बसंत ऋतु के रोग और इलाज

          *बसंत ऋतु में आयुर्वेदिक दवाएं*

                *और खान-पान*

बसंत ऋतु में कफ़ रोग, लीवर रोग , ह्र्दय रोग और खून अशुद्धि जैसे रोग उतपन्न होते हैं।

इसे कच्ची मौसम के रोग भी बोला जाता है।

सिद्ध आयुर्वेदिक औषधियों इस मौसम के हिसाब से निर्मत की जाती है।

।।वसंत ऋतु इस्तेमाल करने योग्य सिद्ध चुर्ण।।

1.सिद्ध कफ़ नाशक कल्पचुर्ण

2.सिद्ध लिवर कल्पचुर्ण

3.सिद्ध ह्रदय कल्पचुर्ण

4.सिद्ध खून शुद्धि कल्पचुर्ण

लिंकः देख सकते टच करे

Sidhayurvedic.com

हिन्‍दू कैलेंडर के हिसाब से15 मार्च से 15 मई का वक्‍त वसंत ऋतु का होता है। 

वसंत ऋतु का शरीर  पर क्‍या असर पड़ता है?

 यह वक्‍त गर्मी और सर्दी के बीच का होता है इसलिए ठंड और गर्मी दोनों का इफेक्‍ट होता है। दिन में गर्मी और रात को ठंडक होती है।

इस मौसम में कफ दोष बॉडी पर और हावी होने लगता है।

वजह ये है कि इससे पहले वाले मौसम यानी शिशिर ऋतु में बॉडी में जमा कफ अब गर्मी होने पर पिघल जाता है।

इससे खासतौर पर पचाने की ताकत पर असर पड़ता है। साफ तौर पर कहें तो खाने को पचाने वाली आग जिसे जठराग्‍नि कहते हैं, कमजोर पड़ जाती है।

एक तो वैसे ही इस मौसम में कफ का असर ज्‍यादा होता है उसमें अगर आपने कफ बढ़ाने वाली चीजें थोड़ी बहुत भी खा लीं तो समझें टांसिल्‍स, खांसी, गले में खराश, जुकाम, सर्दी और कफ व बुखार का हमला हो सकता है।

            ।।बसंत ऋतु में खान -पान।।

   वसंत ऋतु में कफ की समस्या अधिक रहती है। अतः इस मौसम में जौ, चना, ज्वार, गेहूं, चावल, मूंग, अरहर, मसूर की दाल, बैंगन, मूली, बथुआ, परवल, करेला, तोरई, अदरक, सब्जियां, केला खीरा, संतरा, शहतूत, हींग, मेथी, जीरा, हल्दी, आंवला आदि कफनाशक पदार्थों का सेवन करें|

   इसके अलावा मूंग बनाकर खाना भी उत्तम है।

◆◆

                   बसंत ऋतु में 

                ।। घरेलू नुस्खे।।

  नागरमोथा अथवा सोंठ डालकर उबाला हुआ पानी पीने से कफ का नाश होता है।

मन प्रसन्न रखें एवं जो हृदय के लिए हितकारी हों ऐसे आसव अरिष्ट जैसे कि मध्वारिष्ट, द्राक्षारिष्ट, गन्ने का रस, सिरका आदि पीना लाभदायक है। 

●◆◆

          ।।सिद्ध हिर्दय कल्पचुर्ण ।।

आप अगर बसंत ऋतु में इस्तेमाल करते हैं तो आप को कभी हार्ट अटैक नही होगा *

सिद्ध ह्रदय कल्पचुर्ण की पूरी जानकारी के लिए link देखे:- 

https://wp.me/paDg1r-J

●●

   इस ऋतु में कड़वे नीम में नई कोंपलें फूटती हैं। नीम की 15-20 कोंपलें, 2-3 काली मिर्च के साथ चबा-चबाकर खानी चाहिए।

15-20 दिन यह प्रयोग करने से वर्ष भर चर्म रोग, रक्त विकार और ज्वर आदि रोगों से रक्षा करने की प्रतिरोधक शक्ति पैदा होती है एवं आरोग्यता की रक्षा होती है। 

इसके अलावा कड़वे नीम के फूलों का रस 7 से 15 दिन तक पीने से त्वचा के रोग एवं मलेरिया जैसे ज्वर से भी बचाव होता है।

●●

          ।।सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण।।

*बसंत ऋतु में इस्तेमाल करे खून शुद्वि कल्पचुर्ण*

सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण आप बसंत ऋतु में अगर इस्तेमाल करते हैं तो खून सबंधी जितने भी रोग होते हैं सभी साल भर के लिए आप ठीक हो जाएंगे।

सिद्ध खून शुद्वि कल्पचुर्ण की पूरी जानकारी के लिंक देख सकते हैं।

https://wp.me/paDg1r-2H

◆◆

   धार्मिक ग्रंथों के वर्णनानुसार चैत्र मास के दौरान अलौने व्रत याने बिना नमक के व्रत करने से रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है एवं त्वचा के रोग, हृदय के रोग, उच्च रक्तचाप( हाई बीपी), गुर्दा, किडनी आदि के रोग नहीं होते। 

   वसंत ऋतु में दही का सेवन न करें क्योंकि वसंत ऋतु में कफ का स्वाभाविक प्रकोप होता है एवं दही कफ को बढ़ाता है। अतः कफ रोग से व्यक्ति ग्रसित हो जाते हैं।

      वसंत के मौसम में क्‍या नहीं खाना चाहिए

●●

 ।।फेंटी, खःटी औऱ मीठी वस्तुओं से करे परहेज।।

   वसंत में फैटी, खट्टे, मीठे और पेट के लिए भारी चीजें नहीं खानी चाहिए। तली और मसालेदार चीजें कम से कम खाएं। 

दिन में सोना बंद कर दें ऐसा करने से कफ दोष भड़क जाएगा। रात को ज्‍यादा देर तक नहीं जागना चाहिए इससे वायु दोष बढ़ जाता है।

सुबह देर तक सोने से मल सूख जाता है, भूख्‍ देर से लगती है और चेहरे व आंखों की चमक कम हो जाती है। इसलिए इस मौसम में जल्‍दी सोएं और जल्‍दी उठें।

   शीत एवं वसंत ऋतु में श्वास, जुकाम, खांसी आदि जैसे कफजन्य रोग उत्पन्न होते हैं। 

उन रोगों में हल्दी का प्रयोग उत्तम होता है। हल्दी शरीर की व्याधि रोधक क्षमता को बढ़ाती है जिससे शरीर रोगों से लड़ने में सक्षम होता है। 

  चौथाई चम्मच हरड़ का चूर्ण शहद में मिलाकर चाटें तो वसंत ऋतु में होने वाले बलगम, ज्वर, खांसी आदि नष्ट हो जाते हैं। मौसम के अनुसार भोजन हमारे शरीर और मन दोनों के लिए हितकारी होता है।

मौसम के अनुसार भोजन में परिवर्तन करके आहार लेने वाले लोग हर समय स्वस्थ और प्रसन्नचित रहते हैं।

   इस मौसम में स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए रोज एक्‍सरसाइज करें। टहलें, मालिश करें और अगर मौसम में ठंडक है तो गुनगुने पानी से नहा सकते हैं। गर्म पानी से मूत्राशय और मलाशय की अच्‍छे से सफाई करनी चाहिए।

नहाने के बाद बदन पर कपूर, चंदन, अगरू, कुमकुम जैसी खुश्‍बू वाली चीजों का लेप लगा सकते हैं। चाहें तो शाम के वक्‍त दोबारा नहा सकते हैं। ढीले और सूती कपड़े पहनें। 

और जानकारी के whats करे

94178 62263

Online दवाएं के लिए website देखे:-

Online सिद्ध आयुर्वेदिक दवा मगवाएँ

Online सिद्ध आयुर्वेदिक दवा मगवाएँ *सभी सिद्ध अयूर्वादिक दवा लिस्ट*

ayurvedasidh.blogspot.com

Advertisements

Published by sidh ayurvedic

हम आप जी के परिवार के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। इस सेवा में हम आप को आयुर्वेदिक औषधियों, नुस्खे, रोग की जानकारी औऱ समाधान प्रदान करते हैं। आयुर्वेद अनुसार जब आप स्वस्थ्य होते या रहते हैं तो हमे लगता है हम सही आयुर्वेद की सेवा में सही काम कर रहे हैं। यही हमारी ख़ुसी है। और जानकारी के लिए आप whats कर सकते है Whats 94178 62263

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: