामबाण जैसा काम करता है ।

◆ शरीर सुडोल ,मजबूत व आकर्षक बनता हे

बल -बुद्धि – वीर्य की वृद्धि करता है ।

● नपुसंकता दूर होती है।

● माहलाओं में सेक्स की कमी को पूरा करेगा काया क्ल्प चूर्ण

● कब्ज दूर होती हे , जठराग्नि व् पाचन शक्ति बढती है। और बादी /खूनी बवासीर खत्म होगी ।

● व्यक्ति का तेज बढ़ता हे ,

● बुढ़ापा जल्दी नहीं आता

दात मजबूत होते है।

● हड्डीया मजबूत होती है।

● रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है।

● ह्रदय की कार्यक्षमता बढती है।

◆ कोलेस्ट्रोल बढ़ता है तो समान्य हो जाएगा ।

●आलोपथिक द्वइयो के साइड इफ़ेक्ट कम करता है।

● यह चूर्ण आयुष्य वर्धक है ।

● आयु बढ़ेगी

● घठियावादी हमेशा के लिए दूर होती है।

◆ Diabetes काबू में रहती है।

● कफ से मुक्ति मिलती है।

परहेज क्या करें – अंडा, मांस, मछली, नशीले पदार्थो का सेवन एवं तली हुई वस्तु औगर फास्ट फूड वर्जित हैं।

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मोटापा नाशक कल्पचुर्ण

■मोटापा कम करने का योग ■

¶यह एक फ़ूड है इस योग का

कोई साइड इफेक्ट्स और नुकसान नही है।¶

【बाजार में मिलने वाली दवाएं

हड्ड़ी रोग का कारण बन सकती हैं।】

★★★

नोट -: online दवा मंगवाए जिस में हम आप को साथ मे कायकल्प चुर्ण भी देगे। जो आप की नाड़ी तंत्र को शुद्ध और साफ करेगा।

कायकल्प चुर्ण बारे जानने के लिए whats 94178 62263 पर sms करे।

★★★

आप खुद भी बना सकते है।

यह पेट की चर्बी में बहुत अच्छा काम करती हैं।

आवश्यक सामग्री :

●गुग्गुल(Guggul)- 140 ग्राम

●विलायिती इमली (Camachile)-105 ग्राम (इसे जंगल जलेबी, अग्रेजी इमली, गंगा इमली भी कहते है।)

●त्रिफला (Triphala)- 105 ग्राम

●बेल चूर्ण -105 ग्राम

◆अर्जुन छाल-,105 ग्राम

●यष्टिमधु (Liquorice)-70 ग्राम (इसे मुलेठी भी कहते है।)

◆गिलोय (Tinospora)- 70 ग्राम

●नागरमोथा (Nut grass)- 70 ग्राम (Cyperus Scariosus)

जीरा (cumin)- 70 ग्राम

शुंठी(Shunti)- 70 ग्राम (सोंठ)

★ बनाने की विधि :

उपरोक्त सभी औषिधियों को बारीक-बारीक कूट-पीस ले और महीन छन्नी से छान कर किसी डिब्बे में बंद कर के रख ले-आपकी ये सामग्री कूट-पिस लगभग 700 ग्राम तैयार हो जायेगी।

सेवन करने का तरीका :

प्रतिदिन आपको इसमें से दस ग्राम सुबह खाने से पहले गुनगुने पानी से और शाम को खाने के बाद गुनगुने पानी से लेना है ।

बीस ग्राम के हिसाब से एक माह में 600 ग्राम दवा होगी तथा ये एक माह से उपर के लिए हो जायेगी।

तब तक आपका वजन लगभग आठ से दस किलो से जादा कम हो जाएगा।

पेट बढ़ा है 2 से 3 इंच कम हो जाएगा।

पहले माह तेजी से घटता है लगभग छ: से सात किलो फिर थोडा कम घटेगा।

आप इसे आगे भी जारी रख सकते है जब आपको लगे कि आपका वजन और चर्बी अब आपके लिए पर्याप्त है दवा को बंद कर सकते है।

★ आवश्यक परहेज :

भोजन और परहेज :

मोटापे से परेशान व्यक्ति को मुद्ग, जौ, मूंग का रस, मक्खन, गर्म पानी, बाजरा, गेहूं, ताजा दूध, मुनक्का, संतरा, टमाटर, मसूर, छाछ आदि का सेवन करना चाहिए। मोटे व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह टहलना चाहिए और थोड़ी-बहुत मेहनत भी करनी चाहिए। रोगी को पतला करके दूध, फलों का रस, कॉफी, गर्म करके पीना चाहिए।

मोटापे के रोगी को गाय का दूध, देशी घी, गाढ़ी दाल, चावल, आलू, गर्म दूध, चीनी से बने पदार्थ, पनीर, आइसक्रीम, मिठाइयां, मांसाहारी भोजन, अधिक चिकनाई व चटपटा पदार्थ, सांभर, सूप, बिस्कुट, केक, नमकीन पदार्थ, जेली, मिठाइयां, बाहर का खाना, देर रात पार्टियों में खाना, नए शालि चावल आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। शीतल पानी से नहाना मोटापे के लिए हानिकारक होता है।

तली भुनी चीजे, फास्ट-फ़ूड तथा रिफाइंड आयल का प्रयोग न करे।

Online आप दवा मंगवा सकते हैं।

हम साथ मे काया क्ल्प चूर्ण भी देगे।

जो मोटापे की दवा औऱ मोटापे में हैरानीजनक फायदा करता है।

★★★★

70 दिन की दवा होगी

खर्च जाने अब

मोटापा कम करने की दवा 500 ग्राम

1050 रुपये

कायाकल्प चुर्ण 500 ग्राम

500 रुपये।

टोटल 1550 जमा कराए।

★★★★

सेवन विधि

कायाकल्प चुर्ण 1 चम्मच सुबह खाली पेट।

रात को सोते टाइम पानी से सेवन करे।

★★★

मोटापा दवा दिन 3 बार कभी भी पानी से ले।

परहेज के लिए पोस्ट पढ़े।

★★

नोट

कोरियर केवल शहर मे ही जाएगा ।

पता शहर का ही दे ।

डाक से गांव में जाएगी दवा ।

अपना पता साफ लिखे।

आप को पहले अकाउंट मे

दवा की राशि जमा करानी होगी

फिर आप को दवा कोरियर होगी ।

हमारा अकाउंट है है -:

Paytm 9417862263

Swami Veet Dass c℅ Ranjit Singh

State bank of india

A/c -65072894910

Ranjit Singh

Bank code –50966

Ifsc code -sbin0050966

Sarhind barach

Fatehgarh sahib (punjab )

पढ़ कर कॉल करे

94178 622636

https://ayurvedasidh.blogspot.in/2018/01/blog-post_26.html

बसंत ऋतु के रोग और इलाज

          *बसंत ऋतु में आयुर्वेदिक दवाएं*

                *और खान-पान*

बसंत ऋतु में कफ़ रोग, लीवर रोग , ह्र्दय रोग और खून अशुद्धि जैसे रोग उतपन्न होते हैं।

इसे कच्ची मौसम के रोग भी बोला जाता है।

सिद्ध आयुर्वेदिक औषधियों इस मौसम के हिसाब से निर्मत की जाती है।

।।वसंत ऋतु इस्तेमाल करने योग्य सिद्ध चुर्ण।।

1.सिद्ध कफ़ नाशक कल्पचुर्ण

2.सिद्ध लिवर कल्पचुर्ण

3.सिद्ध ह्रदय कल्पचुर्ण

4.सिद्ध खून शुद्धि कल्पचुर्ण

लिंकः देख सकते टच करे

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हिन्‍दू कैलेंडर के हिसाब से15 मार्च से 15 मई का वक्‍त वसंत ऋतु का होता है। 

वसंत ऋतु का शरीर  पर क्‍या असर पड़ता है?

 यह वक्‍त गर्मी और सर्दी के बीच का होता है इसलिए ठंड और गर्मी दोनों का इफेक्‍ट होता है। दिन में गर्मी और रात को ठंडक होती है।

इस मौसम में कफ दोष बॉडी पर और हावी होने लगता है।

वजह ये है कि इससे पहले वाले मौसम यानी शिशिर ऋतु में बॉडी में जमा कफ अब गर्मी होने पर पिघल जाता है।

इससे खासतौर पर पचाने की ताकत पर असर पड़ता है। साफ तौर पर कहें तो खाने को पचाने वाली आग जिसे जठराग्‍नि कहते हैं, कमजोर पड़ जाती है।

एक तो वैसे ही इस मौसम में कफ का असर ज्‍यादा होता है उसमें अगर आपने कफ बढ़ाने वाली चीजें थोड़ी बहुत भी खा लीं तो समझें टांसिल्‍स, खांसी, गले में खराश, जुकाम, सर्दी और कफ व बुखार का हमला हो सकता है।

            ।।बसंत ऋतु में खान -पान।।

   वसंत ऋतु में कफ की समस्या अधिक रहती है। अतः इस मौसम में जौ, चना, ज्वार, गेहूं, चावल, मूंग, अरहर, मसूर की दाल, बैंगन, मूली, बथुआ, परवल, करेला, तोरई, अदरक, सब्जियां, केला खीरा, संतरा, शहतूत, हींग, मेथी, जीरा, हल्दी, आंवला आदि कफनाशक पदार्थों का सेवन करें|

   इसके अलावा मूंग बनाकर खाना भी उत्तम है।

◆◆

                   बसंत ऋतु में 

                ।। घरेलू नुस्खे।।

  नागरमोथा अथवा सोंठ डालकर उबाला हुआ पानी पीने से कफ का नाश होता है।

मन प्रसन्न रखें एवं जो हृदय के लिए हितकारी हों ऐसे आसव अरिष्ट जैसे कि मध्वारिष्ट, द्राक्षारिष्ट, गन्ने का रस, सिरका आदि पीना लाभदायक है। 

●◆◆

          ।।सिद्ध हिर्दय कल्पचुर्ण ।।

आप अगर बसंत ऋतु में इस्तेमाल करते हैं तो आप को कभी हार्ट अटैक नही होगा *

सिद्ध ह्रदय कल्पचुर्ण की पूरी जानकारी के लिए link देखे:- 

https://wp.me/paDg1r-J

●●

   इस ऋतु में कड़वे नीम में नई कोंपलें फूटती हैं। नीम की 15-20 कोंपलें, 2-3 काली मिर्च के साथ चबा-चबाकर खानी चाहिए।

15-20 दिन यह प्रयोग करने से वर्ष भर चर्म रोग, रक्त विकार और ज्वर आदि रोगों से रक्षा करने की प्रतिरोधक शक्ति पैदा होती है एवं आरोग्यता की रक्षा होती है। 

इसके अलावा कड़वे नीम के फूलों का रस 7 से 15 दिन तक पीने से त्वचा के रोग एवं मलेरिया जैसे ज्वर से भी बचाव होता है।

●●

          ।।सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण।।

*बसंत ऋतु में इस्तेमाल करे खून शुद्वि कल्पचुर्ण*

सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण आप बसंत ऋतु में अगर इस्तेमाल करते हैं तो खून सबंधी जितने भी रोग होते हैं सभी साल भर के लिए आप ठीक हो जाएंगे।

सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण की पूरी जानकारी के लिंक देख सकते हैं।

https://wp.me/paDg1r-2H

◆◆

   धार्मिक ग्रंथों के वर्णनानुसार चैत्र मास के दौरान अलौने व्रत याने बिना नमक के व्रत करने से रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है एवं त्वचा के रोग, हृदय के रोग, उच्च रक्तचाप( हाई बीपी), गुर्दा, किडनी आदि के रोग नहीं होते। 

   वसंत ऋतु में दही का सेवन न करें क्योंकि वसंत ऋतु में कफ का स्वाभाविक प्रकोप होता है एवं दही कफ को बढ़ाता है। अतः कफ रोग से व्यक्ति ग्रसित हो जाते हैं।

      वसंत के मौसम में क्‍या नहीं खाना चाहिए

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 ।।फेंटी, खःटी औऱ मीठी वस्तुओं से करे परहेज।।

   वसंत में फैटी, खट्टे, मीठे और पेट के लिए भारी चीजें नहीं खानी चाहिए। तली और मसालेदार चीजें कम से कम खाएं। 

दिन में सोना बंद कर दें ऐसा करने से कफ दोष भड़क जाएगा। रात को ज्‍यादा देर तक नहीं जागना चाहिए इससे वायु दोष बढ़ जाता है।

सुबह देर तक सोने से मल सूख जाता है, भूख्‍ देर से लगती है और चेहरे व आंखों की चमक कम हो जाती है। इसलिए इस मौसम में जल्‍दी सोएं और जल्‍दी उठें।

   शीत एवं वसंत ऋतु में श्वास, जुकाम, खांसी आदि जैसे कफजन्य रोग उत्पन्न होते हैं। 

उन रोगों में हल्दी का प्रयोग उत्तम होता है। हल्दी शरीर की व्याधि रोधक क्षमता को बढ़ाती है जिससे शरीर रोगों से लड़ने में सक्षम होता है। 

  चौथाई चम्मच हरड़ का चूर्ण शहद में मिलाकर चाटें तो वसंत ऋतु में होने वाले बलगम, ज्वर, खांसी आदि नष्ट हो जाते हैं। मौसम के अनुसार भोजन हमारे शरीर और मन दोनों के लिए हितकारी होता है।

मौसम के अनुसार भोजन में परिवर्तन करके आहार लेने वाले लोग हर समय स्वस्थ और प्रसन्नचित रहते हैं।

   इस मौसम में स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए रोज एक्‍सरसाइज करें। टहलें, मालिश करें और अगर मौसम में ठंडक है तो गुनगुने पानी से नहा सकते हैं। गर्म पानी से मूत्राशय और मलाशय की अच्‍छे से सफाई करनी चाहिए।

नहाने के बाद बदन पर कपूर, चंदन, अगरू, कुमकुम जैसी खुश्‍बू वाली चीजों का लेप लगा सकते हैं। चाहें तो शाम के वक्‍त दोबारा नहा सकते हैं। ढीले और सूती कपड़े पहनें। 

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सालम पंजा – शरीर की हर शक्ति देता है जगा

                *सालम पंजा*
     *एक जीवित ऊर्जा प्रदान करता है*
*अयुर्वेदिक अनंत जड़ी बूटी मानव जीवन के लिए कुदरत का वरदान है।।

*सालम पंजा युक्त सिद्ध शक्तिवर्धक कल्पचुर्ण online मंगवाए*
*’सालमपंजा’ एक बहुत ही गुणकारी, बलवीर्यवर्द्धक, पौष्टिक और यौन शक्ति को बढ़ाकर नपुंसकता नष्ट करने वाली वनौषधि है।*
*यह बल बढ़ाने वाला, शीतवीर्य, भारी, स्निग्ध, तृप्तिदायक और मांस की वृद्धि करने वाला होता है। यह वात-पित्त का शमन करने वाला, रस में मधुर होता है।*

विभिन्न भाषाओं में नाम : संस्कृत- मुंजातक। हिन्दी- सालमपंजा। मराठी- सालम। गुजराती- सालम। तेलुगू- गोरू चेट्टु। इंग्लिश- सालेप। लैटिन- आर्किस लेटिफोलिया।

परिचय : सालम हिमालय और तिब्बत में 8 से 12 हजार फीट की ऊंचाई पर पैदा होता है। भारत में इसकी आवक ज्यादातर ईरान और अफगानिस्तान से होती है। सालमपंजा का उपयोग शारीरिक, बलवीर्य की वृद्धि के लिए, वाजीकारक नुस्खों में दीर्घकाल से होता आ रहा है। 

समुद्र यात्रा : समुद्र में प्रायः यात्रा करते रहने वाले पश्चिमी देशों के लोग प्रतिदिन 2 चम्मच चूर्ण एक गिलास पानी में उबालकर शक्कर मिलाकर पीते हैं। इससे शरीर में स्फूर्ति और शक्ति बनी रहती है तथा क्षुधा की पूर्ति होती है।
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यौन दौर्बल्य : 
सालमपंजा 100 ग्राम, बादाम की मिंगी 200 ग्राम, दोनों को खूब बारीक पीसकर मिला लें।

इसका 10 ग्राम चूर्ण प्रतिदिन कुनकुने मीठे दूध के साथ प्रातः खाली पेट और रात को सोने से पहले सेवन करने से शरीर की कमजोरी और दुबलापन दूर होता है, यौनशक्ति में खूब वृद्धि होती है और धातु पुष्ट एवं गाढ़ी होती है। यह प्रयोग महिलाओं के लिए भी पुरुषों के समान ही लाभदायक, पौष्टिक और शक्तिप्रद है, अतः महिलाओं के लिए भी सेवन योग्य है।
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शुक्रमेह :
 सालम पंजा, सफेद मूसली एवं काली मूसली तीनों 100-100 ग्राम लेकर कूट-पीसकर खूब बारीक चूर्ण करके मिला लें और शीशी में भर लें।
प्रतिदिन आधा-आधा चम्मच सुबह और रात को सोने से पहले कुनकुने मीठे दूध के साथ सेवन करने से शुक्रमेह, स्वप्नदोष, शीघ्रपतन, कामोत्तजना की कमी आदि दूर होकर यौनशक्ति की वृद्धि होती है।
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जीर्ण अतिसार : 
सालमपंजा का खूब महीन चूर्ण 1-1 चम्मच सुबह, दोपहर और शाम को छाछ के साथ सेवन करने से पुराना अतिसार रोग ठीक होता है।

एक माह तक भोजन में सिर्फ दही-चावल का ही सेवन करना चाहिए। इस प्रयोग को लाभ होने तक जारी रखने से आमवात, पुरानी पेचिश और संग्रहणी रोग में भी लाभ होता है।
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प्रदर रोग :

 सलमपंजा, शतावरी, सफेद मूसली और असगन्ध सबका 50-50 ग्राम चूर्ण लेकर मिला लें।
इस चूर्ण को एक-एक चम्मच सुबह व रात को कुनकुने मीठे दूध के साथ सेवन करने से पुराना श्वेतप्रदर और इसके कारण होने वाला कमर दर्द दूर होकर शरीर पुष्ट और निरोगी होता है।
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वात प्रकोप : 
सालमपंजा और पीपल (पिप्पली) दोनों का महीन चूर्ण मिलाकर आधा-आधा चम्मच चूर्ण सुबह-शाम बकरी के कुनकुने मीठे दूध के साथ सेवन करने से कफ व श्वास का प्रकोप शांत होता है। सांस फूलना, शरीर की कमजोरी, हाथ-पैर का दर्द, गैस और वात प्रकोप आदि ठीक होते हैं। 
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विदार्यादि चूर्ण :
 विन्दारीकन्द, सालमपंजा, असगन्ध, सफेद मूसली, बड़ा गोखरू, अकरकरा सब 50-50 ग्राम खूब महीन चूर्ण करके मिला लें और शीशी में भर लें।

इस चूर्ण को 1-1 चम्मच सुबह व रात को कुनकुने मीठे दूध के साथ सेवन करने से यौन शक्ति और स्तंभनशक्ति बढ़ती है।

*यह योग online मगवां सकते हैं*
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रतिवल्लभ चूर्ण :
 सालमपंजा, बहमन सफेद, बहमन लाल, सफेद मूसली, काली मूसली, बड़ा गोखरू सब 50-50 ग्राम। छोटी इलायची के दाने, गिलोय सत्व, दालचीनी और गावजवां के फूल-सब 25-25 ग्राम। मिश्री 125 ग्राम। सबको अलग-अलग खूब कूट-पीसकर महीन चूर्ण करके मिला लें और शीशी में भर लें।

इस चूर्ण को 1-1 चम्मच सुबह व रात को कुनकुने मीठे दूध के साथ दो माह तक सेवन करने से यौन दौर्बल्य और यौनांग की शिथिलता एवं नपुंसकता दूर होती है। शरीर पुष्ट और बलवान बनता है।

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सिद्ध गर्भधारण कल्पचुर्ण

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        *सिद्ध गर्भधारण कल्पचुर्ण*

*फायदे-*

*अंडे का न बनना, गर्भावस्था कमजोरी, गर्भ नली का बंद होना, लकोरिया, गर्भाशय कमजोरी , अंतुसलन हार्मोन, गर्भाशय का छोटापन आदि*

सिद्ध गर्भधारण कल्पचुर्ण का नुस्खा

पुत्रजीवक          100 ग्राम

शिवलिंगी बीज    100 ग्राम

गजकेसर की जड़  50 ग्राम

पीपल की दाढ़ी      50 ग्राम

ब्रह्मिबुटी               50 ग्राम

तुलसी के बीज       50 ग्राम

गोरखमुण्डी।          50 ग्राम

काकोली का बीज   20 ग्राम

नागकेसर              20 ग्राम

मिश्री                   100 ग्राम

इसकी 5 ग्राम मात्रा को सुबह के समय बछडे़ वाली गाय के 250 मिलीलीटर  दूध से मासिक-धर्म खत्म होने के बाद लगभग 20 दिन तक करना चाहिए।

इसके सेवन से स्त्रियां गर्भधारण के पक्के तौर योग्य बन जाती हैं।

       *गऊ के दूध और दही का खूब सेवन करे।*

परहेज -गर्म ओर खट्टी वस्तु न ले। 

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नोट

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अगर आप online मंगवाते है तो हम आप को 2 दवाएं का पैक देगे।

      *जिस से बहुत फायदा होता है।*

     दोनों चूर्ण कब औऱ कैसे उपयोग करे

             *कायाकल्प चूर्ण*

कायाकल्प चूर्ण कैसे और कब उपयोग करे-

मासिक धर्म से 15 दिन पहले कायाकल्प चूर्ण सुबह खाली पेट औऱ रात को सोते समय गर्म पानी से इस्तेमाल करे।

कायाकल्प चूर्ण क्यों इस्तेमाल करे-

कायाकल्प चूर्ण मासिक धर्म की हर समस्या सही करेगा।

जैसे :-

बंद ट्यूब, गर्भाशय की सफाई, कमजोरी औऱ गर्भशय की गांठ आदि को ठीक करेगे।

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     *गर्भधारण कल्पचुर्ण कैसे उपयोग करे*

*मासिक धर्म बंद होने के 1 दिन बाद कोसे गर्म दूध से सुबह खाने के 30 मिनट बाद और रात को भी ऐसे ही उपयोग करे।*

*ध्यान रहे :-खाने में  दही का उपयोग जरूर करे।*

कोई भी गर्म वस्तु इन दिनों उपयोग न करे।*

           *खुद बनाएं या online मंगवाए*

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शरीर में दर्द क्यों होते हैं ??

 शरीर में दर्द क्यों होते है??
*वातदर्द रोगों की संपूर्ण जानकारी ,मात्र जानने से दर्दो से आप दर्दो से पाएंगे मुक्ति

      *सिद्ध वातदर्द नाशक कल्पचुर्ण*
*सभी वातदर्द रोगों को जड़ से खत्म करता है*
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वात क्या है ??

          वात, पित्त और कफ तीनों में से वात सबसे प्रमुख होता है क्योंकि पित्त और कफ भी वात के साथ सक्रिय होते हैं।

शरीर में वायु का प्रमुख स्थान पक्वाशय में होता है और वायु का शरीर में फैल जाना ही वात रोग कहलाता है।

हमारे शरीर में वात रोग 5 भागों में हो सकता है जो 5 नामों से जाना जाता है।

वात के पांच भाग निम्नलिखित हैं-

1.उदान वायु    – यह कण्ठ में होती है।
2.अपान वायु   – यह बड़ी आंत से मलाशय तक होती है।
3.प्राण वायु     –  यह हृदय या इससे ऊपरी भाग में होती है।
4.व्यान वायु        – यह पूरे शरीर में होती है।5.समान वायु       – यह आमाशय और बड़ी आंत में होती है।

वात रोग बहुत प्रकार की होती है।

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जैसे
1.आमवात :
आमवात के रोग में रोगी को बुखार होना शुरू हो जाता है तथा इसके साथ-साथ उसके जोड़ों में दर्द तथा सूजन भी हो जाती है।

इस रोग से पीड़ित रोगियों की हडि्डयों के जोड़ों में पानी भर जाता है। जब रोगी व्यक्ति सुबह के समय में उठता है तो उसके हाथ-पैरों में अकड़न महसूस होती है और जोड़ों में तेज दर्द होने लगता है। जोड़ों के टेढ़े-मेढ़े होने से रोगी के शरीर के अंगों की आकृति बिगड़ जाती है।

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2.सन्धिवात रोग
         जब आंतों में दूषित द्रव्य जमा हो जाता है तो शरीर की हडि्डयों के जोड़ों में दर्द तथा अकड़न होने लगती है।

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3.यूरिक एसिड वात रोग
गाउट रोग बहुत अधिक कष्टदायक होता है। यह रोग रक्त के यूरिक एसिड में वृद्धि होकर जोड़ों में जमा होने के कारण होता है। शरीर में यूरिया प्रोटीन से उत्पन्न होता है, लेकिन किसी कारण से जब यूरिया शरीर के अंदर जल नहीं पाता है तो वह जोड़ों में जमा होने लगता है और बाद में यह पथरी रोग का कारण बन जाता है।

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मांसपेशियों में वातदर्द :-

         इस रोग के कारण रोगी की गर्दन, कमर, आंख के पास की मांस-पेशियां, हृदय, बगल तथा शरीर के अन्य भागों की मांसपेशियां प्रभावित होती हैं जिसके कारण रोगी के शरीर के इन भागों में दर्द होने लगता है। जब इन भागों को दबाया जाता है तो इन भागों में तेज दर्द होने लगता है।

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4.गठिया

        इस रोग के कारण हडि्डयों को जोड़ने वाली तथा जोड़ों को ढकने वाली लचीली हडि्डयां घिस जाती हैं तथा हडि्डयों के पास से ही एक नई हड्डी निकलनी शुरू हो जाती है। जांघों और घुटनों के जोड़ों पर इस रोग का बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है और जिसके कारण इन भागों में बहुत तेज दर्द होता है।

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अब जाने
           *वात रोग के लक्षण*

वात रोग से पीड़ित रोगी के शरीर में खुश्की तथा रूखापन होने लगता है।

वात रोग से पीड़ित रोगी के शरीर की त्वचा का रंग मैला सा होने लगता है।

रोगी व्यक्ति को अपने शरीर में जकड़न तथा दर्द महसूस होता है।वात रोग से पीड़ित रोगी के सिर में भारीपन होने लगता है तथा उसके सिर में दर्द होने लगता है।

रोगी व्यक्ति का पेट फूलने लगता है तथा उसका पेट भारी-भारी सा लगने लगता है।रोगी व्यक्ति के शरीर में दर्द रहता है।

वात रोग से पीड़ित रोगी के जोड़ों में दर्द होने लगता है।रोगी व्यक्ति का मुंह सूखने लगता है।

वात रोग से पीड़ित रोगी को डकारें या हिचकी आने लगती है।

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अब जाने
वात रोग होने का कारण :-


वात रोग होने का सबसे प्रमुख कारण पक्वाशय, आमाशय तथा मलाशय में वायु का भर जाना है।

भोजन करने के बाद भोजन के ठीक तरह से न पचने के कारण भी वात रोग हो सकता है।

जब अपच के कारण अजीर्ण रोग हो जाता है और अजीर्ण के कारण कब्ज होता है तथा इन सबके कारण गैस बनती है तो वात रोग पैदा हो जाता है।

पेट में गैस बनना वात रोग होने का कारण होता है।जिन व्यक्तियों को अधिक कब्ज की शिकायत होती है उन व्यक्तियों को वात रोग अधिक होता है।

जिन व्यक्तियों के खान-पान का तरीका गलत तथा सही समय पर नहीं होता है उन व्यक्तियों को वात रोग हो जाता है।

ठीक समय पर शौच तथा मूत्र त्याग न करने के कारण भी वात रोग हो सकता है।

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अब जाने

वात रोग होने पर प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार :-

वात रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को अपने हडि्डयों के जोड़ में रक्त के संचालन को बढ़ाना चाहिए। 
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*क्या करे इस के लिए*

वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को लगभग 4 दिनों तक फलों का रस (मौसमी, अंगूर, संतरा, नीबू) पीना चाहिए।

इसके साथ-साथ रोगी को दिन में कम से कम 4 बार 1 चम्मच शहद चाटना चाहिए।

●●

इसके बाद रोगी को कुछ दिनों तक फलों को खाना चाहिए।

कैल्शियम तथा फास्फोरस की कमी के कारण रोगी की हडि्डयां कमजोर हो जाती हैं इसलिए रोगी को भोजन में पालक, दूध, टमाटर तथा गाजर का अधिक उपयोग करना चाहिए।

पर यूरिक एसिड रोग  में इनका सेवन न करे।
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कच्चा लहसुन वात रोग को ठीक करने में रामबाण औषधि का काम करती है इसलिए वात रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन कच्चे लहसुन की 4-5 कलियां खानी चाहिए।

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वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को भोजन में प्रतिदिन चोकर युक्त रोटी, अंकुरित हरे मूंग तथा सलाद का अधिक उपयोग करना चाहिए।

●●
रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम आधा चम्मच मेथीदाना तथा थोड़ी सी अजवायन का सेवन करना चाहिए।

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इनका सेवन करने से यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए रोगी को प्रतिदिन सुबह तथा शाम के समय में खुली हवा में गहरी सांस लेनी चाहिए। इससे रोगी को अधिक आक्सीजन मिलती है और उसका रोग ठीक होने लगता है।

●●
शरीर पर प्रतिदिन तिल के तेलों से मालिश करने से वात रोग ठीक होने लगता है।रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह के समय में धूप में बैठकर शरीर की मालिश करनी चाहिए। धूप वात रोग से पीड़ित रोगियों के लिए बहुत ही लाभदायक होती है।

●●●
वात रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए तिल के तेल में कम से कम 4-5 लहसुन तथा थोड़ी सी अजवाइन डालकर गर्म करना चाहिए तथा इसके बाद इसे ठंडा करके छान कर इस तेल से प्रतिदिन हडि्डयों के जोड़ पर मालिश करें। इससे वात रोग जल्दी ही ठीक हो जायेगा।

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*अगर आप वातरोग के आधीन आ गए हैं तो 2 से  5 महीने तक सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण जरूर इस्तेमाल करे।*

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*सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण online भी* 
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*कैसे बनता है सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण*

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सिद्ध एलोवेरा आयुर्वेदिक शेंपू

*एलोवेरा आयुर्वेदिक शेंपू*

बालों का झड़ना, खुश्क बाल, दो मुँहे बाल,

बालों के विकास का रुकना, रूसी, त्वचा की इंफेक्शन, बालों की चमक मर जाना औऱ बालों की कमजोरी को करे जड़ से खत्म।

             *खुद घर बनाए*
              *लुटाई से बचे*

   *हम देगे जानकारी आप करे अविष्कार*

एलोवेरा व शहद दोनो ही बालों को नमी देते हैं। बालों से नमी निकालने के अलावा वे जड़ों से भी तेल हटाते हैं।

           *कैसे बनायें एलोवेरा शेंपू*
               *सामग्री देखे*

एलोवेरा रस  (जेल ) 100 ml
एक कोई भी शेंपू     20 ml
सेब का सिरका        50 ml
शहद                     50 ml
अरंडी तेल              50 ml
कोई भी खुसबू तेल   30 ml

विधि: 
एलोवीरा जेल और सामग्री को अच्छे से मिलाकर 2 से 4 बार लगा कर बालो को अच्छे से मलते रहे।
       *हफ्ते में 2 बार बालों को इस धोएं*

लाभः 
1.एलोवीरा एक तरह का कंडीशनर है. इसके इस्तेमाल से बाल रेशम से मुलायम बनते हैं और चमकीले नज़र आते हैं.


2. बाल झड़ेंगे नही न ही दो मुहे रहेंगे।


3.सिर की त्वचा की खुश्की, इंफेक्शन,रूसी और बालों की जड़ का दर्द में  हैरानीजनक लाभ होगा।


4. बाल लंबे और घने होने शुरू हो जाएंगे।

5.सिर में हल्कापन महसूस करेगे।


     *आयुर्वेदिक निशुल्क सलाह ले
     *Whats 94178 62263*


सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण

           *सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण*
           *शुगर रोग की देशी दवा*
          *सुलभ और सस्ती औषधि*
       *घर बनाए या*Online मंगवाएं*
         *whats 94178 62263*

*शुगर की आयुर्वेदिक दवा बनाने के लिए*
          *चूर्ण बनाने की विधि*
*त्रिफला चूर्ण-400 ग्राम*
*इन्द्रजो कडवा या*
*इन्द्रजो तल्ख़ 250 ग्राम*
*इंद्राण अजमायन-250 ग्राम*
*मेथी का दना – 200 ग्राम*
*कलौंजी 200 ग्राम*
*तेज पत्ता ——- 200 ग्राम*
*जामुन की गुठली -200 ग्राम*
*बेलपत्र के पत्ते – 200 ग्राम*
*गुडमार -130 ग्राम*
*नीम की गुठली  130 ग्राम*
*तुलसी की पत्तियाँ- 130 ग्राम*
*सदाबहार की पत्तियाँ -130 ग्राम*
*वंशलोचन -130 ग्राम*
*जायफल -50 ग्राम*
*जावित्री -50 ग्राम*
*चार गोंद -50 ग्राम*
*छोटी इलायची -20 ग्राम*
*कालीमिर्च- 50*
*एलोवेरा रस 500 ग्राम*

*सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर सांय में
सुखाए।*
*सेवन विधि – सुबह -शाम  3 से 5  ग्राम पानी से लेते रहे।*
***
*खानपान में करें परहेज*

-*अधिक चावल खानें से बचें। चीनी, आलू का सेवन कम करें। मीठे फलों से दूर रहें। मिठाई से बचें।*

*गुड़, आम, इमली की खटाई, आलू, अरबी, बैंगन, शक्कर, सैक्रिन, सभी मीठे फ़ल, गाजर, कद्दू (पेठा), गेहूं, चावल, तले हुए भोजन, उड़द, मसूर दाल, मांस- मछली, अण्डा-मुर्गा, सभी मादक द्र्व्य, चाय, काफ़ी, तेज मिर्च,अश्लिल-उत्तेजक साहित्य, टीवी, फ़िल्में देखना,अधिक रात्रि तक जागना,औरत प्र्संग आदि से मधुमेही को अवश्य बचना चाहिए । अन्यथा लाभ नहीं होगा।*
-***
*मधुमेह के रोगी इसका भी जरुर  करें सेवन*

*जौ का आटा 6 किलो में चने का बेसन 2 किलो मिला कर इसकी रोटी खायें।*

*यह चूर्ण शुगर की रामबाण दवाई का काम करेगा| सुबह खाली पेट एक चम्मच चूर्ण गर्म पानी के साथ लें और ध्यान रखें कि नाश्ता करने के कम से कम एक घंटा पहले आपको यह चूर्ण लेना है| उसी प्रकार शाम को खाना खाने के एक घंटा पहले फिर से इस चूर्ण का एक चम्मच गर्म पानी के साथ लें।*

*यह दवा शुगर के रोग में दैवीय औषधि का काम करती है|*
***

*यह डायबिटीज की दवा  आप ऐसे इस्तेमाल करेगे तो हैरानीजनक लाभ होगा।*

करेले के जूस – से

करेला शुगर के मरीजों को विशेष लाभ पहुंचाता है| सुबह खाली पेट एक गिलास करेले का जूस के साथ 1चमच्च मधुमेह चुर्ण सेवन करे।
और करेले की सब्जी का भी सेवन करें| करेले का जूस कड़वा लग रहा हो तो उसमें थोड़ी मात्रा में पानी मिला लीजिये|
***
तुलसी के 5 पत्ते – मधुमेह कल्पचुर्ण के साथ मे सेवन
1चमच्च चुर्ण पानी ले फिर  5 पत्ते धीरे चबाएं।

तुलसी अनेक रोगों में काम आने वाला पौधा है| तुलसी के 5 पत्ते रोजाना सुबह खाली पेट चबाइए| इससे शुगर का बढ़ता लेवल खुद कम हो जायेगा| तुलसी में एंटी-ऑक्सीडेंट तत्व होते हैं जो आपके पेट की क्रियाओं को सुगम बनाते हैं|
**
मैथी के दाने साथ – सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण सेवन करे।रात को एक चम्मच मैथी के दाने एक गिलास पानी में डालकर रख दें|

सुबह उठकर इस पानी को छान लें और खाली पेट इस पानी से सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण सेवन करे।
मैथी के दाने आप पानी पीने के बाद चबा जाइये| मैथी बढ़ती शुगर को तुंरत कंट्रोल करती है|
**&

ग्रीन टी – के साथ सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण सेवन करे।
कैसे बनाए ग्रीन टी:-

6 ग्लास पानी लेकर आग पर रख दे।
उसमे नीचे लिखी सामग्री डाले

★ गिलोय हरी 100 ग्राम
★मेथी दाना   1चमच्च
★चरायता 1 चमच्च
★अजवाइन 1चमच्च
★नीम पत्ती 10 पीस
★तुलसी पत्ते 50 पीस
★पपीता पत्ता 1पीस

सभी सामग्री को तब तक उबाले जब तक आधा न रह जाए। 3 ग्लास बाकी बची टी को:-
1चमच्च मधुमेह कल्पचुर्ण को
1 ग्लास सुबह
1 दुपहरी
1 शाम को ले।

आम की पत्तियां – के पानी से सेवन।

आम सबका पसंदीदा फल होता है लेकिन दुर्भग्यवश शुगर के रोगियों को आम का सेवन करने से बहुत नुकसान होता है लेकिन आम की पत्तियां शुगर के मर्ज में बहुत लाभ पहुंचाती हैं| आम की पत्तियों को रात को पानी में भिगोकर डाल दें| सुबह खाली पेट इस पानी के साथ सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण सेवन करें इससे शुगर कण्ट्रोल होती है|
★★★

एलोवेरा का जूस –के साथ सिद्ध  मधुमेह कल्पचुर्ण का सेवन:-

एलोवेरा के चमत्कारी गुणों के बारे में तो आप सब जानते ही होंगे| रोजाना सुबह एक गिलास एलोवेरा का जूस के साथ सिद्ध मधुमेह कल्पचुर्ण सेवन करने से  शुगर का लेवल कण्ट्रोल होता है और यह लम्बे समय तक अच्छे परिणाम भी देता है|
नोट:-एलोवेरा जूस में थोड़ा करेले का जूस मिलाकर भी ले सकते हैं|

ज्वारे खायें – यह  मधुमेह में बहुत लाभदायक साबित हुआ है।

“ज्वारे” हो सकता है आपने यह नाम पहले ना सुना हो लेकिन ज्वारे को डायबिटीज की सबसे बेहतरीन औषधि माना जाता है| गेहूं के बीजों से जब छोटी पत्तियां निकलना शुरू होती हैं तो इसे “ज्वारे” कहा जाता है| घर पर ही मिटटी के बर्तन में कुछ गेहूं के बीज बो दें| इसमें समय से पानी वगैहरा डालते रहें| कुछ समय बाद जब गेहूं की पत्तिया निकलना शुरू हों तो इन पत्तियों को किसी कैंची से काट लें और इनका सेवन करें| शुगर में यह रामबाण दवा का काम करती है|

ध्यान रखें कि पत्तियों को उखाड़े नहीं क्यूंकि कुछ समय बाद फिर से पत्तियां आनी शुरू हो जाएँगी तब आप फिर से काटकर खाएं|
★★★
नित्य व्यायाम – अगर कर सको तो बहुत फायदेमंद साबित होगा।

मधुमेह की बीमारी ज्यादातर उन लोगों को होती है जो शारीरिक रूप से बिल्कुल निष्क्रिय रहते हैं| इसलिए शुगर के रोग में रोजाना सुबह व्यायाम बहुत जरुरी है| सुबह टहलने जरूर जाएँ और हो सके तो 10 से 15 मिनट की दौड़ भी लगाएं|

आपको साफ़-साफ बता दूँ कि कोई भी दवा आपको उतना लाभ नहीं पहुँचाएगी जितना सुबह का घूमना आपको लाभ पहुँचायेगा| इसलिए गर्मी, जाड़ा, बारिश कुछ भी हो लेकिन सुबह 30 मिनट टहलना ना भूलें|

योगा करें –

डायबिटीज के रोगियों के लिए कपालभाति सबसे लाभकारी योगा है।

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मंदाग्नि के 103 रोग

*मंदाग्नि के 103 रोग*


मंदाग्नि से होते हैं 103 हानिकारक रोग
*पेट के हाजमे की अग्नि जब मध्म
पड़ जाती है तो अनेकों रोगों का शरीर पर हमला होने लग जाता है।*
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*मंदाग्नि रोगों की संपूर्ण जानकारी*
आयुर्वेद में बताया गया है कि मंदाग्नि (मन्द अगनी) से 103 प्रकार के रोग होते है, जिसमे पहले स्थान पर एसिडिटी और एक सौ तीन स्थान पर कैंसर को रखा गया है।

ये सूची देखे मंदाग्नि के 103
1. हाइपर एसिडिटी
2. जल्दी-जल्दी भूख लगना
3. भोजन के 4 घंटे बाद या खाली पेट जलन
4. अत्यधिक प्यास
5. हर समय मुँह सुखना
6. मसूढ़ो में संवेदनशीलता
7. लार का खट्टा होना
8. दाँतो में ढीलापन
9. होठो के किनारे फटना
10. दाँतो में ठंडा गर्म लगना
11. दाँतो का फटना या टुकड़ो में निकलना
12. दाँतो की नसों में दर्द
13. गले या टॉन्सिल का बार बार संक्रमण
14. अम्ल का मुँह में आना
15. अल्सर
16. खट्टी डकार
17. उदर के ऊपरी भाग में दर्द
18. बहुत ज्यादा गर्मी लगना या जलन होना
19. थकान, हाथ पैरो में भारीपन, मानसिक शक्ति का ह्रास
20. शरीर छूने से बुखार की अनुभूति
21. प्रसन्नता व उत्साह की कमी
22. अवसादित होने की प्रवृति
23. बिना कारण घबराहट, व्याकुलता, तेज शोरगुल में चिड़चिड़ाहट
24. अत्यधिक रक्तहीन चेहरा
25. सिरदर्द
26. आसानी से बातो बातो में आँसू आजाना
27. आँखों में सूजन, लाली, दर्द, जलन, गड़न
28. पलको एवं कोर्निया में प्रदाह
29. बालो का घुँघराले होना
30. नाख़ून पतले होना, जल्दी टूट जाना
31. रूखी त्वचा
32. बाल घुँघराले, बेजान, झड़ते
33. शरीर पर पसीने से खुजली
34. पित्ती उछलना
35. पिण्डलियों में बायटे आना, ऐंठन
36. झाईयां
37. कान में दर्द
38. आवाज़ में बदलाव
39. बैचैनी
40. कब्ज
41. ऑस्टियो ऑर्थोरिटिस
42. यूरिक एसिड बढ़ना
43. CRP बढ़ना
44. मासपेशियो में ऐंठन
45. पैर के बाहरी भाग में दर्द
46. अमाशय या अन्न नली में दर्द या घाव
47. बवासीर
48. भगन्दर
49. फिशर
50. गैस्ट्रिक
(वायु बनकर शरीर में घूमने से)
51. पेट में जलन
52. गले में जलन
53. छाती में जलन जैसे heart attack हो
54. सिर दर्द या भारीपन
55. चक्कर
56. कान में घंटियाँ बजना
57. हाई बी पी
58. सिर में भ्रम की स्थिति, समझ न आना
59. बालो का झड़ना
60. बालो का सफ़ेद होना या पकना
61. पीठ दर्द
62. धड़कन बढ़ना
63. पायरिया
64. मुँह में दुर्गन्ध
65. भूख न लगना
66. प्यास न लगना
67. खट्टी / कच्ची डकार
68. मितली होना
69. मल में गंध
70. पेट में भारीपन
71. अफारा
72. शुगर
73. ढीले मसूड़े
74. मसूढ़ो के किनारे सफ़ेद या हरी परत
75. मल थोड़ा पतला, लेकिन मुश्किल से निकले
76. उल्टी होने, करने के बाद हल्का महसूस होना
77. अनिद्रा
78. कोलेस्ट्रॉल बढ़ना
79. बॉडी का फूल जाना मोटा हो जाना
80. पैरो में चलने पर दर्द
81. मसूढ़ो से खून आना
(कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से होने वाले रोग)
82. रक्त वाहिनियों में अवरोध
83. हृदयाघात
84. रक्त वाहिनियों का का संकरा होना
85. धमनियों में थक्के जमना
86. अत्यधिक बलगम
87. साँस लेने में कठिनाई
88. सीने में भारीपन
89. धमनियों में कड़कपन
90. किडनी से जुडी हुई बीमारियाँ
91. मस्तिष्क में ब्लड सप्लाई अवरोध होने से भूलने की समस्या
92. शरीर में जगह जगह गाँठे
93. हर्निया
94. गर्भाशय का स्थान से नीचे लटक जाना
95. हाथ पैर पतले होना
96. आंतरिक या बाहरी रक्त स्त्राव
97. आँखों का कमजोर होना
98. आँखों के सामने कुछ उड़ता प्रतीत होना
99. मुँह में कफ़ ज्यादा आना
100. पसीने में बदबू
101. मल मूत्र ज्यादा होना, मल लेसदार होना
102. हाथ पैरो में फड़कन
103. शरीर में होने वाला कैंसर
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सिद्ध त्वचा रोग नाशक तेल

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नुस्खा
गन्धक शुद       200 ग्राम
कलौंजी तेल      100 ml
पीली सरसों तेल 100 ml
नीम तेल            100ml
अरंडी तेल          100 ml
करंज तेल            50 ml
केलेतेल               50 ml
मदार का दूध       100 ml

सभी सामग्री को 200 ग्राम एलोवेरा जेल में भावना दे।

लगाने की विधि
दाद, खाज, खुजली ,सिरासिस, एक्जिमा, बवासीर पर उंगली से हल्के से मालिश करे।

Not – साबन का उपयोग बिल्कुल बंद कर दे।
★★
फ़ायदे-
★चमड़ी के किसी भी प्रकार के रोगो को जड़ से खत्म कर चमड़ी को नॉर्मल कर देता है।
★ बवासीर के मस्से पर लगाने से मस्सा
        बेजान  हो कर गिर जाता है।
★ सुगर के रोग होने वाले जख्म को
       साफ करता है।
★ जिदी चमड़ी के इंफेक्शन को जड़ से खत्म
    कर देता है।
★दाद,खाज, खुजली  को तुरंत आराम
   कर देता है।

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आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का संपूर्ण ज्ञान

आयुर्वेदिक नुस्खे, जड़ी बूटी, बच्चों के रोग, नारी रोग, गुप्त रोग, वात्त, पित्त, कफ़ रोग की संपूर्ण जानकारी देता है 

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सिद्ध अम्लपित्त नाशक कल्पचुर्ण

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दस्त, पेट में जलन, पतले दस्त का आना, मल त्यागने में गुदा प्रदेश में जलन महसूस हो तो कारगर है *सिद्ध अम्लपित्त नाशक कल्पचुर्ण*

आयुर्वेद में एसिडिटी को अम्ल पित्त कहते हैं। इसमें खट्टे डकार आ सकते हैं, छाती में जलन महसूस हो सकती है, उल्टी की प्रवृति दिखती है

क्योंकि आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, बदलती जीवनशैली और खान-पान की आदतें हमें कई रोगों की तरफ धकेल रही हैं। हमारी दिनचर्या आरामदेह हो गई है और खाने में स्वस्थ खाने की जगह पिज़्ज़ा, बर्गर और सोडा कोल्ड ड्रिंक्स ने ले ली है।

एसिड रिफ्लक्स भी ऐसा ही एक रोग है, जो हमारे खान-पान और रहन-सहन की गलत आदतों के कारण होता है। पेट के अंदर गई हुई चीज़ों का वापस खाने की नली  में आना एसिड रिफ्लक्स (acid reflux) कहलाता है।

कभी- कभार, बहुत थोड़ी मात्रा में पेट की चीज़ों का खाने की नली में वापस आना आम बात है, लेकिन ऐसा बार-बार और अधिक मात्रा में होना आपके लिए हानिकारक हो सकता है।

●इसे हार्टबर्न (heartburn),
●एसिड इनडाइजेशन (acid indigestion),
●गेस्ट्रो इसोफेजियल रिफ्लक्स डिसीज (gastrooesophageal reflux disease/GERD/GORD)
या
●पाईरोसिस (pyrosis) के नाम से भी जाना जाता है।

       क्या हैं एसिड रिफ्लक्स के मुख्य कारण ?

*अनियमित और असंतुलित आहार
*निष्क्रिय जीवनशैली (Sedentary Lifestyle)
*मोटापा (Obesity)
*हर्निया (hiatal hernia)
*स्मोकिंग (Smoking)
*नमक और नमक युक्त खाने का अत्यधिक प्रयोग
*गर्भावस्था (Pregnancy)
*बुढ़ापा
*अत्यधिक चाय और कॉफ़ी का सेवन
*अत्यधिक मात्रा में और भूख न लगने पर भी खाना
*कुछ दवाओं जैसे एंटी-डिप्रेसेंट, पेन किलर्स, एंटी-अलर्जिक या एंटी-बायोटिक के साइड इफेक्ट्स फलस्वरुप एसिड रिफ्लक्स

●●●

  क्या हैं एसिड रिफ्लक्स के लक्षण ?
(What Are The Symptoms Of Acid Reflux Or GERD?)

*छाती के बीच के हिस्से में जलन
*खाने की चीज़ों का पेट से वापस अन्न नली में आना
*सूखी खांसी और आवाज का बैठ जाना
*जी मचलाना या उल्टी आना
*बिना किसी कारण के वजन कम होना
*बेचैनी या घबराहट होना
*खट्टी डकार आना
*पेट भरा हुआ लगना

        *क्या सिद्ध अम्लपित्त कल्पचुर्ण*

त्रिफला                ~ 20 ग्राम
बेल चुर्ण               ~  20 ग्राम
ब्रह्मी बूटी              ~ 20 ग्राम
संखपुष्पी               ~10 ग्राम
हिंग                      ~  10 ग्राम
कालीमिर्च             ~  10 ग्राम
अजवायन             ~  10 ग्राम
दालचीनी             ~ 10 ग्राम
छोटी हरेड             ~  10 ग्राम
सतपुष्पा                ~10 ग्राम
सैंधा नमक            ~   10 ग्राम
सौंफ भुनी             ~   10 ग्राम
मीठा सोडा             ~100 ग्राम  मिलाए

सभी चुर्ण को 100 ग्राम एलोवेरा रस भावना दे।
●●●
सेवन विधि

जब सुख जाए तो पानी से खाने के बाद एक एक चम्मच लेते रहे।

              *साथ यह जरूर करे*

*सबसे पहले तो खाने के बाद गुड़ जरुर खाएं। ऐंसा करने से एसिड की समस्या नही होती।

*खाने में भुने हुए जीरे को शामिल कर लें।

*खाने के बाद रोज 4 से 5 बादाम खायें।

*इलाइची भी पाचन में काफी मदद करती है, और आपको एसिड रिफ्लक्स से भी आराम दिलाने में मदद करती है।

* पुदीना, अदरक, आंवला और तुलसी के सेवन से भी आराम मिलता है।

*ठंडा दूध एसिड को पेट तक ही रखने में मदद करेगा।

*यदि आप स्मोकिंग करते हैं, तो स्मोकिंग करना बंद कर दें।

*मुलेठी चूर्ण (Licorice Powder) का काढ़ा आपकी काफी मदद कर सकता है।

*गरिष्ठ भोजन से दूर रहें।

*बहुत ज्यादा टाइट कपड़े ना पहनें।

*एक्सरसाइज करें।

*अल्कोहल से दूर रहें।

*तली हुई चीज़ों से दूरी बनाकर रखें।

■■
      अम्लपित्त के बारे कुछ जरूरी जानकारी

अधोग स्थिति: यह स्थिति छोटी अमाशय और बड़ी अमाशय के बीच होती है। इसमें दस्त, पेट में जलन, पतले दस्त का आना, मल त्यागने में गुदा प्रदेश में जलन महसूस होता है। इसमें पित्त और वायु बढ़ जाते हैं। ऐसा बरसात में पेय पदार्थ का ज्यादा सेवन करने से भी हो सकता है या खट्टे पदार्थ का ज्यादा सेवन भी कारण बन सकता है।

■■

क्या करें: ऐसे लोगों को उड़द की दाल, बैंगन, तिल के तेल से बनी चीजें, गरिष्ठ भोजन, मदिरा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

 अगर इस समस्या से परेशान हैं तो बेल का शरबत, नारियल पानी, चिरायता आदि का इस्तेमाल करें, पूरा लाभ होगा।

■■

उध्र्वग-अधोग स्थिति: इसमें दोनों के मिले-जुले लक्षण होते हैं। इसमें मल का रंग काला होता है। जो लोग खाना खाने के काफी देर बाद सोते हैं, उनका पित्त विकृत हो जाता है।

■■

क्या करें: इसमें परवल के व्यंजन, कुटकी, चिरायता का काढ़ा, गिलोय के रस का सेवन करना चाहिए। 

उन्हें गुलकंद, सेब और बेल का मुरब्बा खाना चाहिए। ऐसे लोगों के लिए अदरक और सौंठ, कागजी नींबू, नारियल का पानी लाभकारी है।

■■

 दफ्तर में लगातार बैठकर काम करते हैं तो

जो लोग लगातार बैठकर काम करते हैं उनके पेट और छाती में जलन पैदा होती है। 

इससे शरीर में भारीपन, नींद, चकत्ते आना आदि की समस्या होती है। इससे शुरुआत में खांसी होती है। इसके बाद रोग शुरू होता है। 

इसके रोगियों को थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहना चाहिए। नारियल पानी बेहतर पेय है। उनके लिए पेठे की मिठाई अमृततुल्य है। 

कभी-कभी गुलकंद, मुनक्का का भी सेवन कर लेना चाहिए। इन्हें टमाटर, चावल, चाय, सिगरेट आदि से बचना चाहिए। खाने में उड़द की दाल, राजमा आदि चावल के साथ न लें। राजमा का सेवन रोटी के साथ कर सकते हैं

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                     ■■■

                    निवेदन

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  जरूरत होने पर call के लिए time देगे।

सिद्ध स्वाइन फ्लू नाशक कल्पचुर्ण

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     *सिद्ध स्वाइन फ्लू नाशक काढ़ा*
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         *स्वाइन फ्लू के लक्षण*

स्वाइन फ्लू की ऊष्मायन अवधि एक से चार दिनों (लक्षण प्रकट होने वाला समय) की होती हैं। इसके लक्षण इन्फ्लूएंजा (फ्लू) के समान हैं। इसके लक्षणों में शामिल है :

बुख़ार●सिरदर्द●नाक बहना●गले में खराश●खांसी की तकलीफ या सांस फूलना●भूख में कमी●दस्त या उल्टी

●गिलोय- लगभग 50 इंच लम्बा तना कुटा हुआ
●मुनक्का    -10 नग
●छुहारे        -5 नग
●तुलसी।      – 11 पत्ते
●चिरायता      –3 ग्राम
●दालचीनी।     -3 ग्राम
●सोंठ             –2 ग्राम
●हल्दी            -2 ग्राम
●छोटी पीपल   – 3 नग कुटी
●लौंग               – 3 नग कुटी
●बड़ी इलायची – एक कुटी हुई
●गुड देसी स्वादानुसार

सब सामग्री कूटकर 6 ग्लास पानी मे उबाले।
3 ग्लास बाकी रहने पर दिन 4 बार गर्म चाय की भांति सेवन करे।
●3 पूर्ण दिन आराम करें।
●घर से बाहर न निकले।
            ◆◆◆
नोट करें।
इसको पीने के बाद ओढ़ कर लेट रहें शरीर में ठंडी हवा न लगने दें घंटे भर और कुछ खाना पीना नहीं. ।

कितना भी कठिन जकड़ा जुकाम फ्लू हो सब ठीक हो जाता है. स्वाइन फ्लू में भी फायदा होगा.
◆◆◆

              *गिलोय से बनी*
            *स्वाइन फ्लू की दवा*
      *स्वाइन फ्लू नाशक कल्पचुर्ण *
यह दवा स्वाइन फ्लू,टाइफाइड, डेंगू, चिकन गुनिया,दिमागी बुखार, वायरल फीवर और मलेरिया।किसी भी प्रकार का  बुखार और हैपेटाटस ए बी सी  हो या डेंगू बुखार हो….
              
            ★यह दवा रामबाण है★
★ यह समान पन्सारी से सुलभ मिल जाता हैं★
         ★कोरियर से मँगवा सकते हैं★
*और भी फ़ायदे है।*
     ★3 ग्राम दवा 5000 डेंगू cell{ wbc} निर्मित करती है★
★*बढ़े हुए wbc को समानता देती हैं*

       *स्वाइन फ्लू नाशक कल्पचुर्ण*

गिलोय चूर्ण 100 ग्राम
आंवला चूर्ण 100 ग्राम
छोटी हरड़ 100 ग्राम
सतावर      100 ग्राम
तुलसी पाचांग-100 ग्राम 
चरायता चूर्ण 100 ग्राम
अजमायण-100 ग्राम
मलॅठी-50 ग्राम
सौंठ-50 ग्राम
काली मिर्च -10 ग्राम

सभी  चूर्ण को मिलाकर 250 ग्राम गिलोय रस में भावना दे

दिन मे 4 बार  2-2 ग्राम  3-3 घंटे बाद लेते रहे । साथ मे दुध भी जरूर ले । साथ काढ़ा का सेवन करे।
स्वाईन  मे  लगातार 3 दिन दवा ले ।

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  सिद्ध बिल्वादी कल्पचुर्ण

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               *सिद्ध बिल्वादी कल्पचुर्ण*
                 *मल का बार बार आना*
               *एक बार पेट साफ न होता हो*

                      *यह चुर्ण रामबाण है*
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भाँग चूर्ण          100 gm
सौंठ                 100 gm
बेल गिरी          100 gm
मोचरस            100 gm
धायफूल           100 gm
धनियां बीज      200 gm
सौंफ                 400 gm
सभी को पीस कप्पड़छान कर 1   1 चम्मच लस्सी के साथ 2 या 3 बार प्रयोग करें

लाभ:- मल का बार बार आना और मरोड़ के साथ आना आँव का आना खून मिक्स हो कर आना इन सब रोगों में अच्छा लाभ देता है लेकिन परहेज़ के साथ परहेज़ में रोटी और दूध बन्द करें ।

कॉल 89680 42263
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चेहरे की काली छाया हटाएँ

सिद्ध अयूर्वादिक

                 चेहरे की छाया( कालापन)
                   अयूर्वादिक इलाज

 कभी-कभी चेहरे में कालापन आ जाता है जिसे चेहरे की छाया कहते हैं। इसमें चेहरे की त्वचा में काले या भूरे रंग के दाग-धब्बे भी हो जाते हैं।

★★★
     चेहरे का कालापन दूर करने के लिए
                 अयूर्वादिक उपाय

गेंदे के फूल से हटाए झाई

झाई के उपाय में गेंदे के फूल और गेंदे के पत्ती ले और पीस ले| झाई हटाने के घरेलू उपाय  मे यह एक सफल उपाय है जिस के नियमित उपयोग से झाई ख़तम हो जाती है| रात को लेप करे और सवेरे धो दे|

★★

काले तिल और हल्दी से झाई हटाए

झाइयां की क्रीम  का इस्तेमाल करे उस के बदले फेस की झाइयों का इलाज जानिए कैसे करे ।

काले तिल और हल्दी के उपयोग से काले तिल को गुलाब जल के साथ मिला के पीस ले और फिर इस मे हल्दी और नींबू का रस मिला के झाई पर लगा के रखे ।

एक घंटे तक तक धोएं नही

इस मे एलो वेरा जूस मिलाया जाए तो और भी अच्छा काम करेगा|
★★

संतरे के छिलके से हटाए झाइया

संतरे के छिलके मे गुण है जो काले दाग धब्बे मिटा दे और त्वचा के मेलानोसाईट मे अधिक मेलेनिन के निर्माण पर रोक लगाए ।


इसलिए झाइयों का उपचार करने के लिए संतरे के छिलके को पीस ले और इस मे तुलसी का रस मिला के जहाँ पर झाई है वहाँ पर लगा के रात भर रहने दे।

बेकिंग सोडा, हाइड्रोजन पेरोक्साइड, अरीठा से झाई निकाले अरीठा को भिगो के पीस दे|

 इस मे बेकिंग सोडा मिलाए और फिर थोड़े बूँद हाइड्रोजन पेरोक्साइड डाल के झाइयों पर 10 मिनिट तक घिसे और फिर धो दे।

★★★
झाइया हटाने की क्रीम
आप चाहे तो बाजार मे मिल रही झाइयों की क्रीम  का इस्तेमाल करे।

झाइयों के लिए बेस्ट क्रीम आप को
ऑनलाइन ज़रूर मिल जाएँगे|

झाइयां मिटाने की झाइयों की बेस्ट क्रीम एक है Mediderma

 दूसरा है Vincere एंटी -मेलासमा क्रीम,

 तीसरा है मेला K वाइट मेलासमा ब्राइटनिंग क्रीम

 और Reviva Labs ka skin lightening और brown spot removing cream।

 यह झाइयां मिटाने की क्रीम (jhaiya mitane ki cream) का प्रयोग करे या तो घर पर ही बनाए|

★★


झाइयों के लिए बेस्ट क्रीम घर पर बनाने के लिए

 झाइयां के लिए क्रीम बनाने के लिए
 इस मे आप ले

मलाई     5 ग्राम (2 चमच्च)
हल्दी      1 ग्राम (आधा चम्मच)
शहद      1 ग्राम
 बादाम   4  (बादाम रात को भिगोकर रखना है।)

सभी को मिलाकर कर पेस्ट बनाएं।
तो फ्रेश एंटी स्पॉट क्रीम तैयार।

20 मिनट के लिए चेहरे में लगाए।
यह प्रयोग दिन में 2 बार करे।

21 दिन लगातार उपयोग करे।


झाई गायब होंगे और साथ मे त्वचा मे भी अनोखा निखार आएगा|

झाई मिट जाने के बाद भी यह प्रयोग करते रहे हफ्ते मे दो बार तो त्वचा की कोमलता और रंगत बरकरार रहेगी|

◆◆
नोट

बाजार की क्रीम में होते है हानिकारक एसिड

 ध्यान मे रखे की इन झाइयों की क्रीम मे होते है hydroquinone, kojic acid, retinoid जो की लंबे समय के उपयोग पर त्वचा के लिए हानिकारक है तो बेहतर है की घरेलू नुस्खे से झाइयां हटाए।

किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
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सिद्ध थाइराइड नाशक कल्पचुर्ण

सिद्ध थाइराइड नाशक कल्पचुर्ण

सिद्ध आयुर्वेदिक

       *थाइराइड नाशक कल्पचुर्ण*
      *थाइराइड को करे जड़ से खत्म*
            *Online मंगवाए*

यह दवा हाइपर थायराइड और हाइपो थायराइड  दोनों प्रकार के थायराइड को ठीक करती है ।
★★
हाइपर थायराइड के लक्षण
वजन कम होना,हार्ट बीट तेज होना,पसीना जादा आना,हाथ और पैरों में कप कपी होना आदि हैं ।
★★★

    *थाइराइड नाशक कल्पचुर्ण नुस्खा*

*यह नुस्खा किसी वैद की रेख देख में तैयार करे।*

कचनार छाल        300 ग्राम
हार सिंगार फूल     250 ग्राम
इंद्रायण अजवाइन  200 ग्राम
गिलोय चुर्ण          125 ग्राम
निर्गुंडी बीज          125 ग्राम
हल्दी                    125 ग्राम
सौंठ                     125 ग्राम
मलॅठी चुर्ण            100 ग्राम 
डाल चीनी             100 ग्राम
चित्रक मूल            100 ग्राम
काली मिर्च             50 ग्राम

*सभी को कूटपीस कर चुर्ण बनाए*
फिर चुर्ण को 200 ग्राम गिलोय रस और 400 ग्राम एलोवेरा रस भावना दे धूप में सुखाएं।

सेवन विधि -2 ग्रा से 5 ग्राम दिन में 3 बार 
                 दूध के साथ लें । 

                        “★★★

साथ यह भी ले –

दिन मे 2 बार दही 200 -200 ग्राम जरूर सेवन करे ।

सुबह और रात को सोते समय 5 बादाम 1 अखरोट सेवन करे ।

साबित दालें ज्यादा इस्तेमाल करे,

गऊ मूत्र 50 मिलीलीटर रोजाना सेवन करे ।

परहेज –

तली हुई चीजे बिल्कुल इस्तेमाल न करे ।
मास अंडे प्रयोग न करे यह थाइरायड में जहर 
समान है ।

साथ मे यह जरूर करे

1. हल्दी दूध: थायराइड कण्ट्रोल करने के लिए आप रोजाना दूध में हल्दी को पका कर पिए। अगर हल्दी वाला दूध न पिया जाये तो हल्दी को भून कर इसका सेवन करे।

2. लौकी का जूस: रोजाना सुबह खली पेट लौकी का जूस पिने से भी थाइरोइड खत्म करने में मदद मिलती है। जूस पिने के आधे घंटे तक कुछ खाये पिए नहीं।

3. तुलसी और एलोवेरा: दो चम्मच तुलसी के रास में आधा चम्मच एलोवेरा जूस मिला कर सेवन करना भी इस बीमारी से छुटकारा पाने का उत्तम उपाय है।

4. लाल प्याज: प्याज को बीच से काट कर दो टुकड़े कर ले और रात को सोने से पहले थायराइड ग्रंथि के आस पास मसाज करे। इसके बाद गर्दन से प्याज का रस को धोये नहीं।

5. बादाम और अखरोट: बादाम और अखरोट में सेलीनीयम तत्व मौजूद होता है जो  थायराइड के इलाज में फायदा करता है। इस के सेवन से गले की सूजन से भी आराम मिलता है। हाइपोथायराइड में ये उपाय जादा फायदा करता है।

6. अश्वगंधा: रात को सोते वक़्त एक चम्मच अश्वगंधा चूर्ण गाय के गुनगुने दूध के साथ सेवन करे।

7 .एक्सरसाइज: रोजाना आधा घंटा एक्सरसाइज करे, इससे थाइरोइड बढ़ता नही है और कंट्रोल में रहता है। 

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Call 89680 42263

सिद्ध वातदर्द रोग कल्पचुर्ण

               ★साइटिका की दवा★

           *सिद्ध वातरोग कल्पचुर्ण*

कमर से संबंधित नसों में से अगर किसी एक में भी सूजन आ जाए तो पूरे पैर में असहनीय दर्द होने लगता है।

जिसे गृध्रसी या सायटिका (Sciatica) कहा जाता है।

साइटिका की बीमारी में होने वाला दर्द बहुत तकलीफ देह होता है।

यह दर्द कभी कभी हमारी रीढ़ की हड्डी के नीचे से पैर की एड़ी तक जाता है।

इस दर्द में सूजन की समस्या भी होने लगती है।

 जिसके कारण हमारे पैरो में बहुत ज़्यादा दर्द होने लगता है जिससे उठने बैठने में भी तकलीफे होने लगती है।

हम इस के लिए आप को रामबाण दवा बता रहे हैं।

आप करे आप को फायदा होगा।

           ★साइटिका दवा★

गिलोय चुर्ण       ~200 ग्राम
सहजन की जड़ ~100ग्राम
सतावर             ~100 ग्राम
आँवला चुर्ण     – 100 ग्राम
चरायता             ~ 50 ग्राम
अजवाइन         ~ 50 ग्राम
सौंठ भुनी         ~ 50 ग्राम
हींग  भुनी         ~ 10 ग्राम

सभी को मिलाकर चुर्ण बनाए।

दिन में 2 बार दूध के साथ सेवन करे।

दवा खाने के एक घंटे बाद ही ले।

कैंसर और पेट आदि के दौरान शरीर के बनी गांठ , फोड़ा आदि में यह दवा रामबाण है।

यह दवा साइटिका (पैरों में दर्द) , जोड़ों में दर्द , लकवा ,दमा,सूजन , पथरी आदि में लाभकारी है |

Online दवा मंगवा सकते हैं।
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गुर्दे की खराबी में रामबाण -सिद्ध कायाकल्प चुर्ण

सिद्ध अयूर्वादिक

             ★गुर्दे की खराबी में रामबाण★
                   ■कायाकल्प चुर्ण■

   गुर्दे खराब हो और डायलिसिस ट्रीटमेंट ले रहे तो 21 दिन कायाकल्प चुर्ण ले ।आप को डायलिसिस ट्रीटमेंट
की जरूतर नही पड़ेगी।

गुर्दे हमारे शरीर में खून साफ़ करने और शरीर से विषेले पदार्थ पेशाब के रास्ते बाहर निकालने का काम करते है, इससे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम करने में मदद मिलती है।

 इसके इलावा ब्लड प्रेशर, नया खून बनाना, पानी और कैल्शियम का नियंत्रण बनाए रखना भी किडनी के कुछ अन्य काम है। अगर किडनी में कोई इन्फेक्शन या फिर कोई बीमारी हो जाती है तो ये सही से काम नहीं कर पाती जिस कारण शरीर को कई दूसरे रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।

गुर्दे सही तरीके से काम नही कर रहे तो कायाकल्प चुर्ण आप के गुर्दे रोग में सहायता करेगा।

क्योंकि  कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था।

कायाकल्प चुर्ण के तीन मुख्य लक्ष्य
(Three main Objective of Kayakalpa churan)

कायाकल्प चुर्ण के वैसे तो कई फायदे हैं

लेकिन इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं-

*नशों की कमजोरी को दूर करता है।
• व्यक्ति की सुंदरता एंव स्वास्थ्य के साथ-साथ लंबे समय तक उन्हें जवानी को बरकरार बनाए रखना।
• नेचुरल एजिंग प्रोसेस को धीमा करना
• आयु बढ़ाना

●●
क्या है काया कल्प चूर्ण में 
आए जाने -:::

*त्रिफला -250 ग्रा
*इंद्राण से बनी 
हुई अजमायन-200 ग्राम
*गिलोय चूर्ण-100 ग्राम
बेल 200 ग्राम
*अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम
* ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम
*शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम
*कलौंजी -100 ग्राम
*आवला चूर्ण-100 ग्राम
*नसांदर -100 ग्राम
*अपामर्ग -50 ग्राम
* जटामांसी -50 ग्राम
* सत्यनाशी -50 ग्राम
* काला नमक -50 ग्राम
*सेंधानमक -50 ग्राम
*ऐलोवैरा रस -500 ग्राम

सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर 
सांय मे सुखाय ।

जब सुख जाए तब आप का काया कल्प 
चूर्ण बनकर तैयार हो गया है ।

सेवन विधि – गुर्दे के रोगी दिन में 3 बार पानी से ले।

★★

         किडनी को स्वस्थ रखने के लिए 
               ★आहार और परहेज★

नमक का सेवन जादा ना करे।

बाजार में मिलने वाला डब्बा बंद खाने से दूर रहे।

साफ पानी पिए और अगर पानी साफ ना मिले तो उबाल कर पिए।

किडनी के लिए डाइट हेल्थी होनी चाहिए और फास्ट फुड खाने से परहेज करे। अपने आहार में फलों और सब्जियों का सेवन अधिक करे।

अगर दस्त, उल्टी या बुखार हुआ हो तो शरीर में पानी की कमी ना हो, इसलिए प्रयाप्त मात्रा में पानी पिए।

धूम्रपान शराब और किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहे।
गुर्दे के रोग से बचने के लिए ज़रूरी है की आप किसी भी तरह के इन्फेक्शन से बचे रहे।

ज्यादा तनाव लेने से बचे और स्वस्थ जीवनशैली अपनाये।

शरीर का वजन जादा ना बढ़ने दे।

दर्द निवारक दवा का सेवन कम से कम करे, क्योंकि ये मेडिसिन किडनी को नुकसान करती है।

कायाकल्प चुर्ण online मंगवा सकते हैं।

किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  
contact करे
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http://www.ayurvedasidh.blogspot.com/

   सिद्ध नाड़ी दुर्बलता नाशक कल्पचुर्ण

सिद्ध अयूर्वादिक

      *नाड़ी दुर्बलता(Nervous Weakness)*

        सिद्ध नाड़ी दुर्बलता नाशक कल्पचुर्ण

Online  मगवाएँ- whats 94178 62263

                        (Online मंगवाए)
               *नाड़ी दुर्बलता कल्पचुर्ण*

अश्वगन्धा 100 ग्राम
गिलोय 100 ग्राम
सर्पगन्धा 100 ग्राम
ब्रह्मबुटी 100 ग्राम
संखपुष्पी 100 ग्राम
सतावर 100 ग्राम
बाहीपत्र 100 ग्राम
इसबगोल की भूसी 100 ग्राम
तालमिश्री 100 ग्राम

इन सबको कपड़छन चूर्ण बनाकर एक काँच की शीशी में भरकर रख लें।

सुबह-शाम दूध या पानी के साथ 10 ग्राम मात्रा लें।

5 ग्राम सुबह 
5 ग्राम शाम

21 दिन तक लेने के बाद ही मस्तिष्क एवं शरीर रक्त में संचार का अनुभव होगा।

★★★
                *नाड़ी दुर्बलतामें क्या होता*

जब किसी व्यक्ति नाड़ी दुर्बलता का रोग हो जाता है तो उसे नींद बहुत आती है तथा उसकी पाचनक्रिया खराब हो जाती है जिसके कारण उसको भूख नहीं लगती है तथा खाया हुआ खाना ठीक से पचता नहीं है।

रोगी का शरीर गिरा-गिरा सा रहता है तथा उसे यौन सम्बंधी अनियमिताएं भी हो जाती हैं। रोगी को भय, क्रोध, चिंता, ईर्ष्या, चिड़चिड़ापन, दुविधा में रहना आदि परेशानियां भी हो जाती हैं।

रोगी को कोई काम करने का मन नहीं करता है और उसका मन इधर-उधर भटकता रहता है। इस रोग से पीड़ित रोगी को कभी-कभी आत्महत्या करने का मन करता है तथा रोगी को अकेले रहने का मन करता है और उसे कहीं भी शांति नहीं मिलती है।

          इस रोग से पीड़ित रोगी को सहानुभूति की आवश्यकता होती है इसलिए इस रोग के रोगी के साथ मधुरवाणी (प्यार भरे शब्द) से बोलना चाहिए और रोगी व्यक्ति को अधिक देर तक सोने देना चाहिए।

रोगी को सोच-विचार का अधिक कार्य नहीं करना चाहिए। इस रोग से पीड़ित रोगी को पहले की सारी बातें याद दिलानी चाहिए जिसमें उसने कोई सफलता प्राप्त की हो या फिर उसने अच्छे स्थान की यात्रा की हो।

रोगी की इच्छाओं को महत्व देना चाहिए। रोगी व्यक्ति के साथ कभी भी बहस नहीं करनी चाहिए।

           “*निःशुक्ल अयूर्वादिक सलाह ले*

                  दवा online मगवाएँ
              What’s   *
94178 62263*

सिद्ध कंठ कल्पचुर्ण

सिद्ध आयुर्वेदिक

                   *सिद्ध कंठ कल्पचुर्ण*

Online मगवाएँ- whats 94178 62263

            *गलेगी की आवाज बैठ जाएं तो*
                     *गले सूजन हो तो*

मलाठी चुर्ण       100 ग्राम
ब्राह्मी                100 ग्राम
सोंठ भुनी           50 ग्राम
कालीमिर्च          50 ग्राम
छोटी इलाची      50 ग्राम
आवला चुर्ण       50 ग्राम
चरायता             50 ग्राम
गिलोय चुर्ण        50 ग्राम
लौंग                  10 ग्राम
हींग                   10 ग्राम
सुहागे की खील  10 ग्राम
काला नमक       10 ग्राम

चुर्ण बना कर 2 ग्राम चुर्ण एक चम्मच शुद्ध शहद से दिन में 3 से 4 बार ले।

            *क्यों बैठता है गला संपूर्ण जानकारी ले*

        अस्पष्ट आवाज (खराब आवाज), कर्कश स्वर (भारी आवाज) को स्वरभंग या गला बैठना कहते हैं। ठंड लगने या ठंड शरीर में बैठ जाने से आवाज अटकने से होता है। ज्यादा जोर से बोलने या ज्यादा देर तक लगातार बोलने या गाने से भी यह रोग हो जाता है।

गला बैठना या आवाज (स्वर) खराब होने का कारण है गुस्से में अधिक जोर से चिल्लाकर बोलना। ऊंची आवाज से पढ़ने या गाने से गला बैठ जाता है। गले में लकड़ी आदि की चोट के कारण एवं विष या विषयुक्त पदार्थों का सेवन कर लेने से भी गला बैठ जाता है।

आवाज का बैठ जाना कोई रोग नहीं होता है परन्तु यह रोग द्वारा उत्पन्न हो सकता है जैसे : गले में कैंसर, हिस्टीरिया और पक्षाघात (लकवा) आदि।

             *गले बैठने के 6 प्रकार होते है*

           यह रोग 6 प्रकार से उत्पन्न होता है :

 1. वातज 2. पित्तज 3. कफज 4. त्रिदोषज 5. क्षयज 6. मेदज।
कारण :

खट्टा, चटपटा या ज्यादा मसालेदार चीजें खाने से गला बैठ सकता है। यह चीजें हमारी आवाज को खराब कर देती हैं।

 स्वर-यंत्र में सूजन आने से, जोर-जोर से बोलने से, अधिक खांसी और गले में जख्म आदि कारणों से भी आवाज बैठ जाती है जिसमें रोगी को बोलते समय गले में जलन सी महसूस होती है। गले में कफ (बलगम) रुक जाता है।

शरीर में कमजोरी, खून की कमी, वीर्य आदि के कम हो जाने के कारण भी गले की आवाज खराब हो जाती है।

Online मगवाएँ- whats 94178 62263

◆सिद्ध बलवर्धक कल्पचुर्ण◆

सिद्ध अयूर्वादिक

        ★शरीरिक की हर कमजोरी के लिए★
            ★खाया पीया न लगे तो यह चुर्ण ले★

                      ◆सिद्ध बलवर्धक कल्पचुर्ण◆

सिद्ध आयुर्वेदिक का एक ही नंबर 94178 62263 है।  बहुत frod लोग सिद्ध आयुर्वेदिक को अपना बता रहे है। धोखे से बचे। 94178 62263 पर ही call या whats करे।

घर में काम करने वाली महिला, दफ्तर जाने वाले पुरुष, स्पोर्ट्स खेलने वाले खिलाडी हो या running करने वाले लड़के हो सबको बेहतर प्रदर्शन के लिए शरीर में ताकत और स्टैमिना चाहिए। इस लिए हर कोई ये जानना चाहता है की शारीरिक कमजोरी दूर करके शरीर में ताकत और एनर्जी कैसे बढ़ाये ताकि जल्दी थकान ना हो। बलवर्धक चुर्ण ऐसा है जिनकी मदद से आप बॉडी में एनर्जी और स्टैमिना बढ़ा सकते है।

*★ बीमारी के बाद आई कमजोरी को दूर करे★*
*★महिलाओं औऱ पुरुषों के रामबाण चुर्ण★*

*★जिन को खून की कमी है वो यह जरूर

दवा ले★*

*★दुगले पतले लोग और बच्चे जरूर उपयोग करे★*

*★जिन को खाया पिया नही लगता उनके लिए              कारगर है।★*

       ★online मंगवा सकते हैं आप★

   ★ 94178 62263 पर कॉल या whats करे★

        ★बलवर्धक कल्पचुर्ण नुस्खा★
अश्वगंधा        -250 ग्राम 
सतावर।         -250 ग्राम 
आवला-          200  ग्राम 
अनार छिलका  200 ग्राम
अजवाइन-       100ग्राम
सौंफ                100 ग्राम
मिश्री                -100 ग्राम 
शंखपुष्पी         -100 ग्राम 
ब्राह्मी बुटी         -100  ग्राम 
जायफल           100 ग्राम
जावित्री           100 ग्राम
लोहभस्म           50 ग्राम
तुलसी बीज       -50 ग्राम 
सालम मिश्री     -50 ग्राम
सालम पंजा       -5 0 ग्राम

काली मिर्च -20 ग्राम

सभी को मिलाकर किसी बंद डब्बे मे रखे ।

सेवन विधि –

इसे रात सोते समय रोज दो चम्मच गाय के दूध के साथ लें।

हर शरीरिक कमजोरी दूर होगी।

◆◆◆

*शारीरिक कमजोरी के लक्षण*

★पसीना ज्यादा आना
★जल्दी थकान होना
★नींद नहीं आना
★चक्कर आना
★दुबला पतला शरीर दिखना
★भूख ना लगना या कम लगना
★किसी भी काम में मन नहीं लगना
★मर्दाना कमज़ोरी महसूस होना

    *दवा के साथ साथ यह भी जरूर करे।*

कमजोरी चाहे शारीरिक हो या मानसिक, सबसे पहले समस्या के कारण पता होना चाहिए तभी इलाज सही तरीके से और सही दिशा में संभव है। शरीर की कमजोरी दूर करने और ताकत बढ़ाने के लिए आप दवा दवा के साथ साथ  निम्न उपयोग भी करे आप को  दुगना फायदा होगा।

*देसी खजूर शरीर में ताक़त बढ़ाने का एक आसान तरीका है। खजूर के बीज निकाल ले, अब खजूर में मक्खन भर कर खाये। इस उपाय को कुछ दिन निरंतर करने पर आप शरीर में भरपूर ताकत और एनर्जी महसूस करेंगे।*

*नसों की कमजोरी दूर करने और खून बढ़ाने के लिए प्रतिदिन 8 – 10 खजूर खाये और एक गिलास दूध पिए।*

*शारीरिक ताकत बढ़ाने के उपाय में गाजर का हलवा भी फायदेमंद है। अगर आपका शरीर दुबला पतला और कमजोर दिखाई देता है तो गाजर का सेवन करना चाहिए। प्रतिदिन गाजर के जूस का सेवन भी उत्तम उपाय है।*

*मर्दाना कमज़ोरी दूर करने के लिए सुबह मीठा आम खाये और सोंठ वाला दूध पिए।*

*अंकुरित दाल, चने और सोयाबीन दाल खाने से body को प्रोटीन और आवश्यक पोषक मिलते है। इससे शरीर में ताकत आने के साथ साथ पाचन तंत्र भी दरुस्त रहता है।*

शरीर की कमजोरी कैसे दूर करे में दूध भी काफी उपयोगी है। दूध में कैल्शियम और अन्य कई प्रकार के पोषक तत्व होते है जिससे शरीर में ताक़त बढ़ती है। रोजाना कम से कम एक गिलास दूध जरूर पीना चाहिए। दूध से हड्डियां भी मजबूत होती है।

*शरीर में energy बढ़ने के लिए अपने आहार में केला शामिल करे। केला प्राकृतिक शुगर का अच्छा स्रोत है जो शरीर में एनर्जी जल्दी छोड़ता है। प्रतिदिन 2 केले ज़रूर खाए।*

*सुबह दूध के साथ एक केला हर रोज खाने से बॉडी में power और चर्बी बढ़ती है। वजन बढ़ाने और दुबलापन दूर करने का ये सबसे आसान उपाय है।*

प्रतिदिन टमाटर का सूप पीने से शरीर में खून की कमी पूरी होती है। इस होम रेमेडीज से भूख बढ़ती है व चेहरे पर निखार भी आने लगता है।*

*दूध के ही जैसे दही भी कमज़ोरी दूर करने व stamina बढ़ाने के लिए कारगर है। अगर जुखाम हो या गला खराब हो तो दही के सेवन से बचे।*

         *★Online मंगवाए और sms करे★*
                *Whats 94178 62263*

सिद्ध कैश तेल

सिद्ध आयुर्वेदिक

              *बालों की सभी समस्याओं से मुक्ति*
                     *घर मे तेल बनाए*

                    *सिद्ध कैश तेल*

       *केशों की मजबूती ओर सुन्दर्य के लिए*

                  *तैल बनाने की विधि*

*अलसी तैल 20ml

*करंज तैल 10ml

*निम्ब तैल 10ml

*एरण्डेका तैल 10m l

*कलोंजी तैल 20ml

*जमालगोटेका तैल 20ml

*रक्तगुंजा तैल 10ml

*बादाम का तेल 25 ml

★सभी तैल को अच्छे से मिलाकर लाल रंग की कांच की बौतल में भर ले ।सूर्य की रोशनी में 7 दिन तक शोधित करें।

 ◆उपयोग विधि◆
‍★उंगलियों से बालो के जड़ मैं मालिस करे 15-20 मिनिट तक

★सप्ताह मे तीन बार यह तैल जहा तक हो इसे बालो मे लगा रहने दे ।।

★तैल के लाभ

★बालो की सारी समस्या समाप्त।

★3 उपयोग मे बाल जड़ना भूल जाओगे।

★9 उपयोग मे बाल सफ़ेद होना बंद।

★6 माह के उपयोग से  फिर से नए  बाल आना शुरू शुरू किन्तु यह समस्या आनुवंशिक न हो|  बाल को काला घना मजबूत करेगा .

      *निःशुक्ल आयुर्वेद चिकित्सा  सलाह ले*
       कॉल 89680 42263
      व्हाट्स 94178 62263

हार्ट ब्लॉकइज है तो कायाकल्प चुर्ण है कारगर

हार्ट ब्लॉकइज है तो कायाकल्प चुर्ण है कारगर

 हार्ट ब्लॉकइज है तो

कायाकल्प चुर्ण है कारगर

Online मगवाएँ- whats 94178 62263

  रोजाना 50  ग्राम अर्जुन छाल का काढ़ा बनाएं ।
              
                ★कैसे बनाएं काढ़ा★

1 लीटर पानी मे 50 ग्राम अर्जुन छाल डाल कर
तब तक पकाएं, जब तक 500 ग्राम न रह जाए।
रोजाना ऐसा काढ़ा बनाना है।

500 ग्राम काढ़े की 3 खुराक बनाकर एक एक चम्मच कायाकल्प चुर्ण दिन में 3 बार ले।

     सुबह -दुहपर-शाम को 3 बार ले।

50 दिन बाद टेस्ट कराए आप को 70 %फायदा होगा।  पूरे 100 दिन प्रयोग करे।

जाने क्या है

                  सदैव युवा रखने वाला,
                 शरीर का पूरा कायाकल्प
                 करने वाला सदाबहार चूर्ण
                          ★★★
            कायाकल्प चुर्ण वात पित्त कफ़
                 को संतुलित करता है।

क्या है कायाकल्प चूर्ण
(What is Kayakalpa churan)

कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था।

कायाकल्प चुर्ण के तीन मुख्य लक्ष्य
(Three main Objective of Kayakalpa churan)
कायाकल्प चुर्ण के वैसे तो कई फायदे हैं

लेकिन इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं-

*नशों की कमजोरी को दूर करता है।
• व्यक्ति की सुंदरता एंव स्वास्थ्य के साथ-साथ लंबे समय तक उन्हें जवानी को बरकरार बनाए रखना।
• नेचुरल एजिंग प्रोसेस को धीमा करना
• आयु बढ़ाना
• शरीर में कहीं भी गाँठ हो तो यह 15 से 50 दिन 90% लाभ होगा।

●●
क्या है काया कल्प चूर्ण में
आए जाने -:::

*त्रिफला -250 ग्रा
*इंद्राण से बनी
हुई अजमायन-200 ग्राम
*गिलोय चूर्ण-100 ग्राम
बेल 200 ग्राम
*अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम
* ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम
*शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम
*कलौंजी -100 ग्राम
*आवला चूर्ण-100 ग्राम
*नसांदर -100 ग्राम
*अपामर्ग -50 ग्राम
* जटामांसी -50 ग्राम
* सत्यनाशी -50 ग्राम
* काला नमक -50 ग्राम
*सेंधानमक -50 ग्राम
*ऐलोवैरा रस -500 ग्राम

सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर
सांय मे सुखाय ।

जब सुख जाए तब आप का काया कल्प
चूर्ण बनकर तैयार हो गया है ।

सेवन विधि – अगर आप बिमार
★★

हार्ट ब्लॉकइज के बारे जाने

हार्ट ब्लॉकेज होने पर व्यक्ति की धड़कने अर्थात Pulses सुचारु तरीके से काम करना बंद कर देती है

 इस प्रकार हार्ट ब्लॉकेज पर व्यक्ति की धड़कने रुक रुक कर चलती है| धड़कनो के रुक रूककर चलने को ही हार्ट ब्लॉकेज कहते है।

 हार्ट ब्लॉकेज की समस्या कुछ लोगो में जन्मजात होती है, लेकिन कुछ लोगो में हार्ट ब्लॉकेज की समस्या जन्म के बाद बड़े होने पर विकसित हो जाती है।

जन्मजात हार्ट ब्लॉकेज की समस्या को कोनगेनिटल हार्ट ब्लॉकेज कहते है।

और बड़े होने के होने वाली हार्ट ब्लॉकेज की समस्या को एक्वायर्ड हार्ट ब्लॉकेज कहते है।

बड़े होने के बाद हार्ट ब्लॉकेज की समस्या खाने पीने की गलत आदतों और खराब जीवन शैली के चलते बढ़ती जा रही है।

★★

              हार्ट ब्लॉकेज के लक्षण
(Heart Blockage Symptoms in Hindi)

हार्ट ब्लॉकेज की तीन डिग्री होती है और इन डिग्री के आधार पैर ही हार्ट अटैक के लक्षणों की पहचान की जाती है।

हार्ट ब्लॉकेज की पहली डिग्री में किसी प्रकार का कोई लक्षण नजर नहीं आता।

हार्ट ब्लॉकेज की दूसरी डिग्री में दिल की धड़कने सामान्य से थोड़ी कम हो जाती है।

हार्ट ब्लॉकेज की तीसरी डिग्री में दिल की धड़कने रुक रूककर धड़कना शुरू कर देती है।

हार्ट ब्लॉकेज के अन्य लक्षण निम्न है –

बार बार चक्कर आना
बार बार सिरदर्द होना
छाती में दर्द होना
सांस फूलना
थकान अधिक होना
बेहोश होना
★★

हार्ट ब्लॉकइज में परहेज

तेल में बने खाद्य पदार्थ
कोल्ड ड्रिंक
डेयरी उत्पाद
धूम्रपान
मक्खन
शराब
घी
★★★

          ★साथ साथ घरेलू नुस्खे जरूर★

★खाने में या सलाद में अलसी के बीजों का इस्तेमाल करें।

★खाने में सामान्य चावल की जगह लाल यीस्ट चावल का इस्तेमाल करें।

◆प्रतिदिन सुबह में 3 से 4 किलोमीटर की सैर करें।

 ★सुबह को लहसुन की एक कली लेने से कोलेस्‍ट्राल कम होता है।

★खाने में बैंगन का प्रयोग करने से कोलेस्‍ट्राल की मात्रा में कमी आती है।

★प्याज अथवा प्याज के रस का सेवन करने से हृदय गति नियंत्रित होती है।

★हृदय रोगी को हरी साग-सब्‍जी जैसे लौकी, पालक, बथुआ और मेथी जैसी कम कैलोरी वाली सब्जियों का प्रयोग करना चाहिए।

 ★घी, मक्खन, मलाईदार दूध और तली हुई चीजों के सेवन से परहेज करें।

★अदरक अथवा अदरक का रस भी खून का थक्का बनने से रोकने में सहायक होता है।

★शराब के सेवन और धूम्रपान से बचना चाहिए।

★एक कप दूध में लहसुन की तीन से चार कली डालकर उबालें। इस दूध को रोज पीएं।

★एक गिलास दूध में हल्दी डालकर उबालें और गुनगुना रहने पर शहद डालकर पीएं।

★एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू का रस, काली मिर्च और शहद डालकर पीएं।

★दो से तीन कप अदरक की चाय रोजाना पीएं। इसके लिए पानी में अदरक डालकर उबालें और शहद मिलाकर पीएं।

★मेथी दाने को रात भर पानी में भिगाकर, सुबह मेथी चबाकर खायें और बचा हुआ पानी पी जाएं।

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सिद्ध घाव नाशक मरहम*

सिद्ध घाव नाशक मरहम*

सिद्ध आयुर्वेदिक

               *सिद्ध घाव नाशक मरहम*

         लगभग 25 ग्राम नीम के पत्तों को
         पानी में पीसकर टिक्की बना लें।
 
     और इस टिक्की को 50 मिलीलीटर
              तिल के तेल में पकायें।

              जब यह टिक्की जल जाये
       तो तेल को छानकर फिर इसमें 6 ग्राम
मोम मिलाकर घोंट लें और मरहम की तरह बना लें।

              इसके बाद इसे फूटे हुए
  फोड़े के घाव पर लगाने से घाव ठीक हो जाता है। इसको हर प्रकार के घाव पर लगाया जा सकता है।

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सिद्ध कायाकल्प भस्म

सिद्ध  आयुर्वेदिक
                  सिद्ध  कायाकल्प भस्म

पेचिश पाचन तंत्र का रोग है जिसमें गंभीर अतिसार (डायरिया) की शिकायत होती है और मल में रक्त एवं म्यूकस आता है में कायाकल्प भस्म कारगर है।

            मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव और

                  खूनी बवासीर में रामबाण
   *प्रकार के रक्तस्राव को रोकने में कारगर यह योग*
*नारियल की जटा से करे खूनी बवासीर मासिक धर्म में अधिक रक्तस्रावका एक दिन में भी इलाज हो सकता है।*
          कैसे बनाए कायाकल्प भस्म
       3 किलोग्राम नारियल की जटा

       300 ग्राम आवला चुर्ण

       100 ग्राम कोंचबीज काला

          50  छोटी इलाची

● नारियल की जटा लीजिए।

● उसे माचिस से जला दीजिए।

● इस मे सभी और सामग्री डाल कर जला दे।

● जलकर भस्म बन जाएगी।

● इस भस्म को शीशी में भर कर ऱख लीजिए।

● कप डेढ़ कप छाछ या दही के साथ सिद्ध कायाकल्प भस्म तीन ग्राम खाली पेट दिन में तीन बार सिर्फ एक ही दिन लेनी है।
● ध्यान रहे दही या छाछ ताजी हो खट्टी न हो।
● कैसी और कितनी ही पुरानी पाइल्स की बीमारी क्यों न हो, एक दिन में ही ठीक हो जाती है।
■ यह नुस्खा किसी भी प्रकार के रक्तस्राव को रोकने में कारगर है।
■ महिलाओं के मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव या श्वेत प्रदर की बीमारी में भी कारगर है।
■ हैजा, वमन या हिचकी रोग में यह भस्म एक घूँट पानी के साथ लेनी चाहिए।

*परहेज़*
■ दवा लेने के एक घंटा पहले और एक घंटा बाद तक कुछ न खाएं तो बहुत अच्छा रहेगा।
■ अगर रोग ज्यादा जीर्ण हो और एक दिन दवा लेने से लाभ न हो तो दो या तीन दिन लेकर देखिए।
*हम आपके लिए कोने कोने से कुदरत के अनसुने चमत्कारिक नुस्खे ले कर आते हैं, आप इनको आजमायें और फायदा होने पर ज़्यादा से ज़्यादा लोगो तक पहुंचाए।*
*●विशेष सावधानियां●*
                  खूनी बवासीर के लिए
1. बवासीर से बचने के लिए गुदा को गर्म पानी से न धोएं। खासकर जब तेज गर्मियों के मौसम में छत की टंकियों व नलों से बहुत गर्म पानी आता है तब गुदा को उस गर्म पानी से धोने से बचना चाहिए।
2. एक बार बवासीर ठीक हो जाने के बाद बदपरहेजी (जैसे अत्यधिक मिर्च-मसाले, गरिष्ठ और उत्तेजक पदार्थो का सेवन) के कारण उसके दुबारा होने की संभावना रहती है। अत: बवासीर के रोगी के लिए बदपरहेजी से बचना परम आवश्यक है।
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 *गोखरू युक्त सिद्ध आयुर्वेदिक नुस्खे*

सिद्ध आयुर्वेदिक

                *गोखरू युक्त सिद्ध आयुर्वेदिक नुस्खे*

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गोखरू (Gokhru)– गोखरू का फल कांटेदार होता है और औषधि के रूप में काम आता है। 

बारिश के मौसम में यह हर जगह पर पाया जाता है।

                      *गोखरू नुस्खा 1*

 नपुंसकता रोग में गोखरू के लगभग 10 ग्राम बीजों के चूर्ण में इतने ही काले तिल मिलाकर 250 ग्राम दूध में डालकर आग पर पका लें। 

पकने पर इसके खीर की तरह गाढ़ा हो जाने पर इसमें 25 ग्राम मिश्री का चूर्ण मिलाकर सेवन करना चाहिए।

*सुबह शाम 2 बार उपयोग करे*

*21 दिन लगातार उपयोग करे*

1. इसका सेवन नियमित रूप से करने से नपुसंकता रोग में बहुत ही लाभ होता है।

2. शरीरक ,मानसिक और आत्मिक शक्ति का उदय होगा।

★★★

                      *गोखरू नुस्ख़ा 2*

गोखरू                         100 ग्राम

कौंचबीज काला               50 ग्राम

कीकर फल(बीज रहित)    50 ग्राम

सतावर                           50 ग्राम

तालमखाना                     50 ग्राम

अशगन्ध                         50 ग्राम

मिश्री।                          100 ग्राम

     *सभी को चूर्ण बना कर बंद डिब्बे में रखे*

*सेवन विधि :-*

                  *1 चमच्च सुबह 1चमच्च रात को मीठे दूध से 30 दिन तक सेवन करे।*

परहेज :-खट्टे पदार्थों से परहेज करें।

लाभ:- सेक्स कमजोरी, शीघ्रपतन, वीर्य का पतलापन, सेक्स की इच्छा की कमी, टाइम की कमी, तनाव की कमी और शरीरक कमजोरी में लाभदायक है।

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                 *सदा स्वस्थ रहे*

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सिद्ध आयुर्वेदिक तेल

सिद्ध आयुर्वेदिक

             *सिद्ध आयुर्वेदिक तेल*
           *यह आयुर्वेदिक तेल आप जी*
         *घर मे आसानी से बना सकते हैं*

            *हम आप जी की सेवा में है*
       *दर्दो की दवा सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण*
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*साइटिका, गठिया का दर्द, कमर का दर्द ,जोड़ों का दर्द और कंधे की जकड़न स्नायू शूल मांशपेशियों का दर्द को सिर्फ़ 1 मिनट में ख़त्म करने का अद्भुत उपाय*

*शरीर में दर्द होना एक आम समस्या है। लेकिन इसके लिए यह तो जरूरी नहीं है कि आप दर्द निवारक दवाईयों का सेवन करें। भारत में अक्सर देखा गया है कि यदि शरीर के किसी भी अंग में दर्द हो रहा होता है तो वे तुरंत दर्द नाशक गोलियां खा लेते हैं।

जिसके दुष्प्रभाव उन्हें आगे चलकर झेलने पड़ते हैं। पेन किलर के साइड इफेक्टस होते हैं। इनकी जगह आप अपने घर में दर्द निवारक तेल बनाकर उसकी मालिश कर सकते हो जिससे दर्द पल भर में दूर हो जाएगा और आपको इसका फायदा भी मिलेगा।

*आइये जानते हैं दर्द निवारक तेल बनाने का तरीका।*

       *दर्द नाशक तेल बनाने का तरीका :*

*1. पहला तरीका : कांच कि शीशी में एक छोटा कपूरए पुदीने का रस एक छोटा चम्मचए एक चम्मच अजवायन को डालकर अच्छे से मिलाएं और इसमें एक चम्मच नीलगिरी का तेल डालकर इसे अच्छे से हिलाएं। अब इस तेल को दर्द वाली जगह पर लगाएं।*

*2. दूसरा तरीका : तारपीन का तेल 60 ग्राम, कपूर 25 ग्राम। इन दोनों को मिलाकर किसी कांच की शीशी में भरकर इसे धूप में रख दें। और समय.समय पर इसे हिलाएं भी। जिससे कि इसमें मौजूद कपूर अच्छे से घुल जाए। अब आपका दर्द निवारक तेल तैयार है।*

*3. तीसरा तरीका : पचास ग्राम सरसों के तेल को किसी बर्तन में डाल दें। और उसमें दो गांठ छिला और पिसा हुआ लहसुन का पेस्ट और एक चम्मच सेंधा नमक को  डाल कर इसे गैस या चूले पर तब तक पकाते रहें जब तक इसमें मौजूद लहसुन काला न पड़ जाए। फिर बाद में इसे ठंडा करके किसी छोटी बोतल या कांच की शीशी में भर कर रख लें।*

*इन तीनों तेलों को आप अलग-अलग बनाकर बोतलों या कांच की शीशीयों में भरकर रख लें। ये तेल दर्द निवारक तेल गठिया के दर्द कमर के दर्द जोड़ों के दर्द और शरीर के अन्य किसी हिस्से में होने वाले दर्द में राहत देते हैं।*

*साइटिका, रिंगन बाय, जोड़ों के दर्द, घुटनो के दर्द, कंधे की जकड़न, कमर दर्द के लिए एक अद्भुत तेल*

*साइटिका, रिंगन बाय, गृध्रसी, जोड़ों के दर्द, घुटनो के दर्द, कंधे की जकड़न एक टांग मे दर्द (साइटिका, रिंगन बाय, गृध्रसी), गर्दन का दर्द (सर्वाइकल स्पोंडोलाइटिस), कमर दर्द आदि के लिए ये तेल अद्भुत रिजल्ट देता हैं। दर्द भगाएँ चुटकी में एक बार जरूर अपनाएँ। ये चिकित्सा आयुर्वेद विशेषज्ञ “श्री श्याम सुंदर” जी ने अपनी पुस्तक रसायनसार मे लिखी हैं। मैं इस तेल को पिछले 2 सालों से बना रहा हूँ और प्रयोग कर रहा हूँ। कोई भी तेल जैसे महानारायण तेल, आयोडेक्स, मूव, वोलीनी आदि इसके समान प्रभावशाली नहीं है। एक बार आप इसे जरूर बनाए।*

*आवश्यक सामग्री :*

*कायफल = 250 ग्राम,*

*तेल (सरसों या तिल का) = 500 ग्राम,*

*दालचीनी = 25 ग्राम*

*कपूर = 5 टिकिया*

*कायफल- “यह एक पेड़ की छाल है” जो देखने मे गहरे लाल रंग की खुरदरी लगभग 2 इंच के टुकड़ों मे मिलती है। ये सभी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी बेचने वाली दुकानों पर कायफल के नाम से मिलती है। इसे लाकर कूट कर बारीक पीस लेना चाहिए। जितना महीन/ बारीक पीसोगे उतना ही अधिक गुणकारी होगा।*

*तेल बनाने की विधि :*

*एक लोहे/ पीतल की कड़ाही मे तेल गरम करें। जब तेल गरम हो जाए तब थोड़ा थोड़ा करके कायफल का चूर्ण डालते जाएँ। आग धीमी रखें। फिर इसमें दालचीनी का पाउडर डालें। जब सारा चूर्ण खत्म हो जाए तब कड़ाही के नीचे से आग बंद कर दे। एक कपड़े मे से तेल छान ले। तेल ठंडा हो जाए तब कपड़े को निचोड़ लें। यह तेल हल्का गरम कर फिर उसमें 5 कपूर की टिकिया मिला दे या तेल में अच्छे से कपूर मिक्स हो जाये इसलिए इसका पाउडर बना कर डाले तो ठीक होगा।  इस तेल को एक बोतल मे रख ले। कुछ दिन मे तेल मे से लाल रंग नीचे बैठ जाएगा। उसके बाद उसे दूसरी शीशी मे डाल ले।*

*प्रयोग विधि :*

*अधिक गुणकारी बनाने के लिए इस साफ तेल मे 25 ग्राम दालचीनी का मोटा चूर्ण डाल दे। जो कायफल का चूर्ण तेल छानने के बाद बच जाए उसी को हल्का गरम करके उसी से सेके। उसे फेकने की जरूरत नहीं। हर रोज उसी से सेके।*

*जहां पर भी दर्द हो इसे हल्का गरम करके धीरे धीरे मालिश करें। मालिश करते समय हाथ का दबाव कम रखें। उसके बाद सेक जरूर करे।*

*बिना सेक के लाभ कम होता है। मालिस करने से पहले पानी पी ले। मालिश और सेक के 2 घंटे बाद तक ठंडा पानी न पिए।*

*दर्दनिवारक तेल बनाने की एक और विधि जो मेरी 70 वर्षीय मासी जी हर चिकित्सा पद्धति से इलाज कराने के बाद थक हार कर नानी माँ के ज्ञानानुसार इस घरेलू तेल का उपयोग कर रही हैं 30 वर्षो से इस तेल का उपयोग कर रही हैं और दर्दनिवारक दवायों से कोषों दूर हैं*साथ ही अपना और हृदयरोग से ग्रसित मौसा जी का देखभाल कर लेती हैं जबकि एलोपैथी चिकित्सा ने 20 साल पहले घुटना बदलने की सलाह दे चुके हैं*

*समय के साथ दर्द बर्दाश्त करने की शक्ति रखे अन्यथा स्वास्थ्य व समृद्धि दोनो का नाश हो जाएगा जब दिल सामाज पारिवारिक भौतिक दर्द बर्दाश्त कर सकते हैं तो इसका दर्द क्यों नहीं दर्द निवारक आयुर्वेद होमेओपेथी पंचगव्य या घरेलू ही उपयोग में लायें*

**दर्दनिवारक तेल :-*

*दर्दनिवारक  तेल बनाने की विधि*

*500ml तिल का तेल या सरसो तेल*
*100gram लहसुन की कली*
*50 ग्राम सौठ*
*25 ग्राम कच्चा कपूर*
*15 ग्राम पीपरमेंट*
*अजवायन 2 चम्मच*
*मेथी 2 चम्मच*
*लौंग 15 20*
*दालचीनी 25 ग्राम*
*सफेद प्याज 1*
*गौमुत्र 100 ml या गौ अर्क 20ml*
*बड़ी इलायची 2 pcs*
*जवन्तरि  10 ग्राम*
*सबसे पहले धीमी आंच पर तेल में सभी का पाउडर बनाकर या पेस्ट बनाकर डालकर गर्म करें गर्म होते होते झाग व बुलबुले बनने बन्द हो जाएंगे तो आग को तेज करे जब सभी सुनहरे या काले रंग को हो तो आग बन्द कर दे इस बीच मे* *चलाते रहे । अब कपूर व पीपरमेंट डालकर खूब घोल दे अब छान कर कांच की शीशी में रखे व दर्द होने पर इस्तेमाल करें।*
*बाजार से शुद्ध व उत्तम कोटि का तेल ।*
*इस्तेमाल व शेयर करे  साथ ही उपयोग के बाद अनुभव शेयर करें स्वस्थ व समृद्ध भारत निमार्ण हेतु*


*कुछ अन्य उपाये करें*

*दो गेंहूं के दाने के बराबर चुना दूध छोड़कर किसी भी तरल पेय में पथरी की समस्या हो तो न ले*

या

*2 चम्मच मेथी रात को एक गिलास पानी मे भिगो दें सुबह इस पानी को पिये व मेथी को चबाकर खाये*

या

*हरड़ को गौमुत्र में भिगोकर रातभर के लिए सुबह इसे साँवली छाँव में सुखाकर अरण्ड के तेल में भूनकर पाउडर बनाले इस पाउडर का एक चम्मच या भुने हरड़ का एक पीस भोजन के बाद ले गुनगुने जल के साथ*

या

*सुबह प्रतिदिन एक चम्मच अरण्ड का तेल गौमुत्र के साथ सेवन करें*

या

*प्रतिदिन एक कप गौमुत्र पिये सर्वरोगनाशक हेतु*

या

*बराबर मात्रा में मेथी हल्दी सौठ का चूर्ण बनाकर रखे सुबह शाम भोजन के बाद एक चम्मच गर्म जल या गर्म पानी के साथ सेवन करे*

*जब दर्द बिस्तर पर लेटा कर छोड़ दे आर्थत घुटने बदलने की नौबत आये तब इस दिव्य औषधि का उपयोग करें*

*हरसिंगार (पारिजात) के पत्तो की चटनी 2 चम्मच बनाये और एक गिलास पानी मे उबाले जब पानी आधा रह जाये तो इसे रातभर छोड़ दे सुबह इस पानी को पी ले 3 माह लगातार*

     *सिद्घ वातदर्द कल्पचुर्ण online मंगवाए*

     *निशुल्क आयुर्वेद सलाह के लिए संपर्क करे*
                Call      89680 42263
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   *सिद्ध क्रेक हील तेल*

          *सिद्ध आयुर्वेदिक एक सेवा संस्था है*

         फ़टी एड़ियो का गरंटी सुधा आयुर्वेदिक तेल
           सर्दियों में फ़टी एड़ियो के परेशानी से बचे

                   *सिद्ध क्रेक हील तेल*

अमचूर तेल, देशी गाय का घी,जैतून का तेल, तिल का तेल, नारियल का तेल , नीम तेल 50 -50 ml ले । सभी तेलों में 100 ml वैसलीन मिलाए।

सोने से पहले वनस्पति तेल को अपनी फटी हुई एड़ियों पर लगाए ओर जुराब पहन कर सोए।

                      *नही बना सकते तो*
         100 ML 250 रुपये में online मगवाएँ*
               *कोरीयर खर्च अलग से होगा*
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सिद्ध फाइलेरिया नाशक कल्पचुर्ण

सिद्ध आयुर्वेदिक


     *सिद्ध फाइलेरिया नाशक कल्पचुर्ण*

  *Online मगवाएँ-94178 62263*
त्रिफला       250 ग्राम
गिलोय चुर्ण 200 ग्राम
त्रिकुटा       200 ग्राम
ब्राहिमी बूटी 100ग्राम
संखपुष्पी    100 ग्राम
अगर         100 ग्राम
सौंठ भुनी   100 ग्राम
बेल चुर्ण       50 ग्राम
शिलाजीत    30 ग्राम
सेंधा नमक 125 ग्राम


सभी चुर्ण को 400 ग्राम एलोवेरा रस औऱ 200 ग्राम गिलोय रस में भावना दे।
सेवन विधि
फ़िर सूखा कर दिन में 3 बार ताजे पानी से एक एक चम्मच लेते रहे।
★90 दिन में 60 से 80 % लाभ  होगा।
★90 दिन उपयोग के बाद दवा को छोड़ दे।
★यह दवा छोड़ने पर भी असर करती रहेगी।
*जरूरत अनुसार फिर चालू कर सकते हैं*

        *साथ मे यह भी अपनाएं*

फाइलेरिया बिमारी के कई अन्य नाम भी हैं जैसे कि हाथीपाँव, फीलपाँव, श्लीपद आदि.

ये बिमारी उष्णकटिबंध देशों में सामान्य है. इसकी उत्पति परजीवी (पेरेसिटिक) निमेटोड कीड़ों के कारण होता है जो छोटे धागों जैसे दिखते हैं. यह बीमारी फिलेरी वुचरेरिअ बैंक्रोफ्टी, ब्रूगिआ मलाई और ब्रूगिआ टिमोरि नामक निमेटोड कीड़ो के कारण होती है. फाइलेरिया के सबसे ज़्यादा मामले वुचरेरिअ बैंक्रोफ्टी नामक परजीवी के कारण होते हैं. फाइलेरिया दुनिया भर में विकलांगता और विरूपता का सबसे बढ़ा कारण है. यह ज़्यादातर गरीब लोगों को होता है क्योंकि जहाँ गरीब लोग रहते हैं वहाँ मच्छरों की प्रजननता अधिक होती है. एलीफेंटिटिस यानि श्लीपद ज्वर एक परजीवी के कारण फैलती है जो कि मच्छर के काटने से शरीर के अंदर प्रवेश करता है. इस बीमारी से मरीज के पैर हाथी के पैरों की तरह फूल जाते हैं. इस रोग के होने से न केवल शारीरिक विकलांगता हो सकती है बल्कि मरीजों की मानसिक और आर्थिक स्थिति भी बिगड़ सकती है.
एलीफेंटिटिस को लसीका फाइलेरिया भी कहा जाता है क्योंकि फाइलेरिया शरीर की लसिका प्रणाली को प्रभावित करता है. यह रोग मनुष्यों के हाथ-पैरों के साथ ही जननांगों को भी प्रभावित करता है. आइए फाइलेरिया को दूर करने के लिए उसके उपचार हेतु कुछ घरेलू उपायों पर प्रकाश डालें.
1. लौंग
लौंग फाइलेरिया के उपचार के लिए बहुत प्रभावी घरेलू नुस्खा है. लौंग में मौजूद एंजाइम परजीवी के पनपते ही उसे खत्म कर देते हैं और बहुत ही प्रभावी तरीके से परजीवी को रक्त से नष्ट कर देते हैं. रोगी लौंग से तैयार चाय का सेवन कर सकते हैं.
2. काले अखरोट का तेल
काले अखरोट के तेल को एक कप गर्म पानी में तीन से चार बूंदे डालकर पिएं. इस मित्रण को दिन में दो बार पिया जा सकता है. अखरोट के अंदर मौजूद गुणों से खून में मौजूद कीड़ों की संख्या कम होने लगती है और धीरे धीरे एकदम खत्म हो जाती है. जल्द परिणाम के लिए कम से कम छह हफ्ते प्रतिदिन इस उपाय को करें.
3. भोजन
फाइलेरिया के इलाज के लिए अपने रोज के खाने में कुछ आहार जैसे लहसुन, अनानास, मीठे आलू, शकरकंदी, गाजर और खुबानी आदि शामिल करें. इनमें विटामिन ए होता है और बैक्टरीरिया को मारने के लिए विशेष गुण भी होते हैं.
4. आंवला
आंवला में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है. इसमें एन्थेलमिंथिंक भी होता है जो कि घाव को जल्दी भरने में बेहद लाभप्रद है. आंवला को रोज खाने से इंफेक्शन दूर रहता है.
5. अश्वगंधा
अश्वगंधा शिलाजीत का मुख्य हिस्सा है, जिसके आयुर्वेद में बहुत से उपयोग हैं. अश्वगंधा को फाइलेरिया के इलाज के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है.
6. ब्राह्मी
ब्राह्मी पुराने समय से ही बहुत सी बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाती है. फाइलेरिया के इलाज के लिए ब्राह्मी को पीसकर उसका लेप लगाया जाता है. रोजाना ऐसा करने से रोगी सूजन कम हो जाती है.
7. अदरक
फाइलेरिया से निजात के लिए सूखे अदरक का पाउडर या सोंठ का रोज गरम पानी से सेवन करें. इसके सेवन से शरीर में मौजूद परजीवी नष्ट होते हैं और मरीज को जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है.
8. शंखपुष्पी
फाइलेरिया के उपचार के लिए शंखपुष्पी की जड़ को गरम पानी के साथ पीसकर पेस्ट तैयार करें. इस पेस्ट को प्रभावित स्थान पर लगाएं. इससे सूजन कम होने में मदद मिलेगी.
9. कुल्ठी
कुल्ठी या हॉर्स ग्राम में चींटियों द्वारा निकाली गई मिट्टी और अंडे की सफेदी मिलाकर प्रभावित स्थान पर लगाएं. इस लेप को प्रतिदिन प्रभावित स्थान पर लगाएं, सूजन से आराम मिलेगा.
10. अगर
अगर को पानी के साथ मिलाकर लेप तैयार करें. इस लेप को प्रतिदिन 20 मिनट के लिए दिन में दो बार प्रभावित स्थान पर लगाएं. इससे घाव जल्दी भरते हैं और सूजन कम होती है. घाव में मौजूद बैक्टीरिया भी मर जाते हैं.
11. रॉक साल्ट – शंखपुष्पी और सौंठ के पाउडर में रॉक साल्ट मिलाकर, एक एक चुटकी रोज दो बार गरम पानी के साथ लें.

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 सिद्ध घरेलू आँख अंजन ड्रॉप्स

 

               

काला या सफ़ेद मोतिया बिंद आयुर्वेदिक दवा

      सिद्ध घरेलू आँख अंजन ड्रॉप्स

        कोई साइड इफेक्ट नही है

10 मिलीलीटर सफेद प्याज का रस, 10 मिलीलीटर अदरक का रस, 10 मिलीलीटर नींबू का रस और 50 मिलीलीटर शहद को मिला लें।

इस रस की 2-2 बूंदें रोजाना आंखों में डालने से मोतियाबिंद कट जाता है।

दिन में 5 से 7 बार आँखों में 41 दिन उपयोग करे।
पक्का फ़ायदा होगा।
किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  
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Email-sidhayurveda1@gmail.com

सिद्ध पीलिया नाशक कल्पचुर्ण*

        *पीलिया रोग की अयूर्वादिक दवा*

        *सिद्ध पीलिया नाशक कल्पचुर्ण*


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*खून की कमी औऱ अशुद्धि को करे 10 दिन में पूरा*


*पीलिया के प्रकार*

*पीलिया मुख्यत तीन प्रकार का होता है* 


*जोकि इस प्रकार हैं – वायरल हैपेटाइटिस ए, वायरल हैपेटाइटिस बी तथा वायरल हैपेटाइटिस नान A व नान B।* 


*यह दवा सभी प्रकार के पीलिया रोग में कारगर है*


       *(Online दवा मंगवा सकते हैं)*


*पीलिया नाशक कल्पचुर्ण नुस्ख़ा*

गिलोय 100 ग्राम

कलमी शोरा 50 ग्राम

आँवला 50 ग्राम

 सोंठ 50 ग्राम

काली मिर्च 50 ग्रान

पीपर (पाखर) 30 ग्राम

हल्दी  30 ग्राम

मीठा सोडा 30 ग्रान

उत्तम लोहभस्म 50 ग्राम

मिश्री तांगा  100 ग्राम


*सभी को मिलाकर  200 ग्राम गिलोय रस में भावना दे।*


*दो आनी भार *(करीब 1.5 ग्राम आधा चम्मच)*जितना चूर्ण दिन में तीन बार शहद के साथ लेने से पीलिया का उग्र हमला भी 3 से 7 दिन में शांत हो जाता है।*


★★★


*परहेज और आहार*


*लेने योग्य आहार*

*सब्जियों का ताजा निकला रस (चुकंदर, मूली, गाजर, और पालक), फलों का रस (संतरा, नाशपाती, अंगूर और नीबू) और सब्जियों का शोरबा।*


ताजे फल, जैसे सेब, अन्नानास, अंगूर, नाशपाती, संतरे, केले, पपीता, आदि। खासकर अन्नानास विशेष रूप से उपयोगी होता है।


पीलिया के उपचार हेतु जौ का पानी, नारियल का पानी अत्यंत प्रभावी होते हैं।


*नीबू के रस के साथ अधिक मात्रा में पानी पीने से लिवर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की रक्षा होती है।

पीलिया की चिकित्सा हेतु लिए जाने वाले प्रभावी आहारों में फलों के रस का विशेष स्थान है। गन्ने, नीबू, मूली, टमाटर आदि का रस लिवर के लिए अत्यंत सहायक होता है।*


*आँवला भी विटामिन सी का उत्तम स्रोत है। आप अपने लिवर की कोशिकाओं को स्वच्छ करने हेतु कच्चा, धूप में सुखाया हुआ या रस के रूप में आँवला ले सकते हैं।*


अनाज जैसे ब्रेड, चपाती, सूजी, जई का आटा, गेहूँ का दलिया, चावल आदि कार्बोहायड्रेट के बढ़िया स्रोत हैं और पीलिया से पीड़ित व्यक्ति को दिये जा सकते हैं।


●●●

*इनसे परहेज करें*

तले और वसायुक्त आहार, अत्यधिक मक्खन और सफाईयुक्त मक्खन, माँस, चाय, कॉफ़ी, अचार, मसाले और दालें आदि


सभी वसा जैसे घी, क्रीम और तेल।


★★★


कुछ अचूक नुस्खे जिससे आपको पीलिया के इलाज में मदद मिलेगी ।


*गन्ने का रस*

गन्ने का रस दिन में कई बार पीना चाहिये। पीलिया के रोग में यह अमृत है। गन्ने के रस का सेवन करने से पीलिया बहुत ही जल्दी ठीक हो जाता है।

 *छाछ*

पीलिया के रोग में 1 ग्लास छाछ रोज़ाना पीनी चाहिये। इसमें काली मिर्च का पाउडर मिलाकर पीने से इसका गुण और भी बढ़ जाता है और यह कुछ ही दिनों में पीलिया के रोग को समाप्त कर देता है।


 *प्याज़ से इलाज*

प्याज़ पीलिया में बहुत ही लाभदायक होती है। प्याज़ को काट लीजिये और नीबू के रस में कुछ घंटों के लिये भिगो दीजिये। कुछ घंटों बाद इस प्याज़ को निकाल लीजिये। इसे नमक और काली मिर्च लगाकर मरीज को खिला दीजिए। दिन में 2 बार इस प्याज़ को खाने से पीलिया बहुत ही जल्दी दूर हो जाता है।


*फ्रूट्स*

फलों में तरबूज और खरबूजा दोनों ही पीलिया में बहुत लाभदायक हैं। इन्हें अच्छी मात्रा में खाना चाहिये। इससे पीलिया का रोग बहुत जल्दी ठीक हो जाता है।

*निम्बू का रस*

लिवर के सेल्स की सुरक्षा की दॄष्टि से दिन में ३-४ बार निंबू का रस पानी में मिलाकर पिएं। कुछ ही दिनों में आप खुदको पीलिया से छुटकारा मिलता है महसूस करेंगे।


*मूली के पत्ते*

मूली के हरे पत्ते पीलिया के इलाज में बेहद लाभदायक होता है। पत्ते पीसकर रस निकालकर छानकर पीना उत्तम है। इससे भूख बढेगी और आंतें साफ होंगी। और आप पाएंगे पीलिया से छुटकारा।


*टमाटर का रस*

टमाटर का रस पीलिया में लाभकारी है। रस में थोड़ा नमक और काली मिर्च मिलाकर पीयें। 

 *खास एहतियात बरतें*

स्वास्थ्य सुधरने पर एक दो किलोमीटर घूमने जाएं और कुछ समय धूप में रहें। भोजन में उन चीजों को शामिल करें  जिसमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, विटामिन सी, विटामिन ई और विटामिन बी काम्पलेक्स मौजूद हों। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद भी भोजन के मामले में लापरवाही न बरतें। वर्कआउट खूब करें और स्वच्छता से रहें हेल्दी चीजें खाएं।


*पीलिया में इनका सेवन न करें*

सभी वसायुक्त पदार्थ जैसे घी ,तेल , मक्खन ,मलाई कम से कम १५ दिन के लिये उपयोग न करें। इसके बाद थोड़ी मात्रा में मक्खन या जेतून का तैल उपयोग कर सकते हैं। 


*दाल खाने से बचें,  क्योंकि दालों से आंतों में फुलाव और सडांध पैदा हो सकती है।*


     ■हम आप की सेवा में है■

         ◆ किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए◆ 

          ●निशुल्क सिद्घ अयूर्वादिक सलाह ले●

                 Whats 94178 62263

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*सिद्ध सर्दी नाशक गिलोय काढ़ा

सिद्ध आयुर्वेदिक


      *सिद्ध सर्दी नाशक गिलोय काढ़ा*       
     

             ★काढ़ा कैसे बनाए★

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*सर्दी, जुकाम, बुखार, काली खाँसी,रेशा, निमोनिया, फेफड़ों के इंफेक्शन, लिवर खराबी, बच्चों में बड़ी/छोटी माता (चेचक)

और भी अनेकों फायदे से भरपूर है सिद्ध सर्दी नाशक गिलोय काढ़ा*


   *6 ग्लास पानी लेकर आग पर रख दे।*

       *उसमे नीचे लिखी सामग्री डाले*


★ गिलोय हरी 100 ग्राम

★किसमिश 10 पीस

★छुहारे 5 पीस

★तुलसी पत्ते 50 पीस

★पपीता पत्ता 1पीस

★सोंठ 2 ग्राम (आधा चमच्च)

★मुलेठी आधा चम्मच

★काली मिर्च आधा चम्मच

★दालचीनी आधा चम्मच


सभी सामग्री को तब तक उबाले जब तक आधा न रह जाए।

सेवन विधि

*200 ग्राम काढ़ा गर्म चाय की भांति उपयोग करे*

*बच्चों को आधी मात्रा में दे।*

* 1 से 3 साल के बच्चों को 5 चमच्च एक बार मे दे*

दिन में 4 बार सिद्ध सर्दी नाशक काढ़े का इस्तेमाल करे।


यह क्रिया 3 से 5 दिन लगातार करे। 

फायदे 

वातरोग, वातदर्द, गठिया वात, wbc, जुकाम, खासी,चेचक, टाइफाइड औऱ किसी भी प्रकार की इंफेक्शन में कारगर है।

        सिद्ध आयुर्वेदिक

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सिद्ध पित्ताशय पथरी नाशक कल्पचुर्ण

सिद्ध आयुर्वेदिक

पित्त की पथरी के लिए

 सिद्ध पित्ताशय पथरी नाशक कल्पचुर्ण

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  • गुलहर फूल चुर्ण           250 ग्राम

इन्द्रयाण अजवाइन       200 ग्राम

त्रिफला                       100 ग्राम

ब्रह्मी                            100 ग्राम

इन्द्रयाण(कड़वी तुंबी)   100 ग्राम

सोंठ                            100 ग्राम

अजमोदा फल का चूर्ण  100 ग्राम

मजीठा                        100 ग्राम

गोखरू                         100 ग्राम

बड़ी इलाची                  100 ग्राम

हूर                                100 ग्राम

सहजना की छाल           50  ग्राम

अपामार्ग                        50 ग्राम

काली मिर्च                     20 ग्राम

हींग                              20 ग्राम

सेंधानमक                     100 ग्राम

 

सभी मिलाकर चुर्ण बनाए।

फिर

200 ग्राम गिलोय रस में भावना दे।

सांय में सुखाए।

सेवन विधि

दिन में 3 बार एक एक चम्मच गर्म पानी से ले।

 

*साथ मे रात को रात 10 बजे आधा कप जैतून  या तिल का तेल – आधा कप ताजा नीम्बू रस में अच्छे से मिला कर पीयें*

 

*21 दिन में पथरी निकल जाती हैं।*

 

*ध्यान दे*

 * सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण* दर्द को ततकाल बंद कर देता है। 

*अगर पथरी बड़ी हो तो सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण

टुकड़े करेगा उस वक्त दर्द बड़ सकता है। 10 से 20 मिनट तक*

           *थोड़ा अपने पर विश्वास रखे दर्द बर्दाश्त करे*

पालक, टमाटर, चुकंदर, भिंडी का सेवन न करें तो आछा है। 

★★★

         *पित्त की थैली में  पथरी क्यों बनती हैं*

जब ज्यादा वसा से भरा पदार्थ यानी घी, मक्खन, तेल वगैरह से बने पदार्थ का सेवन करते हैं तो शरीर में कोलेस्ट्रोल, कैल्शियम कार्बोनेट और कैल्शियम फांस्फेट के अधिक बनने से पित्ताशय में पथरी का निर्माण होता है।

रक्त विकृति के कारण छोटे बच्चों के शरीर में भी पथरी बन सकती है। पित्ताशय में पथरी की बीमारी से स्त्रियों को ज्यादा कष्ट होता है।

 30 वर्ष से ज्यादा की स्त्रियां गर्भधारण के बाद पित्ताशय की पथरी से अधिक ग्रस्त होती हैं। 

कुछ स्त्रियों में पित्ताशय की पथरी का रोग वंशानुगत भी होता है। खून में कोलेस्ट्रोल की मात्रा ज्यादा होने पर कैल्शियम के मिलने से पथरी बनने लगती है।

           *कैसे पता चले कि  पित्ते में पथरी है*

            * पित्त की थैली में पथरी के लक्षण*

पेट के ऊपरी भाग में दायीं ओर बहुत ही तेज दर्द होता है और बाद में पूरे पेट में फैल जाता है। लीवर स्थान बड़ा और कड़ा और दर्द से भरा होता है। नाड़ी की गति धीमी हो जाती है। शरीर ठंड़ा हो जाता है, मिचली और उल्टी के रोग, कमजोरी (दुर्बलता), भूख की कमी और पीलिया रोग के भी लक्षण होते हैं। इसका दर्द भोजन के 2 घण्टे बाद होता है इसमें रोगी बहुत छटपटाता है।

भोजन तथा परहेज :

गाय का दूध, जौ, गेहूं, मूली, करेला, अंजीर्ण, तोरई, मुनक्का, परवल, पके पपीता का रस, कम खाना, फल ज्यादा खाना और कुछ दिनों तक रस आदि का प्रयोग करें।

चीनी और मिठाइयां, वसा और कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें- इस रोग में कदापि सेवन न करें। तेल, मांस, अण्डा, लाल मिर्च, हींग, उड़द, मछली और चटपटे मसालेदार चीजें, गुड़, चाय, श्वेतसार और चर्बीयुक्त चीजें, खटाई, धूम्रपान, ज्यादा मेहनत और क्रोध आदि से परहेज करें।

                  *यह लोग सेवन न करे*

           *इस दवा का कोई नुकसान नही है*

*फिर भी तासीर गर्म  होने के कारण यह लोग ध्यान से उपयोग करे।*

  * सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण*  उन महिलाओं के लिए असुरक्षित है जो गर्भवती हैं या जो प्रजनन उपचार के दौर से गुजर रही हैं।

 * सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण*  शरीर में एस्ट्रोजेन का स्तर कम करती है और मासिक धर्म का कारण हो सकती है, जिससे गर्भपात हो सकता है या खून बह सकता है। 

विशेष रूप से, पहली तिमाही में गर्भवती महिलाओं को बिल्कुल नहीं लेनी चाहिए। 

हार्मोन उपचार करवा रही महिलाओं या गर्भनिरोधक गोलियां ले रही महिलाओं को * सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण* नहीं लेनी चाहिए।

  * सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण* के उपयोग से नींद आने लगती है। अतः वाहन ड्राइव करते समय या मशीन चलाते समय गुड़हल * सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण* का उपयोग नहीं करें।

 * सिद्ध पित्ताशय पथरी कल्पचुर्ण* के उपयोग से उच्च रक्तचाप को कम किया जाता है। निम्न रक्तचाप वाले इस का उपयोग नहीं करें। 

इसके उपयोग से आप का स्वास्थ्य ख़राब हो सकता है।

                 *Online मंगवाए*

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सिद्ध महाशक्ति योग

    ★शुक्राणु विर्द्धि के लिए आयुर्वेदिक योग★

          सिद्ध महाशक्ति योग

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           ★शुक्राणु की पुरुषों में कमी★
     【बच्चे न होने की एक पीड़ा यह भी है】

 ज्यादातर बच्चे के ना होने का कारण महिलाओं को ही ठहराया जाता है ।

लेकिन इसमें पुरूष भी कम नही है जब पुरूषों में शुक्राणु के बनने के लक्षण कम होते है तो उनमें नपुंसकता बढ़ने लगता है ।

 जिससे बच्चे के पैदा होने में
 दुविधा खड़ी हो जाती है

 सामान्य तौर पर एक स्वस्थ या हेल्दी पुरूष में 15 मिलियन शुक्राणु की कोशिकाओं का होना काफी आवश्यक होता है।

जिसमें स्वस्थ शुक्राणु के इन लक्षणों के अलावा रूप, संरचना और गतिशीलता का होना जरूरी माना जाता है।

और इसकी कमी ही अनहेल्दी शुक्राणु के लक्षणों का होना पाया जाता है। जिसमें मर्द में नपुंसकता और सेक्स करने के इच्छा में कमी होने लगती है और पूरी लाइफ पर इसका असर देखने को मिलता है।

यदि आप थोड़ी सी सतर्कता बरते तो आप अपनी जीवनशैली में कुछ सुधार लाकर शुक्राणु की गुणवत्ता और संख्या को बढ़ा सकते है।

★★★
                       शुक्राणुओं के बारे          
                   कुछ हैरान करने वाले सच

भारत के मर्दो के वीर्य में साल दर साल शुक्राणुओं की कमी देखी जा रही है।  भारत के मर्दो में अब पहले जैसी बात नही रही। शक्राणु के आकर और संरचना में गड़बड़ियां आ रही है। 1978 में एक सेहतमंद व्यक्ति के वीर्य में शुक्राणुओं की गिनती 6 करोड़ प्रति लीटर पाई जाती थी, 2012 में यह गिनती 6 करोड़ से 2 करोड़ हो गयी थी।

इन सालों में भारती मर्द बहुत कमजोर हुआ है।

कारण क्या है।

आयुर्वेद मान्यता है कि

■अवैध नशीली दवाओं का प्रयोग – कोकीन या गांजा जैसे नशीले पदार्थों के सेवन से आपके शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता में कमी आ सकती है।

■शराब का सेवन – शराब पीने से टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है और शुक्राणु उत्पादन में कमी आ सकती है। (और पढ़ें – टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के घरेलू उपाय)

■धूम्रपान – अन्य व्यक्तियों की तुलना में धूम्रपान करने वाले पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या कम हो सकती है।

■तनाव – लंबे समय तक तनाव में रहने के कारण शुक्राणु पैदा करने वाले कुछ आवश्यक हार्मोन असंतुलित हो सकते हैं।

■वजन – मोटापे के कारण हार्मोन में बदलाव हो सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप पुरुषों की प्रजनन क्षमता कमज़ोर हो सकती है।

★★★

फिर भी चिंता की बात है आयुर्वेद में हर रोग का इलाज  शर्तिया है।

★★★

       ★शुक्राणुओं के लिए आयुर्वेदिक योग★

गिलोय चुर्ण 100 ग्राम
तुसली बीज 100 ग्राम
कौंच के बीज 100 ग्राम (छिलकारहित)
सफ़ेद मूसली 100ग्राम
सतावर 100 ग्राम
बाबुल फली 50 ग्राम
गोखरू 50 ग्राम
विदारीकंद 50 ग्राम
बरगद दूध 50 ग्राम
सालम पंजा 50 ग्राम
सालम मिश्री 50 ग्राम
शिलाजीत 50 ग्राम
आवला चुर्ण 50 ग्राम
कबाब (शीतल)चीनी 50 ग्राम
तालमखाना 20 ग्राम
शिलाजीत 50 ग्राम
हत्था जोरी 20 ग्राम
कतीरा गोंद 20 ग्राम
बबूल का गोंद 20 ग्राम
काले तिल।   20 ग्राम

सभी को चुर्ण को 200 ग्राम एलोवेरा रस में मिलाकर धुप में सुखाए।

 सुबह-शाम एक-एक चम्मच चूर्ण मीठे दूध के साथ 60 दिन तक सेवन करें और इसके बाद वीर्य की जाँच करवाकर देख लें कि शुक्राणुओं में क्या वृद्धि हुई है।

●●●

भोजन में निम्न पदार्थों का सेवन शरीर में वीर्य Semen improving को बढ़ाता है:

★मिश्री मिला गाय का दूध
★ गाय का धारोष्ण दूध
★मक्खन, घी
★चावल व दूध की खीर
★ उड़द की दाल
★तुलसी के बीज
★बादाम का हलवा
★मीठा अनार
★प्याज, प्याज का रस घी-शहद के साथ
★ खजूर
★बादाम

★★★

परहेज
1. तेल और तली चीजें, अधिक लाल मिर्च, मसालेदार पदार्थ, इमली, अमचूर, तेज खटाईयां व आचार।

2. प्रयोग काल में घी का उचित सेवन करना चाहिए।

3. पेट की शुध्दि पर भी ध्यान देना चाहिए। कब्ज नही होने देनी चाहिए। कब्ज अधिक रहता हो तो प्रयोग से पहले पेट को हल्के दस्तावर जैसे त्रिफला का चूर्ण एक चमच अथवा दो-तीन छोटी हरड़ का चूर्ण गर्म दूध या गर्म पानी के साथ, सोने से पहले अंतिम वास्तु के रूप में लें।

4. सेवन-काल में ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक है।

5. ओषधि सेवन के आगे-पीछे कम से कम दो घंटे कुछ न खाएं। खाली पेट सेवन से यह मतलब है।



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सिद्ध कैंसर नाशक कल्पचुर्ण

सिद्ध कैंसर नाशक कल्पचुर्ण



सिद्ध अयूर्वादिक
★कैंसर की अयूर्वादिक दवा★
गुर्दे का कैंसर
रीढ़ की हड्डी का कैंसर
खून का कैंसर
पेट का कैंसर
हड्डी कैंसर
सभी गांठ रोग में यह योग काम करता है।
★★★
क्या है अयूर्वादिक कैंसर दवा
सतावर चूर्ण 200 ग्राम
अश्वगंधा 100 ग्राम
गिलोय चुर्ण 100 ग्राम
इंद्ररायाण अजवाइन 100 ग्राम
तुलसी पंचाग 100 ग्राम
नीम पंचाग 100 ग्राम
सोंठ 100 ग्राम
मेथी दाना 50 ग्राम
चरायता। 50 ग्राम
अम्बा हल्दी। 50 ग्राम
लाल चित्रक। 50 ग्राम
कलौंजी 50 ग्राम
दालचीनी 50 ग्राम
खुरासानी कुटकी 50 ग्राम
मदार की जड़ 50 ग्राम
कचनार छाल चूर्ण। 50 ग्राम
फिटकरी (भुनी) 50 ग्राम
ताम्र सिंदूर 25 ग्राम
इमली चुर्ण 25 ग्राम
सभी को कूटकर कर 500 मिलीलीटर गुमूत्र में मिलाकर धूप में सुखाए।
जब यह सुख जाए तो
दिन में 3 बार गुमूत्र से सेवन करे।
50 मिलीलीटर गुमूत्र ले 150 मिलीलीटर पानी में मिलाकर कर 3 ग्राम दवा सेवन करे।
★★
साथ मे यह करते रहे-:
1 मिट्टी के बर्तन में 300 मिलीलीटर पानी भर लें। इसमें 12 ग्राम अजवायन, 12 ग्राम मोटी सौंफ, दो बादाम की गिरी रात को भिगो दें।
सुबह पानी के साथ छानकर इनको पत्थर के सिलबट्टे पर पीसें। इनको पीसने में इन्हें भिगोकर छाना हुआ पानी ही काम में लें।
फिर 21 पत्ते तुलसी के तोड़कर, धोकर इस पिसे पेस्ट में डालकर फिर से बारीक पीसें और छानकर रखे पानी में स्वाद के अनुसार मिश्री पीसकर घोलें।
अन्त में पेस्ट मिलाकर कपड़े से छान लें और पीयें। यह सारा काम पीसकर, घोल बनाकर पीना, सब सूर्य उगने से पहले करें। सूर्य उगने के बाद बनाकर पीने से लाभ नहीं होगा।
इसे करीब 21 दिनों तक सेवन करें। जब तक लाभ न हो, आगे भी पीते रहें। इससे हर प्रकार के कैंसर से लाभ होता है।
★★★
अनार दाना और इमली को रोजाना सेवन करते रहने से कैंसर के रोगी को आराम मिलता है और उसकी उम्र 10 वर्ष के लिए और बढ़ सकती है।
★★
अंगूर का सेवन करें, 1 दिन में दो किलो से ज्यादा अंगूर न खायें। कुछ दिनों के बाद छाछ पी सकते हैं और कोई चीज खाने को न दें। इससे लाभ धीरे-धीरे महीनों में होगा। कभी-कभी अंगूर का रस लेने से पेट दर्द, मलद्वार पर जलन होती है। इससे न डरे। दर्द कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। दर्द होने के बाद इसे सेंक सकते हैं। इस प्रयोग से कैंसर की बीमारी में आराम मिलता है।
◆◆
दही के लगातार सेवन से कैंसर होने की संभावना नहीं रहती है।
★★★
गेहूं के नये पौधों का रस रोजाना सुबह-शाम पीने से कैंसर रोग ठीक हो जाता है।आधा कप गेहूं धोकर किसी बर्तन में दो कप ताजा पानी डालकर रख दें। 12 घंटे के बाद उस पानी को सुबह-शाम पीयें। लगातार 8-10 दिनों में ही रोग भागने लगेगा और 2-3 महीने के लगातार प्रयोग से कैंसर रोग से मरने वाला प्राणी रोग मुक्त हो जाएगा।
कैंसर भी शरीर की एक स्थिति मात्र है, जो यह बताती है कि अदभुत यंत्र में कोई खराबी है।
प्रकृति हमेशा शरीर में संतुलन बनाए रखने का प्रयास करती है। कुछ लोग कैंसर से पीड़ित होते है और कुछ को अन्य बीमारियां।
यह इसलिए कि सबके जीने का ढंग अलग-अलग होता है। एक महिला की छाती में कैंसर था वह सभी प्रकार की चिकित्सा कराकर निराश हो चुकी थी।
उसको सभी प्रकार के रसों का आहार दिया गया तो वह कुछ ही महीनों में ठीक हो गई। इसी प्रकार एक ल्यूकीमिया के रोगी को पानी को एनिमा देकर पेट साफ किया गया और बाद में एनिमा से ही आंतों में गेहूं के पौधे का रस पहुंचाया गया और वह रोगी भी ठीक हो गया।
◆◆◆
लहसुन के सेवन से पेट का कैंसर नहीं होता है। खाना-खाने के बाद 2 लहसुन को चबाकर 1 गिलास पानी के साथ पीयें। पेट कैंसर होने पर लहसुन को पानी में पीसकर कुछ दिनों तक पीयें। इससे लाभ होगा।
◆◆
तांबे के लोटे में रात को पानी भरकर रख दें। सुबह इसी पानी को पीयें। इससे कैंसर में लाभ होगा।
◆◆
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सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण



         ● खून शुद्धि की अयूर्वादिक दवा●              *सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण*


इस दवा से चेहरे का कालापन,पीपल्स ,फुंसी, झाईयां, आँखों के नीचे काला घेरा, कब्ज से होने वाले रोग,और खून की खराबी से होने वाले रोग ठीक होते हैं।

रक्त विकार अर्थात खून में दूषित द्रव्य बनना। खून में दूषित द्रव्य बनने के कई कारण होते हैं।

सूक्ष्म कीटाणु फैलने के कारण यह रोग होता है। जब किसी रोगी का खून दूषित हो जाता है तो फुंसियां हो जाती हैं।
किसी को फोड़े निकल आते हैं।

किसी को ऐसे फोड़े हो जाते हैं जो किसी साधारण दवा से ठीक ही नहीं होता।

 इस तरह विभिन्न कारणों से उत्पन्न रक्त विकार को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक औषधि का प्रयोग करने से लाभ होता है।

आइये जाने रक्त विकार(खून की खराबी)को दूर करने के घरेलू उपाय

उपाय :
पहला प्रयोगः दो तोला काली द्राक्ष (मुनक्के) को 20 तोला पानी में रात्रि को भिगोकर सुबह उसे मसलकर 1 से 5 ग्राम त्रिफला के साथ पीने से कब्जियत, रक्तविकार, पित्त के दोष आदि मिटकर काया कंचन जैसी हो जाती है।

दूसरा प्रयोगः बड़ के 5 से 25 ग्राम कोमल अंकुरों को पीसकर उसमें 50 से 200 मि.ली. बकरी का दूध और उतना ही पानी मिलाकर दूध बाकी रहे तब तक उबालकर, छानकर पीने से रक्तविकार(Blood Disorders) मिटता है।

          ★खून शुद्वि की अयूर्वादिक दवा★

त्रिफला 200 ग्राम
गिलोय 100 ग्राम
अजवायन 100 ग्राम
नीम पंचाग 100 ग्राम
तुलसी पंचाग 100 ग्राम
बेल चुर्ण 100 ग्राम
आँवला 50 ग्राम
चरायता 50 ग्राम
हल्दी 50 ग्राम
सोंठ 50 ग्राम
काली मिर्च 50 ग्राम
सौंफ 50 ग्राम
काला नमक 50 ग्राम

सभी को मिलाकर चुर्ण बनाए।
सुबह-शाम पानी या दूध के 1 चमच्च लेते रहे।
21 दिन लगातार सेवन करें।


●●
★भारती सभी वैद इसका उपयोग करते रहे हैं★
खून की खराबी में होने वाले रोगों में यह दवा रामबाण है।
नीचे लिखे सभी रोग खून की अशुद्धि के कारण होते हैं। यह दवा सभी को ठीक करती हैं।

–चेहरे पर फुंसियाँ और दाने और कील-मुँहासे

–त्वचा पर चकते और धब्बे, चेहरे समेत

–एलर्जी और संक्रमण (ख़ास तौर पर त्वचा का)

–चेहरे पर झुर्रियाँ

–त्वचा पर चकते और जलन फोड़े और फुंसियाँ, या अन्य त्वचा रोग,

–सिर चकराना और सिर में दर्द

–बाल झड़ना

–आँखें कमजोर हो जाना

–सांसों की बदबू

–श्वास प्रणाली से जुड़ी समस्याएँ

यह सभी रोग आसानी से दूर होंगे।

सिद्ध अयूर्वादिक
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गुर्दे की पथरी में कायाकल्प चुर्ण

      ★गुर्दे की पथरी में कायाकल्प चुर्ण★

●पथरी 5 mm तक की 3 दिन में गुर्दे से बाहर निकल जाती है।

अगर पथरी बड़ी या ज्यादा हो तो 21 दिन कायाकल्प चुर्ण का सेवन करे।

कैसे ले- 50 मिलीलीटर नीबू रस ले 300 ग्राम पानी मे मिलाकर 5 ग्राम दवा ले।
दिन में 4 बार दवा ले।

जब दवा लेगे दर्द तत्काल मिट जाएगा।
★★★
यह 21 दिन का उपयोग होगा।
21 दिन पथरी गुर्दे से बिल्कुल साफ हो जाएगी।
निम्बू पानी से केवल 5 दिन दवा लेनी।
5 दिन के बाद 2 बार सुबह शाम खाने के बाद ताजे पानी से कायाकल्प चुर्ण लेते रहे।
★★

क्या है कायाकल्प चूर्ण
(What is Kayakalpa churan)

कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था।

कायाकल्प चुर्ण के तीन मुख्य लक्ष्य

(Three main Objective of Kayakalpa churan)
कायाकल्प चुर्ण के वैसे तो कई फायदे हैं

लेकिन इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं-

*नशों की कमजोरी को दूर करता है।

• व्यक्ति की सुंदरता एंव स्वास्थ्य के साथ-साथ लंबे समय तक उन्हें जवानी को बरकरार बनाए रखना।

• नेचुरल एजिंग प्रोसेस को धीमा करना
• आयु बढ़ाना

●●
क्या है काया कल्प चूर्ण में 
आए जाने -:::

*त्रिफला -250 ग्रा
*इंद्राण से बनी 
हुई अजमायन-200 ग्राम
*गिलोय चूर्ण-100 गरा
*अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम
* ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम
*शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम
*कलौंजी -100 ग्राम
*आवला चूर्ण-100 ग्राम
*नसांदर -100 ग्राम
*अपामर्ग -50 ग्राम
* जटामांसी -50 ग्राम
* सत्यनाशी -50 ग्राम
* काला नमक -50 ग्राम
*सेंधानमक -50 ग्राम
*ऐलोवैरा रस -500 ग्राम

सभी चूर्ण को एलोवेरा रस में मिलाकर 
सांय मे सुखाय ।

जब सुख जाए तब आप का काया कल्प 
चूर्ण बनकर तैयार हो गया है ।

विधि अनुसार सेवन करे।

किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
Whats 94178 62263

Email-sidhayurveda@gmail.com

सिद्ध अस्थमा नाशक कल्पचुर्ण

            ◆अस्थमा की अयूर्वादिक दवा ◆

 सिद्ध अस्थमा नाशक कल्पचुर्ण

आज के समय में दमा (अस्थमा) तेजी से स्त्री-पुरुष व बच्चों को अपना शिकार बना रहा है। यह रोग धुंआ, धूल, दूषित गैस आदि जब लोगों के शरीर में पहुंचती है तो यह शरीर के फेफड़ों को सबसे अधिक हानि पहुंचाती है। प्रदूषित वातावरण में अधिक रहने से श्वास रोग (अस्थमा) की उत्पत्ति होती है।

         यह श्वसन संस्थान का एक भयंकर रोग है। इस रोग में सांस नली में सूजन या उसमें कफ जमा हो जाने के कारण सांस लेने में बहुत अधिक कठिनाई होती है। दमा का दौरा अधिकतर सुबह के समय ही पड़ता है। यह अत्यंत कष्टकारी है जो आसानी से ठीक नहीं होता है।

आयुर्वेद के अनुसार यह पांच प्रकार का होता है :

1. क्षुद्र श्वांस -रूखे पदार्थों का सेवन करने तथा अधिक परिश्रम करने के कारण जब कुछ वायु ऊपर की और उठती है तो क्षुद्रश्वांस उत्पन्न होती है। क्षुद्रश्वांस में वायु कुपित होती है परन्तु अधिक कष्ट नहीं होता है। यह रोग कभी-कभी स्वत: ही ठीक हो जाता है।

2. तमक श्वास  : इस दमा रोग में वायु गले को जकड़ लेती है और गले में जमा कफ ऊपर की ओर उठकर श्वांस नली में विपरीत दिशा में चढ़ता है जिसे तमस (पीनस) रोग उत्पन्न होता है। पीनस होने पर गले में घड़घड़ाहट की आवाज के साथ सांस लेने व छोड़ने पर अधिक पीड़ा होती है। इस रोग में भय, भ्रम, खांसी, कष्ट के साथ कफ का निकलना, बोलने में कष्ट होना

3. श्वास :इस रोग में रोगी ठीक प्रकार से श्वांस नहीं ले पाता, सांस रुक-रुककर चलती है, पेट फूला रहता है, पेडू में जलन होती है, पसीना अधिक मात्रा में आता, आंखों में पानी रहता है तथा घूमना व श्वांस लेने में कष्ट होता है। इस रोग में मुंह व आंखे लाल हो जाती हैं, चेहरा सूख जाता है, मन उत्तेजित रहता है और बोलने में परेशानी होती है। रोगी की मूत्राशय में बहुत जलन होती है और रोगी हांफता हुआ बड़बड़ाता रहता है।

4. ऊध्र्वश्वास :ऊध्र्वश्वास (सांस को जोर से ऊपर की ओर खिंचना) :

ऊपर की ओर जोर से सांस खींचना, नीचे को लौटते समय कठिनाई का होना, सांसनली में कफ का भर जाना, ऊपर की ओर दृष्टि का रहना, घबराहट महसूस करना, हमेशा इधर-उधर देखते रहना तथा नीचे की ओर सांस रुकने के साथ बेहोशी उत्पन्न होना आदि लक्षण होते हैं।

5. छिन्न श्वास:सांस ऊपर की ओर अटका महसूस होना, खांसने में अधिक कष्ट होना, उच्च श्वांस, स्मरणशक्ति का कम होना, मुंह व आंखों का खुला रहना, मल-मूत्र की रुकावट, बोलने में कठिनाई तथा सांस लेने व छोड़ते समय गले से घड़घड़ाहट की आवाज आना आदि इस रोग के लक्षण हैं। जोर-जोर से सांस लेना, आंखों का फट सा जाना और जीभ का तुतलाना-ये महाश्वास के लक्षण हैं।
इन सभी के लिए एक ही दवा है।आप घर मे इसको आसानी से बना सकते हैं।

अस्थमा की अयूर्वादिक दवा

त्रिफला            50 ग्राम
अजवाइन भुनी 50 ग्राम
सौंठ भुनी         50 ग्राम
गिलोय             50 ग्राम
हल्दी                50ग्राम
चरायता            50 ग्राम
अडूसा             20 ग्राम
लौंग का चूर्ण    20 ग्राम
हरड़ काली       20 ग्राम
अपामार्ग          20 ग्राम
बेरी की छाल    20 ग्राम
नौसादर           20 ग्राम
नागरमोथा       20 ग्राम
तेजपात           10 ग्राम
पीपल             10 ग्राम
बबूल के गोंद    10 ग्राम
काली मिर्च       10 ग्राम
भुनी हुई हींग    10 ग्राम
काला नमक     10 ग्राम
पीपर                5 ग्राम
काकड़ासिंगी    5 ग्राम
पुष्करमूल         5 ग्राम
गंधक का चूर्ण   5 ग्राम
कुलिंजन           5 ग्राम
गुग्गल               5 ग्राम
हरसिंगार           5 ग्राम
जावित्री             5 ग्राम

एलोवेरा रस 200 ग्राम ताजा ले कर सभी अयूर्वादिक जड़ी बूटियों को मिलाकर धुप में सुखा लें।

★★★
सेवन विधि

दिन में 3 बार 1 -1 चमच्च  50 ग्राम गाय  मूत्र 100 ग्राम पानी से ले।

जिदी अस्थमा भी ख़त्म होगा।
यह 90 दिन का कोर्स है।

सिद्ध अयूर्वादिक

किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
Whats 94178 62263

Email-sidhayurveda1@gmail.com

 *सिद्ध शीतल चुर्ण*

*गर्मी में अयुर्वेदिक तोहफा*

*पेट की गर्मी के लिए आयुर्वेदिक चुर्णा*
*सिद्ध शीतल कल्पचुर्ण*
*21 जड़ी बूटी का महत्वपूर्ण मिश्रण*
*Online मंगवाए*

★*दिमाग को रखे ठंडा , बच्चों और बजुर्गों के गर्मी की राहत के लिए वरदान है *सिद्ध शीतल चुर्ण*

★*गर्भवती महिलाओं और पेट पल रहे बचें के लिए *सिद्ध शीतल चुर्ण* गर्मी में रामबाण है।

★* पैरों से सेक निकलता है तो यह चुर्ण ले*

★ मुह में और सांस नली में छाले (जब खाना खाते जलन होती ) हो तो सिद्ध शीतल कल्पचुर्ण कारगर साबित होता है।

★ *दफ्तरों और कम्यूटर पे काम करने वाले यह चुर्ण जरूरत इस्तेमाल करे।*

*घर मे आसानी से बना सकते हैं आप*
*इसका कोई साइड इफेक्ट्स नही है*

*21 जड़ी बूटी का महत्वपूर्ण मिश्रण*
*सिद्ध शीतल चुर्ण*
कौंचबीज बीज काला 100 ग्राम
त्रिफला 100 ग्राम
सफेद चंदन 100 ग्राम
ब्रह्मबुटी 100 ग्राम
खसखस सफेद 100ग्राम
संखपुष्पी 100ग्राम
सौंफ़ 100 ग्राम
आवला चुर्ण 100 ग्राम
तुलसी बीज 100 ग्राम
बादाम गिरी 100 ग्राम
मुलेठी का चूर्ण 100 ग्राम
मिश्री 100 ग्राम
जीरा 50 ग्राम
छोटी इलाची 50 ग्राम
पुदीना सत 5 ग्राम
निम्बू सत। 5 ग्राम
*5 और महत्वपूर्ण जड़ी बूटी *
*वैद की देखरेख में तैयार करे*

*सभी को मिलाकर चुर्ण बना ले*
*और चार गोंद 200 ग्राम काढ़े में भावना दे*
*सायं में सुखाए*
सेवन विधि

*दिन में 3 बार 3 से 5 ग्राम*
*बच्चों को 2 ग्राम*

*निम्बू पानी, छाछ, मठा पानी(दही पानी),नारियल पानी,
बेल शर्बत के साथ ले।*

फायदे जाने

पेट में तेजाब बनना, पेट मे गैस, कब्ज, एसिडिटी, आंतों, मसाने की गर्मी होना या लिवर की गर्मी और सूजन होना।

पेट में गर्मी होने पर पेट में जलन, मरोड़, दर्द और ठीक से पेट साफ़ ना होना जैसे लक्षण दिखने लगते है।

इन सभी को *सिद्ध शीतल चुर्ण* फायदा करेगा।

★★★
●सिद्ध शीतल कल्पचुर्ण फायदे●
~~~~~~~~~~~~
_यह उत्तम शीतल गुणों से युक्त होती है |

_पेशाब में धातु जाना,

_पेशाब में जलन,

_पेशाब में इन्फेक्शन एवं

_महिलाओं के श्वेत प्रदर जैसे रोगों में लाभदायक औषधि साबित होती है |

_सिद्ध शीतल कल्पचुर्ण में एंटीबैक्टीरियल गुण होते है जो इसे और अधिक उपयोगी औषधि बनाते है |

_यह शरीर में जलन,

_उष्णता एवं पत्थरी के निर्माण को रोकने का कार्य करती है |

_अश्मरी रोग एवं हृदय की कमजोरी में भी यह लाभदायक परिणाम देती है |

★★★

*पेट की गर्मी के कारण*

ज्यादा मसालेदार खाना

शाम होने के बाद ज्यादा खाना खाने से

दर्द दूर करने वाली दवा का जादा सेवन करना

पेट में तेजाब (एसिडिटी) बनने के कारण

धूम्रपान और शराब का अधिक सेवन करना

★★★

*पेट में गर्मी के लक्षण*

पेट में जलन होना
सीने में जलन महसूस होना
मुंह और गले में छाले पड़ना
गले मे छाले।
शरीर पर छोटे छोटे लाल रंग के दाने निकलना

*पेट की गर्मी का इलाज और घरेलू उपाय*

1. अरहर की दाल बारीक पीस कर इसे पीने से पेट के दर्द में आराम मिलता है और साथ ही इस उपाय से पेट की गर्मी दूर होती है।

2. एक गिलास गुनगुने पानी में 1 चम्मच हल्दी पाउडर मिला कर इस पानी से गरारे करे। इस घरेलू नुस्खे को करने पर पेट की गर्मी से राहत मिलती है।

3. पेट की गर्मी दूर करने के उपाय में थोड़ा काला नमक और निम्बू पानी मे मिला कर पिए। इससे पेट के रोग दूर होते है व पेट की अन्य समस्या से बचाव में मदद मिलती है।

4. लिवर की गर्मी होना पीलिया होने का प्रमुख कारण है, ऐसे में छाछ, नारियल पानी और गन्ने का जूस रामबाण इलाज है।

5. पेट की बीमारी ठीक करने व इससे बचने के लिए नीम काफी उपयोगी है। शरीर की गर्मी कम करने के लिए प्रतिदिन नीम का दातुन करना चाहिए।

6. पेट की गर्मी कैसे दूर करे में नींबू का रस गुनगुने पानी में मिला कर पिने से तुरंत आराम मिलने लगता है।

7. नारियल पानी हर रोज पीने से भी पेट की गर्मी से छुटकारा मिलता है।

8. गले की सूजन व पेट की गर्मी कम करने में गुड़ का पानी पीने से आराम मिलता है।

9. बबूल की छाल पीस कर इसे पानी में उबाल कर इससे कुल्ला करे। Baba ramdev के देसी नुस्खे से पेट की गर्मी के लक्षण कम होने लगते है।

10. शरीर की गर्मी कम करने और इससे बचने के लिए ठंडी चीज़ो का सेवन अधिक करे जैसे नारियल का पानी, शरबत, नींबू पानी और छाछ। शहद के सेवन से भी शरीर में ठंडक आती है।

पेट की गर्मी दूर करने के लिए क्या खाएं

◘ पेट की बीमारी का उपचार करने मे लस्सी और दही के सेवन करने से काफी आराम मिलता है। पेट की गर्मी को कम करने में भी लस्सी और दही फायदेमंद है। आप इन्हें अपने आहार में शामिल कर सकते है।

◘ पेपेट में गर्मी का इलाज करने के लिए हफ्ते मे 2 – 3 बार चने की दाल और दही का सेवन करे।

◘ पेथोड़ी सी चीनी और घी चावल मे मिला कर खाने से भी pet ki garmi कम करने में मदद मिलती है।

*निःशुक्ल आयुर्वेदिक सलाह ले*
*94178 62263*
https://ayurvedasidh.blogspot.in/2018/04/blog-post_27.html

सिद्ध धातू पुष्टि कल्पचुर्ण

              सिद्ध धातू पुष्टि कल्पचुर्ण

        ★सफ़ेद पानी (लकोरिया ) की दवा★

श्वेत प्रदर या ल्यूकोरिआ या लिकोरिया (Leukorrhea) या “सफेद पानी आना” स्त्रिओं का एक रोग है जिसमें स्त्री-योनि से असामान्य मात्रा में सफेद रंग का गाढा और बदबूदार पानी निकलता है और जिसके कारण वे बहुत क्षीण तथा दुर्बल हो जाती है। महिलाओं में श्वेत प्रदर रोग आम बात है।

ल्‍यूकोरिया स्त्री की योनि से जुड़ी एक बहुत ही सामान्य स्थिति है। योनि मार्ग से आने वाले सफेद और चिपचिपे गाढ़े स्राव को ल्‍यूकोरिया कहते हैं। कभी-कभी योनि से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने के लिए यह सामान्य होता है। लेकिन कई बार योनि से निकलते स्राव में ज़्यादा चिपचिपापन, जलन, खुजली, गंध होती है जिसके कारण यह ज़्यादा परेशानी का कारण बनता है।

लिकोरिया होने के लक्षण :

★पेट के निचले हिस्से और टांगो में दर्द रहना
★बार बार पेशाब आना
★योनी के आस पास खुजली होना
★सम्भोग के दौरान दर्द महसूस होना
★थकावट ज्यादा रहना
★कब्ज़ होना
★गर्भ न ठहरना
★खाया पीया न लगना।
★ शरीर का कमजोर होना।

★★★
लकोरिया की दवा

कौंचबीज बीज 100 ग्राम
आवला चुर्ण     100  ग्राम
तुलसी बीज     100  ग्राम
कीकर फली     100  ग्राम
सतावरी           100  ग्राम
सफेद मूसली    100  ग्राम
मिश्री               100  ग्राम
मुलहठी            50 ग्राम
छोटी इलायची के बीज 25 ग्राम

सभी लो मिलाकर चुर्ण बनाए।

कैसे सेवन करे।
दिन में 3 बार 1-1चमच्च पानी से ले।
कम से कम 21 दिन कोर्स करे।
अगर पुराना लकोरिया रोग है तो 90 दिन कोर्स करे।
★★
साथ मे यह जरूर करे

नीम पत्ती 200 ग्राम 100 ग्राम फिटकरी को 2 लीटर
में उबालकर कर बोतल में भर ले।

दिन में 5 से 7 वार इस पानी से योनि की सफाई करे।
या

योनी की साफ-सफाई का समुचित ध्यान रखें, इसके लिए आप गुनगुने पानी में कुछ बूँद डेटॉल का डालकर साफ करें।

सेक्स करने के बाद अपने प्राइवेट पार्ट को धोना न भूलें।

यूरिन पास करने के बाद पानी से साफ करें।

सेक्स के समय कंडोम क प्रयोग करें।

अपने अंडरगारमेंट को अच्छे से साफ करें।

दवा online मंगवा सकते हैं।

किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
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सिद्ध लकवा नाशक कल्पचुर्ण

सिद्ध लकवा नाशक कल्पचुर्ण

           अधरंग, पक्षाघात (लकवा)
               की अयूर्वादिक दवा

किसी भी प्रकार लकवा  मुंह का लकवा, जीभ का लकवा, शरीर के एक तरफ का लकवा, सकम्प लकवा 
सभी के यह दवा कारगर है।

त्रिफला        100 ग्राम
अजवाइन     100  ग्राम
गिलोय         100 ग्राम
चरायता        50 ग्राम
करेला चुर्ण    50 ग्राम
तुसली पंचाग 50 ग्राम
सोंठ भुनी      50 ग्राम
अकरकरा      50 ग्राम
राई               50 ग्राम
सर्पगंधा        50 ग्राम
शुद्ध गुग्गुल   50 ग्राम
दालचीनी     50 ग्राम
कलौंजी       50 ग्राम
तिल काले    50 ग्राम
कालीमिर्च    50 ग्राम
अजमोद।    25 ग्राम
सौंफ           25 ग्राम
बबूना          25 ग्राम
बालछड़       25 ग्राम
नकछिनी      25  ग्राम 
जायफल       25 ग्राम
पिपली          25 ग्राम
काला नमक  50 ग्राम

सभी को चुर्ण बनाकर 300 ग्राम ताजा एलोवेरा रस 
में मिला ले। 5 दिन सायं में सुखाए।
आप तुरंत भी उपयोग कर सकते हैं।
इसका कोई साइड इफेक्ट्स नही है।
◆◆
सेवन विधि-1 चम्मच चुर्ण को 50 मिलीलीटर एलोवेरा
ताजा रस को 200 ग्राम मिलाकर सेवन करे।
दिन में 4 बार पहले 15 दिन ले।
15 दिन बाद दिन 3 बार ले।
फिर
15 दिन बाद 2 बार लेते रहे ।
90 दिन पूरा कोर्स करे।
पुराना लकवा भी ठीक होगा
★★
लकवा तेल बनाए

तिल का तेल।       50 ग्राम
निर्गुण्डी का तेल   50 ग्राम
अजवायन का तेल 50 ग्राम
बादाम का तेल       50 ग्राम
सरसों का तेल        50 ग्राम
विषगर्भ तेल           50 ग्राम
कलौजी तेल           50  ग्राम
10 ग्राम लहसुन,5 ग्राम बारीक पीसी हुई अदरक, 10 ग्राम काली उडद की दाल  50 ग्राम कपूर टिकी तेल में मिलाकर 5 मिनट तक गर्म करें।

इस तेल से दिन में 5 बार मालिश करते रहे
■■■

      ★अयूर्वादिक लकवा दवा के फायदे★

लकवा रोग से पीड़ित रोगी को भूख कम लगती है, नींद नहीं आती है और रोगी की शारीरिक शक्ति कम हो जाती है।
यह भूख ,नींद औऱ शरीरक कमजोरी को दूर करेगी।
★★★
रोगी के शरीर के जिस अंग में लकवे का प्रभाव होता है, उस अंग के स्नायु अपना कार्य करना बंद कर देते हैं तथा उस अंग में शून्यता आ जाती है।
यह अयूर्वादिक दवा शून्यता को दूर कर अंग में हरक़त कायम करती।
★★★
                 ★लकवा रोगी ध्यान दे★

दवा के साथ आप इस बात पर ध्यान दे आप जल्दी बीमारी से छुटकारा पा लेंगे।
लकवा रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन नींबू पानी का एनिमा लेकर अपने पेट को साफ करना चाहिए और रोगी व्यक्ति को ऐसा इलाज कराना चाहिए जिससे कि उसके शरीर से अधिक से अधिक पसीना निकले।

★लकवा रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन भापस्नान करना चाहिए तथा इसके बाद गर्म गीली चादर से अपने शरीर के रोगग्रस्त भाग को ढकना चाहिए और फिर कुछ देर के बाद धूप से अपने शरीर की सिंकाई करनी चाहिए।

★लकवा रोग से पीड़ित रोगी यदि बहुत अधिक कमजोर हो तो रोगी को गर्म चीजों का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।
★लकवा रोग से पीड़ित रोगी की रीढ़ की हड्डी पर गर्म या ठंडी सिंकाई करनी चाहिए तथा कपड़े को पानी में भिगोकर पेट तथा रीढ़ की हड्डी पर रखना चाहिए।
★लकवा रोग से पीड़ित रोगी को लगभग 10 दिनों तक फलों का रस नींबू का रस, नारियल पानी, सब्जियों के रस या आंवले के रस में शहद मिलाकर पीना चाहिए।
★लकवा रोग से पीड़ित रोगी का रोग जब तक ठीक न हो जाए तब तक उसे अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए तथा ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए। रोगी को ठंडे स्थान पर रहना चाहिए।
★लकवा रोग से पीड़ित रोगी को अपने शरीर पर सूखा घर्षण करना चाहिए और स्नान करने के बाद रोगी को अपने शरीर पर सूखी मालिश करनी चाहिए। मालिश धीरे-धीरे करनी चाहिए जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

★★★

      ★लकवा में इन चीजों से बचकर ही रहे★

इस रोग में नमक बहुत कम या बिलकुल न लेना अच्छा होता हैं. आरम्भ में भोजन में अन्न लेना भी ठीक नहीं. लकवा के रोगी को चाय, चीनी, तालीभुनि चीजें, नशे की चीजें, मसाले आदि उत्तेजक खाद्य से परहेज करना चाहिए. उसे ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.

मानसिक उद्वेगों चिंता क्रोध तथा भय से बचना चाहिए. उसे न तो ठंडा पानी पीना चाहिए और न ठन्डे पानी से स्नान ही करना चाहिए. नया चावल, कुम्हड़ा, गूढ़, भैंस का दूध, उड़द की दाल, घुइया, भिंडी, रतालू, तरबूज, बासी ठंडी, चीजें, रात्रि जागरण, पाखाना-पेशाब रोकना, बर्फ का सेवन आदि इस रोग में वर्जित हैं.
★★★

★लकवा में दवा के साथ साथ उपवास करे ★
              डबल फायदा होगा

उपवास के दिनों में केवल जल अथवा कागजी नीबू का रस मिले जल के सिवा कुछ भी खाना पीना नहीं चाहिए. उन दिनों में थोड़ा-थोड़ा करके 2-3 सेर या अधिक पानी रोज जरूर पीना चाहिए. जिस दिन उपवास किया जाए, उस दिन शाम को और फिर उपवास काल में रोज सबेरे या शाम को दिन में एक बार सेर डेढ़ सेर गुन-गुने पानी का एनिमा जरूर लेना चाहिए.


अगर एक दिन का उपवास किया जाए तो दूसरे दिन फल खाने के बाद, तीसरे दिन भोजन किया जा सकता हैं. अगर तीन दिन का उपवास किया जाए तो चौथे दिन केवल फल या तरकारियों का सूप पांचवे दिन फल और छठे दिन सुबह शाम को फल और दोपहर को थोड़ी रोटी और सब्जी लेनी चाहिए. फिर साधारण भोजन पर आ जाना चाहिए।
सिद्ध अयूर्वादिक
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सिद्ध साइनस नाशक कल्पचुर्ण

                ◆जिदी साइनस की दवा◆

सिद्ध साइनस नाशक कल्पचुर्ण

गिलोय चुर्ण    100 ग्राम
त्रिफला चुर्ण    100 ग्राम
चरायता           50 ग्राम
हल्दी                50 ग्राम
दालचीनी          50 ग्राम
जीरा                 50 ग्राम
मेथी भुनी          50 ग्राम
सोंठ                  50 ग्राम
तुसली पंचाग      50 ग्राम

सभी को चुर्ण मिला ले।
सेवन विधि – दिन में 3 बार गर्म पानी से 1 -1 चम्मच लेते रहे।
41 दिन का कोर्स करे।
★★★

परहेज और आहार

लेने योग्य आहार

संक्रमण के दौरान सीमित मात्रा में खाएँ, आहार में साबुत अनाज, फलियाँ, दालें, हलकी पकी सब्जियाँ, सूप, और शीतलन की प्रक्रिया से बने तेल (जैतून का तेल)
शिमला मिर्च, लहसुन, प्याज़, और हॉर्सरैडिश अपने सूप और आहार में शामिल करें, ये अतिरिक्त म्यूकस को पतला करके निकलने में सहायक होते हैं।
अच्छी तरह साफ पानी अधिक मात्रा में पियें।
◆◆
इनसे परहेज करें
म्यूकस बनाने वाले आहार जैसे कि मैदे की चीजें, अंडे, चॉकलेट्स, तले और प्रोसेस्ड आहार, शक्कर और डेरी उत्पाद, कैफीन, और शराब

■■
साइनसाइटिस और साइनस संक्रमण के प्रकार

साइनसाइटिस को कई प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है, जिसमें संक्रमण रहने की अवधि (तीव्र, कम तीव्र या लंबे समय से), सूजन (संक्रामक या असंक्रामक) आदि शामिल हैं –

1) तीव्र साइनस संक्रमण (Acute sinus infection; कम समय तक रहने वाला) – आम तौर पर शरीर में इसका संक्रमण 30 दिन से कम समय तक ही रह पाता है।

2) कम तीव्र साइनस संक्रमण (Sub acute sinus infection) – इसका संक्रमण एक महीने से ज्यादा समय तक स्थिर रह सकता है मगर 3 महीने से ज्यादा नहीं हो पाता।

3) क्रॉनिक साइनस संक्रमण (Chronic sinus infection; लंबे समय तक रहने वाला) – यह शरीर में 3 महीने से भी ज्यादा समय तक स्थिर रह सकता है। क्रॉनिक साइनसाइटिस आगे उप-वर्गीकृत भी हो सकता है, जैसे

क्रॉनिक साइनसाइटिस नाक में कणों (polyps) के साथ या उनके बिना
एलर्जिक फंगल साइनसाइटिस
4) रीकरंट साइनसाइटिस (Recurrent Sinusitis; बार-बार होने वाला) यह तब होता है जब किसी व्यक्ति पर प्रतिवर्ष कई बार संक्रमण का प्रभाव होता है।

संक्रमित साइनसाइटिस आम तौर पर सीधे वायरस संक्रमण से होता है। अक्सर बैक्टीरिया की वृद्धि के कारण साइनस संक्रमण या फंगल साइनस संक्रमण भी हो सकता है लेकिन ये बहुत ही कम हो पाता है। कम तीव्र साइनस संक्रमण (Sub acute sinus infection) और क्रॉनिक साइनस संक्रमण (chronic infection) ये दोनों तीव्र साइनस संक्रमण (acute sinus infection) के अधूरे इलाज का परिणाम होते हैं।

असंक्रामक साइनसाइटिस जलन और एलर्जी के कारण होता है, जो तीव्र, कम तीव्र औऱ क्रॉनिक साइनस संक्रमण को सामान्य साइनस संक्रमण के रूप में अनुसरण करता है।
★★★

साइनस शब्द का हिन्दी अर्थ विवर या कोटर होता है। ये हडि्डयों के अन्दर वाले खोल या गहृर होते हैं।

उदाहरण के लिये ऊर्ध्वहनु की हड्डी का विवर तथा नाक का वह विवर जो माथे के नीचे अन्दर की ओर पाया जाता है। 

जब कभी इन विवरों में प्रदाह (जलन) होती है तो उसे ही साइनस की प्रदाह या विवरशोथ नाम से जाना जाता है। वैसे मनुष्य के शरीर में कई सारे विवर पाये जाते है जैसे- ललाटविवर (फरनटल साइनस), ऊर्ध्वहन्वास्थि विवर (मैकसीलैरी साइनस), गोल विवर (लैफनाओइड साइनस), झर्झर विवर (ऐथमोइड साइनस )। मनुष्य के शरीर में जब कभी इन सभी विवरों के कारण जलन की अवस्था प्रकट होती है तो उसे साइनस की प्रदाह कहते हैं। ये सारे विवर नाक तथा उसकी आस-पास की हडि्डयों में पाए जाते हैं। इस रोग से पीड़ित रोगी को सर्दी-जुकाम, नाक बंद होना, माथे पर हल्का-हल्का दर्द रहना, बार-बार छींके आना तथा बुखार जैसी अवस्थाएं घेर लेती है। रोगी के विवर को दबाने पर दर्द हो सकता है।

कारण-

        इस प्रकार का रोग विवरशोथ में ठंड लग जाने के कारण, इन्फ्लुएंजा रोग के कारण या दांत में फोड़ा होने के कारण भी हो सकता है।

सिद्ध अयूर्वादिक

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सिद्ध कान दर्द नाशक तेल

        कान दर्द की दवा

            सिद्ध कान दर्द नाशक तेल

सिद्ध कान दर्द नाशक तेल

मेथी के दाने    5 ग्राम
लहसुन कली    5 पीस
नीम पत्ती          5 पीस
प्याज               2 ग्राम
अजवाइन         2 ग्राम
अदरक            2 ग्राम

सभी को

200 ग्राम  जैतून तेल में डाल कर गरम करे और ठंडा होने के बाद इसे छान कर कान में डालने से दर्द से तुरंत आराम मिलता है।

दिन में 3 से 5 बार कान डालते रहे।

★★★

यह भी कर सकते है

       कान में दर्द का आयुर्वेदिक उपचार

1. चाहे कितना भी कान दर्द हो केले के तने का रस निकल कर सोने से पहले रात को कान में डाले। इस उपाय को करने से सुबह तक कान में होने वाले दर्द से राहत मिल जाएगी। कान से जुड़े दूसरे रोगों के इलाज में भी ये उपाय काफ़ी कारगर है।

2. घी में मुलेठी को हल्का गरम करे और कान के आस पास इसका लेप लगाये। इस नुस्खे से दर्द में आराम मिलता है।

3. अजवाइन का तेल सरसों के तेल में मिलाकर गुनगुना करे और कान में डाले। अजवाइन तेल सरसों के तेल का तीसरा भाग होना चाहिए।

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   सिद्ध वीर्यवर्धक कल्पचुर्ण

अनेकों बीमारियों करेगा दूर बलवर्धक और वीर्यवर्धक,चांदी भस्म युक्त।
गर्मियों में लेने योग वीर्यवर्धक चुर्ण
बिना किसी साइड इफेक्ट्स के

सिद्ध वीर्यवर्धक कल्पचुर्ण

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*जब सेक्स की इच्छा मर जाए तो वीर्यवर्धक कल्पचुर्ण ले*
*महिलाओं और मर्द दोनों*
*की हर कमज़ोरी दूर करता है।*

यह हाइपोथेलेमस पर काम करता है।
इसके सेवन से सीरम टेस्टोस्टेरोन, लुटीनाइज़िंग luteinizing हार्मोन, डोपामाइन, एड्रेनालाईन, आदि में सुधार होता है।

कौंचबीज 500 ग्राम
आँवला चुर्ण 200 ग्राम
अश्वगान्ध 300 ग्राम
बरगद फल 100 ग्राम (चुर्ण)
सतावर 100 ग्राम
तुलसी बीज 100 ग्राम
बाबुल फली 100 ग्राम (बीज रहित)
सालम पंजा। 100 ग्राम
सालम मिश्री 100 ग्राम
कौंचबीज काला 50 ग्राम
तालमखाना 50 ग्राम
कंदबीज 25 ग्राम
बरगद दूध(सुखा) 25 ग्राम
चांदी भस्म 2 ग्राम

सभी को मिलाए और डब्बे में बंद कर ठंडी जगह पर रखे।
सेवन विधि
रोजाना 5 -5 ग्राम 3 बार हल्के ठंडे दूध के साथ सेवन करे।

***
यह चुर्ण मर्द और महिलाओं के लिए शक्तिवर्धक है

यह महिलाओं के भी रामबाण योग है।
महिलाओं की हर कमजोरी और सफेद पानी की समस्या को ठीक करता है।

***

शक्तिवर्धक, वीर्यवर्धक, स्नायु व मांसपेशियों को ताकत देने वाला एवं कद बढ़ाने वाला एक पौष्टिक रसायन है।

यह धातु की कमजोरी, शारीरिक-मानसिक कमजोरी आदि के लिए उत्तम औषधि है।

इसके सेवन से शुक्राणुओं की वृद्धि होती है एवं वीर्यदोष दूर होते हैं।

धातु की कमजोरी, स्वप्नदोष, पेशाब के साथ धातु जाना आदि विकारों में इसका प्रयोग बहुत ही लाभदायी है।

यह राज्यक्ष्मा(क्षयरोग) में भी लाभदायी है। इसके सेवन से नींद भी अच्छी आती है।

यह वातशामक तथा रसायन होने के कारण विस्मृति, यादशक्ति की कमी, उन्माद, मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) आदि मनोविकारों में भी लाभदायी है।

दूध के साथ सेवन करने से शरीर में लाल रक्तकणों की वृद्धि होती है, जठराग्नि प्रदीप्त होती है, शरीर में शक्ति आती है व कांति बढ़ती है।

Online आप मंगवा सकते हैं।

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सिद्ध क्षय रोग नाशक कल्पचुर्ण

                
   सिद्ध क्षय रोग नाशक कल्पचुर्ण

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             ★टी.बी के तीन प्रकार हैं★
  फुफ्सीय टी.बी, पेट का टी.बी और हड्डी का टी.बी.
★किसी भी प्रकार की क्षय रोग में रामबाण दवा★

                  ★Online मंगवाए★

काकड़सिंगी 10 ग्राम
करेला चुर्ण 10 ग्राम
अर्जुन की छाल 10 ग्राम
कौंच के बीज 10 ग्राम
गुलाब के फूलों 10 ग्राम
सोंठ 10 ग्राम
असगंध 10 ग्राम
मुलेठी 5 ग्राम
बहेड़ा 5 ग्राम
पिपली 5 ग्राम
पीपल 5 ग्राम
पीपलामूल 5 ग्राम
धनिया 4 ग्राम
अजमोद 5 ग्राम
अनारदाना 50 ग्राम
मिसरी 25 ग्राम
काली मिर्च 5 ग्राम
बंशलोचन 2 ग्राम
दालचीनी 2 ग्राम
लोंग चुर्ण 2 ग्राम
तेजपात  8-10 पत्ते।

सबको पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण प्रतिदिन शहद या बकरी/गाय के दूध से सेवन करें।
***
नोट
साथ में चयवनप्राश 10 ग्राम सुबह-शाम दूध से लें।
★★★

परहेज और आहार

लेने योग्य आहार

वे आहार जो शरीर को टी.बी. संक्रमण से मुकाबले के लायक बनाते हैं उनमें दूध, फल और सब्जियाँ आते हैं।
स्ट्रॉबेरी पोटैशियम, विटामिन और खनिजों से भरीपूरी होती है, जिनसे प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होता है और रोग से लड़ने की शक्ति मिलती है।

सीताफल टीबी की घरेलु चिकित्सा में प्रयुक्त होता है, जिसमें गूदे को पानी के साथ उबालकर बने आहार को प्रतिदिन लिया जाता है।

टीबी के इलाज में अन्नानास अत्यंत उपयोगी है। दिन में एक बार इसका रस पीने से बलगम बाहर निकल जाता है और ठीक होने में सहायता होती है।

अन्य फल जैसे कि ब्लूबेरी और चेरी तथा हरी पत्तेदार सब्जियाँ के साथ साबुत अनाज, दूध, लीन मीट और पोल्ट्री उत्पाद

संतरे के रस में विटामिन C होता है जो कि एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है और शरीर को ट्यूबरक्लोसिस बैक्टीरिया से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है. अन्य लाभकारी रसों में गाजर, टमाटर, गूसबेरी, और अन्नानास आते हैं।

प्रतिदिन सुबह इंडियन गूसबेरी और शहद लेने से ट्यूबरक्लोसिस ठीक करने में सहायता होती है।
हरी पत्तेदार सब्जियाँ, दालें, और स्टार्च युक्त सब्जियाँ जिनमें करेला, सहजन, पालक, और ब्रोकोली हैं, शरीर को ट्यूबरक्लोसिस से लड़ने में सहायता करती हैं। ट्यूबरक्लोसिस की चिकित्सा में लौकी सबसे बढ़िया सब्जी है।

विटामिन-B और आयरन से समृद्ध आहार लें, जैसे कि साबुत अनाज (यदि कोई एलर्जी ना हो), गहरे हरे पत्तों वाली (जैसे कि पालक और केल), और समुद्र सब्जियाँ।

प्रोटीन के लिए रेड मीट कम और लीन मीट अधिक लें, ठन्डे पानी की मछली, टोफू (सोया, यदि एलर्जी ना हो), या फलियाँ लें।
★★★
इनसे परहेज करें

कैन में बंद आहार, पाई, पुडिंग, सॉस, कैफीन युक्त पेय, अचार, मसाले और प्रोसेस्ड आहार सख्ती अपनाते हुए बिलकूल बंद करें।

रिफाइंड आहार, जैसे कि सफ़ेद ब्रेड, पास्ता, और शक्कर से परहेज।

कॉफ़ी और अन्य उत्तेजक, शराब और तम्बाकू से परहेज।

ट्रांस-फैटी एसिड को बंद या कम करें, जो कि व्यावसायिक बेकरी उत्पाद जैसे की कूकीज, क्रैकर्स, केक्स, फ्रेंच फ्राइज, ओइनों रिंग्स, डोनट आदि में होता है।

स्वयं को धूम्रपान और मदिरापान से दूर रखें।

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सिद्ध चेचक नाशक कल्पचुर्ण

              ★सिद्ध मसूरिका(चेचक) दवा★

               सिद्ध चेचक नाशक कल्पचुर्ण

           ★चेचक (माता) की अयूर्वादिक दवा★
               ★यह दवा बहुत कारगर है★
          ★मात्र 3 खुराक में आराम आ जाता है★
           ★दवा ऑनलाइन भी मंगवा सकते हैं★

चेचक की अयूर्वादिक दवा

                 ★सिद्ध मसूरिका दवा★

गिलोय चूर्ण 100 ग्राम 
आंवला चूर्ण 100 ग्राम 
छोटी हरड़ 100 ग्राम 
तुलसी पाचांग-100 ग्राम  
नीम पंचाग 100 ग्राम
चरायता चूर्ण 50 ग्राम 
अजमायण-50 ग्राम 
मलॅठी-20 ग्राम

★सभी को चुर्ण बनाए
★ रोगी को 4 बार दिन मे  पानी से दवा दे
★रोगी को 3 दिन बंद कमरे में रखे।

★★
साथ मे नीचे लिखे उपचार जरूर करे यह उपचार बहुत कारगर हीते है ।
★★

पहला प्रयोगः चेचक में जंगल के कण्डे की राख लगाने से एवं उपवास करने से आराम मिलता है।

दूसरा प्रयोगः गूलर की जड़ का 5 से 20 मि.ली रस 2 से 5 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर खाने से बच्चों के खसरे में आराम मिलता है।

तीसरा प्रयोगः इमली के बीज एवं हल्दी का समान मात्रा में चूर्ण लेकर 3 से 4 रत्तीभार (करीब 500 मिलिग्राम) एक बार रोज ठण्डे पानी के साथ देने से बच्चों को चेचक नहीं निकलता।

चौथा प्रयोगः करेले के पत्तों का रस व हल्दी मिलाकर पीने से चेचक के रोग में फायदा होता है।

विभिन्न औषधियों से उपचार-
★★★

नीम :

नीम की छाल को पानी में पीसकर चेचक के दानों पर लगाने से आराम आता है।

नीम के तेल में आक के पत्तों का रस मिलाकर चेचक(Badi Mataबड़ी माता) के दानों पर लगाने से लाभ होता है।

चेचक के रोगी का बिस्तर बिल्कुल साफ-सुथरा रखें और उसके बिस्तर पर नीम की पत्तियां रख दें। फिर नीम के मुलायम पत्तों को पीसकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। इस 1-1 गोली को सुबह और शाम दूध के साथ रोगी को खिलायें। गर्मी का मौसम हो तो नीम की टहनी से हवा करने से चेचक के दानों में मौजूद जीवाणु जल्द ही समाप्त हो जाते हैं। तवे पर मुनक्का को भूनकर रोगी को खिलाना चाहिए।

नीम के 7 से 8 मुलायम पत्तों (कोपले) और 7 कालीमिर्च को 1 महीने तक लगातार सुबह खाली पेट खाने से चेचक जैसा भयंकर रोग 1 साल तक नहीं होता। 15 दिन तक यह खाने से 6 महीने तक चेचक (माता Shitala Mata) नहीं निकलती। जिन दिनों चेचक का रोग फैल रहा हो उन दिनों में जो लोग नीम के पत्तों का सेवन करते हैं उन्हें चेचक (माता) जैसा भयंकर रोग नहीं होता है।

नीम की लाल रंग के 7 कोमल पत्तियां की और 7 कालीमिर्च को एक महीने तक नियमित रूप से खाने से चेचक में निश्चित ही लाभ होता है।

नीम के बीज, बहेड़े और हल्दी को बराबर मात्रा में लेकर ठंड़े पानी में पीसकर छान लें। इसे कुछ दिनों तक पीते रहने से चेचक के दानों में शान्ति मिलती है।

नीम के पेड़ की 3 ग्राम कोपलों को 15 दिन तक लगातार खाने से 6 महीने तक चेचक(शीतला)नहीं निकलती है।

नीम की कोमल पत्तियों को पीसकर रात को सोते समय चेहरे पर लेप करें और सुबह ठंड़े पानी से चेहरे को धो लें। यह प्रयोग लगातार 50 दिन करने से चेचक के दाग मिट जाते हैं। चेचक के दानों पर कभी भी मोटा लेप नहीं करना चाहिए।

नीम के बीजों की 5-10 गिरी को भी पानी में पीसकर लेप करने से चेचक की जलन शान्त हो जाती है।

यदि चेचक के रोगी को अधिक प्यास लगती हो तो नीम की छाल को जलाकर उसके अंगारों को पानी में डालकर बुझा लें।

इस पानी को छानकर रोगी को पिलाने से प्यास शान्त हो जाती है। अगर प्यास इससे भी शान्त न हो 1 किलो पानी में 10 ग्राम कोमल पत्तियों को उबालकर जब आधा पानी शेष रह जायें, तब इसे छानकर रोगी को पिला दें। इस पानी को पीने से प्यास के साथ-साथ चेचक के दाने भी सूख जाते हैं।

जब चेचक के दाने ठीक हो जाये तो नीम के पत्तों के काढ़े से नहाना चाहिए।

10 ग्राम नीम के मिश्रण और 5 कालीमिर्च का चूर्ण रोजाना सुबह कुछ दिन तक सेवन करने से चेचक के दानों में लाभ मिलता है।

★★
जीरा 
100 ग्राम कच्चा धनिया और 50 ग्राम जीरा को 12 घंटों तक पानी में भीगने के लिये रख दें। फिर दोनों को पानी में अच्छी तरह से मिला लें और इस पानी को छानकर बोतल में भर लें। चेचक के रोग में बच्चे को बार-बार प्यास लगने पर यही पानी पिलाने से लाभ होता है।

■■

शहद

चेचक के रोग में रोगी को शहद चटाने से लाभ होता है।

★★

कालीमिर्च :

5 नीम की कोंपल (नई पत्तियां) 2 कालीमिर्च और थोड़ी सी मिश्री लेकर सुबह-सुबह चबाने से या पीसकर पानी के साथ खाने से चेचक(Shitala Mata) के रोग में लाभ होता है।

★★
चमेली : चेचक के रोग में चमेली के 10-15 फूलों को पीसकर लेप करने से लाभ मिलता है।

◆◆
मुनक्का: चेचक के रोगी को दिन में कई बार 2-2 मुनक्का या किशमिश खिलाने से लाभ होता है।

★★
इमली के बीज और हल्दी का चूर्ण ठंडे पानी के साथ पीने से चेचक(Badi Mataबड़ी माता) का रोग नहीं होता है।

★★
लताकरंज

लताकरंज के बीज, तिल और सरसों को बराबर मात्रा में मिलाकर लेप बना लेते हैं। इस लेप को चेचक के दानों पर लगाने से आराम मिलता है।

★★
अंगूर 
अंगूर को गर्म पानी में धोकर खाने से चेचक के रोग में लाभ होता है।

★★
संतरे

संतरे के छिलके को पीसकर चेचक के दानों पर लगाने से लाभ होता है।

संतरे के छिलकों को सुखाकर पीस लें। इसमें 4 चम्मच की मात्रा में गुलाबजल मिलाकर पेस्ट बनाकर रोजाना चेहरे पर मलें। इससे चेचक के दाग हल्के हो जाते हैं।
★★
चना 
चेचक से पीड़ित रोगी को भीगे हुए चनों पर अपनी हथेलियां रखनी चाहिए क्योंकि भीगा हुआ चना चेचक(शीतला) के कीटाणुओं को सोख लेता है।

★★
हल्दी
10 ग्राम हल्दी, 5 ग्राम कालीमिर्च और 10 ग्राम मिश्री का बारीक चूर्ण बनाकर रख लें। फिर तुलसी के पत्तों के रस में शहद मिलाकर उसके साथ इस चूर्ण को रोजाना सुबह-सुबह खाने से चेचक के रोग मे लाभ होता है।

हल्दी को पानी में मिलाकर चेचक के दानों पर लगाने से लाभ होता है।

★★
तुलसी

नीम की कोंपले (नीम की नई पत्तियां) और तुलसी के पत्तों का चूर्ण बनाकर शहद या मिश्री के साथ मिलाकर सुबह-सुबह चेचक से ग्रस्त रोगी को देने से लाभ होता है।

तुलसी के पत्तों के साथ अजवायन को पीसकर प्रतिदिन सेवन करने से चेचक(Badi Mataबड़ी माता) का बुखार कम हो जाता है।

जब चेचक (माता) फैल रही हो तो उस समय प्रतिदिन सुबह तुलसी के पत्तों का रस पीने से चेचक के संक्रमण से सुरक्षा बनी रहती है।

सुबह के समय रोगी को तुलसी के पत्तों का आधा चम्मच रस पिलाने से चेचक के रोग में लाभ होता है।

बुखार को कम करने के लिये तुलसी के बीज और धुली हुई अजवाइन को पीसकर रोगी को पानी के साथ दें।
★★

नारियल :

लगभग आधा ग्राम केसर को नारियल के पानी के साथ रोजाना 2 बार रोगी को पिलाने से चेचक(शीतला) के दाने जल्दी ही और आसानी से बाहर आ जाते हैं।

नारियल के तेल में कपूर को मिलाकर लगाने से चेचक के दाग मिट जाते हैं।

★★★

भोजन और परहेज :

छोटे बच्चों को चेचक(chicken pox)होने पर दूध, मूंग की दाल, रोटी और हरी सब्जियां तथा मौसमी फल खिलाने चाहिए या उनका जूस पिलाना चाहिए।

चेचक के रोग से ग्रस्त रोगी के घर वालों को खाना बनाते समय सब्जी में छोंका नहीं लगाना चाहिए।

रोगी को तली हुई चीजें, मिर्चमसाले वाला भोजन और ज्यादा ठंड़ी या ज्यादा गर्म चीजें नहीं देनी चाहिए।

दरवाजे पर नीम के पत्तों की टहनी लटका देनी चाहिए।

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नारी पीरियड कल्पचुर्ण

             *नारी पीरियड कल्पचुर्ण*

पीरियड को जल्दी लाने, बंद होने पर, कष्ट पूर्ण होने पर, शरीर कष्ट होने पर और अनिमियत पीरियड में कारगर और 100% लाभदायक।


नारी पीरियड कल्पचुर्ण

गिलोय चूर्ण 10 ग्राम 

आंवला चूर्ण 10 ग्राम 

छोटी हरड़ 10 ग्राम 

तुलसी पाचांग-10 ग्राम  

चरायता चूर्ण 10 ग्राम 

तिल काले 10 ग्राम

अलसी 10 ग्राम

अजमायण-10 ग्राम 

मलॅठी-10 ग्राम 

सौंठ-20 ग्राम 

काली मिर्च -10 ग्राम 

सभी चुर्ण को 50 ग्राम एलोवेरा रस में भावना दे।चुर्ण बना कर दिन में 3 या 4 बार गर्म  दूध से सेवन करे।

                   ★फायदे★

★इसका कोई साइड इफेक्ट्स नही है★

★ 3 दिन में पीरियड आ जाता है

★अगर पीरियड बंद हो गए हो 21 दिन दवा ले।

★पीरियड जल्दी आएगा।

★पीरियड में दर्द नही होगा।

★कमजोरी और सुस्ती नही पड़ेगी।

★अगर गर्भ ठहर गया है तो पुरियड बिन दर्द के आएगा।

★पीरियड दौरान गुसा नही आएगा

★खून की कमी ठीक होगी।


       ★अगर यह समान आप को न मिले तो ★

             ★ऑनलाइन मंगवा सकते हैं।★

         ★यह दवा  कभी खराब नही होती ।★

           ★ आप कभी ले सकते है★

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                       ★★★★★

              पीरियड्स जल्दी लाने के 
        लिए अयूर्वादिक उपाय क्या हैं ?
                      ★★★★

       ★गिलोय काढ़ा साथ जरूर ले★
                           

                    ★कैसे बनाए काढ़ा★

★ गिलोय हरी 100 ग्राम
★छोटी हरड़ 4 पीस
★किसमिश 10 पीस
★छुहारे 5 पीस
★तुलसी पत्ते 50 पीस
★पपीता पत्ता 1पीस
★शहद 5 चम्मच

सभी सामग्री को तब तक उबाले जब तक आधा न रह जाए।

3 ग्लास बाकी बचा काढ़ा ठण्डा होने पर 
1 ग्लास सुबह 
1 दुपहरी 
1 शाम को ले।

यह क्रिया 3 दिन लगातार करे।
पीरियड 3 दिन पका आ जाएगा

मासिक धर्म के रुक जाने का कारण

शरीर में बहुत ज्यादा आलस्य, खून की कमी, मैथुन दोष, माहवारी के समय ठंडी चीजों का सेवन, ठंड लग जाना, पानी में देर तक भीगना, व्यर्थ में इधर-उधर भ्रमण करना, शोक, क्रोध, दुःख, मानसिक उद्वेग, तथा मासिक धर्म के समय खाने-पीने में असावधानी – इन सभी कारणों से मासिक धर्म रुक जाता है या समय से नहीं होता|

मासिक धर्म के रुक जाने की पहचान

गर्भाशय के हिस्से में दर्द, भूख न लगना, वमन, कब्ज, स्तनों में दर्द, दूध कम निकलना, दिल धड़कना, सांस लेने में तकलीफ, कान में तरफ-तरह की आवाजें सुनाई पड़ना, नींद न आना, दस्त लगना, पेट में दर्द, शरीर में जगह-जगह सूजन, मानसिक तनाव, हाथ, पैर व कमर में दर्द, स्वरभंग, थकावट, शरीर में दर्द आदि मासिक धर्म रुकने के लक्षण हैं|

                   

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  निम्न रक्तचाप नाशक कल्पचुर्ण

           लौ ब्लड प्रेसर की अयूर्वादिक दवा

          निम्न रक्तचाप नाशक कल्पचुर्ण

गिलोय चुर्ण          50 ग्राम
आवला चुर्ण         50 ग्राम
सोंठ चुर्ण              20 ग्राम
तुलसी चुर्ण           20 ग्राम
दालचीनी पाउडर 20 ग्राम
सेंधा नमक            10 ग्राम
भुनी हुई हींग          10 ग्राम
बड़ी इलायची         5 ग्राम
काली मिर्च चुर्ण      5 ग्राम
लौंग  चुर्ण               5 ग्राम
तरबूज बीज चुर्ण     5 ग्राम

सभी  चुर्ण  को बना घर रखे ।
सेवन विधि –

किसी को भी निम्न रक्तचाप हो तो 1 चम्मच गर्म दूध से दे और 1 घंटा पूर्ण करने दे।
★★★
अगर निम्न रक्तचाप हमेशा रहता हो तो
रात को सोने से पहले एक गिलास गरम पानी में आधा चम्मच मेथी दाना भिगो कर रखे, सुबह उठ कर पानी से 1 चम्मच दवा ले और मेथी के दाने चबा कर खाये। इस नुस्खे से उच्च रक्तचाप जल्दी कम होगा।

यह उपयोग 5 दिन करे।
★★★
लो ब्लड प्रेशर का इलाज के घरेलू नुस्खे

Low blood pressure का सब से आसान और बढ़िया उपाय है नमक वाला पानी। दिन में दो से तीन बार नमक का पानी पिने से आराम मिलता है।
★★
निम्न रक्तचाप की समस्या में गुड़ का सेवन करना उतम है। 1 गिलास पानी में 20 से 25 ग्राम गुड़ थोड़ा सा निम्बू का रास और थोड़ा सा नमक मिला कर पिये। इस gharelu upay को दिन में 2 से 3 बार करने पर सामान्य हो जायेगा।
★★
अनार के रस में थोड़ा नमक डाल कर पिने से जल्दी आराम मिलता है। इसके इलावा गन्ने का रस, अनानास का रस और संतरे का रस भी निम्न रक्तचाप ठीक करने में फायदा करते है।
★★
एक गिलास देसी गाय के दूध में एक चम्मच देसी गाय का घी मिला कर पिने से ठीक हो जाता है।
★★
एक ग्लास पानी में, 10 तुलसी के पत्ते, 4 काली मिर्च और 2 लोंग डालकर अच्छी तरह उबाल लीजिए।

एक मिट्टी का बर्तन ले और उसमे किशमिश को रातभर भिगोने के लिए रख दे। सुबह भीगी हुई किशमिश को चबाकर खाए।
■■■

              निम्न रक्तचाप हेतु आहार

दिन भर के दौरान थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कुछ खाने से रक्तचाप में एकाएक होने वाली गिरावट को रोकने में मदद मिलती है, जिस गिरावट का अनुभव किसी भी व्यक्ति को भोजन के बाद होता है।
●●
निम्न रक्तचाप की समस्या के उपचार के लिए गाजर और चुकंदर अत्यंत प्रभावी होते हैं।
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किशमिश निम्न रक्तचाप की समस्या का बढ़िया और प्रभावी घरेलू उपचार है। एक कटोरे में कुछ काले रंग की किशमिश पानी में डालकर रात भर के लिए रखें और सुबह उठते ही उन्हें खा लें। इन्हें धीरे-धीरे चबाएँ और निश्चित रहे कि आप पानी भी पी लें।
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रात भर कुछ बादाम गलाकर रखें। सुबह उन्हें छीलें और पीसकर एक समान पेस्ट बना लें। एक छोटा चम्मच भरकर ये पेस्ट दूध में मिलाएँ और इसे अपने नाश्ते के साथ लें।
●●
कॉफ़ी में कैफीन होता है जो रक्तचाप को बढ़ाता है। इसलिए ब्लैक कॉफ़ी के एक या दो कप पीने से वास्तव में आपको अच्छा महसूस होता है और यह आपके रक्तचाप को बढ़ाने में सहायक होता है।

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सिद्ध बवासीर नाशक कल्पचुर्ण-खूनी/बादी बवासीर के लिए


              खूनी बादी बवासीर और 
            बवासीर के मस्सो का इलाज।

दवा online मंगवाए खूनी बवासीर 2 दिन में ठीक हो जाएगी।
                      *****

           बवासीर किंतनी भी पुरानी हो 
           1 हफ्ते में ठीक हो जाएगी
           ★ बादी बवासीर की दवा★

           *Online भी मंगवा सकते हैं*
                

त्रिफला 200 ग्राम
नीम बीज 80 ग्राम
आवला 80 ग्राम
रीठा 50 ग्राम
शुद गूगल 50 ग्राम
शंख भस्म 30 ग्राम
मोच रस 30 ग्राम

सभी को कूटपीस कर चुर्ण बनाए।
मात्रा :
   1-1 चमच्च -दिन में 3 से 4 बार पानी से ले।
1 हफ्ता दवा करे बिलकुल बादी बवासीर ठीक हो जएगी।
★★★

बवासीर के मस्सो पर 
लगाने के लिए तेल

एरंडी के तेल को थोड़ा गर्म कर आग से नीचे उतार कर उसमे कपूर मिलाकर व घोलकर रख ले।

अगर कपूर की मात्रा 10 ग्राम हो तो अरंडी का तेल 80 ग्राम होना चाहिए। मतलब 8 गुना अगर कपूर 5 ग्राम हैं तो तेल 40 ग्राम।

पाखाना करने के बाद मस्सो को धोकर और पोछकर इस तेल को दिन में दो बार नर्मी से मस्सो पर इतना मलें की मस्सो में शोषित हो जायें।

इस तेल की नर्मी से मालिश से मस्सो की तीव्र शोथ, दर्द, जलन, सुईयां चुभने को आराम आ जाता ही और निरंतर प्रयोग से मस्सो खुश्क हो जाते है।

★★★
बवासीर के मस्से नष्ट करने के लिए  अजमाये हुए रामबाण घरेलू इलाज–

1. हल्दी को कड़वी तोरई के रस में लेप बनाकर मस्सों पर लगाने से सब तरह के मस्से नष्ट हो जाते हैं। इसमें अगर नीम का तेल या कोई भी कड़वा तेल मिलाकर मस्सों पर लगाया जाये तो और भी जल्दी आराम आता है।
2. आक के पत्ते और सहजने के पत्तों का लेप भी मस्सों के लिए बहुत रामबाण है।
3. नीम और कनेर के पत्तों का लेप मस्सों को नष्ट करता है।
4. सेहुंड(थूअर) के दूध में हल्दी का चूर्ण मिलाकर एक-एक बूँद मस्सों पर लगाने से मस्से नष्ट होते हैं

 

अगर बार बार बवासीर होती हैं और मस्से बाहर आ कर बहुत कष्ट देते हो तो ये घरेलु उपचार और मस्सो पर लगाने के लिए ये तेल घर पर बनाये बहुत ही लाभदायक हैं।

तो आइये जाने खूनी बादी बवासीर और बवासीर के मस्सो का इलाज।

दो सूखे अंजीर शाम को पानी में भिगो दे। सवेरे के भगोये दो अंजीर शाम चार-पांच बजे खाएं।

एक घंटा आगे पीछे कुछ न लें। आठ दस दिन के सेवन से बादी और खुनी हर प्रकार की बवासीर ठीक हो जाती है।

बवासीर को जड़ से दूर करने के लिए और पुन: न होने के लिए छाछ सर्वोत्तम है।

दोपहर के भोजन के बाद छाछ में डेढ़ ग्राम ( चौथाई चम्मच ) पीसी हुई अजवायन और एक ग्राम सेंधा नमक मिलाकर पीने से बवासीर में लाभ होता है और नष्ट हुए बवासीर के मस्से पुन: उत्प्न्न नही होते।

*****
बवासीर के मस्सो पर 
लगाने के लिए तेल

एरंडी के तेल को थोड़ा गर्म कर आग से नीचे उतार कर उसमे कपूर मिलाकर व घोलकर रख ले।

अगर कपूर की मात्रा 10 ग्राम हो तो अरंडी का तेल 80 ग्राम होना चाहिए। मतलब 8 गुना अगर कपूर 5 ग्राम हैं तो तेल 40 ग्राम।

पाखाना करने के बाद मस्सो को धोकर और पोछकर इस तेल को दिन में दो बार नर्मी से मस्सो पर इतना मलें की मस्सो में शोषित हो जायें।

इस तेल की नर्मी से मालिश से मस्सो की तीव्र शोथ, दर्द, जलन, सुईयां चुभने को आराम आ जाता ही और निरंतर प्रयोग से मस्सो खुश्क हो जाते है।

***
बवासीर के मस्से सूजकर संगर की भांति मोटे हो जाते है और कभी-कभी गुदा से बाहर निकल आते है।

ऐसी अवस्था में यदि उन पर इस तेल को लगाकर अंदर किया जाये तो दर्द नही होता और मस्से नरम होकर आसानी से गुदा के अंदर प्रवेश किये जा सकते है।

सहायक उपचार

1. बवासीर की उग्र अवस्था में भोजन में केवल दही और चावल, मूंग की खिचड़ी ले। देसी घी प्रयोग में लाएं। मल को सख्त और कब्ज न होने दे। अधिक तेज मिर्च-मसालेदार, उत्तेजक और गरिष्ठ पदार्थो के सेवन से बचे।

2. खुनी बवासीर में छाछ या दही के साथ कच्चा प्याज ( या पीसी हुयी प्याज की चटनी ) खाना चहिए।
3. रक्तस्रावी बवासीर में दोपहर के भोजन के एक घटे बाद आधा किलो अच्छा पपीता खाना हितकारी है।

4. बवासीर चाहे कैसी भी हो बड़ी हो अथवा खुनी, मूली भी अक्सीर है। कच्ची मूली ( पत्तो सहित ) खाना या इसके रस का पच्चीस से पचास ग्राम की मात्रा से कुछ दिन सेवन बवासीर के अतिरिक्त रक्त के दोषो को निकालकर रक्त को शुद्ध करता है।

विशेष

1. बवासीर से बचने के लिए गुदा को गर्म पानी से न धोएं। खासकर जब तेज गर्मियों के मौसम में छत की टंकियों व नलों से बहुत गर्म पानी आता है तब गुदा को उस गर्म पानी से धोने से बचना चाहिए।

2. एक बार बवासीर ठीक हो जाने के बाद बदपरहेजी ( जैसे अत्यधिक मिर्च-मसाले, गरिष्ठ और उत्तेजक पदार्थो का सेवन ) के कारण उसके दुबारा होने की संभावना रहती है। अत: बवासीर के रोगी के लिए बदपरहेजी से परम आवश्यक है।

सिद्ध आयुर्वेदिक

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              *सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण*     *यूरिक एसिड की रामबाण औषधि*

सिद्ध आयुर्वेदिक
9417862263

*सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण*
*यूरिक एसिड की रामबाण औषधि*

*समस्त शरीरिक दर्दों के लिए *
*यह दवा रामबाण है ।*
*इंग्लिश दर्द युक्त दवाईयों से मुक्ति पाएं*

★समस्त वात रोग में रामबाण★
★आस्टि़यो आर्थराईटिस जोड़ों के दर्द कारगर★

*मांसपेशी संबंधी समस्या में कारगर*

*असामान्य रूप से चलना, ढीली मांसपेशियां, मांसपेशियों में कमज़ोरी, मांसपेशी का नुकसान, या मांसपेशी का स्थायी रूप से छोटा होना*

★*सुस्ती रहती हो, थकावट और कमजोरी महसूस हो,* *नींद न आती हो ,*शरीर में भारापन और *पेट की खराबी रहती हो तो यह रामबाण होगी.*

*केसी भी सूजन यह दवा कम करेगी*

यह दवा शुगर के मरीज भी ले ।
यह योग शुगर को भी नार्मल करता है।
★सायटिका दर्द
★स्तन दर्द
★Vrushan bagअण्डकोश की थैली(अंडकोश और निचले पेट का दर्द दर्द)
★*नाक का मांस बढ़ा होने का दर्द*
★नाक जंतु (Polyps) दर्द और सूजन
◆*चेहरे की नसो मे दर्द*
◆ *Frozen shoulder_जमा हुआ( Frozen shoulder) या जकड़ा हुआ कन्धा में यह दवा रामबाणहै*
◆अफस्फीत शिराएं(Varicose veins) दर्द
◆सर्वकल दर्द
◆ पुरपडी (आंख से लेकर कान तक)दर्द
◆छाती का दर्द
◆घुटनों का दर्द,
◆जोड़ा का दर्द और सुजन,
◆कमर दर्द ,गठिया दर्द
◆समस्त शरीर का दर्द
◆युरिक एसिड दर्द
◆माइग्रेन का दर्द
◆डिस्क का दर्द
◆सिर (आधा) दर्द
◆नस ब्लॉक दर्द
★बुखार के बाद होने वाला दर्द

◆नजला के दर्द
यह दवा सभी प्रकार के दर्दो के लिए है क्योंकि यह दवा हमारे शरीर मे रोग प्रीतिरोधक जीवाणुओं को बढ़ाती है।

अगर किसी के घुटनों की ग्रीस खत्म हो चुकी हो और उनका चलना, उठना और सीढ़ी चढ़ना मुश्किल हो गया हो तो यह दवा कारगर होगी

दवा क्या है

इंद्रयाण अजवाइन 100 ग्राम
सौंठ भुनी 50 ग्राम
सोंठ, काली मिर्च और पीपर – 5-5 ग्राम।
पिपरामूल, चित्रकमूल, च्‍वय, धनिया, बेल की जड, अजवायन, सफ़ेद जीरा, काला जीरा, हल्‍दी, दारूहल्‍दी, अश्‍वगंधा, गोखुरू, खरैटी, हरड़, बहेड़ा, आंवला, शतावरी, मीठा सुरेजान, शुद्ध कुचला, बड़ी इलायची, दालचीनी, तेजपात, नागकेसर 4-4 ग्राम।
योगराज गुग्‍गल 100 को कूटने के बाद बारीक पीस लें और छान कर मिला लें।

दवा तैयार हो गई ।

सेवन विधि –
1-1 चम्मच छोटा सुबह-शाम दूध के साथ ले ।

☆☆☆
घुटनों के दर्द में दवा के साथ
यह जरूर करे

दिन 2 बार

3 लीटर पानी में 200 ग्राम नमक 200 ग्राम सरसों का तेल डालकर गरम कर लें। फिर उस पानी में कपड़ा भिगोकर लगभग 10 मिनट तक नित्य सेंकाई करें।

☆☆☆☆

परहेज -:

*घुटने दर्द में क्या खाएं क्या नहीं*

अपथ्य भोजन:- (तीन से छह महीनों तक क्या न खाएं):- केला,सब खट्टे फल व पदार्थ ( नींबू, अचार इत्यादि) सब ठंडे पदार्थ, सब सूखे मेवे खासकर काजू ,बादाम इत्यादि उड़द दाल का उपयोग न करे। जोड़ो के दर्द ठीक होने में कब्ज सबसे बड़ी समस्या है इसलिये पेट का रोज साफ होना जरूरी है।

पथ्य:- दिन में भोजन के पहले गेंहू के दाने के बराबर चुना थोड़े से देशी गुड़ व देशी गाय के घी के साथ खाएं । कम से कम 20 मिनट धूप में (कम से कम कपड़े पहन कर ) बैठे।

घुटने के दर्द में केवल ठंडी तथा वायु बनाने वाली चीजों का उपयोग वर्जित है।

फलों तथा हरी तरकारियों का सेवन अधिक करें| मट्ठा, चाट, पकौड़े, मछली, मांस, मुर्गा, अंडा, धूम्रपान आदि का सेवन बिलकुल न करें।

घुटनों को मोड़कर नहीं बैठना चाहिए|।

पेट को साफ रखें तथा कब्ज न बनने दें|।

दूध के साथ ईसबगोल की भूसी का प्रयोग करें।

शरीर को अधिक थकने वाले कार्य न करें।

प्रतिदिन सुबह-शाम टहलने के लिए अवश्य जाएं।

***

☆साथ मे यह करे ज्यादा फायदा होगा ☆

आलू, शिमला मिर्च, हरी मिर्च, लाल मिर्च, अत्‍यधिक नमक, बैगन आदि न खाये।

घुटनो की गर्म व बर्फ के पैड्स से सिकाई करे।
घुटनो के निचे तकिया रखे।

वजन कम रखे इसे बढ़ने न दे।

ज्‍यादा लम्बे समय तक खड़े न रहे।

आराम करे दर्द बढ़ाने वाली गति विधिया न करे इससे आपका दर्द और बढता जायेगा और आप इसे सहन नहीं कर पाएंगे।

सुबह खली पेट तीन से चार अखरोट खाये, विटामिन इ युक्त खाना खाये धुप सेके।

सिद्ध आयुर्वेदिक

9417862263

https://ayurvedasidh.blogspot.in/2017/12/blog-post_95.html

सिद्ध गिलोय कल्पचुर्ण-नाक की बढ़ी हड्डी के लिए

              *नाक एलर्जी (rhinitis )*
                *के निदान और दवा*

          नाक की बढ़ी हड्डी की कारगर दवा

               *सिद्ध गिलोय कल्पचुर्ण*

        *Online मंगवाए 94178 62263*

हम सबने अपने आस पास बहुत से लोगों को सुबह उठते ही लगातार 10 से 20 छीकें लगाते देखा होगा। ए छींकें नाक में होने वाली एलर्जी की वजह से होता है जिसे “एलर्जिक राइनाइटिस” कहते है। इस प्रकार नाक की एलर्जी घर एवं वातावरण की धूल के कण एवं पालतू व अन्य जानवरों की वजह से हो सकती है।

★★★

          ★एलर्जी rhinitis के लक्षण★

एलर्जी rhinitis निम्न लक्षण पैदा कर सकता है:

नाक की एलर्जी के लक्षण:

लगातार छीकें आना;

नाक से पानी जैसा तरल पदार्थ बहना;

नाक आँख व तालु में खुजली होना;

नाक या गले में खराश होना;

हल्का बुखार या सिरदर्द होना;

आँखों से आंसू निकलना होना;

नाक बंद होना।

★★

        *एलर्जी rhinitis के निदान और दवा*

               *सिद्ध गिलोय कल्पचुर्ण*

गिलोय चूर्ण।         200 ग्राम

हल्दी अम्बा           100 ग्राम
सतावर                 100 ग्राम
इन्द्रयाण अजवाइन 100 ग्राम
नीम पंचाग।            100 ग्राम
सोंठ                        50 ग्राम
आँवला चूर्ण              50 ग्राम
तुलसी पंचांग            50 ग्राम
चिरायता                  50 ग्राम

सभी चूर्ण को 100 मिलीग्राम एलोवेरा रस में 
मिलाकर सुखाये।

दूप में सुखा सकते हैं।

1 चमच्च चूर्ण को 50 मिलिग्राम एलोवेरा रस को 1 ग्लास पानी में मिलाकर सेवन करे।

इस चूर्ण को 21 दिन लगातार
दिन में 3 बार सेवन करे।

एलर्जी rhinitis में जबरदस्त फायदा होगा।

★★

           *परहेज और आहार*

लेने योग्य आहार

गर्म तरल पदार्थ
शहद
मछली
दही
गहरी हरी पत्तेदार सब्जियाँ।
अलसी के बीज

स्थानीय स्तर पर उत्पन्न, बिना छना शहद, कई लोगों द्वारा हे फीवर की औषधि माना जाता है, माना जाता है कि यह शरीर को आवश्यक परागकणों की आपूर्ति करता है।

  ◆◆◆◆
      साथ मे   *घरेलू उपाय (उपचार)*  जरूर करे

अपनी नाक को उत्तेजक पदार्थों से मुक्त रखने के लिए अपने नथुनों को सलाइन घोल से नियमित धोएँ।

हर बार धुलाई के समय हर नथुने को कम से कम 200 मिली (लगभग 3/4 कप) व्यावसायिक या घर पर निर्मित घोल से धोएँ।

अपनी नाक के म्यूकस को ढीला करने के लिए नाक से श्वास सहित भाप लें।
★★★

इनसे परहेज करें

मूंगफली, स्ट्रॉबेरी या किसी अन्य वस्तु के लिए एलर्जी से चकत्ते या सूजन उत्पन्न हो सकती है।

कुछ फल और सब्जियों से
कुछ लोगों में शराब खासकर बियर या वाइन लेने से नाक में अवरोध उत्पन्न हो जाता है।

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सिद्ध शक्तियोग कल्पचुर्ण

सिद्ध आयुर्वेदिक

             *शारीरिक हार्मोन असंतुलन*
            *की कारगर आयुर्वेदिक औषधि*

          ★ *सिद्ध शक्तियोग कल्पचुर्ण* ★
    
*40 साल के महिला और पुरूष यह जानकारी *जरूर पढ़ें आप के लिए यह जानकारी*
*महत्वपूर्ण है।*

      *सिद्ध शक्तियोग कल्पचुर्ण*

अश्वगान्ध          200 ग्राम
कौंचबीज बीज  100 ग्राम
बेल चुर्ण           100 ग्राम
आवला चुर्ण     100  ग्राम
तुलसी बीज     100  ग्राम
कीकर फली     100  ग्राम
सतावरी           100  ग्राम
सफेद मूसली    100  ग्राम
गिलोय              50 ग्राम
बड़ दूध             50 ग्राम
मुलहठी            50 ग्राम
चरायता            50 ग्राम
हल्दी                50 ग्राम
सोंठ                 50 ग्राम
काली मिर्च       50 ग्राम
लोह भस्म        50 ग्राम
सौंफ                50 ग्राम
निर्गुन्डी            25 ग्राम
त्रिवृत               25 ग्राम
पिप्पली            25 ग्राम
लवंग                25 ग्राम
वच                   25 ग्राम
कुष्ठ                  25 ग्राम

*सभी को चुर्ण बनाए और 400 ग्राम गिलोय रस में भावना दे। फिर  धूप में सुखाकर औऱ सुबह शाम दूध के साथ ले।*

यह आप खुद बना सकते हैं।

आप online भी मंगवा सकते हैं
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★★★
हार्मोन असुंतलन जानकारी

बहुत बार किशोरावस्था में हार्मोन असुंतलन हो जाते हैं।

नोजवान भी ध्यान दे।

किशोरावस्था में आने वाले बच्चे को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन सब महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक है हार्मोनल स्राव के कारण होने वाले शारीरिक परिवर्तन, जो कि एक बच्चे को यौवन में कदम रखने में मदद करते हैं। यह एक बहुत ही नाजुक अवधि होती है जहां वे वयस्क जैसा होने की आशा रखते हैं, जबकि उनका शरीर और मन अब भी पर्याप्त परिपक्व नहीं हुआ होता है। उनका व्यवहार और मूड हर मिनट बदलता रहता है और उनके व्यवहार के लिए होर्मोन्स को दोषी माना जाता है।

★★★

*क्या होता है जब हार्मोन्स( शरीरक बदलाव)* 
*असुंतलन होते हैं*

बिना कारण के मूड बदलना,लड़कियों में अनियमित पीरियड,अचानक वजन बढ़ना,लड़कों में स्तन विकास
,लगातार सिरदर्द,डिप्रेशन,जी मिचलाना,मुँहासे,साइनस समस्याएं,पीठ दर्द,आक्रामकता,शरीर पर अत्यधिक बाल उगना,

इन दोषों पर माता पिता जरूर ध्यान दे।

★★★

40 साल के ऊपर जब हार्मोन्स असुंतलन होते हैं तो ऐसे लक्षण पाए जाते हैं।

हार्मोन महिलाओं के अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब हार्मोन के स्तर में अस्थिरता होती है, तो उसका सीधा प्रभाव पड़ता है जिससे मूड बदलता है ,डिप्रेशन हो सकता है और वह आपकी यौन इच्छा, ओवुलेशन और प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित कर सकता  हैं।

कई बार शारीरिक हार्मोनल असंतुलन के कारण  कुछ हार्मोन का उत्पादन ज़्यादा या कम हो जाता है। अकसर  हम शरीर द्धारा भेजे संकेतों पर ज़्यादा ध्यान नहीं देते है और इससे स्थिति बदतर हो जाती है।

इसलिए,हार्मोन असंतुलन का संकेत देने वाले कुछ सामान्य लक्षण जानना आवश्यक है, और अगर यह लक्षण कुछ दिनों में नहीं जाते तो जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

★★

वजन बढ़ना :

पेट के निचले हिस्से में या जांघों में वजन बढ़ना यह संकेत देता है कि एड्रेनल ग्लैंड द्धारा कोर्टिसोल हार्मोन ज़्यादा स्रावित होने से इंसुलिन के स्तर (खून  से जारी होने वाला) में वृद्धि हो जाती है।  यह ब्लड शुगर के स्तर को प्रभावित करता है और दिल से संबंधित बीमारियों को जन्म दे सकता है।
★★

बालों का झड़ना :

एक दिन में 100 से 200 से ज़्यादा बाल टूटना बहुत खतरनाक है। डीहैड्रो-टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के असंतुलन से अत्यधिक बाल टूटते है।

★★

गर्भावस्था के बाद नींद में गड़बड़ी होना : 

नींद पूरी न होना एक बहुत ही आम समस्या है, लेकिन गर्भावस्था के बाद यह  महिलाओं में एक बड़ी संख्या में होती देखी जाती है । ऐसा प्रोजेस्टेरोन  ( एक हार्मोन जो आराम प्रदान करने वाले गुणों का है) में कमी होने के कारण होता है। गर्भावस्था के बाद  प्रोजेस्टेरोन में गिरावट होने से आप बेचैन महसूस कर सकती है और आपकी नींद को प्रभावित कर सकता है।

★★

योनि में सूखापन: 

रजोनिवृत्ति (मीनोपॉज) की शुरुआत के साथ, एस्ट्रोजन का स्तर कम होने के कारण योनि में सूखापन हो जाता है ।यह यौन गतिविधि को असहज या दर्दनाक कर सकता  हैं।

★★

डिप्रेशन: 

क्या आपको बिना किसी कारण  उदास लगता है और वह भी बहुत बार? यह हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है। जब थायराइड हार्मोन का स्राव बढ़ जाता है, तब यह होता है।

★★★

पसीना: 

अगर आप 40 से ऊपर हैं और बहुत पसीना आता है, तो खबरदार रहें। यह रजोनिवृत्ति (मीनोपॉज) की शुरुआत के कारण हो सकता है। एंडोक्राइन सिस्टम को प्रभावित करने वाले सेरोटोनिन हार्मोन के असंतुलन के कारण अत्यधिक पसीना आ सकता है।

★★ 

चीनी खाने की लालसा :

लगातार मीठा भोजन खाने की इच्छा होना हार्मोनल असंतुलन का संकेत है जिसके कारण थायराइड या मधुमेह हो सकता है।

★★

लगातार भूख लगना : 

अगर आपको मुख्य भोजन लेने के बाद भी भूख लगती है, तो यह हार्मोन घ्रेलिन की वजह से हो सकता है (जो हमारी भूख के लिए जिम्मेदार है)।

ओक्सिनटोमोडयूलिन  और लेप्टिन जैसे  हार्मोन भूख को कम करते हैं । इन हार्मोन के असंतुलन से आपको हर समय भूख महसूस होती है।

★★

लगातार थकान होना :

क्या आप सुस्त  या हर समय नींद आना महसूस करते हैं? थकान कभी न जाने वाली लगती है ? थायराइड हार्मोन के कारण हाइपोथायरायडिज्म भी इसके पीछे कारण हो सकता है।

★★

गैस और सूजन: 

ज़्यादातर हल्की गैस और सूजन जीवन शैली कारकों की वजह से होता हैं लेकिन अगर यह स्थिर है तो यह एक अंतर्निहित हार्मोनल स्थिति हो सकती है। जब एस्ट्रोजन का स्तर अनियमित होता हैं, तो शरीर अधिक तरल पदार्थ बनाए रखने के कारण फूला हुआ महसूस होता है।

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सिद्ध धातू पुष्टि कल्पचुर्ण

सिद्घ आयुर्वेदिक


             धातु रोग औऱ शीघ्रपतन

                 अयूर्वादिक  दवा


            *धातु पुष्टि कल्पचुर्ण चुर्ण*


      मसाने की गर्मी, पेट की गर्मी लाभदायक

     पुराने से पुराने धातु के रोग सपनदोष के लिए

                     कारगर नुस्खा


जाने :

            *धत रोग के लक्षण, उपाय,

             और अयूर्वादिक दवा*


★★


*आज के युग में अनैतिक सोच और अश्लीलता के बढ़ने के कारण आजकल युवक और युवती अक्सर अश्लील फिल्मे देखते और पढते है तथा गलत तरीके से अपने वीर्य और रज को बर्बाद करते है! अधिकतर लड़के-लड़कीयां अपने ख्यालों में ही शारीरिक संबंध बनाना भी शुरू कर देते है!*


जिसके कारण उनका लिंग अधिक देर तक उत्तेजना की अवस्था में बना रहता है, और लेस ज्यादा मात्रा में बहनी शुरू हो जाती है! और ऐसा अधिकतर होते रहने पर एक वक़्त ऐसा भी आता है! जब स्थिति अधिक खराब हो जाती है और किसी लड़की का ख्याल मन में आते ही उनका लेस (वीर्य) बाहर निकल जाता है, और उनकी उत्तेजना शांत हो जाती है! ये एक प्रकार का रोग है जिसे शुक्रमेह कहते है!


वैसे इस लेस में वीर्य का कोई भी अंश देखने को नहीं मिलता है! लेकिन इसका काम पुरुष यौन-अंग की नाली को चिकना और गीला करने का होता है जो सम्बन्ध बनाते वक़्त वीर्य की गति से होने वाले नुकसान से लिंग को बचाता है!


■■■


धात रोग का प्रमुख कारण क्या है? 


अधिक कामुक और अश्लील विचार रखना!

मन का अशांत रहना!


अक्सर किसी बात या किसी तरह का दुःख मन में होना!


दिमागी कमजोरी होना!


व्यक्ति के शरीर में पौषक पदार्थो और तत्वों व विटामिन्स की कमी हो जाने पर!


किसी बीमारी के चलते अधिक दवाई लेने पर 

व्यक्ति का शरीर कमजोर होना और उसकी प्रतिरोधक श्रमता की कमी होना!


अक्सर किसी बात का चिंता करना


पौरुष द्रव का पतला होना


यौन अंगो के नसों में कमजोरी आना


अपने पौरुष पदार्थ को व्यर्थ में निकालना व नष्ट करना (हस्तमैथुन अधिक करना)


            ★धात रोग के लक्षण क्या है?★


मल मूत्र त्याग में दबाव की इच्छा महसूस होना! 

धात रोग का इशारा करती है! 


लिंग के मुख से लार का टपकना!


पौरुष वीर्य का पानी जैसा पतला होना!


शरीर में कमजोरी आना!


छोटी सी बात पर तनाव में आ जाना!


हाथ पैर या शरीर के अन्य हिस्सों में कंपन या कपकपी होना!


पेट रोग से परेशान रहना या साफ़ न होना, कब्ज होना!

सांस से सम्बंधित परेशानी, श्वास रोग या खांसी होना!


शरीर की पिंडलियों में दर्द होना!


कम या अधिक चक्कर आना!


शरीर में हर समय थकान महसूस करना!


चुस्ती फुर्ती का खत्म होना!


मन का अप्रसन्न रहना और किसी भी काम में मन ना लगना इसके लक्षणों को दर्शाता है!

★★★


शतावरी मुलहठी ( Asparagus Liquorices ) : 


 50 ग्राम शतावरी, 50 ग्राम मुलहठी, 25 ग्राम छोटी इलायची के बीज, 25 ग्राम बंशलोचन, 25 ग्राम शीतलचीनी और 4 ग्राम बंगभस्म, 50 ग्राम सालब मिसरी लेकर इन सभी सामग्रियो को सुखाकर बारीक पिस लें!


 पीसने के बाद इसमे 60 ग्राम चाँदी का वर्क मिलाएं और प्राप्त चूर्ण को (60 ग्राम ) सुबह-शाम गाय के दूध के साथ लें! 


                       ■धातु दवा■


कौंचबीज बीज 100 ग्राम

शीतल चीनी     100 ग्राम

आवला चुर्ण     100  ग्राम

तुलसी बीज     100  ग्राम

कीकर फली     100  ग्राम

सतावरी           100  ग्राम

बड़ दूध            100 ग्राम

सालम पंजा       100 ग्राम

सफेद मूसली    100  ग्राम

मिश्री              100  ग्राम

50 ग्राम मुलहठी, 25 ग्राम छोटी इलायची के बीज,


सभी लो मिलाकर चुर्ण बनाए।


कैसे सेवन करे।

दिन में 3 बार 1-1चमच्च पानी से ले।

*कम से कम 21 दिन कोर्स करे।*

*सपनदोष नही होगा*

*धातु रोग जड़ से खत्म होगा*

परहेज :

 गर्म मिर्च मसालेदार पदार्थ और मांस, अण्डे आदि, हस्तमैथुन करना, अश्लील पुस्तकों और चलचित्रों को देखना, बीड़ी-सिगरेट, चरस, अफीम, चाय, शराब, ज्यादा सोना आदि बन्द करें।

ये उपाय पुराने से भी पुराने धात रोग को ठीक कर देता है!।

वीर्य गाड़ा हो sex timing 20 मिनट होगी।

धातु दवा online भी मंगवा सकते है।।
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सिद्ध शुगर कामकल्प चुर्ण

सिद्ध अयूर्वादिक

       *शुगर रोगी के लिए कामक्ल्प चुर्ण*

      महिलाओं और मर्दो के लिए कारगर है ।
                 *सिद्ध शुगर नाशक कामकल्प*
        ★शरीर मे दर्दों में से होगी मुक्ति★
*शुगर से आई कमजोरी को जड़ करेगा पूरा*

*अगर शुगर नॉर्मल करनी है तो हमेशा आटा भून कर रोटी बना कर खाए।*

‌*शुगर 2 दिन में नार्मल होने लगेगी*।

जब किसी व्यक्ति को मधुमेह की बीमारी होती है। इसका मतलब है वह व्यक्ति दिन भर में जितनी भी मीठी चीजें खाता है (चीनी, मिठाई, शक्कर, गुड़ आदि) वह ठीक प्रकार से नहीं पचती अर्थात उस व्यक्ति का अग्नाशय उचित मात्रा में उन चीजों से इन्सुलिन नहीं बना पाता इसलिये वह चीनी तत्व मूत्र के साथ सीधा निकलता है।

इसे पेशाब में शुगर आना भी कहते हैं। जिन लोगों को अधिक चिंता, मोह, लालच, तनाव रहते हैं, उन लोगों को मधुमेह की बीमारी अधिक होती है।

मधुमेह रोग में शुरू में तो भूख बहुत लगती है। लेकिन धीरे-धीरे भूख कम हो जाती है। शरीर सुखने लगता है, कब्ज की शिकायत रहने लगती है।

अधिक पेशाब आना और पेशाब में चीनी आना शुरू हो जाती है और रेागी का वजन कम होता जाता है। शरीर में कहीं भी जख्म/घाव होने पर वह जल्दी नहीं भरता।

*सबसे बड़ी बात सेक्स कमजोरी हो जाती हैं*
पर आधुनिक विशेषग्य इसपे खुलकर बात नही करते।

मधुमेह या डायबिटीज का एक प्रभाव ऐसा भी है जिस पर अमूमन खुलकर चर्चा कम ही होती है।

सच यह है कि असुविधाजनक चर्चा मानकर छोड़ दिए जाने से इस गंभीर नुक्सान के प्रति जागरूकता लाने का एक महत्वपूर्ण पहलू छूट जाता है।

* आधुनिक विशेषग्यों का मानना है कि मधुमेहग्रस्त स्त्रियों और पुरुषों में सेक्स संबंधी ऐसी शिथिलता आ जाती है जिसके कारण इच्छा होते हुए भी ऐसे मरीज सेक्स के प्रति अक्षम हो जाते हैं।*

*पर आयुर्वेद ऐसा नही मानता ,आयुर्वेद अनुसार हर रोग का इलाज है। बस गहरे ध्यान से इलाज की जरूरत होती है।*

*आयुर्वेद सदियो से शुगर से आई कमजोरी को ठीक करता आया है।*

*हम बता रहे वो* कामकल्प चुर्ण* जो शुगर के मरीज के लिए रामबाण है।*
*यह दवा महिलाओं और मर्द दोनों के लिए कारगर है
आप खुद तैयार कर सकते है*
इन्द्रजो तल्ख़       250 ग्राम
करेला चुर्ण          200 ग्राम
गिलोय                100 ग्राम
चरायता              100 ग्राम
छोटी हरड़          100 ग्राम
सर्पगन्धा             100 ग्राम
मिचका बीज चुर्ण 100 ग्राम
अश्वगान्ध            100 ग्राम
सतावर               100 ग्राम
आँवला चुर्ण        100 ग्राम
बरगद फल         100 ग्राम (चुर्ण)
तुलसीबीज         100 ग्राम
बाबुल फली       100 ग्राम (बीज रहित)
कौंचबीज काला  100 ग्राम
कंदबीज             100ग्राम
बरगद दूध(सुखा) 100 ग्राम
सालम मिश्री        125 ग्राम
सालम पंजा।       125 ग्राम
जायफल              50 ग्राम
*जावित्री।             50ग्राम
*चार गोंद।            50 ग्राम
*छोटी इलायची      20 ग्राम
*कालीमिर्च।           50

सभी चूर्ण को मिलाकर 500 ग्राम गिलोय रस में भावना दे।
सेवन विधि – सुबह -शाम  3 से 5  ग्राम दूध (बिना मीठा) से लेते रहे

फायदे

★*शुगर कट्रोल में रहेगी*
★*शुगर के कारण आई शरीरक कमजोरी दूर  हो        जाएगी*
★*शुगर कारण सेक्स कमजोरी दूर होगी।*

***
खानपान में करें परहेज

-अधिक चावल खानें से बचें। चीनी, आलू का सेवन कम करें। मीठे फलों से दूर रहें। मिठाई से बचें।

गुड़, आम, इमली की खटाई, आलू, अरबी, बैंगन, शक्कर, सैक्रिन, सभी मीठे फ़ल, गाजर, कद्दू (पेठा), गेहूं, चावल, तले हुए भोजन, उड़द, मसूर दाल, मांस- मछली, अण्डा-मुर्गा, सभी मादक द्र्व्य, चाय, काफ़ी, तेज मिर्च,अश्लिल-उत्तेजक साहित्य, टीवी, फ़िल्में देखना,अधिक रात्रि तक जागना,औरत प्र्संग आदि से मधुमेही को अवश्य बचना चाहिए । अन्यथा लाभ नहीं होगा।
-***

मधुमेह केरोगी इसका करें सेवन

जौ का आटा 6 किलो में चने का बेसन 2 किलो मिला कर इसकी रोटी खायें ।
***

पत्तागोभी,पालक,मेथी और मेथी दाने का साग, करेला,तुरई (तोरी),गिलकी, घीया (लोकी),टिंडा, परवल,कन्दूरी, बथुआ, चौलाई, मुंग, अरहर,चने की दाल, भुने हुए चने,चने के बेसन से छाछ में बनाई हुई कढी,जीरा प्याज तथा लहसुन से छौंकी हुई, अकेली छाछ,पका हुआ पीला नींबू,नींबू का अचार थोडी मात्रा में, फ़ीका दूध, घी,थोडा मक्खन,जामुन फ़ल,कैथ[कबीट]के गुद्दे की चटनी खा सकते हैं। पथ्य के बिना औषधि सेवन बेकार है। लाभ का कोई चांस नहीं है।

-जौ और गेहूं की रोटी खाएं। मूंग, मसूर और चने की दाल का सेवन करें। करेला, बबूल के फल खाएं।

सिद्ध आयुर्वेदिक
किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।
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अफस्फीत शिराएं(Varicose veins) -सिद्ध वातदर्द कल्पचुर्ण

सिद्ध आयुर्वेदिक

          
           अफस्फीत शिराएं(Varicose veins)

              की आयुर्वेदिक दवा और जानकारी

                    *दवा online मंगवाए*

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                             *दवा क्या है*

               *दवा का नाम है वातदर्द कल्पचुर्ण*


इंद्रयाण अजवाइन 100 ग्राम ,सौंठ भुनी 50 ग्राम ,सोंठ, काली मिर्च और पीपर – 5-5 ग्राम।


पिपरामूल, चित्रकमूल, च्‍वय, धनिया, बेल की जड,

अजवायन, सफ़ेद जीरा, काला जीरा, हल्‍दी, दारूहल्‍दी, अश्‍वगंधा, गोखुरू, खरैटी, हरड़, बहेड़ा, आंवला,शतावरी, मीठा सुरेजान, शुद्ध कुचला, बड़ी इलायची, दालचीनी, तेजपात, नागकेसर 4-4 ग्राम।


योगराज गुग्‍गल 100 को कूटने के बाद बारीक पीस लें और छान कर मिला लें।


दवा तैयार हो गई ।


सेवन विधि –

बड़े लोग-1-1 चम्मच छोटा सुबह-शाम दूध के साथ ले ।

बचों को आधी खुराक दे।


इसका 90 दिन का कोर्स पहली अवस्था मे होता है।

मरीज बिल्कुल ठीक हो जाता है।


अगर रोग 3 से 10 साल पुराना है तो 1 से 3 साल कोर्स चल सकता है।


       *इस दवा कोई साइड इफेक्ट्स नही है।*


              *यह दवा गर्मी नही करती*


                          *परहेज*


 खाद्य पदार्थों की हिदायत ( Food Instructions ) :


 इस तरह के रोग से ग्रस्त रोगी को पिने में नारियल का पानी, खीरे का पानी, गाजर का रस, पालक का रस, पत्तागोभी, आदि का इस्तेमाल करना चाहियें, साथ ही साथ उपवास भी रखें।


आपके लिए हरी सब्जियों का सूप भी बहुत फायदेमंद होता है. इन सब चीजों के सेवन के साथ रोगी को उपवास रखना चाहिये।


इन सब के बाद कुछ दिनों तक रोगी व्यक्ति को फल, सलाद, अंकुरित दालों को ही अपने आहार और खाद्य पदार्थों में शामिल करें।


विटामिन E तथा विटामिन C को पूरी करने वाली चीजें रोगी व्यक्ति को ज्यादा मात्रा में देनी चाहिये।


 रोगी को तला भुना खाने से और ज्यादा नमक मिर्च खाने से कुछ दिनों के लिए परहेज करना चाहिये.


                        ★★★★


                   *जानकारी*


          जब यह रोग किसी व्यक्ति को हो जाता है तो उसके शरीर की शिराएं (नसें) फैलकर लंबी और मोटी हो जाती हैं। 


यह शिराएं (नसें) शरीर की किसी भाग की हो सकती हैं जैसे- मलाशय शिराएं, वृषण शिराएं तथा ग्रासनली शिराएं। 


लेकिन यह रोग अधिकतर पैरों को प्रभावित करता है जिसके कारण पैरों की शिराएं लंबी तथा मोटी हो जाती हैं।


 इस रोग का शिकार अधिकतर महिलाएं होती हैं और इस रोग में रोगी का दाहिना पैर, बाएं पैर की अपेक्षा अधिक प्रभावित होता है।


वेरिकोस वेन्स रोग का लक्षण :-


          इस रोग के हो जाने पर रोगी व्यक्ति के पैरों में दर्द के साथ थकान तथा भारीपन महसूस होने लगता है। रोगी के टखने में सूजन हो जाती है। 


रात के समय में रोगी के पैरों में ऐंठन होने लगती है। इस रोग से पीड़ित रोगी की त्वचा का रंग बदलने लगता है। इस रोग के कारण स्टैटिस डर्मेटाइटिस तथा शरीर के नीचे के अंगों में सेल्युलाइटिस रोग हो जाता है।


          *वेरिकोस वेन्स रोग होने का कारण*


ये शिराएं वह रक्त वाहिकाएं होती हैं जो रक्त (खून) को हृदय में वापस लाती हैं। इन शिराओं में वॉल्व लगे होते हैं, जिनसे रक्त का एक ही दिशा में संचारण होता है।


 जब ये शिराऐं फैल जाती हैं तो इसके वॉल्व अपना कार्य करना बंद कर देते हैं, जिसके कारण रक्त (खून) उपास्थि शिराओं में जमा होकर, टांग के ऊतकों के बीच में जमने लगता है, जिसके कारण उस भाग पर सूजन हो जाती है और आगे चलकर त्वचा के रंग में परिवर्तन होने लगता है।


 जिसके कारण रोगी व्यक्ति के शरीर में क्षय, एक्जिमा, खून की कमी आदि लक्षण दिखाई पड़ने लगते हैं।

वेरिकोस वेन्स रोग उन व्यक्तियों को हो जाता है जो अधिक देर तक खड़े होकर या बैठकर काम करते हैं।


वेरिकोस वेन्स रोग उन व्यक्तियों को भी हो जाता है जो अधिक वजन उठाने का कार्य करते हैं तथा अधिक वजन वाले व्यक्तियों और महिलाओं को भी वेरिकोस वेन्स रोग हो जाता है।


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ड़ेंगू नाशक दवा फ्री

सिद्ध आयुर्वेदिक


              *share जरूर करें*

    

                *Free ड़ेंगू दवा*

 *1 ही खुराक करेगी 5000  cell निर्मित*

    *आप का मरीज सीरियल्स है तो चिंता न करे*

      *12 घंटे में ही मरीज  मे होगा ठीक*


        *ड़ेंगू की दवा और गिलोय* *

     *सहित काढ़ा free दिया जाता है।*

     *काढ़े के बर्तन साथ लेकर आए*


*ड़ेंगू की free दवा के लिए संपर्क करे।*


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सिद्ध कफ़ नाशक कल्पचुर्ण

सिद्ध अयूर्वादिक

               *जिदी कफ़ की दवा*


               *सिद्ध कफ़ कल्पचुर्ण*
     *विश्वास का नाम है सिद्ध आयुर्वेदिक*
*क्योंकि सिद्ध आयुर्वेदिक का हर नुस्खा दमदार है*

        *टॉसिल रोग में रामबाण*
     *◆साइनस में रामबाण है कफ़ चुर्ण◆*
*फेफड़ों की इन्फ़ेक्सन में 100℅ असरदार हैं*
जिदी इंफेक्शन में 3 महीने का कोर्स करें।

*■ गले की सूजन और खराश के उत्तम है सिद्ध कफ़ कल्पचुर्ण■*

            ★जिदी कफ़ को कहे अलविदा★
                           ★★★
             3 ही खुराक छींकना, गला खराब होना, गले मे रेसा आना, रेसा कारण सांस का बंद होना,
               नाक जाम होना, खाँसना बंद
                            ★★★
     ★ कफ़ के कारण सिर दर्द रहता है तो यह ले★
   ★पूरे परिवार के लिए सदा यह चूर्ण अपने घर रखे★
            ◆साइनस में रामबाण है कफ़ चुर्ण◆
★ शरीर मे कही भी रेशा हो यह चुर्ण रामबाण है★

        ■ खुद बनाए या online मंगवाए ■

                ★सिद्ध कफ चुर्ण★

★हींग              100 ग्राम (हींग भून लें)
★इंद्रयाण
  (अजवाइन)     100 ग्राम
★गिलोय चूर्ण    50 ग्राम
★आंवला चूर्ण।  50 ग्राम
★छोटी हरड़      50 ग्राम
★तुलसी पाचांग-50 ग्राम 
★मलॅठी-            50 ग्राम
★चरायता चूर्ण    50 ग्राम
★अजमायण-      50 ग्राम
★काला नमक      50 ग्राम( नमक को भून लें)
★सौंठ-                20 ग्राम
★काली मिर्च –      10 ग्राम
400 ग्राम गिलोय रस में भावना दे।
साया में सुखाए।

सभी को चुर्ण बना कर 1-1 चमच्च दिन में 3 बार गर्म पानी से लेते रहे।


●●
बच्चों को आधा चमच्च दे।
3 दिन पूर्ण आराम करें।
जिदी कफ़ में 21 से 90 दिन तक सेवन करे।

      ●इन रोग में जबरदस्त फायदा करेगी●

★गले की खराश ,ले में खराश खिचखिच रहना
★सर्दी जुकाम
★वायरल बुखार
★लगातार नाक बहना
★छाती (सीने) और गले में इंफेसन
★सांस लेने में तकलीफ होना,
★जिदी कफ़ रेसा का बने रहना

के लिए यह दवा रामबाण है।
■■■
बलगम जमने के कारण

ज्यादा धूम्रपान करना
वायरल इन्फेक्शन होना
साइनस का रोग
सर्दी जुखाम और फ्लू
■■■
छाती में कफ के लक्षण

सांस लेने और खाँसने पर घरघराहट की आवाज आना
गले में खराश रहना
बलगम वाली खांसी होना
सीने में जकड़न और दर्द महसूस होना
लगातार छीकें आना और सांस लेने में तकलीफ होना
■■■
कफ को दूर करने के आसान उपाय

पानी ज्यादा पिए, शरीर से बलगम बाहर निकालने के लिए दिन भर में हर घंटे पानी पिए।

सीने, गले और नाक से बलगम तोड़ने के लिए भाप ले। ये बलगम खत्म करने का तरीका काफी आसान और फायदेमंद है।

Gale mein balgam ka ilaj, एक गिलास गरम पानी में 1 चम्मच नमक मिला कर इससे गरारे करे। दिन में 2 से 3 बार ये उपाय करने पर नाक और गले में जमा बलगम बाहर निकलने लगती है।

बलगम बनने से रोकने के लिए डेयरी प्रोडक्टस का सेवन ना करे जैसे की चीज़, दूध, दही और आइसक्रीम। इसके इलावा ज्यादा तला हुआ खाना भी ना खाएं।

धूम्रपान ना करे, धुँआ शरीर में balgham को बढ़ाता है और शरीर का जल्दी ठीक होने की क्षमता को कम करता है।

मसालेदार खाना नाक की बलगम तोड़ता है और इसे आसानी से बहने देता है।

                  ■हम आप की सेवा में है■
         ◆ किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए◆ 
          ●निशुल्क सिद्घ अयूर्वादिक सलाह ले●
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Pcod की समस्या में-सिद्ध कायाकल्प चुर्ण

सिद्ध आयुर्वेदिक


               *Pcod की समस्या में*


       *महलाओं के लिए रामबाण ओषधि*


              *सिद्ध कायाकल्प चुर्ण*

                  Online मंगवाए


                  कायाकल्प चुर्ण

         एलोवेरा और गिलोय रस युक्त


*कायाकल्प चुर्ण आयुर्वेद की एक पुरानी तकनीक है जिसका प्रयोग दक्षिण भारत के संतो द्वारा जीवन में शक्तियों को बढ़ाने के लिए किया जाता था।*

           *कायाकल्प चुर्ण की सामग्री*


*गिलोय चूर्ण-100 ग्राम

*बेल चुर्ण    200 ग्राम

*अर्जुन छाल चूर्ण -100 ग्राम

* ब्रह्मा बूटी चूर्ण- 100 ग्राम

*शंखपुष्पी चूर्ण-100 ग्राम

*कलौंजी -100 ग्राम

*नसांदर -100 ग्राम

*आंवला चूर्ण 100 ग्राम 

*छोटी हरड़ 100 ग्राम 

*तुलसी पाचांग-100 ग्राम  

*चरायता चूर्ण 50 ग्राम 

*अजमायण-50 ग्राम 

*अपामर्ग -50 ग्राम

* जटामांसी -50 ग्राम

* सत्यनाशी -50 ग्राम

* काला नमक -50 ग्राम

*सेंधानमक -50 ग्राम

*मलॅठी-20 ग्राम 

*सौंठ-20 ग्राम 

*काली मिर्च -10 ग्राम


*ऐलोवैरा रस -500 ग्राम 

सभी चूर्ण को 1 किलोग्राम एलोवेरा रस और 400 ग्राम गिलोय रस में मिलाकर 

सांय मे सुखाय ।


जब सुख जाए तब आप का काया कल्प 

चूर्ण बनकर तैयार हो गया है ।


सेवन विधि – 3 बार दूध से 2 ग्राम (एक चम्मच)

उपयोग करे।

 

         *45 से 90 दिन उपयोग करे*

        *21 दिन में आप अच्छे होने लगेंगे।*

                         ★★★ 


*पॉलीसिस्टिक ओवेरियन        सिंड्रोम की जानकारी*


इस रोग से ग्रस्त महिलयों की ओवारीस में बहुत सारी सिस्ट्स (cysts) अर्थात की झिल्लियाँ पाई जाती हैं।


ये झिल्लियाँ अगर बढ़ कर तैयार अंडकोषों के ऊपर भी बन जाएँ तो इससे मासिक स्राव में रुकावट और बांझपन की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।


माना जाता है की जो स्त्रीयाँ बहुत अधिक तनावग्रस्त होती हैं या फिर जो रात्रि में ठीक से सो नही पाती है।


उनमें इंसुलिन हॉर्मोन के असंतुलन के साथ-साथ यह बीमारी होने की संभावना भी अधिक होती है.।


 पॉलीसिस्टिक ओवेरियन        सिंड्रोम के कुछ लक्षण


समय पर मासिक धर्म का न आना, बालों का झड़ना और मुँह, कमर, पेट, हाथ, व पैरों पर अधिक बालों का उगना ,चेहरे पर मुहांसों का होना, भावनात्मक उथल-पुथलवज़न का बढ़ना, अनुर्वरता


           कुछ ज़रूरी सुझाव 


दिन में 5-6 बार मौसमी ताज़ा फलों ख़ास तौर पर जिनसे शरीर में मीठा अधिक ना बढ़े (चकोतरा, टमाटर, आड़ू, सेब) का सेवन करें.


★यदि आपका मॅन अप्रसन्न रहता है तो ध्यान प्राणायाम और रुचिकार कार्य करने प्रारंभ करें।

 अवसाद के रहते यह बीमारी ठीक नही हो पाती।


★देसी गाय के दूध से बने घृत का सेवन करना आवश्यक है।


★घृत कुमारी को सब्जियों में मिलाकर (गोभी, प्याज़) और इसका जूस दिन में एक बार अवश्य लें।


★अधिक चीनी युक्त भोजन और मिठाइयों का सेवन न करें।


★साथ ही तले हुए, मैदा युक्त पदार्थों का सेवन भी अहितकर सिद्ध होगा।


         * सिद्ध कायाकल्प चुर्ण*

            *ऑनलाइन मंगवाए*

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https://ayurvedasidh.blogspot.com/2018/10/pcod.html

सिद्ध हिर्दय कल्पचुर्ण

सिद्ध अयूर्वादिक

      ★ह्रदय रोग और बढ़े कालेस्ट्राल की दवा★


                  *सिद्ध ह्रदय कल्पचुर्ण*
             *बढ़े ह्रदय की रामबाण दवा*
★यह दवा अधरंग के दौरे को भी ठीक करती है★
      ★पोटेशियम की कमी को दूर करता है★
        ★ह्रदय का वाल बंद हो यह दवा करे★
          ★ खराटे की समस्या ठीक होगी★
          *Bp हाई रहता है तो ठीक होगा*
      दिल में तेज दर्द होने पर बेचैनी हो जाती है। हृदय में दर्द अचानक उठता हैं और बाएं कंधे तथा बाएं हाथ तक फैल जाता है। सांस फूलना, घबराहट बढ़ जाना, ठंडा पसीना आना तथा बेहोश हो जाना, जी मिचलाना, हाथ-पैर ठंडे पड़ना तथा नब्ज कमजोर मालूम पड़ना इस रोग के अन्य लक्षण हो तो यह दवा रामबाण है।
★★★

जिन को हदय का अटैक हुआ है उन को दवा कारगर है।
जिस रोगी के दिल का आकार बढ़ा हो और सांस लेने में मुश्किल हो वो यह दवा बनाए ओर सेवन करे।
★★
यह दवा आप खुद बना सकते है।
★★
यह सभी समान पन्सारी से आसानी से मिल जाता हैं।
नही तो online मंगवा सकते हैं।

ह्रदय रोग और बढ़े कालेस्ट्राल की
          अयूर्वादिक दवा

अर्जन छाल चुर्ण 200 ग्राम
गिलोय 100 ग्राम
बेल चुर्ण 100 ग्राम
त्रिफला 100 ग्राम
अश्वगंधा50 ग्राम
तुसली बीज 50 ग्राम
पुनर्नवा 50 ग्राम
राई 50 ग्राम
अकरकरा 50 ग्राम
मुलेठी 50 ग्राम
कुटकी 50 ग्राम
इन्द्रयाण अजवायन 50 ग्राम
बरगद का दूध 50 ग्राम
जावित्री 20 ग्राम
दालचीनी 20 ग्राम
पीपला मूल 20 ग्राम
छोटी इलायची 20 ग्राम
:हींग10 ग्राम
बच10 ग्राम
सोंठ10ग्राम
जीरा10ग्राम
कूट10ग्राम
जवाखार10 ग्राम

सभी को कूट छानकर चुर्ण बनाए।
औऱ 200 ग्राम गिलोय रस औऱ 500 ग्राम एलोवेरा रस में भावना दे 
सायं में सुखा कर सेवन करे।
सेवन विधि
यह 90 दिन का कोर्स होगा।
2 ग्राम (1 चमच्च)  ताजे पानी से ले।
सेवन विधि
यह 90 दिन का कोर्स होगा।
2 ग्राम (1 चमच्च)  ताजे पानी से ले।
Whats 94178 62263
Call 89680 42263
दिन में 3 बार 21 दिन ले।

★21 दिन के बाद अगले 90 दिन सुबह शाम ले।
दिन 2 बार दवा ले।
★★★
भोजन और परहेज:

★अत्यधिक गर्म एवं ठंडे दोनों खाद्य-पदार्थों से बचें।
अधिक परिश्रम, सहवास, घी, मलाई, मक्खन आदि हानिकारक है।
★तम्बाकू, जर्दा, चाय, कॉफी, शराब एवं अन्य नशीली चीजें तथा मांस-मछली, गर्म मसाला आदि का सेवन करना मना है।
★हृदय-रोग में शीर्षासन कभी न करें।

★ रोगी को हाइड्रोजनकृत चर्बी जैसे- घी, मक्खन, वनस्पति, नारियल का तेज, नकली मक्खन या ताड़ का तेल आदि का उपयोग भोजन में नहीं करना चाहिए।
इन तेलों की जगह रोगी को सोयाबीन तेल, सूर्यमुखी तेल या कुसुम कराड़ी तेल का उपयोग करना चाहिए। पापकार्न, मजोला या सफोला तेल का भी उपयोग भोजन बनाने में कर सकते हैं।
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क्रीम, पनीर या दूध से बने दही या अन्य मिठाईयां जो गाढ़े दूध से बनी हो जैसे- गुलाब जामुन, मावा, चाकलेट तथा रसगुल्ले आदि चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
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यह करते रहे

रोजाना ध्यान में घंटा भर बैठना, प्राणायाम, आसन, व्यायाम, हर रोज आधा घंटा घूमने जाना और चर्बी बढऩे से रोकने के लिए सात्विक या शाकाहारी भोजन अत्यंत लाभकारी है। दूसरे शब्दों में कहें तो एक स्वस्थ आहार, धूम्रपान छोडऩे, एक स्वस्थ वजन बनाए रखने और तनाव से खुद को बचाए रखना भी काफी अहम है।

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